Latest Nuskhe

loading...

टाइफाइड के लक्षण, कारण और इलाज, typhoid fever ka ayurvedic ilaj

 typhoid fever ka ayurvedic ilaj
 typhoid fever ka ayurvedic ilaj


टाइफाइड क्या है
यह रोग एस. टायफी या पेराटायफी नामक रोगाणुओं द्वारा फैलता है। यह मलमूत्र द्वारा दूषित भोजन या पानी द्वारा मनुष्यों में पहुँच जाते हैं और इसके कारण बनते हैं स्वयं के गंदे हाथ और मक्खियाँ। यह रोग आंतों में होने के कारण ही इसका नाम आन्त्रिक ज्वर पड़ा हैं । इस रोग के जीवाणु स्वस्थ शरीर में मुहँ से प्रवेश करते हैं और आंतों में पहुंच कर अपना विषैला प्रभाव विभिन्न अंगों में फैलाना शुरू कर देते हैं।

typhoid fever ka desi ilaj
लोग टाइफाइड के बुखार से आसानी से बच सकते हैं।अत: इस रोग की जानकारी होना अत्यंत जरूरी है। जीवाणु से पैदा होने वाली इस बीमारी को मियादी बुखार भी कहते हैं। यह रोग दुनिया के उन देशों में पाया जाता है, जहाँ मल-मूत्र और गंदगी के सही निपटाने की व्यवस्था नहीं है अथवा पीने का साफ़ पानी उपलब्ध नहीं है।
टाइफाइड के लक्षण
टाइफाइड होने की शुरुवात में शरीर में रोगाणुओं के प्रवेश के 10 से 14 दिन के भीतर रोग के लक्षण दिखने लगते हैं। कुछ स्थितियों में यह समय 2-3 दिन कम भी हो सकता है।

शुरुवात मामूली बुखार से होती है, जो धीरे-धीरे बढ़ कर 108-104 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है।
इस बीच हृदय व नाड़ी की गति धीमी होना, बेचैनी, कमजोरी, पेट फूलना, सिर दर्द, मुंह सूखना, होठों पर पपड़ी जमना, जीभ सूखी, पपड़ीदार व लाल होना, दस्त लगना जैसे लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं।

टाइफाइड में तेज बुखार के साथ कपकपी या ठंड भी लग सकती है। साथ में हाथ-पैर दर्द, खाँसी जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं।

गले में दर्द या सूजन भी हो सकती है।
टाइफाइड बुखार में पेट में दर्द और कब्ज की शिकायत होती है। बाद में दस्त भी लग सकते हैं।

टाइफाइड के बाद सावधानी

कभी-कभी 2 सप्ताह पश्चात् टाइफाइड बुखार फिर से आ सकता है। यह तब होता है जब इलाज सही तरीके से न लिया जाए।

typhoid ka ilaj

टाइफाइड बुखार का इलाज किसी योग्य चिकित्सक से जल्द ही करवाना चाहिए और टाइफाइड को साधारण रोग समझकर इसके इलाज के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
टाइफाइड की जाँच :
टाइफाइड का टेस्ट आसानी से हो जाती है। लेकिन प्राय: जाँच के परिणाम सात दिन के बाद ही पोसिटिव मिलते हैं।
टाइफाइड के लिए विडाल (Widal Test) जाँच की जाती है। साथ ही इस रोग में रक्त के श्वेत रक्ताणु की संख्या कम हो जाती है। इसलिए इनकी संख्या भी पैथोलॉजिस्ट अपनी जाँच में देखते हैं। अच्छी पैथोलॉजी में मल एवं रक्त के कल्चर (Culture) द्वारा भी चिकित्सक रोग की पहचान निश्चित करते हैं।

टाइफाइड से बचाव के टिप्स :

टाइफाइड के रोगी को अस्पताल में भरती करवाकर इलाज देना बेहतर रहता है। यदि यह संभव न हो तो घर पर ही उसे अलग रखने का प्रयास करना चाहिए।
परंतु यह ध्यान रहे कि उसे पूरी मात्रा में पर्याप्त समय तक दवाइयाँ खिलाई जाएँ।

टाइफाइड रोगी के मल-मूत्र के संपर्क से बचने के लिए विशेष सावधानियाँ रखी जाए जैसे नाखून काटना, खाने के पहले अच्छी तरह से हाथ साफ करना, खुले स्थानों में शौच न जाना। संभव हो तो प्रत्येक घर में सेप्टिक टेंकवाला पक्का शौचालय बनवाना चाहिए।

टाइफायड के इलाज

typhoid ki dawa

टाइफाइड के इलाज के लिए आजकल अच्छे एंटीबायोटिक्स उपलब्ध हैं। पूर्व में प्रचलित क्लोरेमफेनीकाल तो रोग में असरकारक है ही, अब सिप्रोफ्लाक्सेसिन, एमाक्सीसिलिन, कोट्राइमेक्साजोन इत्यादि दवाइयाँ भी उपलब्ध हैं। इलाज बहुत महँगा भी नहीं है।

मरीज के मल-मूत्र रक्त की जाँच कर उसकी पहचान की जाती है, फिर उसे पर्याप्त मात्रा में एंपीसिलिन अथवा अन्य दवाएँ खिलाते हैं, ताकि रोग के जीवाणु खत्म हो जाएँ और वह टाइफाइड दूसरे व्यक्तियों में न फैला सके।

टाइफाइड के टीके

आजकल तीन प्रकार के टीके (Vaccines) उपलब्ध हैं (1) मोनोवेलेंट टीका, (2) बाईवेलेंट टीका तथा (3) टी.ए.बी. (B.) टीका। यह टीका तीन वर्ष तक रोग से रक्षा करता है, तीन वर्ष बाद इसे पुनः लगवाना होता है। इसे टीके की प्रभावी मात्रा या बूस्टर डोज कहते हैं।

आजकल पोलियो वेक्सीन की तरह मुँह द्वारा ली जानेवाली टाइफाइड वेक्सीन भी विकसित की गई है। टीकाकरण के मामले में अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

टाइफाइड में परहेज :
टाइफाइड बुखार में मरीज को गरिष्ठ, भारी, पेट में गैस पैदा करने वाला भोजन सेवन न करें। शराब आदि का सेवन भी ना करें | मक्खन, घी, पेस्ट्री, तले हुए आहार, मिठाईयाँ, गाढ़ी मलाई आदि ना लें |
टाइफाइड की बीमारी में खुले हुए दूषित खाद्य पदार्थ या पानी न पिएं। दस्त और गैस की तकलीफ मौजूद हो, तो दूध न पिएं। पूरी तरह रोगमुक्त होने तक चपाती का सेवन करने से बचें।

typhoid ka ayurvedic ilaj

टाइफाइड बुखार के मरीज को पर्याप्त मात्रा में पानी और पोषक तरल पदार्थ लेना चाहिए। क्योंकि रोगी के शरीर में पानी की कमी नही होनी चाहिए | कुनकुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना टाइफाइड में काफी फायदेमंद होता है। इस रोग से विशेष रूप से बच्चो को बचाना चाहिए क्योंकि अकसर वो साफ सफाई से सम्बंधित नियमो का ठीक से पालन नहीं करते हैं

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !!
आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।
EmoticonEmoticon