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कामशक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे, kamshakti badhane ke ayurvedic nuskhe

कामशक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे
कामशक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

मित्रों आइये जानते हैं नामर्दी ,सेक्स में आई कमजोरी, शिथिलता, नपुंसकता की घरेलू दवाइयां जिसमें से अधिकांश आप सभी के किचन में उपलब्ध हैं कुछ सूखे मेंवे का प्रयोग विधि जिससे आप की कामशक्ति बढ़ जाएंगी आप इन उपायों को अवश्य आजमाए आपको फायदा होगा तो आइए जानते हैं ये नुख्शे

कामशक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे,

बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और काली मिर्च कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द होता है।

यौनशक्ति बढ़ाने के उपाय

बादाम को गर्म पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज़ पीऐं, इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।

kamshakti badhane ke ayurvedic nuskhe

कौंच के बीज के चूर्ण में तालमखाना और मिश्री का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3 - 3 ग्राम की मात्रा में खाने और दूध के साथ पीने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।

कौंच के बीजों की गिरी तथा राल ताल मखाने के बीज। दोनों को 25 - 25 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर छान लें, फिर इसमें 50 ग्राम मिस्री मिला लें। इसमें 2 चम्मच चूर्ण रोज़ दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज़ मिस्री और घी के साथ खाने से प्रबल मैथुन शक्ति विकसित होती है।

जायफल का चूर्ण लगभग आधा ग्राम शाम को पानी के साथ खाने से 6 हफ्ते में ही धातु (वीर्य) की कमी और मैथुन में कमजोरी दूर होगी।

जायफल का चूर्ण एक चौथाई चम्मच सुबह -शाम शहद के साथ खाऐं और इसका तेल सरसों के तेल में मिलाकर शिश्न (लिंग) पर लगाएं।

बेल के पत्तों का रस 20 मिली लीटर निकालकर, उसमें सफेद जीरे का चूर्ण 5 ग्राम, मिस्री का चूर्ण 10 ग्राम के साथ खाने और दूध पीने से शरीर की कमजोरी ख़त्म होती है।

सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मिलाकर पीसकर चूर्ण बना कर रखें और चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह - शाम दूध के साथ खाने से शरीर की शक्ति और खोई हुई मैथुन शक्ति, वापस मिल जाती है।

सफेद मूसली, सतावर, असगंध 50 - 50 ग्राम कूट छान कर, 10 ग्राम दवा सोते समय 250 मिली लीटर, लगभग एक गिलास गर्म दूध में मिश्री के संग मिलाकर लें।
सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मात्रा में कूट पीसकर चूर्ण बनाकर 6 ग्राम की मात्रा में खाने से नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।

भीगे चने सुबह - शाम चबाकर खाने से ऊपर से बादाम की गिरी खाने से, मैथुन शक्ति बढ़ती है और नंपुसकता ख़त्म होती है।
कामेच्छा बढ़ाने के उपाय
शतावर, असगंध, एला, कुलंजन और वंशलोचन का चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण में 6 ग्राम मिश्री को मिलाकर खाने से और फिर ऊपर से दूध पीने से कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।

मर्दाना ताकत बढ़ाने के उपाय

शतावर का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम को चीनी मिले दूध में, सुबह - शाम डालकर पीऐं, इससे नपुंसकता दूर होती है। शरीरकी कमजोरी भी दूर होती है।
सेमल के पेड़ की छाल के 20 मिली लीटर रस में मिस्री मिलाकर, पीने से शरीर में वीर्य और मैथुन शक्ति बढ़ती है।

महिलाओं के लिए कामेच्छा बढ़ाने के घरेलू नुस्खे

10 ग्राम सेमल के चूर्ण और चीनी को 100 मिली लीटर पानी के साथ घोट कर सुबह - शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।
उत्तेजना बढ़ाने के उपाय
बड़ी गोखरू का फांट या घोल सुबह - शाम लेने से काम शक्ति यानी संभोग की वृद्धि दूर होती है। 250 मिलीलीटर को खुराक के रूप में सुबह और शाम सेवन करें।
मित्रों ऊपर मैंने एक साथ कई विधियां आप सभी को बताया है आप उपरोक्त कोई एक विधि आजमाये आपको फायदा होगा।

कैंसर का इलाज नीम से कैसे संभव है? cancer ka ilaj neem se kaise sambhav hai

cancer ka ilaj neem se
cancer ka ilaj neem se

‘गांव का दवाखाना’ कही जाने वाले नीम सैकड़ों गुणों से परिपूर्ण हैं। ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला। नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटीज़, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।

नीम का पत्ते से कैंसर का उपचार

नीम के पत्ते भारत से बाहर ३४ देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं। इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है। दांत का दर्द है, तो इसकी दातून का इस्तेमाल किया जाता है।

बैक्टीरिया से लड़ता नीम

आपके भीतर इतने सारे जीव यानि बैक्टीरिया हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत का कारण बन सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है। नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें। सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ हो सकता है। इसके अलावा नीम के कुछ पत्तों को पानी में डाल कर रात भर छोड़ दें और फिर सुबह उस पानी से नहा लें।

एलर्जी के लिए नीम

नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें, उसकी छोटी-सी गोली बना कर सुबह-सुबह खाली पेट शहद में डुबा कर निगल लें। उसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं, जिससे नीम ठीक तरह से आपके सिस्टम से गुजर सके। यह हर प्रकार की एलर्जी में फायदा करता है।

बीमारियों के लिए नीम

नीम कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इससे कैंसर वाली कोशिकाओं की तादाद एक सीमा के अंदर रहती है। नीम में ऐसी भी क्षमता है कि अगर आपकी रक्त धमनियों(आर्टरी) में कहीं कुछ जमना शुरु हो गया हो तो ये उसको साफ कर सकती है।

मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए नीम

भी हर दिन नीम की एक छोटी-सी गोली खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह उनके अंदर इंसुलिन पैदा होने की क्रिया में तेजी लाता है।