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अंदरूनी शारीरिक ताकत को बढ़ाने के लिए कौंच बीज Kaunch Beej ke fayde



कौंच के बीजों का सेवन मसल्स बढ़ाने और वजन बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

कौंच के बीज का सेवन कैसे करें

एक गिलास दूध के साथ नियमित सेवन करने से नपुंसकता, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, वीर्य की कमी, उतेजना और स्तम्भन की कमी दूर होगी | पौरुषबल बढ़कर चेहरे पर निखार आता है |

कौंच के बीज फायदे

सेक्स पावर बढ़ाने के साथ ही कौंच के बीजों का सेवन करने से तनाव और चिंता भी दूर होती है। इसके नियमित सेवन से भी ग्रंथियां मजबूत होती है और तंत्रिका तंत्र के लिए ये पोषक तत्वों का काम करती हैं।

जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल और शुगर की समस्या है उनके लिए कौंच के बीज रामबाण हैं।

कौंच बीज के नुकसान

आमतौर पर कौंच के बीज को सुरक्षित माना जाता है और कम डोपामाइन के स्‍तर और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने में मदद करता है। लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। जिनके बारे आपको पता होना चाहिए :

कौंच बीज के साइड इफेक्ट्स

पागलपन, तनाव और अन्‍य मानसिक बीमारियों से पीडित लोगों को कौंच के बीजों के सेवन से बचना चाहिए।
यदि आप पहले किसी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित परेशानियों का सामना कर चुकें हैं तो इसका उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करना अच्‍छा होगा।
कौंच का सेवन न करने की वजह
प्रजनन कार्य और स्‍तनपान के लिए आवश्‍यक प्रोलैक्टिन को कम करने की इसकी क्षमता के कारण गर्भवती या स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए कौंच का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।

मर्दाना कमजोरी का इलाज के घरेलू नुस्खे MARDANA TAKAT BADHANE KE NUSKHE



मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए केसर एक रामबाण आयुर्वेदिक नुस्खा हैं

जिन लोगो को संतान प्राप्ति का सुख नहीं मिलता उनके लिए केसर से बना नुस्खा सेवन करने के सलाह दी जाती हैं। केसन में एक कामुख खुशबु भी होती है जो यौन इच्छा को बढ़ाने का काम करती हैं। केसर का सेवन करने से गुप्त अंग में खून का प्रवाह बढ़ता हैं जो मेल के लिए सबसे जरुरी होता हैं। दिन में 30 mg केसर को 2 खुराक के रूप में खाने के साथ में सेवन करे।

मर्दाना कमजोरी कैसे दूर करे?

इस प्रॉब्लम का हल गाजर से तैयार होम रेमेडी से किया जा सकता हैं। चाइना में गाजर को पुरुषो की यौन समस्याओ के लिए एक असरदार हर्बल नुस्खा माना जाता हैं। गाजर में बीटा कैरोटीन काफी ज्यादा मात्रा में होता हैं जिससे Mardana taqat बढाने में मदद मिलती हैं। डेली एक गिलास दूध के साथ 2 कसी हुई गाजर खाए या फिर गाजर सलाद के रूप में भी रोजाना लेना शुरू करे।
हजारो सालो से बादाम को ताक़त बढ़ाने के लिए खाया जाता रहा हैं। बादाम में विटामिन इ होता हैं जो शरीर में खून का दौरा तेज़ करता हैं। उसके साथ में इसमें कॉपर, मैग्नीशियम और जिंक होता हैं जो एनर्जी बढाने के काम करते हैं।
बादाम यौन इच्छा और सम्भोग के समय को बढाने में फायदा पहुचाता हैं। जिससे मर्द के साथ औरत को भी पूर्ण रूप से संतुष्टि का अनुभव होता हैं।

कुछ बादाम को पीस करके उसे पोव्देर्नुमा बनाए और उसकी एक चमच्च एक गिलास दूध में मिलकर पिए। यी आप रात को सोने से कम से कम 1 घंटा पहले पिए। क्योंकि बादाम तासीर में गर्म होते है इसलिए गर्मी के मौसम में इसके जगह भीगे हुए बादाम सोने से पहले खाए।
लहसुन में एलिसिन होता हैं जो ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने के साथ स्टैमिना भी बेहतर करता हैं। खासकर पुरुषो के गुप्त अंगो में खून का दौरा बेहतर होता हैं। कुछ समय पहले एक मेडिकल स्टडी की गयी जिसमे कुछ पुरुषो को कुछ दिनों तक रोजाना 3 महीने तक 4 लहसुन की कली खिलाई गयी। उसमे देखा गया की 7 में से 6 पुरुषो की मर्दाना ताकत में इजाफा हुआ। लहसुन का सेवन आयुर्वेदिक दवा के रूप में मरदाना कमजोरी के इलाज के लिए काफी समय से किया जाता रहा हैं। अगर आपको ये समस्या है तो रोजाना 3-4 कच्ची कलि लहसुन की चबाकर खाए।

जिन लडको को नपुंसकता की प्रॉब्लम हैं उनके लिए अदरक एक वरदान के जैसे काम करती हैं

इसमें कई ऐसे हर्बल गुण होते हैं जो जल्दी वीर्य निकलने और

नपुसंकता जैसे यौन समस्याओ से छुटकारा पाने में सहायता करते हैं

ये घरेलु नुस्खा बनाने के लिए आधा चमच्च अदरक का रस, एक सॉफ्ट उबला हुआ अंडा और एक चमच्च शहद की मिलाए। इस मिश्रण को डेली बेड पर जाने से एक घंटा पहले खाए। ये उपाय आपको 30 दिन तक करना हैं।

नपुंसकता,लिंग के ढीलापन, हस्त मैथुन से आई कमजोरी की आयुर्वेदिक नुस्खे

मॉनसून में वायरल बुखार से बचने के घरेलु उपाय Home remedies for viral fever



मॉनसून में वायरल बुखार से बचने के घरेलु उपाय

वायरल बुखार क्या है

गर्मी के बाद बारिश का मौसम सभी को अच्छा लगता है पर यह मौसम अपने साथ कई बीमारियाँ भी लेकर आता है जैसे वायरल फीवर (Viral Fever), दस्त (Diarrhea), हैजा (Cholera), मलेरिया (Malaria), पीलिया (Jaundice) और स्किन की समस्या (Skin Problems).

वायरल फीवर के लक्षण

वायरल फीवर बारिश के मौसम की सबसे आम समस्या जिससे हम सभी कभी न कभी पीड़ित हो जाते हैं. बरसात के मौसम में सर्दी – जुकाम, खांसी, हल्का बुखार और हाथ पैरो में दर्द या सिर में दर्द आदि ये सब वायरल इंफेक्शन होना दर्शाते है.
वायरल इन्फेक्शन से बचने के उपचार
तुलसी के 4 पत्ते, 4 काली मिर्च और अदरक के एक छोटे टुकड़े को कूटकर डेढ़ कप पानी में उबालें. अब इसे छान कर चाय की तरह पीयें. इससे बहुत आराम मिलता है.

वायरल बुखार के उपचार

बारिश में जोड़ों के दर्द के लिए एक चम्मच शहद में आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ मिलाकर दिन में एक बार लें. इसके लगातार उपयोग से भूख सामान्य रहेगी और जोड़ों का दर्द नहीं होगा.
वायरल बुखार ठीक करने के लिए
भीगने से बचें और कपड़े गीले हो तो तुरंत बदल लें.
वायरल बुखार के बाद कमजोरी
पौष्टिक भोजन का सेवन करें.
विटामिन C युक्त फल आदि का सेवन करें.

वायरल फीवर से बचाव

आपके आस पास के किसी व्यक्ति को सर्दी जुकाम हो तो सावधान रहें. ऐसे व्यक्ति से हाथ मिलाया हो तो हाथ साबुन से धो लें.
सड़क पर मिलने वाली खुली हुई खाने पीने की चीज़ों से बचें.

विवाहित महिलाओं के सिंदूर लगाने के 7 वास्तविक कारण sindoor lagane ke fayde



सिंदूर लगाने के 7 वास्तविक कारण

सिंदूर का महत्व

हिन्दू धर्म में सिंदूर का बहुत खास महत्व है।

यह एक महिला के लिए उसके सुहाग की निशानी होती है। हम जब भी कभी किसी शादीशुदा औरत को देखते हैं तो उसके माथे पर सिंदूर जरूर लगा दिखता है। एक शादीशुदा औरत को सिंदूर के बिना अधूरा माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में सिंदूर का आध्यात्मिक महत्व माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सिंदूर लगाने के पीछे के कारणों को जानने का प्रयास किया है। इस सिंदूर को ना केवल शादी के प्रतीक के रूप में लगाया जाता है बल्कि इसे लगाने के पीछे और भी कई कारण हैं जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

सिंदूर लगाने के फायदे

1. परंपरागत रूप से यह पति की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए लगाया जाता है

हिंदू समाज में जब भी किसी लड़की की शादी होती हैं तो उसके लिए सिंदूर लगाना बहुत जरूरी होता है। माना जाता है कि शादीशुदा महिला का सिंदूर लगाना उसके पति की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक होता है। यही वजह है कि विधवा औरतें अपनी मांग में सिंदूर नहीं लगती हैं।
2. लाल रंग शक्ति का प्रतीक माना जाता है
भारतीय पौराणिक कथाओं में लाल रंग के माध्यम से सती और पार्वती की ऊर्जा को व्यक्त किया गया है। सती को हिन्दू समाज में एक आदर्श पत्नी के रूप में माना जाता है। जो अपने पति के खातिर अपने जीवन का त्याग सकती है। हिंदुओं का मानना है कि सिंदूर लगाने से देवी पार्वती ‘अखंड सौभागयवती’ होने का आशीर्वाद देती हैं।

सिंदूर लगाने के फायदे

3. सिंदूर रक्तचाप को नियंत्रित करता है और सेक्स की इच्छा को भी बढ़ाता है

सिंदूर के माध्यम से रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही यह महिलाओं में सेक्स की इच्छा को बढ़ाने में भी मदद करता है। सिंदूर के माध्यम से महिलाओं की पिट्यूटरी ग्रंथियां स्थिर रहती हैं।

4. सिंदूर औरत को शांत और स्वस्थ रखने में मदद करता है

वैज्ञानिक दृष्टि से अगर देखें तो एक औरत जब सिंदूर लगाती है तो वह सिंदूर उसके मन को शांत रखने में मदद करता है। इतना ही नहीं सिंदूर से उसका स्वास्थ भी अच्छा बना रहता है।

सिंदूर लगाने का सही तरीका

5. सिंदूर देवी लक्ष्मी के लिए सम्मान का प्रतीक माना जाता है

यह कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर पांच स्थानों पर रहती हैं और उन्हें हिन्दू समाज में सिर पर स्थान दिया गया है। जिसके कराण हम माथे पर कुमकुम लगा कर उन्हें समान देते हैं। देवी लक्ष्मी हमारे परिवार के लिए अच्छा भाग्य और धन लाने में मदद करती हैं।
6. यह उत्तरी भारत में एक सांस्कृतिक प्रथा है
आप इस बात को तो जानते ही होंगे की सिन्दूर केवल उत्तरी भारत में ही लगाया जाता है। उत्तर भारत में हिन्दू धर्म को मानने वाली हर महिला शादी के बाद सिंदूर जरूर लगाती है। जबकि दक्षिण भारत में सिंदूर लगाने की प्रथा नही है।
7. यह महत्वपूर्ण होता है कि पति अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर लगाए
हिन्दू धर्म में नवरात्र और दीवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान पति के द्वारा अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह उनके एक साथ रहने का प्रतीक होता है और इससे वो काफी लंबे समय तक एक साथ रहते हैं।

घरेलू नुस्खे से निकालें ‘पित्त की पथरी Remove gallstones from home remedies in hindi



मित्रों पित्त की थैली की पथरी के लिये ऑपरेशन की जरूरत होती हैं लेकिन इस उपाय से आप आसानी से पित्त की थैली की पथरी निकाल सकते हैं और इसका कोई दुष्परिणाम भी नहीं हैं

पित्त की पथरी

आजकल कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो साइंस की तरक्की की तरह ही बढ़ती जा रही हैं। यहां हम वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे आविष्कारों को घेरे में नहीं ले रहे, अपितु यह बताना चाहते हैं कि भले ही साइंस ने इतनी तरक्की कर ली हो लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो खत्म होने की बजाय और भी बढ़ती चली जा रही हैं। इन्हीं शारीरिक परेशानियों में से एक है ‘पित्त (गॉल ब्लैडर) की पथरी’।

परेशानी का सबब

लेकिन क्यों इतनी सक्रिय है यह बीमारी? और कैसे बनती है ऐसी परेशानी? दरसला पित्ताशय की पथरी बनने के कारणों का अभी तक पता नहीं चला है, लेकिन माना जाता है कि यह मोटापे, डायबिटीज, आनुवांशिक तथा रक्त संबंधी बीमारियों की वजह से हो सकती है।

पित्ताशय में पथरी

आमतौर पर 85 प्रतिशत लोगों के पित्ताशय में यह पथरी चुपचाप पड़ी रहती है। इनसे कोई कष्ट नहीं होता। जिन लोगों को पेट के दाएं ऊपरी हिस्से में दर्द होता है उन्हें पथरी की समस्या हो सकती है।

दो प्रकार की पथरी

पथरी वैसे दो प्रकार की होती है – पहली पित्त की पथरी और दूसरी किडनी की पथरी। किडनी में बनी पथरी अधिक परेशान नहीं करती, कष्टदायी वह भी होती है किंतु कुछ साधारण प्राकृतिक उपायों से यह पथरी अपने आप ही मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है। किंतु जो अधिक परेशानी वाली बात है वह है पित्त की पथरी ।

गॉल ब्लैडर की पथरी

गॉल ब्लैडर जिसे हम ‘पित्ताशय’ कहते हैं वह हमारे लीवर के ठीक साथ होता है। यह नाशपाती के आकार का थैलीनुमा अंग होता है जो हमारे लीवर के ठीक नीचे पाया जाता है। सामान्यतः इसका कार्य पित्त को इकट्ठा करना एवं उसे गाढ़ा करना है।

पाचक रस के लिए

यदि आप नहीं जानते तो बता दें कि ‘पित्त’ एक पाचक रस है जो कि लीवर द्वारा बनाया जाता है। यह वसायुक्त पदार्थों के पाचन में मदद करता है। यह पित्त हमारे शरीर को किसी प्रकार का नुकसान ना पहुंचाए इसका ख्याल रखता है ‘गॉल ब्लैडर’।

सैकड़ों की संख्या में हो पत्थर

लेकिन कुछ कारणों से इसी पित्ताशय में पथरियां बन जाती हैं। यह पत्थर सैकड़ों की संख्या में हो सकते हैं, छोटे या बड़े साइज में भी। डॉक्टरों का यह मानना है कि ये पत्थर पित्त की थैली में बार-बार सूजन आने के कारण बनते हैं।

सर्जरी होती है

गॉल ब्लैडर में से पथरी निकालने के लिए सामान्यत: आपने ऑप्रेशन के बारे में ही सुना होगा। इस ऑप्रेशन के दौरान रोगी के शरीर से यह गॉल ब्लैडर निकाल बाहर कर दिया जाता है। उस समय रोगी को आराम तो मिल जाता है लेकिन उसके भविष्य के लिए खड़े हो जाते हैं कुछ संकट। उसकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और थोड़े भी वसा युक्त खाद्य पदार्थ वह ग्रहण नहीं कर सकता।

लेकिन यदि कोई ऑप्रेशन से बचना चाहता है और साथ ही पित्त की पथरी से छुटकारा पाना चाहता है तो एक उपाय है। यह एक उपाय आपको जादू जैसा लगेगा, क्योंकि यह शत-प्रतिशत सफल होता है।

इसके लिए आप कुल 5 दिनों तक एप्पल जूस पीयें। सेब का यह रस घर पर ही बनाएं, बाजारी डिब्बे वाला जूस ना लें। साथ ही इन पांच दिनों में दिनभर में 3-4 सेब भी खाएं। छठे दिन आप रात का खाना ना लें।

इस छठे दिन शाम 6 बजे आप गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच सेंधा नमक, जिसे हम पहाड़ी नमक भी कहते हैं, वह लें। इसके ठीक 2 घंटे बाद 8 बजे फिर से गर्म पानी के साथ एक चम्मच सेंधा नमक लें।

अंत में रात 10 बजे आधा कप जैतून यानि कि ऑलिव ऑयल को आधा कप नींबू के रस में मिलाकर पी जाएं। अगले दिन सुबह आपको स्टूल के साथ कुछ हरे पत्थर मिलेंगे।

मिलेगा परिणाम

तो देखा आपने कि जिस पथरी को एलोपैथ में केवल सर्जरी से बाहर करने का उपाय मौज़ूद है, उसी को कितनी सहजता और बिना किसी दर्द के बाहर करने का अचूक उपाय जड़ी-बूटियों के द्वारा किया जा सकता है। सबसे रोचक बात ये है कि इस विधि को अपनाने से कोई साइड इफेक्ट भी नहीं और इसे कितनी भी उम्र के लोग अपना सकते हैं।

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कामदेव चूर्ण Kamdev Churna आयुर्वेद सारसंग्रह से लिया गया है



एक आयुर्वेदिक चूर्ण है जिसे कौंच की गिरी, सफ़ेद मूसली, मखाने, तामलखाने और मिश्री से बनाया गया है।
जैसा की नाम से ही पता चलता है यह दवा पुरुषों के यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयोग की जाती है। इसके सेवन से धातु-विकार, शुक्र-विकार, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, वीर्य का पतलापन, आदि दोष दूर होते है।
यह सीमन ( वीर्य ) को गाढ़ा करने में मदद करता है और शरीर को बल देता है।

कामदेव चूर्ण के घटक :

• कपिकच्छु गिरी - 1 तोला
• सफ़ेद मूसली- 2 तोला
• मखाना की ठुड्डी ( छिलका रहित ) - 4 तोला
• तालमखाना - 4 तोला
• मिशरी शिरटा - 5 तोला
सब का महिन चुर्ण कर मिशरी मिला कर काम में लावें ।

कामदेव चूर्ण के लाभ/फ़ायदे :

•यह वाजीकारक है।
•यह धातु और शुक्र विकार को दूर करती है।

•यह शुक्र को गाढ़ा करती है।

•इसके सेवन से नाईटफॉल (Night Fails) , प्रीमेच्यूर इजाकुलेशन, धातु क्षय आदि में लाभ होता है।
•यह पूरी तरह से हर्बल है ।

कामदेव चूर्ण के चिकित्सीय उपयोग :

•नपुंसकता (Impotence)

•वीर्य विकार (Semen disorder)

•शुक्र विकार

•शीघ्रपतन होना

•धातु का पतलापन

•शरीर में बल की कमी आदि ।

आयुर्वेदिक नुस्ख़ा जो बहुत ही कामयाब है

कामदेव चुर्ण 3 ग्राम

गोक्षुरादि चुर्ण 1 ग्राम
कुक्टातंवक भस्म 250 मिली ग्राम
मन्मथंरस 1 ग्राम
चंद्रोदय गुटीका 500 मिली ग्राम
यह सभी एक खुराक है । सुबह - शाम दूध के साथ लें ।
नोट : अगर किसी का पेट ख़राब रहता हो बंधु इसे ना लें । अपने निजी डॉक्टर की सलाह से ही लें ।
औषधि के साथ यदि "सुपर पावर कैपसुल" का भी सेवन किया जावे तो व्याधि से शीघ्रता से छुटकारा मिल सकता है । औषधि लेने से पहले अपने निजी डॉक्टर की सलाह अवश्य लें ।

कद्दू के औषधीय गुण। MEDICINAL PROPERTIES OF PUMKIN



कद्दू के गुण

कद्दू सुनते ही हंसी से आ जाती है। अकसर मोटे लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए और छोटे बच्चों को प्यार से हम कद्दू कह देते हैं। इसे काशीफल भी कहा जाता है, ज़्यादातर लोग इसे पसंद नहीं करते, ना ही ये कोई बहुत मेहेँगी सब्ज़ी है पर ये होता बहुत ही लाभकारी है। प्रकृति ने अपनी इस 'गोल-मटोल' देन में कई तरह के औषधीय गुण समेटे हैं। इसका सेवन स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। इस में 'पेट' से लेकर 'दिल' तक की कई बीमारियों के इलाज की क्षमता है। आइये जानें...

कद्दू के औषधीय गुण

कद्दू में सेचुरेटेड फैट नहीं पाया जाता। इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम बनी रहती और दिल सेहतमंद रहता है। इसमें पाए जाने वाले डायटरी फाइबर से पेट की बीमारियों में आराम मिलता है।

एंटीऑक्‍सीडेंट से भरा कद्दू में मुख्य रूप से बीटा केरोटीन पाया जाता है, जिससे विटामिन ए मिलता है। पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर में फ्री रैडिकल से निपटने में मदद करता है।

ठंडक पहुंचाए कद्दू ठंडक पहुंचाने वाला होता है। इसे डंठल की ओर से काटकर तलवों पर रगड़ने से शरीर की गर्मी खत्म होती है। कद्दू लंबे समय के बुखार में भी असरकारी होता है। इससे बदन की हरारत या उसका आभास दूर होता है।

कद्दू का जूस

इसका उपयोग भरपूर मात्रा में करें, क्योंकि इसमें बड़ी मात्रा में पाया जाने वाला जिंक ऑस्टियोपोरोसिस से सुरक्षा दिलाने काम करता है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियाँ खोखली हो जाती हैं और यह जिंक की कमी के कारण होता है। इस बीमारी में कद्दू के बीज का अधिक मात्रा में सेवन करें।

मन को शांति पहुंचाए कद्दू में कुछ ऐसे मिनरल्‍स होते हैं जो दिमाग की नसों को आराम पहुंचाते हैं। अगर आपको रिलैक्‍स होना है तो आप कद्दू खा सकते हैं।

हृदयरोगियों के लिय आहार विशेषज्ञों का कहना है कि कद्दू हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह कोलेस्ट्राल कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और फायदेमंद होता है।

डाइयबिटीस के रोगियों के लिए भी लाभदायक कद्दू रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है और अग्न्याशय को सक्रिय करता है। इसी कारण चिकित्सक मधुमेह रोगियों को कद्दू खाने की सलाह देते हैं। इसका रस भी स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। लोगों में यह भी गलत धारणा है कि कद्दू मीठा होता है इसलिये इसे मधुमेह रोगी नहीं खा सकते। यह बात बिल्‍कुल गलत है। शरीर के इन्‍सुलिन लेवल को बढाना कद्दू का काम होता है।

आयरन से भरपूर कई महिलाओं में आयरन की कमी हो जाती है जिससे उन्‍हें एनीमिया हो जाता है। तो ऐसे में कद्दू सस्‍ता भी पड़ता है और पौष्टिक भी होता है। कद्दू के बीज भी आयरन, जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।

स्किन और बालों के लिए इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए बहुत ही लाभकारी होता है। इससे शरीर में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा में इजाफा होता है। ऐसा होने से आपकी स्किन और बालों की सेहत बेहतर रहती है।

त्वचा के लिए कद्दू में जीआ स्कैनटिन नामक एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है। यह अल्ट्रा वायलेट किरणों से होने वाले नुकसान से बचाता है। इससे त्वचा के नए सेल्स बनने लगते हैं।

कद्दू के बीज के गुण

कद्दू के बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। यह बलवर्धक, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

कद्दू के छिलके में भी जादू

प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। शायद इन्हीं खूबियों की वजह से कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है।

कद्दू को क्यूं दिया जाता है महत्व हमारे पूर्वजों ने भी कद्दू के इन औषधीय गुणों को बहुत पहले ही पहचान लिया था और यही कारण है कि हमारे देश में, खासतौर पर उत्तर भारत के खान-पान में, इसे विशेष महत्व दिया जाता है। भारत में कद्दू की कई प्रजातियां पाई जाती हैं जिन्हें उनके आकार-प्रकार और गूदे के आधार पर मुख्य रूप से सीताफल, चपन कद्दू और विलायती कद्दू के वर्गों में बांटा जाता है।

कद्दू को क्यूं दिया जाता है महत्व हमारे यहां विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर कद्दू की सब्जी और हलवा आदि बनाना-खाना शुभ माना जाता है।

शारीरिक और मानसिक नामर्दी के शिकार पुरुषों को मेरा नायाब तोहफा।


यह पोस्ट सिर्फ मर्दों के लिए है । कृप्या माताएं बहनें इससे दूर ही रहें । जिंदगी का लुतफ उठाने वाले हर मर्द के लिए लाभकारी पोस्ट

ताकत_बढ़ाएं_जोश_जवानी_वापिस_पाएं
शरीरिक और मानसिक नामर्दी के शिकार पुरषों को मेरा नायाब तोहफा ।
आज ही मंगवाएं । जिसमें है नीचे लिखा हुआ मिश्रण नुस्खा

बुजुर्गो ने कहा है की यदि पानी की भरी बोतल को उल्टा किया जाए तो पानी बड़ी जल्दी निकल जाता है... लेकिन शहद की भरी बोतल को उल्टा किया जाए तो वह बहुत देर में निकलेगा। ठीक यही हालात शीघ्रपतन की है। जिस व्यक्ति का वीर्य पतला होता है, वह स्त्री की तनिक सी हरकत से भी जल्दी रखलित हो जाता है। ठीक उसी प्रकार जिस व्यक्ति का वीर्य शहद के बराबर गाड़ा हो वह अत्यधिक देर तक स्त्री के साथ प्रसंग कर सकता हैै...

आज में आप लोगो को एक ऐसा फॉर्मूला बताने जा रहा हूँ जो मेरे दिल के सबसे करीब है...

औषधि का वर्णन...
सफ़ेद मूसली, काली मूसली, स्काकुल मूसली, सेमल मूसली, रुमी मस्तगी, सालम पंजा, पीला शतावर काले कौंच की शुद्ध गिरी, श्यामा तुलसी बीज, असगन्ध गूलर फल, मकरध्वज रजत भस्म, मुक्ता भस्म, स्वर्ण भस्म, वज्र भस्म, शुद्ध प्रवाल पिष्टी, चंद्रपुटी, असली शुद्ध शिलाजीत, असली केसर...

इन सभी औषधि को चूर्ण बनाकर कपड़छान करने के बाद जटामांसी के काढे में मिलाकर 3 बार खूब घोटकर सुखाए। फिर विधारि कंद के रस की 4 भावना दे। भांग के रस में 1 बार घोटे । फिर चने के समान गोली बनाए । 2 गोली गर्म दूध से शाम में ले...

इसका सेवन कर्ता कितना भी सम्भोग कर ले... थकता नहीं है। इसका लगातार सेवन करने वाला पूरी रात इश्क की पींघ के हुलारे लेता है। इस दवा का जो भी सेवन कर्ता जिस भी स्त्री से सम्भोग करता है वो सारी उम्र भर उसकी बनके रहेगी। यह दवा सम्भोग शक्ति खोई हुई ताकत जोश जवानी दुबारा लोटा देती है। इसमें पड़ने वाली हर चीज गुणकारी है...

इस दवा का सेवन करने से नामर्द भी मर्द बन जाता है। इस दवा के सेवन से व्यक्ति एक समय में कई स्त्रियों को संतुष्ट कर सकता है...

यह हमारा व् हमारे बुजुर्गो का 1001% दावा और वादा है । जिन लोगो की बीवी एक से ज्यादा हो उनके लिए यह एक सेक्स का माहाशक्ति व् महाकुम्भ में गुम हुए सेक्स को को दोबारा वापिस लाने का एक मंत्र है। जिस पर हमारे बुजुर्गो की पूरी जिंदगी भर की मेहनत लगी है अतः कहना चाहूँगा की सम्भोग के शौकीन के लोगो को इसका सेवन जरूर करना चाहिए। यह दवा हमारे बुजुर्गो व् हमारे द्वारा न जाने कितने ही लोगो पर आजमाई हुई है...

इस दवा की जितनी भी तारीफ़ करू कम रहेगी। इस दवा को 70-80 साल का बुजुर्ग भी सेवन कर सकता है। प्रणाम तीसरे ही दिन आपके सामने होगा। हमे कुछ कहने की जर्रूरत नहीं पड़ेगी। जो भी दवा बनाने में असमर्थ हो वो हमसे कोरियर द्वारा घर बैठे भी माँगवा सकते है...

जानिये कैसे अमरूद के इस्तेमाल से बालों का झड़ना होगा 100% कम, use of guava will reduce hair loss by 100%



अमरुद में भारी मात्रा में विटामिन बी 3, बी 5 और बी 6 होते हैं जो क्षतिग्रस्त बालों की टिश्यू (tissue of damage hairs) को सही करता है, सर की खाल की सफाई (cleaning scalp of head) करता है और बालों को झड़ने से रोकता है।

अमरुद के पत्तों में 9 प्रतिशत पोटासियम, 2 प्रतिशत जिंक और 2 प्रतिशत से थोड़ा ज़्यादा प्रोटीन (protein) होता है जिससे सर में खुजली नहीं होती, डेंड्रफ (dandruff) नहीं होता और बाल मुलायम और मजबूत (silky and strong) बनते हैं।

काफी खोज के बाद हमने आसान और कारगर नुस्खे (easy and effective remedies) निकाले हैं जिससे आपको यह पता चलेगा कि अमरुद का इस्तमाल बालों को बड़ा करने में कैसे किया जा सकता है।

🔸अमरुद के पत्ते – मुट्ठीभर अमरुद के पत्तों को एक कप पानी में उबाल लें (boil in cup of water)। इसे पानी पर धीमे आंच (low flame) पर 10 से 15 मिनट तक खौलने दें। अब गैस बंद कर दें और इसे रूम के तापमान पर ठंडा होने दें (let it cool on room temperature)। इस घोल को छानकर अपने सर और बालों में अच्छी तरह से लगा लें। एक घंटे तक इसे बालों में रहने दें और उसके बाद धो लें।

🔸अमरुद+शहद+नीम्बू का रस – एक पका अमरुद लें और इसे हाथों से तब तक कुचलें (mash) जब तक यह पल्प (pulp) ना बन जाए। इसमें एक बड़ा चम्मच शहद और 10 बूँद नीम्बू का रस डालें। इन्हें अच्छी तरह मिला लें। बालों को गीला करें और बालों को छोटे छोटे हिस्सों में बांटें। इस हर्बल अमरुद के मास्क (mask of herbal guava) को लंबे बालों के लिए इस्तमाल करें। इसे 40 मिनट तक बालों में लगा रहने दें। इसके बाद बालों में शैम्पू करें और कंडीशनर लगाएं (use shampoo and conditioner)|

🔸नारियल तेल+विटामिन ई+अमरुद – आधा कप नारियल तेल (half cup coconut oil) को धीमी आंच पर खौलाएं। विटामिन ई जेल के दो कैप्सूल को तोड़कर एक बड़े चम्मच अमरुद के जूस में मिलाएं। इसे 15 मिनट तक खौलने दें (boil)। अब गैस बंद कर दें और इस आयुर्वेदिक अमरुद के मास्क को रूम के तापमान में ठंडा होने दें। अब इसे अपने सर और पूरे बालों में अच्छी तरह लगा लें। अपने बालों को बन बना लें और शावर कैप लगा लें। 1 घंटे बाद बालों में शैम्पू कर कंडीशन कर लें।

🔸अंडा+अमरुद – इस अमरुद के मास्क में प्रोटीन की मात्रा काफी ज़्यादा होती (good source of protein) है जिससे बाल जड़ से मजबूत बनेंगे (strong hairs from root)। एक बाउल लें और इसमें पके हुए अमरुद को मसलकर पल्प बना लें। अब इसमें अंडे का सफेद भाग मिलाएं। (mix white portion of egg) इसे सर और बालों में अच्छी तरह लगाएं। 40 मिनट बाद सर में मसाज (massage) करें और शैम्पू की मदद से बाल को धो लें।

🔸अमरुद+नारियल – एक मुट्ठी अमरुद के पत्तों को पानी में 10 मिनट तक उबाल लें। अब इसे पीसकर पेस्ट (make a paste of it) बना लें। इस पेस्ट में एक बड़ा चम्मच नारियल तेल मिलाएं। अच्छी तरह मिला लें। अब इस पेस्ट का पतला कोट (thin coat) सर और पूरे बाल पर लगा लें। 15 मिनट तक मसाज करें और अगले 40 मिनट तक बालों में लगा रहने दें। इसके बाद शैम्पू की मदद से धो लें।


🔸शिकाकाई+अमरुद+बादाम का तेल – मुट्ठी भर अमरुद के पत्तों को सूर्य की गर्मी से सुखा लें। अब इसे पाउडर (powder) बना लें। बराबर मात्रा में अमरुद का पाउडर और शिकाकाई पाउडर (shika kai powder) लें और इसमें बादाम तेल (almond oil) की 10 बूंदें डाल लें। पानी के मदद से पेस्ट बना लें। इसे गीले बालों (wet hairs) में लगा लें। इसे 40 मिनट तक लगा रहने दें और उसके बाद धो लें। सप्ताह में एक दिन (once a week) इस हर्बल अमरुद के मास्क को लगाएं और झड़ते बालों से निजात पाएं।

🔸अमरुद+नारियल – एक मुट्ठी अमरुद के पत्तों को पानी में 10 मिनट तक उबाल लें। अब इसे पीसकर पेस्ट (make a paste of it) बना लें। इस पेस्ट में एक बड़ा चम्मच नारियल तेल मिलाएं। अच्छी तरह मिला लें। अब इस पेस्ट का पतला कोट (thin coat) सर और पूरे बाल पर लगा लें। 15 मिनट तक मसाज करें और अगले 40 मिनट तक बालों में लगा रहने दें। इसके बाद शैम्पू की मदद से धो लें।


🔸शिकाकाई+अमरुद+बादाम का तेल – मुट्ठी भर अमरुद के पत्तों को सूर्य की गर्मी से सुखा लें। अब इसे पाउडर (powder) बना लें। बराबर मात्रा में अमरुद का पाउडर और शिकाकाई पाउडर (shika kai powder) लें और इसमें बादाम तेल (almond oil) की 10 बूंदें डाल लें। पानी के मदद से पेस्ट बना लें। इसे गीले बालों (wet hairs) में लगा लें। इसे 40 मिनट तक लगा रहने दें और उसके बाद धो लें। सप्ताह में एक दिन (once a week) इस हर्बल अमरुद के मास्क को लगाएं और झड़ते बालों से निजात पाएं।

हवन का महत्व और उससे होने वाले फायदे benefit of havan


फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमे उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नमक गैस उत्पन्न होती है जो की खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओ को मरती है तथा वातावरण को शुद्द करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला। गुड़ को जलने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।

टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर का सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फ़ैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है।

 हवन की मत्ता देखते हुए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने भी इस पर एक रिसर्च करी की क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्द होता है और जीवाणु नाश होता है अथवा नही. उन्होंने ग्रंथो. में वर्णित हवन सामग्री जुटाई और जलने पर पाया की ये विषाणु नाश करती है। फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी काम किया और देखा की सिर्फ आम की लकड़ी १ किलो जलने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हुए पर जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी
एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बॅक्टेरिया का स्तर 94% कम हो गया। यही नही. उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया की कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के 24 घंटे बाद भी जीवाणुओ का स्तर सामान्य से 96 प्रतिशत कम था। बार बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ की इस एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था।हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का नाश होता 

NEGATIVE vs POSITIVE Way Of Thinking!



नजरिया एक महान लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ लिख रहा था।

1) पिछले साल मेरा आपरेशन हुआ और मेरा गालब्लाडर निकाल दिया गया। इस आपरेशन के कारण बहुत लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा।
2) इसी साल मैं 60 वर्ष का हुआ और मेरी पसंदीदा नौकरी चली गयी। जब मैंने उस प्रकाशन संस्था को छोड़ा तब 30 साल हो गए थे मुझे उस कम्पनी में काम करते हुए।
3) इसी साल मुझे अपने पिता की मृत्यु का दुःख भी झेलना पड़ा।
4) और इसी साल मेरा बेटा कार एक्सिडेंट हो जाने के कारण मेडिकल की परीक्षा में फेल हो गया क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। कार की टूट फूट का नुकसान अलग हुआ।

अंत में लेखक ने लिखा, वह बहुत ही बुरा साल था।

जब लेखक की पत्नी लेखन कक्ष में आई तो उसने देखा कि, उसका पति बहुत दुखी लग रहा है और अपने ही विचारों में खोया हुआ है। अपने पति की कुर्सी के पीछे खड़े होकर उसने देखा और पढ़ा कि वो क्या लिख रहा था।
वह चुपचाप कक्ष से बाहर गई और थोड़ी देर बाद एक दूसरे कागज़ के साथ वापस लौटी और वह कागज़ उसने अपने पति के लिखे हुए कागज़ के बगल में रख दिया। लेखक ने पत्नी के रखे कागज़ पर देखा तो उसे कुछ लिखा हुआ नजर आया, उसने पढ़ा।
1-a) पिछले साल आखिर मुझे उस गालब्लाडर से छुटकारा मिल गया जिसके कारण मैं कई सालों से दर्द से परेशान था।
2-a) इसी साल मैं 60 वर्ष का होकर स्वस्थ दुरस्त अपनी प्रकाशन कम्पनी की नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ। अब मैं पूरा ध्यान लगाकर शान्ति के साथ अपने समय का उपयोग और बढ़िया लिखने के लिए कर पाउँगा।
3-a) इसी साल मेरे 95 वर्ष के पिता बगैर किसी पर आश्रित हुए और बिना गंभीर बीमार हुए परमात्मा के पास चले गए।
4-a) इसी साल भगवान् ने एक्सिडेंट में मेरे बेटे की रक्षा की। कार टूट फूट गई लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी बच गई। उसे नई जिंदगी तो मिली ही और हाँथ पाँव भी सही सलामत हैं।

अंत में उसकी पत्नी ने लिखा था, इस साल भगवान की हम पर बहुत कृपा रही, साल अच्छा बीता।

मित्रो मानव-जीवन में प्रत्येक मनुष्य के समक्ष अनेकों परिस्थितियां आती हैं, उन परिस्थितियों का प्रभाव क्या और कितना पड़ेगा, यह पूरी तरह हमारे सोचने के तरीके पर निर्भर करता है। चीजें वही रहती हैं पर नजरिया बदलने से पूरा परिणाम बदल जाता है।

पूरी तरह से गंजे हो चुके व्यक्ति के भी जड़ो से नए बाल फूटने लगते है इस पत्ते के प्रयोग


आजकल अधिकतर युवा बाल सफ़ेद होने व असमय गिरने की समस्या से परेशान हैं। इस समस्या के कारण बहुत से युवा समय से पहले ही ज्यादा उम्र के दिखने लगते हैं। किसी व्यक्ति के बालों का समय से पहले झड़ जाने का रोग गंजापन कहलाता है। बहुत से लोगों में गंजेपन का रोग अनुवांशिक कारणों से भी होता है जैसे किसी व्यक्ति के पुराने पूर्वजों के समय से ही गंजेपन का रोग होता है। यह रोग साबुन से सिर को धोने से, एक-दूसरे का कंघा इस्तेमाल करने से या गलत शैंपू को सिर में लगाने से हो जाता है।आज हम आपके लिए लाये हैं एक ऐसा प्रयोग जिससे आपकी बालो की सभी समस्याओं से उबर पाएंगे वो भी बड़ी आसानी से।

आवश्यक सामग्री
चुकन्दर के पत्ते :  50  ग्राम
नारियल का तेल : 10 दिन तक नीले कांच की बोतल में सूरज की धूप में रखे।

चमत्कारी चिकित्सा
चुकन्दर के पत्ते का रस सिर में मालिश करने से गंजेपन का रोग मिट जाता है और सिर में नये बाल आना शुरू हो जाते हैं। बंद जड़ो से नए बाल निकलने लगते है।
गंजेपन के रोग में सूर्य किरण और रंग चिकित्सा के माध्यम से तैयार सूर्य चार्ज नारियल का नीला तेल दिन में 2 बार सिर पर अच्छी तरह से लगाने से लाभ होता है। इसके साथ ही नीले सैलोफिन कागज से 5-10 मिनट सूर्य की रोशनी देने से गंजापन दूर होकर सिर में नए बाल पैदा हो जाते हैं।

किन बातो का रखना है ख्याल
चुकन्दर के बीजों का अधिक मात्रा में सेवन आमाशय के लिए हानिकारक होता है। चुकन्दर का रस उपयोग करते समय ध्यान रखे कि यह आंखों में ना जाये क्योंकि ये हानिकारक हो सकता है।

बालों की सभी समस्याओं के लिए 12 कारगर घरेलु उपाय

प्याज का पेस्ट : कुछ दिनों तक, नहाने से 1/2 घंटा पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। इससे सफेद बाल ( Safed baal ) काले और लम्बे होने लगेंगे।

नारियल तेल या जैतून के तेल : 1/2 कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म करें। इसमें 4 ग्राम कर्पूर मिला कर इस तेल से मालिश करें। इसकी मालिश सप्ताह में एक बार जरूर करनी चाहिए। कुछ ही समय में रूसी खत्म हो जाएगी, बाल भी काले और लम्बे रहेंगे।

गाय का शुद्ध देसी घी : प्रतिदिन गाय का शुद्ध देसी घी से सिर की मालिश करके भी सफेद बालों को काला किया जा सकता है ।

भृंगराज और अश्वगंधा और नारियल तेल : भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्ट नारियल के तेल के साथ बालों की जड़ों में लगाएं और 1 घंटे बाद गुनगुने पानी से अच्छीं तरह से बाल धो लें। इससे भी बाल काले होते है।

आंवले के पाउडर में नींबू का रस : आंवले के पाउडर में नींबू का रस मिलाकर उसे नियमित रूप से लगाएं । शैंपू के बाद आंवला पाउडर पानी में घोलकर लगाने से भी बालों लम्बे तो होंगे साथ में इनकी कंडीशनिंग भी होती है, और बाल भी काले होते है । आंवला किसी ना किसी रुप मे सेवन भी अवश्य करते रहे ।

कच्चे पपीता का पेस्ट : सप्ताह में कम से कम 3 दिन दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। इससे बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ भी नहीं होगी और सफेद बाल ( Safed baal ) काले भी होने लगेंगे ।
निम्बू और आंवला : निम्बू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर उसे सिर पर लगाने से भी सफेद बाल काले हो जाते हैं।

अदरक और शहद : अदरक को कद्दूकस कर शहद के रस में मिला लें। इसे बालों पर कम से कम सप्ताह में दो बार नियमित रूप से लगाएं। बालों का सफेद होना कम हो जाएगा।

दही और टमाटर – नींबू रस और नीलगिरी : दही के साथ टमाटर को पीस लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं। इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार करें। बाल लंबी उम्र तक काले और घने बने रहेंगे।

तिल का तेल : जाड़े अर्थात ठंड में तिल अधिक से अधिक खाएं। तिल का तेल भी बालों को काला करने में मदद करता है।

काली मिर्च, दही और नींबू रस : आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से फिर से काले होने लगेंगे।

कारगर चमत्कारी पेस्ट : एक कटोरी मेहंदी पाउडर लें, इसमें दो बड़े चम्मच चाय का पानी, दो चम्मच आंवला पावडर, एक चम्मच नीबू का रस, दो चम्मच दही, शिकाकाई व रीठा पावडर, एक अंडा (अगर आप लेना चाहे तो ), आधा चम्मच नारियल तेल व थोड़ा-सा कत्था। यह सब चीजें लोहे की कड़ाही में डालकर पेस्ट बनाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह बालों में लगाए।फिर दो घंटे बाद धो लें। इससे बाल बिना किसी नुकसान के काले और लम्बे हों जाएँगे। ऐसा माह में कम से कम एक बार अवश्य ही ही करें।

लिंग वृद्धि कि आयुर्वेदिक औषधि बनाने कि विधि



भाइयो लिंग वृद्धि कि मैं आपको औषधि बताता हूं आप उसे प्रयोग करें आशा है कि आपको पर्याप्त लाभ होगा .
रस सिन्दूर २५ मिग्रा.+ मुक्ताशुक्ति भस्म २५ मिग्रा. + जावित्री १० मिग्रा. + स्वर्ण बंग २५ मिग्रा. + कुक्कुटाण्डत्वक भस्म २५ मिग्रा. + अश्वगंधा ५० मिग्रा. + शिलाजीत २५ मिग्रा. + शुद्ध विजया २५ मिग्रा. + गोखरू ५० मिग्रा. + शुद्ध हिंगुल २५ मिग्रा. + बबूल गोंद २५ मिग्रा. + विधारा ५० मिग्रा. + दालचीनी २५ मिग्रा. + कौंच बीज २५ मिग्रा. + तालमखाना २५ मिग्रा. + सफ़ेद मूसली २५ मिग्रा. + जायफल १० मिग्रा. + शतावर ५० मिग्रा. + लौंग १० मिग्रा. + बीजबन्द ५० मिग्रा. + सालम मिश्री ५० मिग्रा.
इन सभी की एक खुराक बनेगी आप इसी अनुपात में औषधियाँ मिला कर अपनी जरूरत के अनुसार दवा बना लें व सुबह नाश्ते तथा रात्रि भोजन के बाद एक एक खुराक मीठे दूध से लीजिये।
दूसरी दवा लिंग पर लगाने के लिये है इससे आपको कोई नुक्सान नहीं होगा इसलिए परेशान न हों।
अश्वगंधा तेल १० ग्राम + मालकांगनी तेल १० ग्राम + श्रीगोपाल तेल १० ग्राम + लौंग का तेल २ ग्राम + निर्गुण्डी का तेल १० ग्राम इन सब को मिला कर इसमें केशर १ ग्राम + जायफल २ ग्राम + दालचीनी २ ग्राम । इन सबको कस कर घुटाई कर लें तो क्रीम की तरह बन जाएगा। इसे किसी मजबूत ढक्कन की काँच या प्लास्टिक की चौड़े मुँह की शीशी में रख लीजिये। इसे नहाने के बाद अंग सुखा कर भली प्रकार हल्के हाथ से मालिश करते हुए अंग में जाने दें। लगभग दस मिनट में यह क्रीम लिंग में अवशोषित हो जाएगी। इस प्रकार यदि दिन में समय मिले तो दो बार क्रीम लगाएं।
ध्यान दीजिये कि औषधि प्रयोग काल में सम्भोग या हस्तमैथुन न करें।
यदि आप लगभग तीन माह तक इस प्रयोग को करें तो स्थायी लाभ होगा।


ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को जड़ से मिटा देती है यह (मखाना) बीज


मखाना एक जलीय उत्पाद है यह एक बीज होता है जिसे भूनने के बाद हमें मखाना उस रूप में प्राप्त होता है जिस रूप में हम इसे खाते है।

मखाना की खेती बेहद जटिल कार्य है दरअसल मखाना किसी तालाब या ठहरे हुए पानी में पैदा होता है इसके पत्ते पानी पर तैरते हैं और इसमें बैंगनी कलर के फूल आते हैं।


इसमें बनने वाले फल में 8 से 10 बीज होते हैं पकने के बाद बीज फल से बाहर आ जाते हैं और पानी की सतह पर तैरने लगते हैं।



कुछ दिनों के बाद बीज पानी के नीचे बैठ जाते हैं तब किसान सारे पौधों को उखाड़ देता है ताकि बीजों को आसानी से प्राप्त किया जा सके।


पानी के तल से इन बीजों को इकट्ठा किया जाता है और साफ करने के बाद सुखाया जाता है।


सुखाने के पश्चात इनको प्रोसेस किया जाता है प्रोसेस करना भी बेहद जटिल कार्य हैं इन्हें कई बार भूना जाता है भूनने की प्रक्रिया के दौरान मखाने का बीज फट जाता है और मखाना बाहर निकल आता है बिल्कुल वैसे ही जैसे मक्का के दाने को भूनने पर होता है।

मखाना के लाभ

1. मखाना में पोटेशियम अधिक मात्रा में होता है जो रक्त के दबाव को कम करके उच्च रक्तचाप की समस्या से छुटकारा दिलाता है।

2. मखाना दस्त के उपचार में बेहद लाभदायक होता है।

3. गर्भावस्था में और डिलीवरी के बाद मखाना खाने की सलाह दी जाती है यह मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।

4. मखाना पेट के लिए बहुत अच्छा होता है इसके अलावा यह शुगर लेवल को भी नियंत्रित रखता है।