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धात गिरना के कारण, लक्षण, और आयुर्वेदिक इलाज, dhatu rog ka aayurvedic nuskhe



धात रोग क्या है

अगर धात रोग को सीधे सीधे समझाएं तो व्यक्ति के मूत्र मेंवीर्यका भी अपने आप निकल जाना धात रोग कहलाता है. धातु के गिरने को शुक्रमेह भी कहा जाता है. किन्तु ये होता क्यों है? इस बात को समझना भी आसान है. मतलब जब किसी पुरुष के मन में काम भावना बढती है तो उसका लिंग सख्त और उत्तेजित अवस्था में आ जाता है. इस अवस्था में पुरुष के लिंग से पानी के रंग के जैसी थोड़ी सी पतली लेस निकलने लगती है. ये लेस इतनी अधिक कम होती है कि ये लिंग से बाहर नहीं आ पाती, लेकिन लिंग के अधिक देर तक उत्तेजित रहने से उसके मुहँ के आगे आ जाती है और इसी को मजी भी कहा जाता है. वैसे इस लेस में तो वीर्य का कोई अंश नहीं होता किन्तु इसका काम लिंग की नाली को गिला करने का होता है ताकि व्यक्ति जब सम्भोग बनाएं तो वीर्य की तीव्र गति से लिंग को कोई नुकसान ना पहुंचें.

आजकल ऐसे अनेक युवक और युवती है जो गलत तरीके से अपने वीर्य को बर्बाद करते रहते है, कुछ तो ख्यालों में ही लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना आरम्भ कर देते है. उनकी इसी ख्यालों की दुनिया में खोये रहने के कारण उनका लिंग अधिक देर तक उत्तेजित रहता है और लेस ज्यादा मात्रा में बहनी आरम्भ हो जाती है. एक समय ऐसा भी है जब इन युवकों की स्थिति अधिक खराब हो जाती है और लड़की का ख्याल मन में आते ही उनकी लेस बाहर निकल जाती है और वे शांत हो जाते है. ये एक रोग है जिसे लालामेह ( शुक्रमेह ) कहते है.

धात रोग के कारण

अधिक कामुक विचार रखना, मन की अशांति, शोक, दिमागी कमजोरी, शरीर में पौषक तत्वों विटामिन्स की कमी, शरीर में मांस, अस्थि, मजा सही मात्रा में ना होना, पौरुष द्रव का पतला होना, नसों में कमजोरी, पौरुष द्रव को व्यर्थ में निकालना

धात रोग के लक्षण

लिंग के मुख से लार टपकना, पौरुष द्रव अर्थातवीर्यका पतला होना, शरीर का कमजोर होना, हर बात पर मानसिक तनाव लेना, शरीर के अन्य हिस्सों में कंपन, पेट रोग जैसे स्नायु का दुर्बल होना, श्वास रोग या खांसी होना, पिंडलियों में दर्द का होना, चक्कर आना या शरीर में हर समय थकान महसूस होना, शरीर की चुस्ती फुर्ती खत्म होना, मन में अप्रसन्नता होना और किसी काम में मन ना लगना भी इसके लक्षणों को दर्शाता है.

धात रोग का प्रभावी हर्बल उपचार

सफेद मुसली White Asparagus Abscendens
आप 10 ग्राम सफ़ेद मुसली का चूर्ण लें और उसमें मिश्री मिलाकर खाएं. इसे लेने के बाद ऊपर से 500 ग्राम गाय का दूध पी जाएँ. ये उपाय शरीर में अंदरूनी शक्ति को बढ़ता है और शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है.

उड़द की दाल Udad Pulses  एक अन्य उपाय के अनुसार आप उड़द की दाल का चूर्ण बनाकर उसे खांड में भुनें और खांड मिलाकर खाएं.

धातु रोग का घरेलू उपचार

जामुन की गुठली Kernels of Blackberry धात के कारण शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लियए आपको जामुन की गुठलियों को सुखाकर उसका पाउडर तैयार करना है और उसे रोजाना दूध के साथ खाना है. ये उपाय कुछ हफ़्तों में ही परिणाम दिखाना आरम्भ कर देता है धात गिरना बंद हो जाता है.

धातु रोग का आयुर्वेदिक इलाज

कौंच के बीज Kaunch Seeds 

अगर वीर्य पतला हो गया है तो आपको 100 – 100 ग्राम की मात्रा में ताल्माखाने और कौंच के बीज लेकर उनका चूर्ण तैयार करना है और उसमें 200 ग्राम पीसी हुई मिश्री मिलानी है. प्राप्त मिश्रण को रोजाना ½ चम्मच गुनगुने दूध के साथ लें. ये उपाय जल्द हीवीर्यको दोबारा गाढा करता है.

धातु रोग का आयुर्वेदिक नुस्खे

शतावरी मुलहठी Asparagus Liquorices  आपको एक प्रयोग के अनुसार 50 ग्राम शतावरी, 50 ग्राम मुलहठी,50 ग्राम सालब मिसरी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज,25 ग्राम बंशलोचन, 25 ग्राम शीतलचीनी और 4 ग्राम बंगभस्म लेनी है. आप इस सभी सामग्री को सुखा लें और उन्हें बारीक पिसें. अब इसमें 60 ग्राम की मात्रा में चाँदी का वर्क मिलाएं और रोजाना सुबह शाम गाय के दूध के साथ 60 ग्राम की मात्रा में लें. ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग से मुक्ति दिलाता है.

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