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चर्म रोग दूर करने के आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय, Ayurvedic nuskhe for removing skin diseases

 Ayurvedic nuskhe for removing skin diseases
चर्म रोग दूर करने के आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय

चर्म रोग कई प्रकार के होते हैं। जैसे कि- दाद, खाज, खुजली, छाछन, छाले, खसरा, फोड़े, फुंसी आदि। बहुत से मामलों में हम आयुवेदिक व घरेलू उपचार से रोग को ठीक कर सकते हैं, पर कई मामलो में एक अच्छे dermatologist से सलाह लेना उचित होता है। Skin disease में बहुत से लोगों को होमियोपैथी की दवाओं से भी काफी लाभ मिलता है। आज इस लेख में हम चर्म रोग ठीक करने के आयुर्वेदिक तरीकों के बारे में बात करेंगे।

चर्म रोग दूर करने के आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय

चर्म रोग होने के कारण / Cause of Skin Disease in Hindi

चर्म रोग होने के कई कारण हो सकते हैं:
अधिकतर समय धूप में बिताने वाले लोगों को चर्म रोग होने का खतरा ज्यादा होता है।
किसी एंटीबायोटिक दवा के खाने से साइड एफेट्स होने पर भी त्वचा रोग हो सकता है।
महिलाओं में मासिक चक्र अनियमितता की समस्या हो जाने पर भी उन्हे चर्म रोग होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।
शरीर में ज़्यादा गैस जमा होने से खुश्की का रोग हो सकता है।
अधिक कसे हुए कपड़े पहेनने पर और नाइलोन के वस्त्र पहनने पर भी चमड़ी के विकार ग्रस्त होने का खतरा होता है।
नहाने के साबुन में अधिक मात्रा में सोडा होने से भी यह रोग हो सकता है।
खुजली का रोग ज़्यादातर शरीर में खून की खराबी के कारण उत्पन्न होता है।
गरम और तीखीं चिज़े खाने पर फुंसी और फोड़े निकल आ सकते हैं।
त्वचा रोग के लक्षण / Symptoms Of Skin Disease in Hindi
दाद-खाज होने पर चमड़ी एकदम सूख जाती है, और उस जगह पर खुजलाने पर छोटे छोटे दाने निकल आते हैं। समान्यतः किसी भी प्रकार के चर्म रोग में जलन, खुजली और दर्द होने की फरियाद रहती है। शरीर में तेजा गरमी इकट्ठा होने पर चमड़ी पर सफ़ेद या भूरे दाग दिखने लगते हैं या फोड़े और फुंसी निकल आते हैं और समय पर इसका उपचार ना होने पर इनमें पीप भी निकलनें लगता है।

त्वचा रोग होने पर भोजन में परहेज़ / Food Sobriety in Skin Disease in Hindi

त्वचा रोग हो जाने पर, समय पर सोना, समय पर उठना, रोज़ नहाना, और धूप की सीधी किरणों के संपर्क से दूर रहेना अत्यंत आवश्यक है।

भोजन में अचार, नींबू, नमक, मिर्च, टमाटर तैली वस्तुएं, आदि चीज़ों का सेवन बिलकुल बंद कर देना चाहिए। (चर्म रोग में कोई भी खट्टी चीज़ खाने से रोग तेज़ी से पूरे शरीर में फ़ेल जाता है।)।

त्वचा रोग में आयुर्वेदिक व घरेलू उपचार / Home Remedies & Ayurvedic Treatment for Skin Disease in Hindi

नहाते समय नीम के पत्तों को पानी के साथ गरम कर के, फिर उस पानी को नहाने के पानी के साथ मिला कर नहाने से चर्म रोग से मुक्ति मिलती है।

नीम की कोपलों (नए हरे पत्ते) को सुबह खाली पेट खाने से भी त्वचा रोग दूर हो जाते हैं।

त्वचा के घाव ठीक करने के लिए नीम के पत्तों का रस निकाल कर घाव पर लगा कर उस पर पट्टी बांध लेने से घाव मिट जाते हैं। (पट्टी समय समय पर बदलते रहना चाहिए)।

जहां भी फोड़े और फुंसी हुए हों, वहाँ पर लहसुन का रस लगाने से फौरन आराम मिल जाता है।
लहसुन और सूरजमुखी को एक साथ पीस कर पोटली बना कर गले की गांठ पर (कण्ठमाला की गील्टियों पर) बांध देने से लाभ मिलता है।

सरसों के तेल में लहसुन की कुछ कलीयों को डाल कर उसे गर्म कर के, (हल्का गर्म) उसे त्वचा पर लगाया जाए तो खुजली और खाज की समस्या दूर हो जाती है।
दाद, खाज और खुजली जैसे रोग, दूर करने के लिए त्वचा पर करेले का रस लगाना चाहिए।

खीरा खाने से चमड़ी के रोग में राहत मिलती है। ककड़ी के रस को चमड़ी पर लगाने से त्वचा से मैल दूर होता है, और चेहरा glow करता है। ककड़ी का रस पीने से भी शरीर को लाभ होता है।

चर्म रोग दूर करने के आयुर्वेदिक व घरेलू उपाय
चर्म रोग कई प्रकार के होते हैं। जैसे कि- दाद, खाज, खुजली, छाछन, छाले, खसरा, फोड़े, फुंसी आदि। बहुत से मामलों में हम आयुवेदिक व घरेलू उपचार से रोग को ठीक कर सकते हैं, पर कई मामलो में एक अच्छे dermatologist से सलाह लेना उचित होता है। Skin disease में बहुत से लोगों को होमियोपैथी की दवाओं से भी काफी लाभ मिलता है। आज इस लेख में हम चर्म रोग ठीक करने के आयुर्वेदिक तरीकों के बारे में बात करेंगे।

गैस और बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे, gas aur badhazmi Ka Ayurvedic nuskhe

गैस और बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे, gas aur badhazmi Ka Ayurvedic nuskhe
gas aur badhazmi Ka Ayurvedic nuskhe

गैस और बदहजमी का कारण
गैस को चिकित्सीय भाषा में अपच के रूप में जाना जाता है। गैस के लक्षण सूजन, डकार, जलन और मतली हो सकते है। गैस और अपच हमारे पेट में पाचक रस के स्राव से होने वाली समस्याएं हैं। पेट में मौजूद एसिड पेट के अंदर जलन पैदा करना शुरू कर देता है। इसमें व्यक्ति को बेचैनी, सीने और पेट में जलन महसूस होती है।

गैस और बदहजमी दूर करने के लिए अपनाएं ये घरेलु उपाय : -
गैस की समस्या ज्यादा तैलीय या मसालेदार खाना खाने से होती है, साथ ही यदि पेट खाली है तब भी गैस की समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा चाय या कॉफ़ी पीने वालों को भी गैस की समस्या हो सकती है। गैस की समस्या यदि बढ़ जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है इसलिए समय रहते इस पर काबू करना आवश्यक होता है। आइए आपको बताते हैं कुछ घरेलू उपाय जिन्हें अपनाकर आप गैस की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

गैस और बदहजमी काआयुर्वेदिक नुस्खे

धनिया के इस्तेमाल से पेट में गैस के कारण होने वाली जलन में राहत महसूस कर सकते हैं। एक गिलास छाछ में भुना हुआ धनिया मिलाकर पीने से गैस से राहत मिलती है।

मसालेदार या वसायुक्त भोजन करने के कारण गैस और अपच जैसी समस्याएं होती हैं, इसके लिए सौंफ के बीच से इसका इलाज संभव है। सौंफ के बीज में मौजूद तेल, मतली और पेट फूलना जैसी समस्याओं से राहत देता है। सौंफ को सुखाकर, भूनकर उसका पाउडर बना लें। दिन में दो बार इस पाउडर के इस्तेमाल से गैस से काफी हद तक राहत मिल जाती है।

खाना हजम कैसे करे
हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कमी को पूरा करने के लिए काली मिर्च का उपयोग बहुत कारगर हो सकता है। काली मिर्च से आमाशय रस का प्रवाह बढ़ता है, जिससे यह पाचन में मदद करती है। गुड़ में काली मिर्च का पाउडर मिलाकर अपच के दौरान छाछ के साथ लिया जा सकता है। इसके अलावा काली मिर्च, सूखे पुदीना के पत्ते, सौंठ पाउडर और धनिया बीज बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से भी अपच में फायदा होता है।

अम्लपित्त की आयुर्वेदिक दवा

लौंग आंत गतिशीलता और जठरांत्र स्राव को बढ़ाती है जिससे गैस और अपच की समस्या खत्म हो जाती है। इसके लिए लौंग को चबाएं। पेट में जलन से छुटकारा पाने के लिए लौंग का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है।
सेब का सिरका गैस और अपच दोनों से राहत देता है। यह हमारे पेट को आवश्यक एसिड प्रदान करता है। गैस के इलाज के लिए इसे पानी और शहद के साथ लिया जा सकता है।

अपच के घरेलू उपाय

अपच और गैस के इलाज के लिए छाछ बहुत फायदेमंद है। इसमें अधिक लैक्टिक एसिड होता है और यह दूध की तुलना में पचने में आसान होता है।

apachan ki dawa

बेकिंग सोडा में अतिरिक्त एसिड का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी और सामान्य रूप से एंटासिड उपलब्ध रहता है। सोडा का मूल स्वभाव नमक और पानी के गठन से पेट में अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनाना होता है। जिससे गैस से राहत मिलती है।

खट्टी डकार का इलाज

हर्बल चाय पाचन सहजता में प्रभावी ढंग से काम करती है। पुदीना, रैस्बेरी और ब्लैकबेरी चाय को अपच को कम करने के लिए खाना खाने के बाद लिया जा सकता है। पुदीना और कैमोमाइल (Mint and Camomile) तेज पेट दर्द होने पर फायदेमंद है।

एसिडिटी की दवा

लहसुन से मुँह में तेज गंध आ सकती है लेकिन इसकी छोटी सी कली में गैस की समस्या से राहत पाने के अभूतपूर्व गुण होते हैं। गैस को दूर करने में लहसुन बहुत फायदेमंद है। लहसुन का इस्तेमाल सूप में करने से यह पाचनशक्ति को और मजबूत करता है। इसके अलावा पानी में लहसुन को उबालकर उसमें काली मिर्च और जीरा डालें, इस घोल को ठंडा होने दें। इसे एक दिन में दो से तीन बार पीएं।

बदहज़मी का घरेलू इलाज

अदरक खाने में न केवल सुगंध और चरपराहट जोड़ता है बल्कि खाने को पचाने में भी सहायक है। अदरक खाद्य पदार्थ के रूप में या अदरक की चाय में इस्तेमाल किया जाता है जिससे यह लार, पित्त रस और आमाशय रस में उत्तेजना पैदा करने में मदद करता है। कॉफी और सोडा की तुलना में अदरक की चाय पीना बहुत अधिक लाभदायक है।

अपच का आयुर्वेदिक इलाज

इलायची पेट में गैस और अपच में बहुत आरामदायक होता है। इसमें मौजूद वाष्पशील तेल पाचन विकार को दूर कर गैस और अपच से राहत देते हैं। इलायची के बीज का यूं ही सेवन किया जा सकता है या खाना पकाने, चाय आदि में भी इलायची या इलायची पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

गैस की आयुर्वेदिक दवा

गैस की रोकथाम और अपच के इलाज करने वाले प्राकृतिक उपायों में से एक नींबू है। गर्म पानी के साथ नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टी, गैस और डकार से छुटकारा मिल सकता है। यह एक सफाई एजेंट के रूप में, एक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है और पित्त रस का उत्पादन करके शरीर में पाचन तेज करता है। सुबह एक गिलास ताजे पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से भी पाचनतंत्र मजबूत होता है।

gas aur badhazmi Ka Ayurvedic nuskhe

हींग से पेट फूलना, पेट दर्द और कब्ज जैसी कई पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। एक चुटकी हींग दिन में दो से तीन बार गर्म पानी के साथ ली जा सकती है।

बदहजमी का उपचार

गैस से छुटकारा पाने के लिए दादी-नानी का नुस्खा है। इसके इस्तेमाल से पेट की लगभग हर समस्या का इलाज कर सकते हैं। तत्काल राहत के लिए अजवाइन में नमक मिलाकर पानी के साथ लें।

अपच. की आयुर्वेदिक दवा

अन्य जड़ी बूटियों और मसालों के साथ इस्तेमाल करने के अलावा सिर्फ गर्म पानी भी आपको गैस और अपच से तत्काल राहत दे सकता है। यह शरीर में मौजूद सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर हमारे शरीर की सफाई में मदद करता है। सुबह एक गिलास गर्म पानी और खाने के बाद गर्म पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है।

दिमाग को शांत रखने के आयुर्वेदिक उपाय, dimag ko shant rakhane ke upay

दिमाग को शांत रखने के आयुर्वेदिक उपाय
दिमाग को शांत रखने के आयुर्वेदिक उपाय

दिमाग को शांत रखती हैं ये आयुर्वेदिक औषधियां, तनाव दूर करने के लिए भी करें इनका सेवन

डिप्रेशन हमारे शरीर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचाता है। एलर्जी, अस्थमा, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं डिप्रेशन की वजह से जन्म लेती हैं।

दिमाग को ठंडा रखने के उपाय

आज के दौर की जीवनशैली में तनाव और चिंता के कई कारण होते हैं। हर कोई कभी न कभी इसकी वजह से परेशान जरूर रहता है। ऐसे में उसे कुछ समझ नहीं आता कि क्या किया जाए। डिप्रेशन से बचने के लिए बाजार में कई तरह की दवाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही साथ कई तरह के ध्यान और व्यायाम भी तनाव और चिंता को दूर करने में कारगर होते हैं। लेकिन आज हम आपको आयुर्वेद के कुछ ऐसे नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल कर आप तनाव से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं।
मन को शांत रखने का मंत्र
डिप्रेशन हमारे शरीर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचाता है। इसकी वजह से शरीर में पित्त, कफ और वात का असंतुलन हो जाता है। इसके अलावा एलर्जी, अस्थमा, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं डिप्रेशन की वजह से जन्म लेती हैं। कुछ आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन से तनाव से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तो आइए, जानते हैं कि ऐसी कौन सी हर्बल युक्तियां हैं जो तनाव भगाने का काम करती हैं-

दिमाग को शांत रखने के नुस्खे

ब्राह्मी तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने का काम करता है। यह तनाव के प्रभावों पर प्रतिक्रियात्मक कारवाई करने के लिए भी जाना जाता है। ब्राह्मी दिमाग को शांत रखने के साथ-साथ एकाग्रता बढ़ाने में भी काफी मददगार है।

दिमाग को कंट्रोल करने का उपाय

भृंगराज चाय दिमाग को निरंतर एनर्जी देने का काम करती है। इससे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह दुरुस्त रहता है। यह दिमाग को शांत तो रखता ही है, साथ ही साथ पूरे शरीर को भी काफी आराम पहुंचाता है।

मन को शांत करने का उपाय

जटामासी एंटी स्ट्रेस हर्ब के रुप में काफी लोकप्रिय है। तनाव भगाने के लिए जटामासी की जड़ों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। यह जड़ें हमारे दिमाग और शरीर को टॉक्सिन्स से मुक्त बनाती हैं। तथा ब्रेन फंक्शन्स को दुरुस्त रखने में काफी मदद करती हैं।

दिमाग को शांत रखने के उपाय

अश्वगंधा एमीनो एसिड्स और विटामिन का बेहतरीन संयोजन है। यह दिमाग में एनर्जी को बूस्ट करने तथा स्टेमिना मजबूत करने में काफी मदद करता है।

चुटकी में सरदर्द से छुटकारा पाने के 10 नुस्खे, 10 Tips to Get Rid for Headaches in hindi

सरदर्द से छुटकारा पाने के 10 नुस्खे,
सरदर्द से छुटकारा पाने के 10 नुस्खे

सिर दर्द क्यों होता है

आज के युवाओं में सिर दर्द की समस्या आम होती जा रही है। चाहे वह स्टूडेंट हो या जॉब करने वाला, हर कोई काम के बोझ और कई समस्याओं के चलते सर दर्द से परेशान हैं।
लोग सर दर्द से तुरंत छुटकारा पाने के लिए दवाओं का सहारा लेते है, जिनके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। पेनकिलर दवायें सिर्फ कुछ देर के लिए आराम तो दे सकती है लेकिन इससे आपकी बॉडी पर बुरा प्रभाव भी छोड़ जाती है।

इन 10 तरीकों से चुटकी में पाएं सरदर्द से छुटकारा

ऐसे में आपको बता रहा है कि दवाओं के बजाय दादी-नानी के बने कुछ घरेलू नुस्खे इस्तेमाल करें तो बिना किसी साइड इफेक्ट के आपको जल्द आराम दिला सकता है।

रोजाना सिर दर्द के कारण

ऐसा कई बार होता है कि तनाव और थकान के कारण सिर में ऐसा दर्द होता है कि बर्दाश्त नहीं होता है। हालांकि ऐसा कई बार गैस के कारण भी सिर में दर्द होता है, क्योंकि पेट की गैस पास न हो पाने पर बॉडी के ऊपर चढ़ती है तो यह दिल और दिमाग पर असर करती है जिसके कारण सरदर्द और चेस्ट पेन की प्रॉब्लम हो जाती है। ऐसे में घरेलू उपचार सबसे कारगर सिद्ध होता है।

सिरदर्द से बचने के घरेलू उपचार

सिरदर्द होने पर बिस्तर पर लेटकर दर्द वाले हिस्से को बेड के नीचे लटका दीजिए। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो रहा हो उस तरफ वाले नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाल दीजिए, उसके बाद जोर से सांसों को ऊपर की तरफ खींचिए इससे सिरदर्द से राहत मिलेगी।

सिरदर्द से बचने के घरेलू नुस्खे

सिरदर्द होने पर दालचीनी को पानी के साथ महीन पीसकर माथे पर पतला लेप कर लगा लीजिए। लेप सूख जाने पर उसे हटा लीजिए। 3-4 लेप लगाने पर सिरदर्द होना बंद हो जाएगा।

सिरदर्द का आयुर्वेदिक इलाज

मुलहठी को कूट-पीसकर महीन चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण को नाक के पास ले जाकर सूंघने से सिरदर्द में राहत मिलती है।

सिरदर्द का आयुर्वेदिक नुस्खे

गर्म मसाला चाय सिर के दर्द के लिए एक कारगर उपाय है। आप इस चाय में एक लौंग और तिलसी के कुछ पत्ते भी डाल सकते हैं। यह चाय नींद को भगा कर दिमाग को सचेत करती है। आप इसमें थोड़े से अदरख के साथ इलायची भी मिला सकते हैं। इससे आपका सिरदर्द तो गायब होगा ही साथ में आप तरोताज़ा भी महसूस करेगें।

सिरदर्द का आयुर्वेदिक उपाय

सिरदर्द होने पर पीपल, सोंठ, मुलहठी, सौंफ, कूठ इन सबको लगभग 10-10 ग्राम लेकर पीसकर चूर्ण बना
लीजिए। उसके बाद इस चूर्ण में एक चम्मुच पानी मिलाकर गाढा लेप बना बना लीजिए। इस लेप को माथे पर लगाइए।सिरदर्द होना बंद हो जाएगा।

अधिक तनाव और दिन भर की भाद दौड़ की वजह से भी सिरदर्द हो सकता है। इसे दूर करने के सिए किसी अच्‍छे हर्बल तेल से अपने सिर की मालिश करवाएं। मालिश के पहले तेल का हल्‍का सा गर्म कर लें। तेल लगाते समय उंगलियों को सिर पर हल्के दबाव के साथ धीरे धीरे मालिश करें। इससे न केवल सिरदर्द दूर होगा। बल्कि इस तरह की मसाज से बालों की जड़े भी मजबूत होती हैं और बाल अच्छी तरह से बढ़ते हैं।

सिरदर्द का घरेलू उपचार

तौलिये को हल्के गर्म पानी में डालकर उस तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश कीजिए। इससे सिरदर्द में फायदा होगा।
पुराना सिर दर्द का इलाज
अगर आपके सिरदर्द का कारण एक हैंग ओवर की वजह से है तो नींबू पानी हर्बल उपाचार आपके बडे़ काम आता है। अधिक शराब पी लेने से शरीर में डीहाईड्रेशन यानी पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में जरुरी है कि आप ज्‍यादा से ज्‍यादा पानी पिएं। एक ग्‍लास हल्‍के गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर उसमें थोडा सा नमक और चीनी मिला कर पिएं। ऐसा करने से सिरदर्द कम खत्म हो जाता है।

सिरदर्द का घरेलू नुस्खे

अदरक पाउडर या सोंठ का एक चम्मच पाउडर लें, इसे थोड़े पानी में मिलाकर गर्म कर लें। हल्का ठंडा होने के बाद इसे माथे पर लगाएं।
सिर दर्द की मेडिसिन
सिरदर्द कई बार अचानक शुरू होता है और अक्सर अपने आप ठीक भी हो जाता है। सिरदर्द में हाथों के स्पर्श से मिलनेवा ला आराम किसी भी दवा से ज्यादा असरदायक होता है। अगर इन नुस्खों को अपनाने के बावजूद भी सिरदर्द से राहत नमि ले तो चिकित्सक से संपर्क अवश्य कीजिए।

एड्स के 3 मुख्य लक्षण, सावधान अनदेखा न करें, main symptoms of AIDS in hindi

main symptoms of AIDS in hindi
main symptoms of AIDS in hindi

एड्स के लक्षण

एचआईवी संक्रमण तीन चरणों में होता है। उपचार के बिना, यह समय के साथ बदतर हो जाएगा और अंततः आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को खत्म कर देगा।

एचआईवी के प्रारंभिक लक्षण

तीव्र एचआईवी संक्रमण

ज्यादातर लोग एचआईवी से संक्रमित होने पर तुरंत नहीं जानते हैं, लेकिन थोड़े समय बाद, उनके लक्षण हो सकते हैं। यह तब होता है जब आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली एक लड़ाई रखती है, आमतौर पर वायरस प्राप्त करने के बाद 2 से 6 सप्ताह के भीतर। इसे तीव्र रेट्रोवायरल सिंड्रोम या प्राथमिक एचआईवी संक्रमण कहा जाता है।
लक्षण अन्य वायरल बीमारियों के समान होते हैं, और उनकी तुलना अक्सर फ्लू से की जाती है। वे आम तौर पर एक या दो सप्ताह तक चलते हैं और फिर पूरी तरह से चले जाते हैं। उनमे शामिल है:
सरदर्द, दस्त, मतली और उल्टी, थकान, मांसपेशियों में दर्द, गले में खरास, सूजी हुई लसीका ग्रंथियां, एक लाल धमाका जो आमतौर पर आपके धड़ पर खुजली नहीं करता है

पुरानी एचआईवी संक्रमण

आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली एचआईवी के साथ लड़ाई खोने के बाद, फ्लू जैसे लक्षण दूर हो जाएंगे। डॉक्टर इसे असम्बद्ध या नैदानिक ​​अव्यक्त अवधि कह सकते हैं। अधिकांश लोगों में ऐसे लक्षण नहीं होते हैं जिन्हें आप देख सकते हैं या महसूस कर सकते हैं। आपको एहसास नहीं हो सकता कि आप संक्रमित हैं और एचआईवी को दूसरों को पास कर सकते हैं। यह चरण 10 साल या उससे अधिक तक चला सकता है।

इस समय के दौरान, इलाज न किए गए एचआईवी सीडी 4 टी कोशिकाओं को मार देगा और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट कर देगा। आपका डॉक्टर यह जांच सकता है कि आपके पास रक्त परीक्षण के साथ कितने हैं (सामान्य गणना 450 माइक्रोलिटर प्रति 450 और 1,400 कोशिकाओं के बीच होती है)। जैसे ही संख्या बूँदें, आप अन्य संक्रमणों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं।

सौभाग्य से, दवाओं का एक संयोजन, या "कॉकटेल" एचआईवी से लड़ने में मदद कर सकता है, अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली का पुनर्निर्माण कर सकता है, और वायरस फैलाने से रोक सकता है। यदि आप दवा ले रहे हैं और स्वस्थ आदतें हैं, तो आपका एचआईवी संक्रमण आगे बढ़ नहीं सकता है।

एड्स

एड्स एचआईवी संक्रमण का उन्नत चरण है।आमतौर पर यह तब होता है जब आपका सीडी 4 टी-सेल नंबर 200 से नीचे गिर जाता है। यदि आपके पास "एड्स परिभाषित बीमारी" है, तो कपोसी के सारकोमा (त्वचा कैंसर का एक रूप) या न्यूमोकिस्टिस निमोनिया (फेफड़ों की बीमारी) जैसी एड्स के साथ निदान भी किया जा सकता है।
यदि आपको पता नहीं था कि आप पहले एचआईवी से संक्रमित थे, तो आप इन लक्षणों में से कुछ के बाद इसे महसूस कर सकते हैं:

3 महीने के बाद एचआईवी लक्षण

आपकी गर्दन या ग्रोइन में सूजन लिम्फ नोड्स बुखार जो 10 दिनों से अधिक समय तक रहता है, रात को पसीना, अस्पष्ट वजन घटाने, अपनी त्वचा पर बैंगनी धब्बे जो दूर नहीं जाते हैं, साँसों की कमी गंभीर, लंबे समय तक चलने वाले दस्त ब्रूस या खून बह रहा है आप समझा नहीं सकते हैं

एचआईवी/एड्स के उपचार

एड्स वाले लोग जो दवा नहीं लेते हैं केवल 3 साल तक जीवित रहते हैं, अगर उन्हें खतरनाक संक्रमण हो तो भी कम। लेकिन सही उपचार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ, आप लंबे समय तक जी सकते हैं।

राखी बांधने का सही तरीका, The right way to bind the rakhi

राखी बांधने का सही तरीका, The right way to bind the rakhi
राखी बांधने का सही तरीका

श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है.
शास्त्रों के अनुसार भद्रा समय में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों ही नक्षत्र समय अवधि में राखी बांधने का कार्य करना वर्जित होता है. 


रक्षा बंधन 2018  की तारीख़ और शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan 2018  Date and Time


इस वर्ष 2018 में रक्षा बंधन का त्यौहार 26 अगस्त, को मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 25 अगस्त 2018 को 15:17 से आरंभ होगा और 26 अगस्त 17:26 तक व्याप्त रहेगी. 25 को किंतु भद्रा व्याप्त रहेगी. इसलिए शास्त्रानुसार यह त्यौहार 26 अगस्त को संपन्न किया जाए तो अच्छा रहेगा. परंतु परिस्थितिवश यदि भद्रा काल में यह कार्य करना हो तो भद्रा मुख को त्यागकर भद्रा पुच्छ काल में इसे करना चाहिए. 26 अगस्त को रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय- 05:59 से 17:25 अपराह्न मुहूर्त- 13:39 से 16:12.


रक्षा बंधन का त्यौहार कैसे मनाएं

How to celebrate Raksha Bandhan


अपनी सुविधा के अनुसार बहन या भाई के घर राखी बांधी जाती है। ज्यादातर बहन भाई के यहाँ राखी बांधने जाती है। भाई के साथ ही भाभी , भतीजा , भतीजी को भी राखी बांधकर पारिवारिक रिश्ते को मजबूती दी जाती है। सुबह जल्दी नहा धोकर सुन्दर वस्त्र पहनकर रक्षा बंधन की थाली तैयार कर लें।


राखी बांधने का सही तरीका,

The right way to bind the rakhi


राखी के रुप में किसी रंगीन सूत की डोर को लिया जा सकता है. डोरी रेशम की भी हो सकती है. डोरी में सुवर्ण, केसर, चन्दन, अक्षत और दूर्वा रख कर इसकी पूजा करें, पूजा करते समय जितने भी समय के लिये पूजा की जा रही है, उतने समय में व्यक्ति को अपना ध्यान केवल पूजा में ही लगाना चाहिए.

डोरी की पूजा करने के बाद, अपने भाई को तिलक करते हुए, रोली, कुमकुम से टीका करें, तथा टीका करते हुए अक्षत का प्रयोग करना चाहिए. राखी दांहिने हाथ में बांधी जाती है.


राखी कैसे बांधे

rakhi kaise bandhe


राखी बांधते समय बहन का मुंह पश्चिम दिशा में और भाई का मुंह पूर्व दिशा में होना चाहिए। ये शुभ माना जाता है।

सबसे पहले भाई को रोली से टीका करें। टीका करने के लिए पहले अनामिका अंगुली ( Ring Finger ) में रोली लगाकर इससे भाई के मस्तक पर भौहों के बीच बिंदी लगाएं जहां से टीका शुरू होगा।

अब अंगूठे में रोली लगाकर ऊपर की तरफ टीका बना दें। रोली में पानी ना तो बहुत कम हो ना बहुत ज्यादा। ज्यादा पानी होने से टीका नाक तक फ़ैल जाता है।

अंगूठे व तर्जनी अंगुली से अक्षत ( चावल ) उठाकर टीके पर चिपका दें। इसमें तीन , पांच , सात या ग्यारह चावल चिपकते है तो शुभ मानते है।

भाई के दाएं हाथ की कलाई कर राखी बांधें। राखी का धागा बहुत टाइट या बहुत ढ़ीला नहीं होना चाहिए।
नारियल पर रोली से टीका लगाकर उस पर एक नोट ( श्रद्धा अनुसार ) रखकर भाई के हाथ में दें । भाई दोनों हाथ से नारियल पकड़े।

भाई को अपने हाथ से मिठाई खिलाएं।
बहन अपने भाई की तीन बार बलाइयां लें और भाई को उन्नति , प्रगति की और खुश रहने की शुभ कामना दें। बलाइयां लेने के लिए बहन अपने दोनों हाथों की अँगुलियों को भाई की कनपटी के पास टच करके फिर अपने कनपटी के पास टच करें।

दीपक वाली थाली से भाई की आरती उतारें
भाई अपनी बहन को उपहार , रूपये आदि दें। बहन को अपने हाथ से मिठाई खिलाएं। हमेशा सुख दुःख में साथ निभाने का वादा करें।

पेट दर्द का इलाज के 10 आसान देसी नुस्खे, Stomach Pain Treatment in hindi

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पेट दर्द का इलाज के 10 आसान देसी नुस्खे
पेट दर्द में रामबाण का काम करती है बिना दूध की चाय, जानें ऐसे ही 10 तरीके
हम अक्सर बाहर का तेल-मसाला और नुकसानदायक खाद्य पदार्थों को खाते रहते हैं। ऐसे में हमारा पेट हर बार डाइजेस्ट नहीं कर पाता। जिसकी वजह से पेट दर्द की समस्या हो जाती है। मसालेदार खाने से अमाशय से आंत तक दर्द पैदा होने लगता है। अपच से होने वाले पेट दर्द से परेशान होने की जरूरत नहीं है आपको ऐसे कुछ रामबाण उपाय बता रहा है, जिससे आप आसानी से पेटदर्द से छुटकारा पा सकते हैं।

पेटदर्द के 10 आसान उपचार

बिना दूध की चाय पीने से भी पेट दर्द में आराम महसूस होता है।

बच्चों के पेट दर्द का घरेलू उपचार

अदरक के रस में शहद मिलाकर लेने से पेट का दर्द दूर हो जाता है।
आधा चम्मच नमक व आधा चम्मच हल्दी मिलाकर ठंडे पानी से लें। पेटदर्द में आराम मिलेगा

पेट दर्द का इलाज

अदरक का रस नाभी पर लगाने और हल्की मालिश करने से पेट दर्द में लाभ होता है।

पेट दर्द का इलाज के आसान देसी नुस्खे

एक गिलास पानी में थोड़ा सा मीठा सोड़ा डालकर पीने से पेट दर्द में फ़ायदा होता है।
आधा चम्मच अदरक का रस व आधा चम्मच नींबू के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर लेने से पेटदर्द का नाश होता है।

नाभि के पास पेट दर्द

एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच बेकिंग सोड़ा मिलाकर पीने से पेट दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
गर्म अच्छी तरह पके हुए चावलों को कॉटन के कपड़े में निथार कर पेट पर सेंक करें। इससे तुरंत लाभ मिलेगा।

पेट दर्द और गैस

सौंठ, जीरा और काली मिर्च को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ एक चम्मच मात्रा में लें। पेट दर्द में आराम मिलेगा।

पेट दर्द का घरेलू उपचार

एक ग्राम काला नमक व दो ग्राम अजवाइन पीसकर गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द में लाभ होता है।

सफेद बाल को काला करने के 5 नुस्खे balo ko kala karne ke 5 nuskhe

balo ko kala karne ke 5 nuskhe
balo ko kala karne ke 5 nuskhe

अगर आप सफेद होते बालों से परेशान हो चुके हैं तो इन. उपायों से आपके बाल काले हो सकते हैं और इनका कोई दुष्परिणाम भी नहीं होगा
उपाय जानने के लिये लेख को ध्यान से पढ़ें
कम उम्र में ही बाल सफेद होना अब आम बात हो गई है. जबकि पहले बाल सफेद होना बूढ़े होने की निशानी मानी जाती थी. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. आज के लोगों की दिनचर्या ऐसी हो गई है कि उनके खान-पान के साथ-साथ पूरा टाइम टेबल ही बदल गया है. फिर भी अगर आप अपने सफेद बाल को काल करना चाहते हो तो कुछ ऐसे उपाय हैं जिसकी मदद से अपने बाल को काला कर सकते हो

सफेद बाल को काला करने के ये 5 उपाय

1- सफेद बाल को काला करना है तो आप कच्चा पपीता ले लें और उसे पीस कर पेस्ट बना ले. अब इसे सप्ताह में दो से तीन बार अपने बालों पर लगाएं. दस से पंद्रह मिनट तक इसे बालों में ही लगे रहने दें उसके बाद केवल पानी ने धो ले. ऐसा करने पर आपके बालों का झड़ना भी बंद होगा और सफेद बाल भी धीरे-धीरे काले हो जाएंगे.

बाल काले करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

2- एलोवेरा का नाम तो सब जानते हैं. लेकिन इसकी उपयोगिता कुछ हो लोगों को पता है. बालों में एलोवेरा लगाने से बालों का झड़ना तो कम होता ही है साथ में बालों की सफेदी को भी कम करता है. बाल काला करने के लिए आप एलोवेरा जेल इस्तेमाल कर सकते हैं. या फिर एलोवेर का पौधा है तो उसके पत्ते के उपरी परत को हटा देने के बाद उसे अंदर के जेल को अपने बालों में लगाए. सफेद बाल जल्द ही काले हो जाएंगे.

बाल काले करने के आयुर्वेदिक उपाय

3- बालों के लिए आंवला का भी उपयोग किया जाता है. आंवला को मेंहदी और रीठा में मिलाकर इसको बालों पर लगाए. लगभग एक घंटे बाद बाल को पानी से धो लें. सप्ताह में दो-तीन दिन ऐसा करने से आपके सफेद बाल काले होने लगेंगे

सफेद बालों को काला करने की दवा

4 - आमतौर पर प्याज का उपयोग तो केवल खाने में ही प्रयोग किया जाता है लेकिन आपको बता दें कि प्याज का रस बालों में लगाने ने सफेद बाल भी काले होते हैं. इसको लगाने से न सिर्फ बालों की सफेदी में कमी आएगी बल्कि बालों को चमद भी देगा.

बाल काले करने का नेचुरल तरीका

5- सफेद बालों से मुक्ति पाने के लिए काली मिर्च भी कारगर उपाय है. काली मिर्च को पानी में डालकर उबाल ले और नहाते समय इसे नहाने वाले पानी में मिलाकर नहाए. कुछ ही दिनों बाद इसका असर दिखने लगेगा. सफेद बाल दिन पर दिन काले होते नजर आएंगे.

खांसी को आसानी से दूर करने का 11 नुस्खे, Ayurvedic nuskhe for cough in hindi

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज


किसी भी खांसी को आसानी से दूर करें ये 11 नुस्खे

मौसम बदलने के साथ हमारे शरीर का टेम्परेचर भी ऊपर-नीचे होता है। ठंडा-गर्म खाना या फिर किसी एलर्जी के कारण हमें खांसी की समस्या हो जाती है। खांसी होने पर शुरुआत में हम इग्नोर करते है, लेकिन जब यह आपके लिए परेशानी बढ़ा देती है, तो आप डॉक्टर के पास या दवा लेते है। ऐसे में क्यों न हमें खांसी के शुरुआत में ही घरेलू नुस्खे अपनाकर इसे जड़ से मिटा दें। तो चलिए आपको खांसी को आसानी से दूर करने के 11 नुस्खे बता रहा है, जिसे अपनाकर आप भी जल्द ठीक हो सकते हैं।

खांसी का बढ़ियां घरेलू उपचार

रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। इससे खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।
सुबह-शाम चने बराबर मात्रा में भूनी हुई फिटकरी का पाउडर लेने से भी खांसी की समस्या दूर हो जाती है।

खांसी की बेस्ट नुस्खे

शहद और कच्चे प्याज का रस समान मात्रा में लेकर मिलाएं। इसे 3 से 4 घंटे के लिए किसी अंधेरे वाले स्थान पर रख दें। बाद में इसका सेवन करें, यह खांसी की दवाई के रूप में सटीक कार्य करता है।

खांसी की बेस्ट इलाज

धनिया, जीरा और बच बराबर मात्रा लेकर मिलाएं और काढ़ा बना लें। सर्दी और खांसी से परेशान बच्चों को खाने के बाद लगभग 10 ML तक यह काढ़ा पीने के लिए दें। खांसी की समस्या दूर हो जाएगी।

लौंग को घी में सेंककर मुंह में रखने से बार-बार खांसी नहीं आती है।

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज

लगभग 2 कप पानी मे अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े और कुछ पत्तियां इमली की डालें। इसे तब तक उबालें जब तक कि ये एक कप न रह जाए। इसमें 4 चम्मच शक्कर डालकर धीमी आंच पर कुछ देर और उबालें और फिर ठंडा होने दें। ठंडा होने पर इसमें 10 बूंद नींबू रस की डाल दें, हर तीन घंटे में इस सिरप का एक बार सेवन करने से खांसी छू-मंतर हो जाती है।
खांसी होने पर हल्दी की छोटी गांठ मुंह में रख कर चूसें। इससे जल्द आराम मिलता है।

खांसी का रामबाण इलाज

तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में रामबाण दवा की तरह काम करती है।

खांसी का आयुर्वेदिक नुस्खे

पानी में गुड़, अदरक, नींबू का रस, अजवाइन, हल्दी को बराबर की मात्रा में डालकर उबालें और फिर इसे छानकर पिएं। खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलेगा।

सूखी खांसी का बढ़ियां घरेलू उपचार

अदरक, लौंग, हींग और नमक को मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां तैयार करें। दिन में 3-4 बार एक-एक गोली चूसें। सूखी खांसी में यह असरदार है।
मुलेठी की चाय बनाकर पीने से भी खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।

घुटने के दर्द से छुटकारा पाने का सबसे सस्ता और घरेलू उपचार, ghutane ke dard ka ilaaj

ghutane ke dard ka ilaaj
ghutane ke dard ka ilaaj

मित्रों आज मैं आपको घुटने के दर्द से छुटकारा पाने का सबसे सस्ता और घरेलू उपचार बताने जा रहा हूँ जिसे मैने खुद आजमाया और आशातीत सफलता प्राप्त हुई है मेरे घुटने का दर्द ख़त्म हो गया है
आइये मित्रों जानते हैं इस उपचार के बारे में

घुटने के दर्द के लिए घरेलू उपचार

हमारी रसोई में प्रतिदिन उपयोग में आने वाले सामान से ही घुटने का दर्द ख़त्म होगा आइये जानते हैं ये सामान क्या है?
1- हल्दी, 2- चीनी , 3- चूना(पान में खाने वाला), 4- पानी
मित्रों सबसे पहले एक चम्मच पीसी हल्दी लें उसमें एक चम्मच चीनी डालें फ़िर उसमें मटर के बराबर चूना डालें अब उसमें एक चम्मच पानी डाल कर सबको मिलाएं जब तक चीनी पूरी तरह से घुल ना जाए ये एक लाल रंग का लेप बन जाएगा।

घुटने के दर्द का घरेलू उपचार

अब इस लेप को घुटने पर चारो तरफ़ से लगा कर करीब 15 मिनट सूखने दें सूखने के बाद इसपर एक कपड़े की पट्टी बाँध दें।
यह लेप कम से कम 5से 6घंटे लगा रहना चाहिये।इसलिये इसे रात में सोने से पहले लगाएं जिससे सारी रात लगा रहेगा और आपको जल्दी आराम मिलेगा।
वैसे तो दो तीन दिनों में ही आराम मिल जाएगा किंतु अगर इसे 30 दिनों तक उपयोग में लिया जाय तो आप सभी को आशातीत लाभ होगा।

ये नुस्खा मैने खुद पर आजमाया हुआ है और लाभ भी हुआ है।

इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें धन्यवाद

लिंग की नसों मे कमज़ोरी ढीलापन का आयुर्वेदिक नुस्खे, ling ki naso me kamzori

लिंग की नसों मे कमज़ोरी ढीलापन का आयुर्वेदिक नुस्खे
लिंग की नसों मे कमज़ोरी ढीलापन का आयुर्वेदिक नुस्खे

हमारे पास रोजाना 100-200 लोगों का यह सवाल होता है कि लिंग की नसों में कमज़ोरी क्यों आती है और कमज़ोरी दूर करने का सुरक्षित तरीका क्या है???
हर मर्द चाहता है कि वह अपनी साथी को भरपूर प्यार दें और उसको खुश रखें. और वह अपने साथी को खुश करने के लिए हरसंभव प्रयास करता है जो वह कर सकता है.
आज के समय में युवा लोग तनाव और खानपान की वजह से कई सेक्स बीमारियों से जूझ रहें हैं और उन सब बीमारियों में से एक है लिंग की नसों का कमजोर होना.
आज के समय करीब 50% युवा लिंग की नसों की कमज़ोरी से परेशान है और आज हम इस बीमारी के बारे में गहराई से बात करेंगे.
सबसे पहले हम बात करते हैं की लिंग की नसें कैसी होती है और क्या काम करती है और कैसे काम करती है.
एक स्वस्थ इंसान के लिंग में 50 से 60 हज़ार छोटी- छोटी नसें होती है जो बहुत ही बारिक होती है धागे जैसी.
एक इंसान के द्वारा सेक्स करने के लिए इन नसों का सही से कार्य करना बहुत ज़रूरी होता है इन नसों के सही नही होने की अवस्था में सेक्स की कल्पना करना भी असंभव है.
सेक्स के दौरान लिंग का खड़ा होना और सख़्त होना इन नसों पर ही निर्भर करता है.

लिंग की नसों मे कमज़ोरी के लक्षण

आइए जानते है की ये नसें केसे काम करती है और इनकी क्या भूमिका है
सेक्स करने के लिए जब मर्द औरत के साथ संपर्क में आता है तो उत्तेजना से टेसटेसटेरॉन हारमोन एक्टिव हो जाता है. टेसटेसटेरॉन हारमोन का कार्य है शरीर में ब्लड सर्क्युलेशन को बढ़ाना. यह हारमोन पूरे शरीर में ब्लड सर्क्युलेशन को बढ़ा देता है और जब लिंग की नसों में यह ब्लड का सर्क्युलेशन पहुँचता है तो नसें फूल जाती है और आपका लिंग भी फूल जाता है और आपके लिंग का साइज़ भी नॉर्मल साइज़ का तीन गुना हो जाता है. आपके लिंग का खड़ा होना इस बात पर निर्भर करता है कि आपके लिंग की नसों में कितना ब्लड सर्क्युलेट हो रहा है !!
(कुछ लोगों के दिमाग़ में सवाल हो रहा होगा कि लिंग का फुल साइज़ कैसा होता है ??? तो उसका जवाब यह है कि जब आपका लिंग का फुल साइज़ बनता है तो लिंग के आगे की स्किन (कैप) 1-2 इंच पिछे हट जाती है और आपका लिंग थोड़ा बाहर निकल आता है.)
इन नसों का दूसरा और सबसे ज़रूरी काम है लिंग को सख़्त करना. आप सभी लोग जानते हैं कि लिंग में कोई हड्डी नही होती. सेक्स के दौरान लिंग का सख़्त होना इस बात पर निर्भर करता है कि इन नसों में कितनी तेज़ी से ब्लड सर्क्युलेट कर रहा है. नसों में जितनी तेज़ी से ब्लड सर्क्युलेट करेगा लिंग उतना ही सख़्त बना रहेगा. सेक्स के दौरान लिंग का साइज़ और सख़्त होना आपके लिंग की नसों पर ही निर्भर करता है

आइए जानते है कि लिंग की नसें कमजोर होने का क्या कारण है?

इन नसों का कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण है हस्थ्मथुन. कुछ लोग 13-14 की उम्र से ही हस्थ्मथुन करना सुरू कर देते है. हस्थ्मथुन किस तरह आपके लिंग की नसों को कमजोर करती है??
जब हस्थ्मथुन करते है हैं तो टेसटेसटेरॉन हारमोन एक्टिव नही होता है और लिंग को हाथ से रगड़ रगड़ कर ही लिंग को उत्तेजित किया जाता है.
हाथ से रगड़ने से घर्षण की वजह से लिंग की ये छोटी छोटी नसें गरम होकर लाल हो जाती है और हस्थ्मथुन के अंत में समय वीर्य जल्दी ना निकल जाए इसलिए लिंग को हाथ से दबाते हैं. इसी समय ये गर्म हुई लाल नसें हाथ के दाब से दब जाती है, कुछ पिचक जाती है और कुछ बिल्कुल ही दब जाती है और यहीं से शुरुआत होती है आपकी कमज़ोरियों की.
इन नसों के कमजोर होने का दूसरा कारण है सोते समय लिंग को रगड़ कर तकिये से दबाना. गरम लिंग को तकिये से दबाने से भी लिंग की नसें दब जाती है और कमज़ोरी आना शुरू हो जाती है.
नसों के कमजोर होने का तीसरा कारण है सेक्स के तुरंत बाद लिंग को पानी से धोना. सेक्स के तुरंत बाद लिंग को ठंडे पानी से धोने की वजह से भी लिंग की नसें कमजोर पड़ जाती है. इसलिए कभी भी सेक्स के तुरंत बाद लिंग को ना धोयें. यदि लिंग को साफ करना ज़रूरी भी हो तो कम से कम आधे घंटे बाद करें.
नसों के कमजोर होने का चौथा कारण है ड्याबिटीज. ड्याबिटीज ज़्यादा होने से और मेडिसिन लेने की वजह से भी लिंग की नसें कमजोर हो जाती है.

आइए जानते है की ये नसें कमजोर होने के क्या क्या नुक्सान है?

•लिंग की नसें दबने की वजह से लिंग का विकास रुक जाता है क्योंकि नसें दबने की वजह से ब्लड का सर्क्युलेशन कम हो जाता है जिससे ऑक्सिजन का सर्क्युलेशन भी कम हो जाता है और लिंग का साइज़ बढ़ना रुक जाता है. लिंग बहुत छोटा सा हो जाता है और चिपका सा बेजान रहता है
लिंग की नसें दबने की वजह से सेक्स के समय लिंग का फुल साइज़ नही बनता और सेक्स का आनंद बहुत ही कम हो जाता है और कई बार सेक्स करते हुए फुल साइज़ नही बनता और सेक्स के बीच में ही लिंग बाहर निकल जाता है
लिंग की नसें दबने की वजह से ब्लड का सर्क्युलेशन बहुत ही कम हो जाता है जिससे लिंग सख़्त होना कम हो जाता है और सेक्स का फुल एंजाय नही आता. कई बार ज़्यादा कमज़ोरी आने की वजह से लिंग सख़्त होना बंद हो जाता है और लिंग खड़ा ही नही होता और napushankta आ जाती है. इसी को नामर्दी और napushankta कहा जाता है.

आइए जानते है कि हम कैसे नसों की कमज़ोरी को दूर कर सकते हैं और सेक्स को एंजाय कर सकते हैं

नसों की कमज़ोरी को दूर करने का सबसे आसान तरीका

नसों की कमज़ोरी को दूर करने का सबसे आसान तरीका है दूध और इलियाची. इसके लिए 300 Ml दूध ले और इसमे 8-10 छोटी इलायची अच्छे से कूटकर डालें और 10 मिनिट तक उबालें. उसके बाद दूध को थोड़ा ठंडा कर उसमें एक छोटा चम्मच शहद डालें और पी लें. 15 दिन में ही आपको असर आना सुरू हो जाएगा. आपको अच्छा रिज़ल्ट पाने के लिए 4-6 महीने तक यह तरीका अपनाना पड़ेगा.

लिंग की नसों मे कमज़ोरी दूर करने की आयुर्वेदिक उपाय

नसों की कमज़ोरी को दूर करने का दूसरा तरीका है सफेद मुसली. इसके लिए 300 Ml दूध ले और 05 ग्राम मुसली डाल कर 10 मिनिट तक उबालें उसके बाद दूध को थोड़ा ठंडा कर पी लें. 15 दिन में ही आपको असर आना सुरू हो जाएगा. आपको अच्छा रिज़ल्ट पाने के लिए 4-6 महीने तक यह तरीका अपनाना पड़ेगा.

लीग का ढीलापन कैसे दूर करे

नसों की कमज़ोरी को दूर करने के लिए कुछ कसरत करना भी फ़ायदेमंद रहेगा जिनके बारे में आप हमसे जानकारी ले सकते है कसरत करने से भी ब्लड का सर्क्युलेशन इंप्रूव हो जाता है और कमज़ोरी दूर होने लगती है.

लिंग की नसों मे कमज़ोरी दूर करने की आयुर्वेदिक इलाज

नसों की कमज़ोरी को दूर करने के लिए हम कुछ आयुर्वेदिक दवा भी बनाते हैं जिनके सेवन से यह कमज़ोरी दूर हो जाती है और सेक्स का आनंद ले सकते हैं

सुबह दौड़ने से अच्छा है वजन घटाने के लिये आप इन चीजों का सेवन करें, Quick weight loss in hindi

सुबह दौड़ने से अच्छा है वजन घटाने के लिये आप इन चीजों का सेवन करें, Quick weight loss in hindi
Quick weight loss in hindi


आइये जानते हैं इनके बारे में
दोस्तों आज आपको बताने वाला हूं एक ऐसे तरीके के बारे में जिसे आप बहुत ही आसानी से कुछ ही दिनों के अंदर वजन घटा सकेंगे।

2 सप्ताह 10 किलो में तेजी से वजन कम करने के लिए

मैं आज आपको बताने वाला हूं ऐसे 3 फलों के बारे में जिसको खाने से आपका वजन 1 हफ्ते या 10 दिनों के अंदर काफी आसानी से कम हो जाएगा। और आपको इन 3 फलों का सेवन नियमित रुप से करते रहना है। सबसे पहला फल जो है वह करेला है और आपको इस फल का सेवन नियमित रूप से करना है आप इसकी मात्रा दिन में एक ले सकते हैं।

एक सप्ताह में 20 किलो कम करने के लिए

और जो दूसरा फल है वह है नींबू इसका भी सेवन आप दिन में एक ही बार करें तथा नियमित रुप से करें और जो अंत में तीसरा साल आता है वह है आंवला इसका भी सेवर आप दिन में एक से दो बार ही कर सकते हैं ऐसा आपको दैनिक रूप से करना जरूरी है।और आप इसका परिणाम 1 हफ्ते के बाद देख सकेंगे कि यह कितना लाभकारी है।

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आयुर्वेद के अद्भुत, चमत्कारी दिव्य जड़ी बूटी, ayurved ke adbhut jadi buti



आज कल की भाग दौर की जिंदगी मे अव्यवस्थित खान पान , रहन सहन और दूषित वातावरण के कारण भूख मे कमी , पाचन क्रिया का कमजोर होना , गैस की प्रॉब्लम , नींद सही से नहीं आना , मानसिक टेंशन और शारीरिक थकावट के कारण लाइफ मे जोश की कमी होना I हमारे ऋषि मुनिओं के द्वारा सुझाय गए 11 चमत्कारी जड़ी बूटी आपके शरीर मे स्फूर्ति , जोश और स्टैमिना को नैचुरली बढ़ाता है I

आयुर्वेद के अद्भुत, चमत्कारी दिव्य जड़ी बूटी

शुद्ध शिलाजीत

Shuddha Shilajit

आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत की उत्पत्ति पत्थर से हुई है। गर्मी के मौसम में सूर्य की तेज गर्मी से पर्वत की चट्टानों के धातु अंश पिघल कर रिसने लगता है। इसी पदार्थ को शिलाजीत कहा जाता है। यह देखने में तारकोल की तरह काला तथा गाढ़ा होता है जो सूखने के बाद एकदम चमकीला रूप ले लेता है। आइए जानते है कि शिलाजीत के क्या-क्या फायदे हैं: A)

स्वप्नदोष की समस्या


B) मधुमेह (डायबिटीज) की समस्याC) बहुमूत्र या बार-बार मूत्र जाने की समस्या D) शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता E) दिमागी ताकत बढ़ाने के लिए F) ब्लड़प्रेशर को नॉर्मल करने में G) यह नपुंसकता खत्म करता है, और यह स्वप्न दोष को भी दूर करता है H) यह सेक्स पॉवर बढ़ाता है और यौन इच्छा में भी वृद्धि करता है. I) ऐसा नहीं है कि इसका सेवन केवल कोई बीमार व्यक्ति हीं कर सकता है, इसका सेवन एक सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति भी कर सकता है. इससे उसका शरीर मजबूत होता है और तंदुरुस्ती बढ़ती है
2 ) अश्वगंधा

Aswagandha

यह पुरुषों में वीर्य को ताकतवर बनाता है और वीर्य की संख्या को भी बढ़ाने में भी मदद करती है। यह एक प्रकार से कामोत्तेजक (Stimulator) की भूमिका निभाता है परंतु इसका कोई साइड इफेक्ट शरीर पर नहीं देखा गया है। यह एजिंग को रोकने का भी काम करती है और आयु बढ़ाती है। इसके सेवन से पुरुषों की प्रजनन क्षमता बढ़ती है। अवसाद-तनाव दूर करने और मानसिक शक्ति बढ़ाने में I अश्वगंधा के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर कम होता है और यह मधुमेह की बीमारी को नियंत्रण में रखती है। इसके चूर्ण खाने से कोलेस्ट्रॉल भी कम होती है।
3 ) सफ़ेद मूसली

Safed Musli

सफेद मूसली एक प्रकार की औषधि है। सफेद मूसली को आयुर्वेद की दुनिया में चमत्कार माना जाता है। मुख्य रूप से सफेद मूसली का प्रयोग सेक्स सम्बन्धी रोगों के लिए किया जाता है। मर्दों में शुक्राणुओं की कमी होनें पर इसका प्रयोग किया जाता है। सफेद मूसली एक बेहतरीन औषधि है। इसमें डायबिटीज से लड़ने की क्षमता होती है। यदि एक दुबले-पतले व्यक्ति को डायबिटीज है, तो मूसली उसका इलाज करने में सक्षम होती है, लेकिन मोटे व्यक्ति में यह थोड़ा मुश्किल होता है।
4 ) कौंच

Kaunch

यह आयुर्वेद की बहुत प्रसिद्ध जड़ी बूटी है जिसके कई लाभ है. इस दवा का प्रयोग प्राचीन काल से ही चला आ रहा है. कौंच/Kaunch के बीजो का प्रयोग सेक्सुअल और न्यूरोलॉजिकल विकारो को दूर करने के लिये भी किया जाता है. इसके बीजो, पत्तियों और जड़ो जैसे भागो का प्रयोग दवा के रूप में किया जाता है. इसका प्रयोग थकान दूर करने. यौन इच्छा की कमी. इरेकशन डिसफंक्शन, पीठ दर्द, नसो का दर्द, शरीर दर्द, वजन बढ़ाने, शक्ति बढ़ाने, इम्युनिटी सुधारने और कई तरह की बीमारियों के इलाज मे किया जाता है.
5 )

गोक्षरु (Gokshru)

यह पेशाब संबंधित सारी समस्याओं को जैसे, पेशाब में जलन, रुक रुक कर पेशाब आना, पेट में दर्द, किडनी स्टोन जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. पुरुषों में यौन संबंधी समस्याओं में जैसे , नपुंसकता, शीघ्रपतन, कमजोरी, प्रजनन अंग की शिथिलता, जल्दी डिस्चार्ज होना, कामेच्छा इच्छा की कमी, इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्याओं में इसके सेवन से फायदा मिलता.
6 ) शतावरी Shatavari शतावरी को शुक्रजनन, शीतल, मधुर एवं दिव्य रसायन माना जाता है। महर्षि चरक ने भी शतावरी को चिर यौवन को कायम रखने वाला माना था। आधुनिक शोध भी शतावरी की जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मानते हैं। शतावरी के लगभग 5 ग्राम चूर्ण को सुबह और रात के समय गर्म दूध के साथ लेना लाभदायक होता है। इसे दूध में चाय की तरह पकाकर भी लिया जा सकता है। इसके अलावा शतावरी के ताजे रस को 10 ग्राम की मात्रा में लेने से वीर्य बढ़ता है। शतावरी मूल का चूर्ण 2.5 ग्राम को मिश्री 2.5 ग्राम के साथ मिलाकर पांच ग्राम मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री-मैच्योर इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष) में लाभ मिलता है। यही नहीं शतावरी की जड़ के चूर्ण को दूध में मिलाकर सेवन करने से धातु वृद्धि भी होती है।
7 ) पलाश (Plash) आयुर्वेद के अनुसार पलाश के पेड़ वात और पित्त (Vata and Pitta) को संतुलित करता है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवा में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। इस पेड़ के सभी भागों का उपयोग विभिन्‍न रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबायल, जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, हाइपोग्‍लाइसेमिक (hypoglycemic), एंटी-इन्‍फ्लामेट्री, बांधने वाले गुण, टॉनिक, एफ्रोडायसियाक (Afrodiusiac) और मूत्रवर्धक (Diuretic) गुण होते हैं। इन सभी गुणों के कारण पलाश हमें बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्रदान करते हैं।
8 ) शुण्ठी (Shunthi) शुण्ठी हमारे हृदय के स्वास्थ को बनाए रखने के लिए एक अत्यंत ही आदर्श औषधी है। यह हायपर टेंशन को कम करती है। शुण्ठी के सेवन से हमारे शरीर में रक्त को पतला होने में सहायता प्राप्त होती है। जिससे शरीर में ब्लडक्ल़ॉट्स नहीं होते। इस प्रकार शुण्ठी हमारे शरीर को दिल का दौरा पडने से सुरक्षा प्रदान करती है। शुण्ठी हमारे शरीर में कोलेस्टेरॉल की मात्रा को भी नियंत्रित करने में बहुत ही प्रभावशाली मानी जाती है।
9 ) अकरकरा (Akarkara) नपुंसकता और स्तंभन दोष के इलाज के लिए अकरकरा (Anacyclus Pyrethrum) अच्‍छा उपाय है। अकरकरा सिल्‍डेलाफिल की तरह ही कार्य करता है लेंकिन यह रक्‍तचाप में वृद्धि नहीं करता है। सिलडेनाफिल की तुलना में इसके कम दुष्‍परिणाम है। इसके अच्‍छे परिणाम के लिए अश्वगंधा (ashwagandha) और कोंच बीज पाउडर के साथ अकरकरा का मिश्रित उपयोग करना चाहिए। अकरकरा का प्रयोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन नपुंसकता (स्तंभन दोष) में अत्यंत ही लाभकारी है ।
10) मेथी (Methi) मेथी दाना पुरुषों के लिए अत्यंत लाभकारी है. अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है। स्वस्थ सेक्स लाइफ के लिए गुणकारी है।
11) सालमपंजा (Salampanja) सालमपंजा वीर्य को पुष्ट कर शरीर को शक्तिशाली बनाता है। बहुत से लोग जो शीघ्रपतन से ग्रस्त हैं उनके लिए सालमपंजा वडा़ ही लाभकारी औषधि द्रव्य है। यह स्त्रियों के प्रदर रोग व इनके कारण उत्पन्न दुर्वलता आदि दूर करने के लिए भी यह उत्तम औषधि रत्न है।
कृपया ध्यान दें उपरोक्त जानकारी आयुर्वेदिक चिकित्सक के लिए है।

योनि में जलन और खुजली के आयुर्वेदिक नुस्खे Ayurvedic nuskhe for itching in vagina




वैजाइना शरीर का सबसे नाजुक और अहम अंग होता है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर के साथ-साथ वैजाइना की देखभाल और पूरी तरह से साफ-सफाई का ध्यान भी रखना चाहिए।
वैजाइना की अच्छे से सफाई न करने और कुछ बातों को नजरअंदाज करने से वहां बैक्टीरियां पनपने लगते हैं, जिससे इंफैक्शन और खुजली की समस्या होने लगती है।
अक्सर महिलाओं को लगता है कि यीस्ट इंफैक्शन के कारण वैजाइना में खुजली हो रही है लेकिन इसके अलावा और बहुत से ऐसे कारण हैं, जिसके कारण वैजाइना में खुजली होने लगती है।
आज हम आपको ऐसे ही कुछ कारण बताने जा रहे हैं, जिसके कारण महिलाओं को यह समस्या हो जाती है।

वैजाइना में खुजली के घरेलू उपचार

1लीटर पानी में 3 बड़े चम्मच सेब का सिरका मिलाकर योनि को साफ करें। इससे वैजाइना की खुजली दूर हो जाती है।

वैजाइना में खुजली के आयुर्वेदिक इलाज

नीम के पत्तों को पानी में उबालकर योनि की सफाई करने से भी खुजली की समस्या दूर होती है।

वैजाइना में खुजली के आयुर्वेदिक नुस्खे

एक खाली कैप्सूल में 9 बूंदे ऑरेगैनो ऑयल की मिलाकर रोज दिन में 2 बार खाने के साथ लें।

योनि में खुजली के घरेलू उपाय

टी ट्री ऑयल एक नैचुरल फंगल क्लींजर है। टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें रूई पर लगाकर 4 घंटे के लिए अपनी योनि पर लगाएं रखें। इससे खुजली दूर हो जाएगी।

योनि में खुजली के आयुर्वेदिक इलाज

तुलसी के पत्तों को धोकर पानी में उबाल लें और उससे योनि की सफाई करें। इससे कुछ समय में ही आपकी वैजाइना खुजली की समस्या दूर हो जाएगी।

योनि में खुजली के आयुर्वेदिक नुस्खे

जिन महिलाओ को योनि में खुजली रहती हैं वो नीम और जैतून के तेल लगाएं आराम मिलेगा

yoni ke rog

जिन महिलाओ की योनि ढीली हो गयी हैं वो नीम के तेल से मसाज करें

नीम का तेल एक सुरक्षित और बहुत प्रभावी गर्भनिरोधक प्रतीत होता है

नीम के तेल से स्तनों की मसाज करने से उनमें निखार आता हैं.

धात गिरना के कारण, लक्षण, और आयुर्वेदिक इलाज, dhatu rog ka aayurvedic nuskhe



धात रोग क्या है

अगर धात रोग को सीधे सीधे समझाएं तो व्यक्ति के मूत्र मेंवीर्यका भी अपने आप निकल जाना धात रोग कहलाता है. धातु के गिरने को शुक्रमेह भी कहा जाता है. किन्तु ये होता क्यों है? इस बात को समझना भी आसान है. मतलब जब किसी पुरुष के मन में काम भावना बढती है तो उसका लिंग सख्त और उत्तेजित अवस्था में आ जाता है. इस अवस्था में पुरुष के लिंग से पानी के रंग के जैसी थोड़ी सी पतली लेस निकलने लगती है. ये लेस इतनी अधिक कम होती है कि ये लिंग से बाहर नहीं आ पाती, लेकिन लिंग के अधिक देर तक उत्तेजित रहने से उसके मुहँ के आगे आ जाती है और इसी को मजी भी कहा जाता है. वैसे इस लेस में तो वीर्य का कोई अंश नहीं होता किन्तु इसका काम लिंग की नाली को गिला करने का होता है ताकि व्यक्ति जब सम्भोग बनाएं तो वीर्य की तीव्र गति से लिंग को कोई नुकसान ना पहुंचें.

आजकल ऐसे अनेक युवक और युवती है जो गलत तरीके से अपने वीर्य को बर्बाद करते रहते है, कुछ तो ख्यालों में ही लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना आरम्भ कर देते है. उनकी इसी ख्यालों की दुनिया में खोये रहने के कारण उनका लिंग अधिक देर तक उत्तेजित रहता है और लेस ज्यादा मात्रा में बहनी आरम्भ हो जाती है. एक समय ऐसा भी है जब इन युवकों की स्थिति अधिक खराब हो जाती है और लड़की का ख्याल मन में आते ही उनकी लेस बाहर निकल जाती है और वे शांत हो जाते है. ये एक रोग है जिसे लालामेह ( शुक्रमेह ) कहते है.

धात रोग के कारण

अधिक कामुक विचार रखना, मन की अशांति, शोक, दिमागी कमजोरी, शरीर में पौषक तत्वों विटामिन्स की कमी, शरीर में मांस, अस्थि, मजा सही मात्रा में ना होना, पौरुष द्रव का पतला होना, नसों में कमजोरी, पौरुष द्रव को व्यर्थ में निकालना

धात रोग के लक्षण

लिंग के मुख से लार टपकना, पौरुष द्रव अर्थातवीर्यका पतला होना, शरीर का कमजोर होना, हर बात पर मानसिक तनाव लेना, शरीर के अन्य हिस्सों में कंपन, पेट रोग जैसे स्नायु का दुर्बल होना, श्वास रोग या खांसी होना, पिंडलियों में दर्द का होना, चक्कर आना या शरीर में हर समय थकान महसूस होना, शरीर की चुस्ती फुर्ती खत्म होना, मन में अप्रसन्नता होना और किसी काम में मन ना लगना भी इसके लक्षणों को दर्शाता है.

धात रोग का प्रभावी हर्बल उपचार

सफेद मुसली White Asparagus Abscendens
आप 10 ग्राम सफ़ेद मुसली का चूर्ण लें और उसमें मिश्री मिलाकर खाएं. इसे लेने के बाद ऊपर से 500 ग्राम गाय का दूध पी जाएँ. ये उपाय शरीर में अंदरूनी शक्ति को बढ़ता है और शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है.

उड़द की दाल Udad Pulses  एक अन्य उपाय के अनुसार आप उड़द की दाल का चूर्ण बनाकर उसे खांड में भुनें और खांड मिलाकर खाएं.

धातु रोग का घरेलू उपचार

जामुन की गुठली Kernels of Blackberry धात के कारण शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लियए आपको जामुन की गुठलियों को सुखाकर उसका पाउडर तैयार करना है और उसे रोजाना दूध के साथ खाना है. ये उपाय कुछ हफ़्तों में ही परिणाम दिखाना आरम्भ कर देता है धात गिरना बंद हो जाता है.

धातु रोग का आयुर्वेदिक इलाज

कौंच के बीज Kaunch Seeds 

अगर वीर्य पतला हो गया है तो आपको 100 – 100 ग्राम की मात्रा में ताल्माखाने और कौंच के बीज लेकर उनका चूर्ण तैयार करना है और उसमें 200 ग्राम पीसी हुई मिश्री मिलानी है. प्राप्त मिश्रण को रोजाना ½ चम्मच गुनगुने दूध के साथ लें. ये उपाय जल्द हीवीर्यको दोबारा गाढा करता है.

धातु रोग का आयुर्वेदिक नुस्खे

शतावरी मुलहठी Asparagus Liquorices  आपको एक प्रयोग के अनुसार 50 ग्राम शतावरी, 50 ग्राम मुलहठी,50 ग्राम सालब मिसरी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज,25 ग्राम बंशलोचन, 25 ग्राम शीतलचीनी और 4 ग्राम बंगभस्म लेनी है. आप इस सभी सामग्री को सुखा लें और उन्हें बारीक पिसें. अब इसमें 60 ग्राम की मात्रा में चाँदी का वर्क मिलाएं और रोजाना सुबह शाम गाय के दूध के साथ 60 ग्राम की मात्रा में लें. ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग से मुक्ति दिलाता है.

सुबह उठते ही आती हैं लगातार छींके तो क्या करें? Sinocytosis problem



साइनोसाइटिस की समस्या
बढ़ते प्रदूषण और लगातार जुकाम रहने के कारण होती है। हमारी खोपड़ी में अनेक प्रकार के खोकले छेद होते हैं जो ये छेद सांस लेने में मदद करते हैं। जिसे साइनस कहते हैं। जब हम सांस लेते हैं तो इसके साथ धूल-मिट्टी के कण अंदर चले जाते हैं तो यह छेद हवा को साफ करके फेफड़ो तक पहुंचाते हैं। जब यह काम करना बंद कर देते है तो साइनोसाइटिस की समस्या हो जाती है। इस समस्या के होने पर रोगी को सुबह उठते ही छींके आना, जुकाम-खांसी, बदन दर्द, आंखों से आंसू आना, दांतों में दर्द जैसी समस्या होने लगती है। आज हम आपको साइनोसाइटिस होने के कारण और इस से बचने के उपाय बताएंगे, जिसे इस्तेमाल करके आप इस समस्या से बच सकते हैं।

साइनोसाइटिस होने के कारण

1. टेंशन होने के कारण
अगर आप हर वक्त तनाव में रहते हैं तो आप कई बीमारियों को बुलावा दे रहे हैं। तनाव के कारण साइनोसाइटिस होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके कारण सिर दर्द भी होने लगता हैं।

छिक क्यों आती है

2. ज्यादा देर ठंड में रहना
जिन लोगों को ज्यादा देर ठंड में रहना पड़ता है। उन्हें इस बीमारी के चांस बहुत अधिक होते हैं। तेज हवा और ठंडे मौसम में रहने से कफ दोष बिगड़ जाता है और बलगम बनने लगती है।
3. वायु प्रदूषण
बढ़ते प्रदूषण के कारण इस बीमारी का खतरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए ऐसे प्रदूषण में सांस लेने से कीटाणु अंदर चले जाते हैं जो एलर्जी का कारण बनते हैं। जिसके कारण नाक में सूजन हो जाती है और जलन होने लगती है।

साइनोसाइटिस से ऐसे करें बचाव

छींक का आयुर्वेदिक इलाज

हल्दी और अदरक की चाय

इस समस्या से बचने के लिए हल्दी और अदरक वाली चाय बना कर पीएं। हल्दी में ऐसे औषधीय गुण पाएं जाते है जो जलन को कम करते हैं। जिससे एलर्जी से बचा जा सकता है। अदरक में भी ऐसे औषधीय गुण पाए जाते हैं जो बंद नाक को खोलने में मदद करते हैं।
इस चाय को बनाने के लिए एक कप उबलते पानी में एक इंच हल्दी और एक इंच अदरक को पीसकर डालें और इसे धीमी आंच पर ढक्कर 10 मिनट के लिए उबालें। फिर इसे छान कर चाय का सेवन करें।

छींक का देसी इलाज

2. स्टीम लें
म्यूकस की मात्रा ज्यादा होने पर भाप जरूर लें। भाप लेने से म्यूकस पिघलता है और नाक अच्छी तरह से साफ होता है। भाप के लिए एक लीटर पानी को उबाल लें और फिर इसमें थोड़ा-सा कपूर मिलाएं। अब इसकी भाप को 10 से 15 मिनट तक लें। इस प्रक्रिया के आराम आने तक रोजाना करते रहे।
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3. अधिक पानी पीएं
इस समस्या से बचने के लिए अधिक मात्रा में पानी पीएं। इससे म्यूकस पतला होता है और नाक में ब्लॉकेज खत्म होती है। जिससे साइनोसाइटिस का खतरा कम होता है।
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4. नाक की सफाई रखें
इस बीमारी से बचने के लिए नाक की रोजाना सफाई करें। इसकी सफाई करने के लिए रात को सोने से पहलें या फिर सुबह-सुबह नाक में थोड़ा-थोड़ा पानी डाल कर साफ करें। इसे जोर से मसल कर साफ न करें।
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5. वातावरण साफ रखें

छींक आने का कारण

इस बीमारी का मुख्य कारण वायु में धूल, मिट्टी के महीन कण, पशुओं के बाल आदि का होना है। अगर आपने ने घर पर पालतू जानवर रखा है तो इन्हें घर से बाहर रखें और इनकी सफाई पर भी विशेष ध्यान दें। घर में एयर प्यूरिफायर लगवाएं, जिससे आपके घर के अंदर वातावरण साफ बना रह सके।

संभोग के बाद आई कमजोरी को दूर करने के आयुवेर्दिक नुस्खा, sambhog ke baad kamajoree ko door karane ke aayuverdik nuskha



संभोग के बाद थकान और कमजोरी के कारण

संभोग के बाद कमजोरी महसूस होती है तो करें विशेष नुस्खे का सेवन आप हो जायेंगे पावरफुल

सर्दी का मौसम आते ही शादी ब्याह शुरु हो जाते हैं और जो पुराना शादी शुदा जोड़े है वो भी बिना बीवी का नहीं रह सकते और थोड़ी से बात पर ही गरम हो जाते है और अपनी वीर्य और धातु का नुक्सान करते रहते हैं

संभोग के बाद कमजोरी के कारण

आज के समय में संयम नाम की चीज ही नहीं है और संभोग करने के बाद कुछ लोग ऐसे ही सो जाते है और सुबह जब उठाते है तो कमजोरी महसूस करते हैं यहाँ हम आपको ऐसे ही कुछ विशेष नुस्खे बताने जा रहे है जिनके सेवन से आपको कभी भी कमजोरी महसूस नहीं होगी

संभोग के बाद कमजोरी की आयुर्वेदिक नुस्खे

आप कितनी भी पावर प्राप्त करने के लिए बाजीकारक औषधियों का सेवन कर सकते हैं।तो आज हम विशेष नुस्खे बताने जा रहे है जिन्हें आप प्रयोग करते रहे तो आपके शरीर में वीर्य की बढ़ोत्तरी ही होगी। इन औषधियों को आप संभोग के बाद भी प्रयोग कर सकते हैं।
सफेद मूसली, विदारी कन्द, गिलोय, गोखरु व लौंग को समान मात्रा में लेकर कूटपीस कर छान लें तीन ग्राम इस चूर्ण की मात्रा को प्रतिदिन रात को गुनगुने दूध से ले लें।

औरतों की कमजोरी दूर करने के उपाय

तालमखाना,उगटन के बीज,व बीजबन्द तीनो को 12-12 ग्राम की मात्रा में लेकर सालव मिश्री,शकाकुल मिश्री,सफेद मूसली,काली मूसली सभी द्रव्य 24-24 ग्राम,मखाना फूला हुआ,सिंघाड़े का आटा दोनो 48 -48 ग्राम,कमरकस 72 ग्राम,और कुल बजन के बरावर खांड या फिर मिश्री लेकर सभी औषधियों का कूट पीस कर वारीक चूर्ण कर लें लैकिन ध्यान रखे सबको पहले अलग अलग कूटने के बाद मात्रा तोले बाद में खांड या मिश्री मिलाए।एक एक चम्मच की मात्रा प्रतिदिन सुबह व सांय को दूध के साथ लें।एक मास भी अगर प्रयोग कर लिया जाए तो भरपूर यौवन शक्ति प्राप्त होगी।

वीर्य वृद्धि और शुक्राणुओं को बढ़ाने के 4 विशेष नुस्खे

उड़द की धुली हुयी दाल 30 ग्राम लेकर घी में भूने।फिर 375 ग्राम दूध डालकर पकाऐं जब खीर की भाँति हो जाए तो चीनी मिलाकर आग से उतार लें तथा कुनकुना गर्म गर्म ही खाऐं इस प्रयोग से कामशक्ति औऱ वीर्य की बहुत वृद्धि होती है।

संभोग के बाद कमजोरी की इलाज

100 ग्राम तालमखाने के बीज, 100 ग्राम चोबचीनी, 100 ग्राम ढाक का गोंद, 100 ग्राम मोचरस तथा 250 ग्राम मिश्री को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं।

यह मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग को खत्म कर देता है।

संभोग के बाद कमजोरी की घरेलू नुस्खे

पीपल का फल और पीपल की कोमल जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2 चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर उसे लगभग चौथाई भाग होने तक पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप सुबह और शाम को पी लें। इसके इस्तेमाल करने से वीर्य में तथा सेक्स करने की ताकत में वृद्धि होती है।

संभोग के बाद कमजोरी की आयुर्वेदिक इलाज

बच्चा पैदा करने के लिए सिर्फ एक बलशाली शुक्राणु की जरूरत होती है, जो स्त्री के अंडाणु से संयोग कर गर्भ में परिवर्तित होता है। वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होने या शुक्राणु कमजोर होने पर बच्चे पैदा करने में परेशानी होती है। जामुन की गुठली का चूर्ण रोज गर्म दूध के साथ खाने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द हो जाता है।

संभोग के बाद कमजोरी की देशी दवा

छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और उसी दूध को पीने से नपुंसकता खत्म होती है। रात को पानी में दो छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे को दूध के साथ खायें।

शारीरिक कमजोरी के कारण

रामबाण नुस्खा :- इसके लिए शतावरी, गोखरू, बड़ा बीजबंद, बंशलोचन, कबाब चीनी, कौंच के छिलकारहित बीज, सेमल की छाल, सफेद मुसली, काली मुसली, सालम मिश्री, कमल गट्टा, विदारीकंद, असगन्ध सब 50-50 ग्राम और शक्कर 300 ग्राम, सभी द्रव्यों को अलग-अलग कूट-पीसकर कपड़छान कर लें। शक्कर को भी पीसकर महीन कर लें और सभी को मिला लें व तीन बार छान लें, ताकि एक जान हो जाएं। सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ 60 दिन तक सेवन करें और इसके बाद वीर्य की जाँच करवाकर देख लें कि शुक्राणुओं में क्या वृद्धि हुई है।
पर्याप्त परिणाम न मिलने तक प्रयोग जारी रखें।

वीर्य को मक्खन की तरह गाढ़ा करने के आयुर्वेदिक नुस्खे ayurvedic remedies for thicken semen in Hindi


कई रिसर्च में इस बात को पाया गया है कि वीर्य का गाढ़ा और सफेद होना, एक स्वस्थ वीर्य की निशानी है। जबकि पतला व पानी की तरह वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होती है। वहीं दूसरी ओर पुरुष भी सफेद और गाढ़े वीर्य को मर्दाना ताकत से जोड़कर देखते हैं। आज कई पुरुषों में वीर्य के पतला होने की समस्या देखी जाती है। लेकिन इस समस्या को आप घरेलू नुस्खों के द्वारा आसानी से ठीक कर सकते हैं। वीर्य को गाढ़ा करने के उपाय और घरेलू नुस्खों को नीचे विस्तार पूर्वक बताया जा रहा है।

वीर्य को गाढ़ा करने के लिए करें अश्वागंधा का प्रयोग

भारत में सदियों से अश्वागंधा का प्रयोग किया जा रहा है। इसको भारतीय जिनसेंग (Ginseng) के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में यौन रोगों के इलाज के लिए इसका उल्लेख विस्तार पूर्वक किया गया है। वर्ष 2016 में एक अध्ययन किया गया और इस अध्ययन में कम शुक्राणु वाले 46 पुरुषों को शामिल किया गया। इन सभी पुरुषों को रोजाना 675 मिलीग्राम अश्वगंधा दिया गया। 90 दिनों के बाद जब इनके शुक्राणुओं की जांच की गई तो उसमें 165 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। इस तरह अश्वगंधा पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाने के लिए बेहतर मानी जाती है।

वीर्य को गाढ़ा करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

सूरजमुखी व कद्दू के बीज से करें वीर्य को गाढ़ा

वीर्य को गाढ़ा करने के लिए आपको नियमित रूप से सूरजमुखी व कद्दू के बीजों का सेवन करना चाहिए। आपको एक चौथाई कप सूरजमुखी व कद्दू के बीजों का नियमित रूप से सेवन करना होगा। एक माह तक लगातार ऐसा करने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है और पुरुषों की प्रजनन क्षमता में भी वृद्धि होती है।

डॉ. नुस्खे धातुपौष्टिक चूर्ण के फायदे

गुण व उपयोग – यह चूर्ण धातु वद्‍​र्धक एवं वीर्य को गाढ़ा करने वाला है। इसके सेवन से धातु गाढ़ा हो जाता है एवं स्वप्नदोष दूर हो कर शरीर हृष्ट-पुष्ट बन जाता है।
मात्रा व अनुपान – 5 से 10 ग्राम, दिन में दो बार दूध के साथ।
विशेष: – यह चूर्ण गरिष्ठ (देर में पचने वाला) है। इसलिए इसका सेवन मन्दाग्नि वाले को नही करना चाहिए। जिनकी जठराग्नि तेज हो वही इसे सेवन से लाभ उठा सकते हैं। इसके सेवन काल में गाय के दूध का सेवन अवश्य करना चाहिए।

उबलतें दूध में जब डालिये तुलसी की पतियाँ तो होता है चमत्कार - Tulsi with Milk



घरेलू नुस्खे बिना किसी साइड इफेक्ट के कई बीमारियों को दूर करते हैं। पीढि़यों से चले आ रहे ये नुस्खे हमेशा से फायदेमंद साबित हुए है और शायद आगे भी होते रहेंगे।

ऐसे ही कुछ टिप्स तुलसी को लेकर भी है। तुलसी एक ऐसा हर्ब है जो कई समस्याओं को आसानी से दूर कर सकती है। सर्दी जुकाम हो या सिरदर्द तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से लाभ मिलता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसी को अगर दूध के साथ मिला लिया जाये तो ये कई बीमारियों के लिए रामबाण साबित होती है।

आज हम आपको बता रहे हैं कैसे तुलसी की तीन से चार पत्तियां उबलते हुए दूध में डालकर खाली पेट पीने से आप सेहतमंद रह सकते हैं।

किडनी की पथरी में

यदि किडनी में पथरी की समस्या हो गई हो और पहले दौर में आपको इसका पता चलता है तो तुलसी वाला दूध का सेवन सुबह खाली पेट करना शुरू कर दें। इस उपाय से कुछ ही दिनों में किडनी की पथरी गलकर निकल जाएगी। आपको इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।

दिल की बीमारी में

यदि घर में किसी को दिल से सबंधित कोई बीमारी है या हार्ट अटैक पड़ा हो तो आप तुलसी वाला दूध रोगी को सुबह के समय खाली पेट पिलाएं। इससे दिल से संबंधित कई रोग ठीक होते हैं।

सांस की तकलीफ में

सांस की सबसे खतरनाक समस्या है दमा। इस रोग में इंसान को सांस लेने में बड़ी परेशानी आती है। खासतौर पर तब जब मौसम में बदलाव आता है। इस
समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि आप दूध और तुलसी का सेवन करें। नियमित इस उपाय को करने से सांस से संबंधित अन्य रोग भी ठीक हो जाएगें।

कैंसर की समस्या

एंटीबायोटिक गुणों की वजह से तुलसी कैंसर से लड़ने में सक्षम होती है। दूध में भी कई तरह के गुण होते हैं जब दोनों आपस में मिलते हैं तो इसका प्रभाव बेहद प्रभावशाली और रोग नाशक हो जाता है। यदि आप नियमित तुलसी वाला दूध पीते हैं तो कैंसर जैसी बीमारी शरीर को छू भी नहीं सकती है।
फ्लू वायरल फ्लू होने से शरीर कमजोर हो जाता है। यदि आप दूध में तुलसी मिलाकर सुबह खाली पेट इसका सेवन करते हो ता आपको फ्लू से जल्दी से आराम मिल जाएगा।
टेंशन में अधिक काम करने से या ज्यादा जिम्मेदारियों से अक्सर हम लोग टेंशन में आ जाते हैं एैसे में हमारा नर्वस सिस्टम काम नहीं कर पाता है और हम सही गलत का नहीं सोचते हैं। यदि इस तरह की समस्या से आप परेशान हैं तो दूध व तुलसी वाला नुस्खा जरूर अपनाएं। आपको फर्क दिखने लगेगा।

सिर का दर्द और माइग्रेन में

सिर में दर्द होना आम बात है। लेकिन जब यह माइग्रेन का रूप ले लेती है तब सिर का दर्द भयंकर हो जाता है। ऐसे में सुबह के समय तुलसी के पत्तों को दूध में डालकर पीना चाहिए। यह माइग्रेन और सिर के सामान्य दर्द को भी ठीक कर देती है। अक्सर हमारे घर में बहुत सी प्राकृतिक औषधियां होती है जिनके बारे में पता रहने से हम मंहगी दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट से बच सकते हैं।
यह मैसेज अगर आपको अच्छा लगे या समझ में आये की यह किसी के लिया रामबाण की तरह काम आएगा तो आप से निवेदन है कि इस मैसेज को अपने परिचित /मित्र/ या आपके व्हाट्स एप्प ग्रुप फ्रेंड्स तक भेज दे ।
आपका यह कदम स्वस्थ भारत के निर्माण मैं योगदान के रूप में होगा

नपुंसकता का 100% आयुर्वेदिक इलाज, Ayurvedic treatment of impotence



नपुसंकता क्या होती है?

जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। सेक्स लाइफ़ में इस अधूरेपन के कारण मनमुटाव और तलाक़ तक की नौबत आ जाती है। कुछ केस में तो यहां तक देखा जाता है कि महिला के संबंध किसी अन्य पुरुष के साथ स्थापित हो जाते हैं
बहुत से लोगों में कामवासना तो बहुत होती है और उनका लिंग भी खड़ा रहता है मतलब वह पूरी तरह सामान्य होते हैं, लेकिन उनकी लिंग में यौन सम्बन्ध के दौरान अंत तक तनाव (कड़कपन ) नहीं रहता जिसकी वजह से वो अपने पार्टनर को पूर्णतः संतुष्ट नहीं कर पाते। कुछ पुरुष जब अपनी पार्टनर के साथ यौन क्रीड़ा कर रहे होते हैं तो उस दौरान ही उनका वीर्य स्खलन हो जाता अर्थात महिला पार्टनर की योनि में पुरुष अपना लिंग अन्दर डालने से पहले या थोड़े ही समय में उनका वीर्य निकल जाता है। इस तरह से वो अपनी पत्नी को खुश नहीं कर पाते और ना ही खुद संतुष्ट हो पाते हैं। इसी यौन कमजोरी को आयुर्वेद में नपुंसकता कहा जाता है।

नपुंसकता के लक्षण

पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की मात्रा में कमी होना

वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं का प्रतिशत बेहद कम होना नपुंसकता के लक्षण हैं ।

वीर्य में इतने शुक्राणुओं का न होना, जिससे व्यक्ति संतान पैदा कर सके |

स्त्री को संतुष्ट करने से पहले ही पुरुष का वीर्य निकल जाना।

🔹कामेच्छा में कमी होना |
🔹रति क्रीड़ा में अक्षम होना |

स्त्री के स्पर्श, आलिंगन व मधुर व्यवहार के बावजूद भी लिंग में बिल्कुल भी उत्तेजना न होना भी नामर्दी के लक्षण हैं |

लिंग में उत्तेजना होने के बावजूद इसका एकदम से समाप्त हो जाना भी नपुसंकता के लक्षण हैं |

नपुंसकता के कारण

लम्बे समय से लगातार बार बार हस्त्मेथुन करने से व्यक्ति की सम्भोग शक्ति ख़त्म हो जाती है।

🔹यदि किसी पुरुष के शरीर में लम्बे समय से कोई बड़ी बीमारी होती है जैसे टीबी, मधुमेह, ह्रदय रोग इत्यादि से।
🔹नशीले पदार्थ जैसे शराब, बीड़ी, गुटखा, सिगरेट इत्यादि को लम्बे समय तक सेवन करने से।
अत्यधिक मोटापा, स्वप्न दोष, लिंग का ज्यादा छोटा होना।
लिंग या गुप्तांग में चोट लगने से ।
🔹यदि कोई व्यक्ति लम्बे समय से tension या मानसिक परेसानी से ग्रसित है।

🔹कुछ व्यक्ति जन्म से ही नामर्द होते हैं।

क्या खाएं एवं क्या ना खाएं
जो व्यक्ति बहुत समय तक किसी बीमारी से पीड़ित रहते हैं उनको शारीरिक कमजोरी के साथ साथ वीर्य में पतलापन होने के कारण मर्दाना कमजोरी महशूश करते हैं ऐसे लोगों को कुछ महीने के लिए सहवास करना बंद करके पौष्टिक खाना जैसे जूस, दूध, घी, मख्खन, सूखा मेवा और फलों का सेवन ज्यादा करना चाहिए।

नामर्दी दूर करने के उपाय

दूध में छुहारे डालकर बढ़िया उबालने के बाद पीने से यौन दुर्बलता मैं फायदा होता है।

नपुंसकता के रोगी को प्रतिदिन हल्के व्यायाम करना बहुत जरुरी होता है।
तेल, मिठाई, ज्यादा मिर्ची वाला भोजन के सेवन से बचना चाहिए। और साथ ही नशीली चीजों से भी दूर रहना चाहिए।

मर्दाना कमजोरी का घरेलू इलाज

नपुंसकता मैं हमारी BigPower Kit का बहुत ही शानदार रिजल्ट देखने को मिला है

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👉 पित्त की पथरी का घरेलू इलाज 

हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का आयुर्वेदिक नुस्खे, how to Control High Blood Pressure



हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के 6 फ़ूड आइटम्स,

हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कैसे करे

Blood Pressure के रोग से सभी भलीभांति परिचित है यह बीमारी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की Tension या फिर किसी भी प्रकार के शॉक अर्थात् ’अचानक कोई खबर’ जिसके कारण व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ या घट सकता है।
खास तौर पर देखे तो यह बीमारी बुढे बुजुर्गो के ज्यादा पाई जाती है, चिंता के कारण उनका ब्लड प्रेशर बढ जाता है।

High Blood Pressure

के मरीज को कई खास चीजों को ध्यान रखना चाहिए और अपने Food का सबसे अधिक ध्यान रखें क्योकि आपके आहार का शरीर के

Blood Pressure

पर ज्यादा असर पड सकता है। यह आपके ब्लड प्रेशर को High और Low के लिए सहायक हो सकता है।

हम अपने इस आर्टीकल के जरीए आपको यह बताना चाहते है कि आप कैसे अपने ब्लड प्रेशर को अपने घर पर बैठे ही Control कर सकते है।

हमारे द्वारा कुछ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए कुछ घरेलु उपाय बताए जा रहे है। जिससे आप अपने घर मे साधारणतः उपलब्ध फल फ्रूट्स से भी अपने ब्लड प्रेशर का ईलाज आसानी से कर पाएगें जो कि निम्न है :-

Lemon Water Lowered High Blood Pressure

निंबु का प्रयेाग
निंबु भी एक रक्तचाप को कम करने का कारगर इलाज है। यह हमारे शरीर की रक्तवाहिकाओं में मौजुद कठोर कणों केा हटाने मे सहायक होता है। इसकें सेवन से आप अपने शरीर मे उच्च रक्त चाप को कम कर सकते है। इसके निंबु का एक और उपयोग है निबु मे मौजुद विटामिन सी आपके शरीर में विटामिन सी की कमी को पुर्ति करता है साथ ही साथ हृदय की परेशानियाँ को भी दुर करता है।
विटामिन की सबसे बडी खुबी यह की यह हमारे षरीर में मौजुद मुक्त कणों के हानिकारक प्रभावों को कम कर उनके असर को समाप्त कर देता है।
आप नियमित रूप एक ग्लास पानी के साथ एक निंबु के रस को मिलाकर पी सकते है। इससे आपके शरीर का उच्चरक्त चाप कम होता है।
नोट:- निंबु के रस के साथ चिनी या नमक का उपयोग वर्जित है।

Watermelon help lower Blood Pressure

तरबुज
सामान्यतया तरबुज का सेवन सभी व्यक्ति करते है मीठा स्वाद और मुहँ में घुलजाना. यह हमारे शरीर की पानी की कमी हो दूर करता है । कभी आपने सोचा की तरबुज हमारे शरीर के उच्चरक्त चाप को नियंत्रित करने मे भी कारगर हो सकता है। तरबुज मे एक यौगिक मौजुद होता है। जिसका नाम कुकुरबोकिटरीन होता है यह हमारे शरीर मे मौजुद रक्त कोषिकाओं का चौड़ा करने मे मदद करता है। जिससे उच्च रक्त चाप धीरे-धीरे नियंत्रित होने लगता है। तरबुतज का एक और फायदा है। यह हमारे शरीर के गुर्दे की कार्य प्रणाली मे भी सुधार लाता है।

High Blood Pressure Natural Treatment

लहसुन
लहसुन ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है लहसुन न केवल खाद्य पदार्थो के स्वाद को बढाने के लिए प्रयोग मे लिया जाता है अपितु लहसुन का आयुवैद के अनुसार कई उपयोग होते है जिनमे से एक होता है उच्च रक्त चाप, उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करने मे लहसुन एक काफी फायदे मंद घरेलु उपचार है। लहसुन मे मौजुद नाइटिक आॅक्साइड और हाइडोजन जो हमारी रक्त वाहिकाओं को आराम पहुॅचाता है।
अगर आप प्रतिदिन नियमित रूप से लहसुन और एक लौंग को पिसकर अपनेे खाद्य पदार्थो मे मिलाकर खाए इससे आपको जरूर फायदा होगा ।
आप ऐसा भी कर सकते है। आधा कप पानी मे चार से पाॅच लहसुन के रस बूॅदे मिला ले और उसका नियमित सेवन करे जिससे आपके उच्च रक्त चाप की बीमारी खत्म होने लगेगी।

स्तन की सौंदर्यता के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे, Ayurvedic nuskhe for beautiful breast in hindi



स्त्री की सौंदर्यता को बनाये रखने में उनके स्तन की अपनी विशेष भूमिका मानी जाती है क्योंकि स्तन मण्डल (वक्षस्थल) यदि ढीले और कमजोर होते हैं, तो उसकी शरीर सौंदर्यता कम होती है इसी प्रकार यदि स्तन आकर्षक, पुष्ट और प्राकृतिक रूप से सुडौल होते हैं तो वह नारी की सौंदर्यता को और अधिक निखार देते हैं।
विभिन्न औषधियों से उपचार-

ब्रेस्ट बढ़ाने के तरीके

1. असगंध: असगंध और शतावरी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग 2-2 ग्राम की मात्रा में शहद के खाकर ऊपर से दूध में मिश्री को मिलाकर पीने से स्तन आकर्षक हो जाते हैं।

ब्रेस्ट का आकार बढ़ाने के आसान तरीके

2. कमलगट्टे: कमलगट्टे की गिरी यानी बीच के भाग को पीसकर पाउडर बनाकर दही के साथ मिलाकर प्रतिदिन 1 खुराक के रूप में सेवन करने से स्तन आकार में सुडौल हो जाते हैं।

ब्रेस्ट बढ़ाने का आयल

3. जैतून: जैतून के तेल की स्तनों पर धीरे-धीरे मालिश करने से करने से स्तनों की सुन्दरता बढ़ जाती है।

ब्रेस्ट बढ़ाने के तरीके

4. सुपारी पाक: मुनक्का (द्राक्षा) 50 ग्राम को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर तज 3 ग्राम, तेजपात 3 ग्राम, नागरमोथा 3 ग्राम, सूखा पोदीना 3 ग्राम, पीपल 3 ग्राम, खुरासानी अजवायन 3 ग्राम, छोटी इलायची 3 ग्राम, तालीस के पत्ते 5 ग्राम, वंशलोचन 5 ग्राम, जावित्री 5 ग्राम, खेतचन्दन 5 ग्राम, कालीमिर्च 5 ग्राम, जायफल 5 ग्राम, सफेद जीरा 7 ग्राम, बिनौला की गिरी 13 ग्राम, लौंग 13 ग्राम, सूखा धनिया 13 ग्राम, पीपल की जड़ 13 ग्राम, खिरनी के बीज 45 ग्राम, बादाम की गिरी 50 ग्राम, पिस्ता 50 ग्राम, सुपारी एक किलो, शहद और चीनी 1-1 किलो और गाय का देशी घी आधा किलो आदि लें। इसके बाद 50 ग्राम पिसा हुआ मुनक्का और सुपारी चूर्ण को गाय के देशी घी में मिलाकर धीमी आग पर भूने, चीनी और शहद को छोड़कर सभी पदार्थो (द्रव्यों) को डाल दें, उसके बाद चीनी और शहद की चाशनी बनाकर मिला दें, फिर उसके बाद सभी चीजों को अच्छी तरह पकाकर उतारकर ठंडा करके सुबह-शाम पिलाने से नारी के स्तनों की सौंदर्यता बढ़ती है और योनि की बीमारियों का नाश और योनि को टाईट करती है।

ब्रेस्ट बढ़ाने का आयल

5. गंभारी: गंभारी की 2 किलोग्राम छाल को पीसकर 16 लीटर पानी में मिलाकर चतुर्थांश काढा बना लें। गम्भारी की 250 ग्राम छाल को पानी के साथ पीसकर चटनी बना लें। गम्भारी के कल्क यानी लई और काढ़े में 1 लीटर तिल का तेल मिलाकर रख लें।

ब्रेस्ट बढ़ाने की क्रीम

इस तेल को रूई में भिगोकर स्तनों पर रखने से, ढीले और लटके हुए स्तन टाईट और सुन्दर हो जाते हैं।

ब्रेस्ट बड़ा करने के उपाय

6. कमल: कमल के बीजों को पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में थोड़ी मिश्री मिलाकर बराबर रूप से 4-6 हफ्ते तक सेवन करने से स्तन कस जाते हैं और वे कठोर बन जाएंगे।

लिंग का साइज बढ़ाने का ये नुस्खा कोई नहीं बताएगा, ling lamba karne ka nuskhe



लिँग की जानकारी

पुरुषो की आज कल एक समस्या आये दिन देखने को मिल रही है वो है अपने जननांग के enlargement (इजाफा) लेकर उनमे एक inferiority complex (हीन भावना) है कि हमारा जननांग पर्याप्त नहीं है मुझे कई लोगो के मेल आते रहते है आइये आज आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते है –
देखने में आया है कि अधिकतर पुरुष जिनको बार-बार मन में शंका होती है कि उनका panis size (जननांग) औसत से कम है यही सोच उनके मन को बार-बार परेशान करती रहती है इनमे से अधिकतर लोग जिनको ये महसूस होता है वो लोग अपने male genitals (जननांग) को औसत से बड़ा करने का उपाय खोजे देखे जा सकते है –

जबकि असल बात ये है धीरे-धीरे वो एक मानसिकता का शिकार होते है पोर्न फिल्मे देखना आजकल के युवाओं में एक फैसन सा बन गया है और उसमे देख कर उनको भी लगने लगता है कि उनका जननांग छोटा है वो अपने पार्टनर को शायद संतुष्ट नहीं कर सकते है ऐसे पुरुषों के रोग को पेनाइल दिसमोर्फिक( Penail Dismorfik) विकार कहा जाता है जिसका मनोचिकित्सक हीं मनोरोग निदान कर सकते है ज्यादातर पुरुष जो सर्जरी के जरिये जननांग का इज़ाफ़ा करवाते हैं वे भी सर्जरी के परिणाम से संतुष्ट नहीं होते और उनमें से कई लोग Penail Dismorfik विकार के शिकार रहते हैं-

लींग आकार बढ़ाने के उपाय

1- ज्यादा फैट(Fat) और कैलरी वाले खाने से न सिर्फ दिल की बीमारियों का खरता बढ़ जता है बल्कि आपके जननांग के भी छोटे होने का भी खतरा रहता है ऐक्ससार्इज और शारीरिक मेहनत न करने पर आपके धमनियों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का भी खतरा रहता है जिससे आपके जननांग में बल्ड सर्कुलेशन कम हो सकता है इसलिए मोटे और स्वस्थ जननांग के लिए जंक फूड खाना छोड़ दें-

2- आप उन सभी फलों और सब्जियों को खाएं जिनमें ऐंटि-ऑक्सिडेंट ज्यादा हो- यह कंपाउंड धमनियों में मौजूद फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और धमनियों को मजबूत बनाता है इसलिए ऐंटि-ऑक्सिडेंट से भरपूर फल और सब्जियों के सेवन से आप अपने जननांग के साइज को बढ़ा सकते हैं-

3- ज्यादा भारी भरकम पेट से आपका जननांग भी छोटा लगने लगता है भले ही जननांग आपका बड़ा भी है लेकिन आपके भारी भरकम पेट के सामने वह छोटा ही नजर आएगा- इसलिए पेट के फैट को कम करिए इससे आपके शरीर में फुर्ती व् चुस्ती के साथ कोलेस्ट्रोल से भी बचाव होगा –

4- धुम्रपान यानि कि सिगरेट के छोटे-छोटे कण धमनियों को ब्लॉक कर देते हैं जिससे शरीर के सभी हिस्सों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता और शरीर के ठीक से विकास नहीं हो पाता है यही बात शरीर के दूसरे हिस्से के साथ आपके जननांग पर भी लागू होती है- इसलिए स्मोकिंग करना बंद कर दें-

लिंक को कैसे बड़ा करे

5- सिर्फ मजबूत मसल्स और वेट कम करने के लिए ही जिम जाने की वजह नहीं होती है अगर आप अपने जननांग का साइज बढ़ाना चाहते हैं तो जिम भी जाइए- जिससे धमनियां का रास्ता साफ हो और बल्ड सर्कुलेशन भी ठीक ढंग से हो-

पेनिस बड़ा करने का तरीका

आपके बेहतर सेक्स लाइफ के लिए मेडिटेशन करिए या योगा करिए- मेडिटेशन से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और जननांग का साइज भी बढ़ता है-

7- आपकी निराशा और तनाव भी जननांग के साइज को घटा देते हैं क्योंकि तनाव की स्थिति में ब्लड जननांग से वापस लौट जाता है और आपके जननांग का साइज बढ़ नहीं पाता है परफॉर्मेंस का डर भी जननांग के छोटे होने के कारणों में से एक है इसलिए परफॉर्मेंस के समय आप तनाव मुक्त रहे-

लींग आकार बढ़ाने के उपाय

8- ठंडा तापमान भी आपके जननांग के साइज को घटाता है इसलिए शरीर को गर्म रखने के लिए गर्म शॉवर लीजिए इससे शरीर में खून का प्रवाह बेहतर होगा और आपके जननांग का साइज बढ़ जाएगा-

लिग बडा करने का तेल

1- देशी घी या सरसों के तेल की मालिश करने से लिंग में मजबूती आती है। मालिश करते समय आपका लिंग उत्तेजित अवस्था में होना चाहिये और इस बात का ध्यान रखें की आपका वीर्य पतन न हो। मालिश की दिशा नीचे से ऊपर की ओर रखें। मालिश करने से लिंग में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और उसमे मजबूती आती है। मालिश करने के बाद लिंग को पानी से न धोये, बल्कि कपड़े या पेपर से पौंछ लें.

लिग बडा करना है

एक चम्मच जैतून के तेल में लौंग तेल की 10-15 बून्दें को अच्छी तरह से मिला ले। इस मिश्रण को लिंग के अगले हिस्से को छोड़कर बाकी हिस्से पर लगाये। ऐसा करने से लिंग का आकार बढ़ता है और उसमें मजबूती आती हैं।

ling lamba karne ka oil

3- पीसे हुये हींग में देशी घी को अच्छी तरह से मिलाकर उसका लेप बना ले। रात मे सोते समय इस लेप को लिंग के अगले भाग को छोड़ कर बाकी हिस्सों पर लगा ले। सुबह में लिंग को हलके गर्म पानी से धो लें । इससे लिंग मोटा तथा लम्बा होता हैं।

लिंग लम्बा करने का तेल

एक लौंग को चबाकर उसकी लार को लिंग के पिछले भाग पर लगाने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।

बेलपत्र के ताजे पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से लिंग में ताकत पैदा हो जाती है।
5- 15 ग्राम सहजन के फूलों को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। यौन-टौनिक के रूप मे इसका सेवन करे।

लींग आकार बढ़ाने के उपाय

6- दालचीनी का तेल, बादाम का तेल, जमालगोटा का तेल और पिस्ता का तेल – सभी तेल समान मात्रा में लेकर एक साथ मिलाकर रख लें। इसे एक बूद की मात्रा में रात को सोेते समय इंद्रिय पर लगाये और ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। इस तिला का प्रयोग एक महिने तक करने से लिंग का टेढापन