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कामशक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे, kamshakti badhane ke ayurvedic nuskhe

कामशक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे
कामशक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

मित्रों आइये जानते हैं नामर्दी ,सेक्स में आई कमजोरी, शिथिलता, नपुंसकता की घरेलू दवाइयां जिसमें से अधिकांश आप सभी के किचन में उपलब्ध हैं कुछ सूखे मेंवे का प्रयोग विधि जिससे आप की कामशक्ति बढ़ जाएंगी आप इन उपायों को अवश्य आजमाए आपको फायदा होगा तो आइए जानते हैं ये नुख्शे

कामशक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे,

बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और काली मिर्च कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द होता है।

यौनशक्ति बढ़ाने के उपाय

बादाम को गर्म पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज़ पीऐं, इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।

kamshakti badhane ke ayurvedic nuskhe

कौंच के बीज के चूर्ण में तालमखाना और मिश्री का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3 - 3 ग्राम की मात्रा में खाने और दूध के साथ पीने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।

कौंच के बीजों की गिरी तथा राल ताल मखाने के बीज। दोनों को 25 - 25 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर छान लें, फिर इसमें 50 ग्राम मिस्री मिला लें। इसमें 2 चम्मच चूर्ण रोज़ दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज़ मिस्री और घी के साथ खाने से प्रबल मैथुन शक्ति विकसित होती है।

जायफल का चूर्ण लगभग आधा ग्राम शाम को पानी के साथ खाने से 6 हफ्ते में ही धातु (वीर्य) की कमी और मैथुन में कमजोरी दूर होगी।

जायफल का चूर्ण एक चौथाई चम्मच सुबह -शाम शहद के साथ खाऐं और इसका तेल सरसों के तेल में मिलाकर शिश्न (लिंग) पर लगाएं।

बेल के पत्तों का रस 20 मिली लीटर निकालकर, उसमें सफेद जीरे का चूर्ण 5 ग्राम, मिस्री का चूर्ण 10 ग्राम के साथ खाने और दूध पीने से शरीर की कमजोरी ख़त्म होती है।

सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मिलाकर पीसकर चूर्ण बना कर रखें और चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह - शाम दूध के साथ खाने से शरीर की शक्ति और खोई हुई मैथुन शक्ति, वापस मिल जाती है।

सफेद मूसली, सतावर, असगंध 50 - 50 ग्राम कूट छान कर, 10 ग्राम दवा सोते समय 250 मिली लीटर, लगभग एक गिलास गर्म दूध में मिश्री के संग मिलाकर लें।
सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मात्रा में कूट पीसकर चूर्ण बनाकर 6 ग्राम की मात्रा में खाने से नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।

भीगे चने सुबह - शाम चबाकर खाने से ऊपर से बादाम की गिरी खाने से, मैथुन शक्ति बढ़ती है और नंपुसकता ख़त्म होती है।
कामेच्छा बढ़ाने के उपाय
शतावर, असगंध, एला, कुलंजन और वंशलोचन का चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण में 6 ग्राम मिश्री को मिलाकर खाने से और फिर ऊपर से दूध पीने से कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।

मर्दाना ताकत बढ़ाने के उपाय

शतावर का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम को चीनी मिले दूध में, सुबह - शाम डालकर पीऐं, इससे नपुंसकता दूर होती है। शरीरकी कमजोरी भी दूर होती है।
सेमल के पेड़ की छाल के 20 मिली लीटर रस में मिस्री मिलाकर, पीने से शरीर में वीर्य और मैथुन शक्ति बढ़ती है।

महिलाओं के लिए कामेच्छा बढ़ाने के घरेलू नुस्खे

10 ग्राम सेमल के चूर्ण और चीनी को 100 मिली लीटर पानी के साथ घोट कर सुबह - शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।
उत्तेजना बढ़ाने के उपाय
बड़ी गोखरू का फांट या घोल सुबह - शाम लेने से काम शक्ति यानी संभोग की वृद्धि दूर होती है। 250 मिलीलीटर को खुराक के रूप में सुबह और शाम सेवन करें।
मित्रों ऊपर मैंने एक साथ कई विधियां आप सभी को बताया है आप उपरोक्त कोई एक विधि आजमाये आपको फायदा होगा।

कैंसर का इलाज नीम से कैसे संभव है? cancer ka ilaj neem se kaise sambhav hai

cancer ka ilaj neem se
cancer ka ilaj neem se

‘गांव का दवाखाना’ कही जाने वाले नीम सैकड़ों गुणों से परिपूर्ण हैं। ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला। नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटीज़, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।

नीम का पत्ते से कैंसर का उपचार

नीम के पत्ते भारत से बाहर ३४ देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं। इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है। दांत का दर्द है, तो इसकी दातून का इस्तेमाल किया जाता है।

बैक्टीरिया से लड़ता नीम

आपके भीतर इतने सारे जीव यानि बैक्टीरिया हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत का कारण बन सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है। नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें। सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ हो सकता है। इसके अलावा नीम के कुछ पत्तों को पानी में डाल कर रात भर छोड़ दें और फिर सुबह उस पानी से नहा लें।

एलर्जी के लिए नीम

नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें, उसकी छोटी-सी गोली बना कर सुबह-सुबह खाली पेट शहद में डुबा कर निगल लें। उसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं, जिससे नीम ठीक तरह से आपके सिस्टम से गुजर सके। यह हर प्रकार की एलर्जी में फायदा करता है।

बीमारियों के लिए नीम

नीम कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इससे कैंसर वाली कोशिकाओं की तादाद एक सीमा के अंदर रहती है। नीम में ऐसी भी क्षमता है कि अगर आपकी रक्त धमनियों(आर्टरी) में कहीं कुछ जमना शुरु हो गया हो तो ये उसको साफ कर सकती है।

मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए नीम

भी हर दिन नीम की एक छोटी-सी गोली खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह उनके अंदर इंसुलिन पैदा होने की क्रिया में तेजी लाता है।

डेंगू बुखार का इलाज, dengue bukhar ka ilaj

dengue bukhar ka ilaj
dengue bukhar ka ilaj

यदि आपके किसी भी जानकार को यह रोग हुआ हो और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो तो चार चीज़ें रोगी को दें :-
(1) अनार जूस
(2) गेहूं घास रस
(3) पपीते के पत्तों का रस
(4) गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व

dengue bukhar ka ilaj in hindi
अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है। यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है।

dengue bukhar ka ilaj

पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है। उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में दो से तीन बार दें, एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढ़ने लगेगी।

dengue bukhar ka ayurvedic ilaj

गिलोय बेल की डंडी ले, डंडी के छोटे टुकड़े करे। उसे दो गिलास पानी मे उबालें, जब पानी आधा रह जाये तो ठंडा होने पर काढ़े को रोगी को पिलायें। मात्र 45 मिनट बाद cells सेल्स बढ़ने शुरू हो जाएँगे!

डेंगू बुखार का इलाज

गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में दो तीन बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है। यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर “गिलोय घनवटी” ले आयें, जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में तीन बार दें।

डेंगू बुखार का आयुर्वेदिक इलाज

यदि बुखार एक दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें। यदि रोगी बार-बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा निम्बू मिलाकर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी। यदि रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है, तब भी यह (उक्त) चीज़ें रोगी की बिना किसी डर के दी जा सकती हैं।

डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है और रोग जल्दी ख़त्म होता है।

अण्डकोष पर होने वाले खुजली का आयुर्वेदिक इलाज, andkosh me khujli ka ilaj

andkosh me khujli ka ilaj
andkosh me khujli ka ilaj

वैसे यह रोग साफ -सफाई की कमी ,दूसरे का आंतरिक वस्त्र पहनने, नीचे बालों में जू हो जाने से और बहुत सारे कारण है जिनसे हो जाते हैं जिससे व्यक्ति को बहुत शर्मिन्दगी महसूस तब होता हैं जब व्यक्ति समाज मे या किसी मित्रों के साथ है और अण्डकोष में खुजली होने लगे उस समय व्यक्ति चाह कर भी खुजलाहट झेलने को मजबूर हो जाता हैं तो आइए इसके कुछ घरेलू उपचारों के विषय में जानते हैं

अंडकोष की बीमारियां

अंडकोष पर खुश्की का इन्फेक्शन के कारण चमड़ी सफ़ेद पड़ जाए और उसमें तेज खुजली हो तो आप सोने से पहले नारियल का तेल अपने अंडकोष पर लगायें इससे बहुत आराम मिलेगा|
किसी हर्बल दूकान से आप छरीला का असली तेल लाये और उसे अंडकोष पर दिन में दो बार लगायें| इससे खुजली में बहुत आराम मिलेगा|

andkosh me gath

नागरमोथा को पीस कें और इसको खुजली वाले अंडकोष पर लगाने से आपको खारिश से जल्द रहत मिलेगी|
andkosh me jalan
अंडकोष की सूजन होने पर आप गर्म जल में कपडे को भिगो लिजिये और इस हलके गर्म कपडे से अंडकोष पर सेख करिए| इस नुस्खे से सूजन और दर्द दूर हो जाएगी|
andkosh par dano ka ilaj
नीम और तिल का तेल बराबर मात्र में मिला लीजिये| अब इस तेल की मिश्रण को दिन में २-3 बार अपने अद्खोश पर लगाइए| इससे खुजली, खुश्की और जलन से रहत मिलेगी|

andkosh me funsi

इसी प्रकार नीम के पत्तों को पानी में उबाल कर और पानी को छानकर अपने अंडकोष को धोने के लिए प्रयोग करने से आपकी खुजली और इन्फेक्शन की समस्या ख़तम हो जाएगी|

andkosh me khujli ka ilaj

अंडकोष की खुजली एक लिए एक और अच्छा आयुर्वेदिक नुस्झा या उपाय यह है की आप सरसों के तेल में बराबर मात्रा में प्याज़ का रस मिला लीजिये| इस मिश्रण को अपने अंडकोष पर दिन में 3 बार लगाइए| इससे खारिश मिट जाएगी|

पुरुष जननांग में खुजली के उपाय

सुहागा की 4 ग्राम मात्र 100 ml जल में घोलिये और इस जल से अपने अंडकोष की चमड़ी को धोइए| इस घरेलु नुस्खे से भी आपको बहुत जल्दी फायदा मिलेगा|

यह पोस्ट जनहित में लिखा गया है अर्थात इसे अधिक से अधिक शेयर करें धन्यवाद।

लूज मोशन का आयुर्वेदिक इलाज, loose motions ka ayurvedic ilaj

loose motions ka ayurvedic ilaj
loose motions ka ayurvedic ilaj

loose motions ka ayurvedic ilaj

मित्रों आज आपको बताएंगे एक ऐसी दवाई जो एक साथ कई बीमारियों में कारगर है विशेष कर संग्रहणी ,लूज मोशन जिसे अतिसार कहते हैं में लाभ पहुँचा कर बीमारी जड़ से ठीक कर देता है।

तो आइए जानते हैं इस फार्मूला के विषय में
सोंठ ,कालीमिर्च, पीपल,इन्द्रजौ ,नीम की छाल ,चिरायता , भांगरा, चीता, कुटकी ,पाठा, दारू हल्दी और अतीस सबको 20ग्राम की मात्रा एवं कूड़े की छाल सभी दवाइयों के वजन के बराबर लेकर चूर्ण बनावें। आपकी दवाई तैयार

सेवन विधि
1 ग्राम से लेकर 2 ग्राम तक कि मात्रा शहद से देनी चाहिए ।
दवाई की मात्रा उम्र और शारिरिक स्वास्थ्य के हिसाब से देनी चाहिए

loose motion in hindi

नोट:- आयुर्वेदिक वैद्य जो प्रेक्टिस करते हैं इस दवाई को उपरोक्त विधि से बना कर अपने मरीजों को दे सकते हैं।

loose motion ki dawai

ये दवाई पूर्ण सुरक्षित ,पाचन एवं ग्राही (दस्त को रोकने वाला )है।इसके सेवन से प्यास, अरुचि ,ज्वर में होने वाले अतिसार ,प्रमेह ,संग्रहणी, गुल्म ,प्लीहा व शोथ में अच्छा कार्य करती है।

लूज मोशन का आयुर्वेदिक इलाज

आप इसे घर पर बना सकते हैं ध्यान रखें जो भी दवाई खरीदे वह शुद्ध व ताजा हो कोई भी काष्ट औषधी जब एक साल से ज्यादा पुरानी हो जाती हैं तो अपना गुण खो देती है इसलिए विश्वसनीयता अति आवश्यक है ।

धन्यवाद मित्रों आप इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करे जिससे सबको आयुर्वेद की जानकारी हो सके

स्टीविया चबाओ, मधुमेह भगाओ, stevia chabao, madhumeh bhagao,

स्टीविया चबाओ, मधुमेह भगाओ,
स्टीविया चबाओ, मधुमेह भगाओ,

स्टीवविया चबाने से मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारी का ईलाज संभव है। भारत में हर पांचवा आदमी डायबिटीज से ग्रस्त है। कई राज्यों में यह महामारी बन गई है। इसके बचाव के लिए कई घरेलू नुस्खे और मेडिकल इलाज हैं,

लेकिन एक आयुर्वेदिक पौधा है जिसका सेवन करने से इस बीमारी से राहत मिलती है। यह आयुर्वेदिक पौधा है स्टीविया। हालांकि यह शहद और गन्ने से बहुत मीठा होता है लेकिन यह पौधा मधुमेह रोगियों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। स्टीविया को आयुर्वेदिक चीनी भी कहा जाता है। स्टीविया पैंक्रियाज से इंसुलिन को छोडने में बहुत सहायक होता है।

क्या है स्टीविया

स्टीविया एक ऐसा पौधा है जो चीनी से भी मीठा होता है। दुनियाभर के देशों में इसका उपयोग किया जाता है। यह पौधा दक्षिण अमरीका में पाया जाता है। इसके पत्तों का इस्तेमाल लोग सालों से कर रहे हैं। इसका मुख्य तत्व स्टेवियोसाइड है जो कि वस्तुत: कैलोरी रहित होता है। इसे खाने से खून में शुगर की मात्रा नहीं बढती है।

मधुमेह रोगी स्टीविया का सेवन कैसे करें

डायबिटीज के मरीजों के लिए मीठा खाना मना होता है, लेकिन स्टीविया जो कि चीनी से कई गुना मीठा होता है, उसे मधुमेह रोगी खा सकते हैं यह नुकसान नहीं करेगा।
अगर मधुमेह के मरीज कोई अन्य मिठाई खा रहे हैं तो उसके प्रभाव को कम करने के लिए मीठा खाने के तुरंत बाद आयुर्वेदिक पौधे स्टीविया की कुछ पत्तियां चबा लें।
स्टीविया पौधे की मिठास गन्ने और शहद से तीन सौ गुणा अधिक होती है, इसके बावजूद यह फैट व शुगर से मुक्त है।

स्टीविया इतना अधिक मीठा होने के बावजूद भी शुगर को कम तो करता ही है साथ ही शुगर को बढ़ने से रोकने में भी सहायक है।

खाना खाने से बीस मिनट पहले या खाना खाने के बीस मिनट बाद स्टीविया की पत्तियों का सेवन करना चाहिए, यह बहुत फायदेमंद होता है।

दुनियां भर में पिछले कई सालों से स्टीविया का स्वीटनर और मेडिसिन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। विश्व के कई देशों की सरकारें इस पौधे को मान्यता दे चु‍की हैं।
स्टीविया शुगर का अद्भुत अल्टरनेटिव होने के अलावा शुगर के मरीजों के लिए एकमात्र नेचुरल स्वीटनर है। इसमें शुगर की तरह फैट और कैलोरी नहीं होती है।
स्टीविया पैंक्रियाज से इंसुलिन को छोडने में अहम भूमिका निभाता है। यह शुगर के मरीजों के लिए वरदान है।

स्टीविया न केवल शुगर बल्कि ब्लड प्रेशर, हाईपरटेशन, दांतों के लिए, वजन कम करने, गैस और कब्ज, पेट की जलन, दिल की बीमारी, चमडे़ के रोग और चेहरे की झुर्रियों के लिए बहुत फायदेमंद है।

तो जो दोस्त इस रोग से पीडित है वो बस चुटकी भर स्टीविया डालें चाय/दूध/खीर में और आनन्द उठाये भरपूर आर्गेनिक हर्बल मिठास का।

ना कोई साइड इफ़ेक्ट और ना ही कोई मिलावट।
घर मगवाईये, खुद भी खाइये और बच्चों को भी खिलाइये- और जिन्हें डायबटीज है उनके लिए तो इससे अच्छी और सस्ती कोई दवाई हो ही नही सकती।
जितनी भी शुगर फ्री क्रिस्टल बनाने वाली कम्पनियां हैं ये लूटती हैं आपको और साथ ही आपके सेहत के साथ खिलवाड़ भी करती हैं।

आप खुद इंटरनेट पर जाकर पढ़ सकते हैं कि- शुगर फ्री की सभी दवाइयों में स्टीविया ही होती है फिर भी ये दवाईयां बिना केमिकल प्रॉसेस के नहीं बनाई जाती।
अतः स्टीविया की पत्तियाँ ही सबसे ज्यादा सुरक्षित है इसे घर मे ही पाउडर बनाइये और प्रयोग कीजिये साथ ही इन विदेशी कम्पनियों को मुनाफा देना अब बन्द कीजिये।

हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होता हैं ? hinduo me vivah ratri me kyu hota hai

हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होता हैं
हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होता हैं

क्या कभी आपने सोंचा है कि हिन्दुओं में रात्रि को विवाह क्यों होने लगे हैं, जबकि हिन्दुओं में रात में शुभकार्य करना अच्छा नहीं माना जाता है ?

रात को देर तक जागना और सुबह को देर तक सोने को, राक्षसी प्रव्रत्ति बताया जाता है. रात में जागने वाले को निशाचर कहते हैं. केवल तंत्र सिद्धि करने वालों को ही रात्री में हवन यज्ञ की अनुमति है.

वैसे भी प्राचीन समय से ही सनातन धर्मी हिन्दू दिन के प्रकाश में ही शुभ कार्य करने के समर्थक रहे है. तब हिन्दुओं में रात की विवाह की परम्परा कैसे पडी ?

कभी हम अपने पूर्वजों के सामने यह सवाल क्यों नहीं उठाते हैं या स्वयं इस प्रश्न का हल नहीं खोजते हैं ?

हिन्दुओं में विवाह रात्रि में क्यों होता हैं

?
दरअसल भारत में सभी उत्सव एवं संस्कार दिन में ही किये जाते थे. सीता और द्रौपदी का स्वयंवर भी दिन में ही हुआ था.

प्राचीन काल से लेकर मुगलों के आने तक भारत में विवाह दिन में ही हुआ करते थे .
मुस्लिम पिशाच आक्रमणकारियों के भारत पर हमले करने के बाद ही, हिन्दुओं को अपनी कई प्राचीन परम्पराएं तोड़ने को विवश होना पडा था .

मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा भारत पर अतिक्रमण करने के बाद भारतीयों पर बहुत अत्याचार किये गये.

यह आक्रमणकारी पिशाच हिन्दुओं के विवाह के समय वहां पहुचकर लूटपाट मचाते थे. कामुक अकबर के शासन काल में, जब अत्याचार चरमसीमा पर थे, मुग़ल सैनिक हिन्दू लड़कियों को बलपूर्वक उठा लेते थे और उन्हें अपने आकाओं को सौंप देते थे.

hinduo me vivah ratri me kyu hota hai?


भारतीय ज्ञात इतिहास में सबसे पहली बार रात्रि में विवाह सुन्दरी और मुंदरी नाम की दो ब्राह्मण बहनों का हुआ था, जिनकी विवाह दुल्ला भट्टी ने अपने संरक्षण में ब्राह्मण युवकों से कराया था. उस समय दुल्ला भट्टी ने अत्याचार के खिलाफ हथियार उठाये थे.

दुल्ला भट्टी ने ऐसी अनेकों लड़कियों को मुगलों से छुडाकर, उनका हिन्दू लड़कों से विवाह कराया |

उसके बाद मुस्लिम आक्रमणकारियों के आतंक से बचने के लिए हिन्दू रात के अँधेरे में विवाह करने लगे.

लेकिन रात्रि में विवाह करते समय भी यह ध्यान रखा जाता है कि - नाच -गाना, दावत, जयमाल, आदि भले ही रात्रि में हो जाए लेकिन वैदिक मन्त्रों के साथ फेरे प्रातः पौ फटने के बाद ही हों.

पंजाब से प्रारम्भ हुई परंपरा को पंजाब में ही समाप्त किया गया . फिल्लौर से लेकर काबुल तक महाराजा रंजीत सिंह का राज हो जाने के बाद उनके सेनापति हरीसिंह नलवा ने सनातन वैदिक परम्परा अनुसार दिन में खुले आम विवाह करने और उनको सुरक्षा देने की घोषणा की थी. हरीसिंह नलवा के संरक्षण में हिन्दुओं ने दिनदहाड़े - बैंडबाजे के साथ विवाह शुरू किये.

तब से पंजाब में फिर से दिन में विवाह का प्रचालन शुरू हुआ. पंजाब में अधिकांश विवाह आज भी दिन में ही होते हैं. अन्य राज्य भी धीरे धीरे अपनी जड़ों की ओर लोटने लगे है, हरीसिंह नलवा ने मुसलमान बने हिन्दुओं की घर वापसी कराई,

 मुसलमानों पर जजिया कर लगाया, हिन्दू धर्म की परम्पराओं को फिर से स्थापित किया , इसीलिए उनको “पुष्यमित्र शुंग” का अवतार कहा जाता है ।

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक नुस्खे, pet ke kide marne ki ayurvedic nuskhe

pet ke kide marne ki ayurvedic nuskhe
pet ke kide marne ki ayurvedic nuskhe

पेट के कीड़ों को पेट में ही नष्ट करने का घरेलू उपाय

पेट में कीड़ों की समस्या अधिकतर छोटे बच्चों में देखी जाती है परंतुऐसा बिल्कुल नहीं है कि यह छोटे बच्चों के अलावा बड़ों में नहीं होती।यह समस्या यानी पेट में कीड़े पड़ने की समस्या छोटे या बड़े किसी कोभी उत्पन्न हो सकती है

पेट में कीड़े होने के लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज

इस समस्या में मानव शरीर के पेट में कीड़ेउत्पन्न हो जाते हैं और मानव द्वारा खाया गया भोजन मानव के बजायपेट में पनप रहे कीड़ों की भूख मिटाता है। जिससे धीरे धीरे मानव कोशरीर में कमजोरी व जल्दी थकान सी महसूस होने लगती है।

 पेट मेंकीड़े पड़ने से समस्या से ग्रसित व्यक्ति के पाचन क्रिया पर भारी असरपड़ता है या कहे कि पाचन क्रिया कमजोर होने लगती है

पेट के कीड़ों को नष्ट करने का घरेलू उपाय

पीड़ितव्यक्ति में पाचन क्रिया के कमजोर होने से व्यक्ति को भूख भी कमलगती है। इस रोग की पहचान अधिकतर तब हो पाती हैजब किसी व्यक्ति को कभी अचानक से पेट में दर्द हो उठता है और तब किसी चिकित्सक के माध्यम से जांच कराने पर पता लगता है कि पेट में कीड़े या क्रमी उत्पन्न हो गए हैं। यदि चर्चित समस्या का उचित समय पर उचित उपचार न किया जाए तो यह कीड़े कुछ समय के बाद फेंफडों तक पहुंच जाते हैं जो आगे चलकर अस्थमा की समस्या को जन्म देते हैं।

इस समस्या को छोटे बच्चों में पहचान करने का एक लक्षण है कि यह समस्या जब किसी छोटे बच्चे को उत्पन्न होती हैं तो उनके शारीरिक विकास में रुकावट आने लगती है और पेट में कीड़े होने से बच्चे अधिकांश पेट में दर्द होने की शिकायत करते हैं।
पेट में व आंतों में पनप रहे कीड़ों की छुट्टी कर देगा यह घरेलू उपचार
छोटे बच्चों व बड़े लोगों के पेट में कीड़े होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कम पका हुआ भोजन या संक्रमित जलपान करना या साफ सफाई का ध्यान ना रखने से भी कीड़े आंतों में पनपने लगते हैं।

पेट में कीड़े होने के लक्षण

1.  वजन कम होना
2. जी मिचलाना या उल्टी आना
3. पेट दर्द होना
4. जीभ सफेद होना
5. मुंह से दुर्गंध आना
6. आंखें लाल होना
7. गुप्तांगों पर खुजली होना
8. गालों पर धब्बे होना
9. मल त्याग करते समय खून आना या रक्त स्त्राव होना
10.  दस्त लगना

पहला उपचार
3 साल से 5 साल तक के बच्चों के लिए उपचार
अजवाइन का चूर्ण आधा ग्राम की मात्रा में लेकर समभाग गुड में गोली बनाकर दिन में 3 बार खिलाने से सभी प्रकार के पेट के कीड़े नष्ट हो जाते है।

pet ke kide marne ki ayurvedic ilaj

दूसरा उपचार प्रातः उठते ही बच्चों को 10 ग्राम और बड़े व्यक्तियों को 25 ग्राम गुड़ खाकर 12 से 15 मिनट आराम करें इससे आंतों में चिपके हुए सभी कीड़े निकल कर एक जगह जमा हो जाएंगे फिर बच्चों आधा ग्राम और बड़ों को 1 से 2 ग्राम की मात्रा में अजवाइन का चूर्ण बासी पानी के साथ खाएं इससे आंतों में मौजूद सभी प्रकार के कीड़े नष्ट होकर मल के साथ मल के रास्ते से शीघ्र ही बाहर आ जाएंगे।

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तीसरा उपचार अजवाइन का चूर्ण आधा ग्राम की मात्रा में चुटकी भर काला नमक मिलाकर रात के समय नित्य गर्म पानी के साथ देने से बालकों के कृमि नष्ट हो जाते हैं व बड़े व्यक्ति अजवाइन का चूर्ण 4 भाग व काला नमक की मात्रा एक भाग तैयार मिश्रण में से 2 ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करें।

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक इलाज

विशेष दूषित जल के सेवन से बच्चों के पेट में कृमि से बचने के लिए भी इस विधि से सेवन करना चाहिए इससे वायु गोला और अफारा का नाश होता है।

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक नुस्खे

चौथा उपचार केवल अजवाइन का चूर्ण आधा ग्राम की मात्रा में60 से 70 ग्राम की मात्रा में मट्ठे या छाछ के साथ और बड़े व्यक्तियों को2 ग्राम की मात्रा में 125 ग्राम मट्ठे के साथ देने से पेट के कीड़े नष्टहोकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं।

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक दवा

विशेष  3 दिन से 1 सप्ताह तक आवश्यकतानुसार लें। इससे पेट के कीड़े  दूर  होकर  बच्चों का सोते समय दांत किटकिटाना और चबाना दूरहोता है अजवाइन एक कृमिनाशक अत्यंत उत्तम औषधि है। मिठाई, गरिष्ट पदार्थ, नशीले पदार्थ का सेवन बंद कर दें। टाफी, चॉकलेट औरमीठी वस्तुओं का सेवन बंद कर दें। जिन व्यक्तियों को रात में बार - बारपेशाब करने की आदत हो उन्हें भी इससे लाभ मिलता है कृमी  जन्य सभी  विकार  दूर होने के  साथ साथ अर्जीण आदि रोग भी कुछ दिनों में दूर हो जाते हैं।

आरती कैसे करना चाहिए,क्या है आरती का महत्व, kaise karna chahiye, kya hai aarti ka mahatva

aarti ka mahatva
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आरती कैसे करना चाहिए,क्या है आरती का महत्व,आरती कितने प्रकार की होती है ?

आरती के महत्व की चर्चा सर्वप्रथम “स्कन्द पुराण” में की गयी है। आरती हिन्दू धर्म की पूजा परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। किसी भी पूजा पाठ, यज्ञ, अनुष्ठान के अंत में देवी-देवताओं की आरती की जाती है। आरती की प्रक्रिया में, एक थाल में ज्योति और कुछ विशेष वस्तुएं रखकर भगवान के समक्ष घुमाते हैं।

आरती कैसे करें

थाल में अलग अलग वस्तुओं को रखने का अलग अलग महत्व होता है पर सबसे ज्यादा महत्व होता है, आरती के साथ गाई जाने वाली स्तुति का. जितने भाव से आरती गाई जायेगी, उतना ही ज्यादा यह प्रभावशाली होगी।

आरती का अर्थ

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है।

स्कंद पुराण में भगवान की आरती के संबंध में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता हो,पूजा की विधि भी नहीं जानता हो। लेकिन भगवान की आरती की जा रही हो और उस पूूजन कार्य में श्रद्धा के साथ शामिल होकर आरती करें,तो भगवान उसकी पूजा को पूरी तरह से स्वीकार कर लेते हैं।

आरती दीपक से क्यों

रुई के साथ घी की बाती जलाई जाती है। घी समृद्धि प्रदाता है। घी रुखापन दूर कर स्निग्धता प्रदान करता है। भगवान को अर्पित किए गए घी के दीपक का मतलब है कि जितनी स्निग्धता इस घी में है। उतनी ही स्निग्धता से हमारे जीवन के सभी अच्छे कार्य बनते चले जाएं। कभी किसी प्रकार की रुकावटों का सामना न करना पड़े।

आरती में शंख ध्वनि और घंटा ध्वनि क्यों-

आरती में बजने वाले शंख और घंटी के स्वर के साथ,जिस किसी देवता को ध्यान करके गायन किया जाता है। उससे मन एक जगह केन्द्रित होता है,जिससे मन में चल रहे विचारों की उथल-पुथल कम होती जाती है। शरीर का रोम-रोम पुलकित हो उठता है,जिससे शरीर और ऊर्जावान बनता है।
आरती कर्पूर से क्यों
कर्पूर की महक तेजी से वायुमंडल में फैलती है। ब्रह्मांड में मौजूद सकारात्मक शक्तियों(दैवीय शक्तियां)को यह आकर्षित करती है। आरती वह माध्यम है जिसके द्वारा देवीय शक्ति को पूजन स्थल तक पहुंचने का मार्ग मिल जाता है।

4. आरती करते हुए भक्त के मन में ऐसी भावना होनी चाहिए कि मानो वह पंच-प्राणों(पूरे मन के साथ)की सहायता से ईश्वर की आरती उतार रहा हो। घी की ज्योति को आत्मा की ज्योति का प्रतीक मानना चाहिए। यदि भक्त अंतर्मन से ईश्वर को पुकारते हैं तो यह पंचारती कहलाती है।

5. आरती दिन में एक से पांच बार की जा सकती है। घरों में आरती दो बार की जाती है। प्रातःकालीन आरती और संध्याकालीन आरती

दीपभक्ति विज्ञान के अनुसार आरती से पहले भगवान को नमस्कार करते हुए तीन बार फूल अर्पित करना चाहिए।

आरती करने की विधि

7. उसके बाद एक दीपक में शुद्ध घी लेकर उसमें विषम संख्या में यानी कि 3,5 या 7 बत्तियां जलाकर आरती करनी चाहिए। सामान्य तौर पर पांच बत्तियों से आरती की जाती है,जिसे पंच प्रदीप भी कहते हैं। इसके बाद कर्पूर से आरती की जाती है। कर्पूर का धुंआ वायुमंडल में जाकर मिलता है। यहां धुआं हमारे पूजन कार्य को ब्रंह्माडकीय शक्ति तक पहुंचाने का कार्य करता है।

किसी विशेष पूजन में आरती पांच चीजों से की जा सकती है। पहली धूप से, दूसरी दीप से, तीसरी धुले हुए वस्त्र से, कर्पूर से,पांचवी जल से।

कैसे सजाना चाहिए आरती का थाल,

आरती करने की पूरी विधि के बारे में।

आरती के थाल में एक जल से भरा लोटा, अर्पित किए जाने वाले फूल, कुमकुम, चावल, दीपक, धूप, कर्पूर, धुला हुआ वस्त्र, घंटी, आरती संग्रह की किताब रखी जाना चाहिए। थाल में कुमकुम से स्वस्तिक की आकृति बना लें। थाल पीतल या तांबे का लिया जाना चाहिए।

आरती करने की विधि?

भगवान के सामने आरती इस प्रकार से घुमाते हुए करना चाहिए कि ऊँ जैसी आकृति बने।
2. अलग-अलग देवी-देवताओं के सामने दीपक को घुमाने की संख्या भी अलग है, जो इस प्रकार है।
भगवान शिव के सामने तीन या पांच बार घुमाएं।
भगवान गणेश के सामने चार बार घुमाएं।
भगवान विष्णु के सामने बारह बार घुमाएं।
भगवान रूद्र के सामने चौदह बार घुमाएं।
भगवान सूर्य के सामने सात बार घुमाएं।
भगवती दुर्गा जी के सामने नौ बार घुमाएं।
अन्य देवताओं के सामने सात बार घुमाएं।

यदि दीपक को घुमाने की विधि को लेकर कोई उलझन हो रही हो तो आगे दी गई विधि से किसी भी देवी या देवता की आरती की जा सकती है।

3. आरती अपनी बांई ओर से शुरू करके दाईं ओर ले जाना चाहिए। इस क्रम को सात बार किया जाना चाहिए। सबसे पहले भगवान की मूर्ति के चरणों में चार बार, नाभि देश में दो बार और मुखमंडल में एक बार घुमाना चाहिए। इसके बाद देवमूर्ति के सामने आरती को गोलाकार सात बार घुमाना चाहिए।

4. पद्म पुराण में आरती के लिए कहा गया है कि कुंकुम, अगर, कपूर, घी और चन्दन की सात या पांच बत्तियां बनाकर अथवा रुई और घी की बत्तियां बनाकर शंख, घंटा आदि बजाते हुए आरती करनी चाहिए।

5. भगवान की आरती हो जाने के बाद थाल के चारों ओर जल घुमाया जाना चाहिए, जिससे आरती शांत की जाती है।

6. भगवान की आरती सम्पन्न हो जाने के बाद भक्तों को आरती दी जाती है। आरती अपने दाईं ओर से दी जानी चाहिए।

7. सभी भक्त आरती लेते हैं। आरती लेते समय भक्त अपने दोनों हाथों को नीचे को उलटा कर जोड़ते हैं। आरती पर से घुमा कर अपने माथे पर लगाते हैं। जिसके पीछे मान्यता है कि ईश्वरीय शक्ति उस ज्योत में समाई रहती हैं। जिस शक्ति का भाग भक्त माथे पर लेते हैं। एक और मान्यता के अनुसार इससे ईश्वर की नजर उतारी जाती है। जिसका असली कारण भगवान के प्रति अपने प्रेम व भक्ति को जताना होता है।

पूजा के बाद क्यों जरूरी है आरती ?

घर हो या मंदिर, भगवान की पूजा के बाद घड़ी, घंटा और शंख ध्वनि के साथ आरती की जाती है। बिना आरती के कोई भी पूजा अपूर्ण मानी जाती है। इसलिए पूजा शुरू करने से पहले लोग आरती की थाल सजाकर बैठते हैं। पूजा में आरती का इतना महत्व क्यों हैं इसका उत्तर स्कंद पुराण में मिलता है। इस पुराण में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता, पूजा की विधि नहीं जानता लेकिन आरती कर लेता है तो भगवान उसकी पूजा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं।

आरती का धार्मिक महत्व होने के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। याद कीजिए आरती की थाल में कौन कौन सी वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। आपके जेहन में रुई, घी, कपूर, फूल, चंदन जरूर आ गया होगा। रुई शुद्घ कपास होता है इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती है। इसी प्रकार घी भी दूध का मूल तत्व होता है। कपूर और चंदन भी शुद्घ और सात्विक पदार्थ है।
जब रुई के साथ घी और कपूर की बाती जलाई जाती है तो एक अद्भुत सुगंध वातावरण में फैल जाती है। इससे आस-पास के वातावरण में मौजूद नकारत्मक उर्जा भाग जाती है और सकारात्मक उर्जा का संचार होने लगता है।
आरती में बजने वाले शंख और घड़ी-घंटी के स्वर के साथ जिस किसी देवता को ध्यान करके गायन किया जाता है उसके प्रति मन केन्द्रित होता है जिससे मन में चल रहे द्वंद का अंत होता है। हमारे शरीर में सोई आत्मा जागृत होती है जिससे मन और शरीर उर्जावान हो उठता है। और महसूस होता है कि ईश्वर की कृपा मिल रही है।

मधुमेह डायबिटीज के लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज, diabetes ka ayurvedic ilaj

diabetes ka ayurvedic ilaj
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diabetes ke lakshan aur upchar

मधुमेह के दौरान आपका शरीर आमतौर पर निर्जलित हो जाता है। निर्जलीकरण में आपको बहुत प्यास लगती है।

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रक्त में अतिरिक्त शुगर की उपस्थिति के कारण गुर्दे रक्त को साफ करने के लिए अधिक काम करने लगते हैं और मूत्र के द्वारा अतिरिक्त शुगर को शरीर से बाहर निकालते हैं। इस कारण बार बार पेशाब आता है। अत्यधिक प्यास लगना और बार बार पेशाब आना यह मधुमेह होने के प्रमुख लक्षण हैं।

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कोशिकाओं में ग्लूकोज़ नही पहुंचने के कारण शरीर की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह से नही हो पाती है और मधुमेह का रोगी हमेशा थकान महसूस करता है और उसे जल्दी भूख लगने लगती है।

mahilao me sugar ke lakshan

मधुमेह से पीड़ित पुरुषों और महिलाओं को हाथ और पैर की उंगलियों के बीच, सेक्स अंगों के आसपास और स्तन के नीचे यीस्ट इनफ़ेक्शन हो सकता है।

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यदि रक्तधारा में रक्त शर्करा का स्तर ठीक से संतुलित नहीं होता है, तब यह तंत्रिका या किसी भी अंग की क्षति का कारण बन सकता है जिससे आपके शरीर के घावों को ठीक होने में मुश्किल होती है।

diabetes me pareshani
वज़न में कमी, मतली और उल्टी, बाल गिरना, धुँधली दृष्टि, त्वचा का सूखापन या खुजली होना मधुमेह के कुछ अन्य लक्षण हैं। अगर इसका समय से इलाज़ ना किया जाए तो गुर्दे की विफलता, दिल का दौरा या स्ट्रोक, अंधापन, तंत्रिका क्षति आदि के रूप में गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

sugar me kya nahi khana chahiye

यह एक सामान्य धारणा है कि चीनी मधुमेह का कारण है, लेकिन मधुमेह के पीछे का असली कारण स्टार्च है। पाचन के दौरान, स्टार्च ग्लूकोज़ में टूट जाता है जो चीनी का एक प्रकार है। इसलिए मधुमेह के रोगी चीनी खा सकते हैं पर उचित मात्रा में। अपने आहार में अपने कार्बोहाइड्रेट को नियंत्रित कर अपने मधुमेह को नियंत्रित करें।

sugar khatam karne ka tarika

मधुमेह से बचाव का सबसे बढ़िया तरीका है इसकी जानकारी रखना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना।

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100 ग्राम नीम के पत्तों का पाउडर,100 ग्राम जामुन गुठलियों का पाउडर, 100 ग्राम बिल्वपत्र पाउडर, 100 ग्राम करेले का पाउडर, 100ग्राम मेथी दाना पाउडर, 100 ग्राम विजयसार पाउडर 100 ग्राम गुड़मार पाउडर इन सातों चीजों के पाउडर को मिक्स करके डब्बे में भर लें खाना खाने के 1 घंटे पहले सुबह शाम सेवन करें 5 दिवस में लाभदायक असर चालू हो जाएगा सेवन करने के 15 दिन बाद diabites की जांच कराएं चमत्कारिक परिणाम मिलेगा

sugar ka permanent ilaj

आजमाया हुआ है निस्संकोच प्रयोग करें आवश्यक समझें तो अपने नजदीकी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें निरापद नुस्खा है लाखों मधुमेह पीड़ित इसका सेवन कर रहे है और स्वस्थ जीवन बिता रहे है।

टाइफाइड के लक्षण, कारण और इलाज, typhoid fever ka ayurvedic ilaj

 typhoid fever ka ayurvedic ilaj
 typhoid fever ka ayurvedic ilaj


टाइफाइड क्या है
यह रोग एस. टायफी या पेराटायफी नामक रोगाणुओं द्वारा फैलता है। यह मलमूत्र द्वारा दूषित भोजन या पानी द्वारा मनुष्यों में पहुँच जाते हैं और इसके कारण बनते हैं स्वयं के गंदे हाथ और मक्खियाँ। यह रोग आंतों में होने के कारण ही इसका नाम आन्त्रिक ज्वर पड़ा हैं । इस रोग के जीवाणु स्वस्थ शरीर में मुहँ से प्रवेश करते हैं और आंतों में पहुंच कर अपना विषैला प्रभाव विभिन्न अंगों में फैलाना शुरू कर देते हैं।

typhoid fever ka desi ilaj
लोग टाइफाइड के बुखार से आसानी से बच सकते हैं।अत: इस रोग की जानकारी होना अत्यंत जरूरी है। जीवाणु से पैदा होने वाली इस बीमारी को मियादी बुखार भी कहते हैं। यह रोग दुनिया के उन देशों में पाया जाता है, जहाँ मल-मूत्र और गंदगी के सही निपटाने की व्यवस्था नहीं है अथवा पीने का साफ़ पानी उपलब्ध नहीं है।
टाइफाइड के लक्षण
टाइफाइड होने की शुरुवात में शरीर में रोगाणुओं के प्रवेश के 10 से 14 दिन के भीतर रोग के लक्षण दिखने लगते हैं। कुछ स्थितियों में यह समय 2-3 दिन कम भी हो सकता है।

शुरुवात मामूली बुखार से होती है, जो धीरे-धीरे बढ़ कर 108-104 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है।
इस बीच हृदय व नाड़ी की गति धीमी होना, बेचैनी, कमजोरी, पेट फूलना, सिर दर्द, मुंह सूखना, होठों पर पपड़ी जमना, जीभ सूखी, पपड़ीदार व लाल होना, दस्त लगना जैसे लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं।

टाइफाइड में तेज बुखार के साथ कपकपी या ठंड भी लग सकती है। साथ में हाथ-पैर दर्द, खाँसी जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं।

गले में दर्द या सूजन भी हो सकती है।
टाइफाइड बुखार में पेट में दर्द और कब्ज की शिकायत होती है। बाद में दस्त भी लग सकते हैं।

टाइफाइड के बाद सावधानी

कभी-कभी 2 सप्ताह पश्चात् टाइफाइड बुखार फिर से आ सकता है। यह तब होता है जब इलाज सही तरीके से न लिया जाए।

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टाइफाइड बुखार का इलाज किसी योग्य चिकित्सक से जल्द ही करवाना चाहिए और टाइफाइड को साधारण रोग समझकर इसके इलाज के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
टाइफाइड की जाँच :
टाइफाइड का टेस्ट आसानी से हो जाती है। लेकिन प्राय: जाँच के परिणाम सात दिन के बाद ही पोसिटिव मिलते हैं।
टाइफाइड के लिए विडाल (Widal Test) जाँच की जाती है। साथ ही इस रोग में रक्त के श्वेत रक्ताणु की संख्या कम हो जाती है। इसलिए इनकी संख्या भी पैथोलॉजिस्ट अपनी जाँच में देखते हैं। अच्छी पैथोलॉजी में मल एवं रक्त के कल्चर (Culture) द्वारा भी चिकित्सक रोग की पहचान निश्चित करते हैं।

टाइफाइड से बचाव के टिप्स :

टाइफाइड के रोगी को अस्पताल में भरती करवाकर इलाज देना बेहतर रहता है। यदि यह संभव न हो तो घर पर ही उसे अलग रखने का प्रयास करना चाहिए।
परंतु यह ध्यान रहे कि उसे पूरी मात्रा में पर्याप्त समय तक दवाइयाँ खिलाई जाएँ।

टाइफाइड रोगी के मल-मूत्र के संपर्क से बचने के लिए विशेष सावधानियाँ रखी जाए जैसे नाखून काटना, खाने के पहले अच्छी तरह से हाथ साफ करना, खुले स्थानों में शौच न जाना। संभव हो तो प्रत्येक घर में सेप्टिक टेंकवाला पक्का शौचालय बनवाना चाहिए।

टाइफायड के इलाज

typhoid ki dawa

टाइफाइड के इलाज के लिए आजकल अच्छे एंटीबायोटिक्स उपलब्ध हैं। पूर्व में प्रचलित क्लोरेमफेनीकाल तो रोग में असरकारक है ही, अब सिप्रोफ्लाक्सेसिन, एमाक्सीसिलिन, कोट्राइमेक्साजोन इत्यादि दवाइयाँ भी उपलब्ध हैं। इलाज बहुत महँगा भी नहीं है।

मरीज के मल-मूत्र रक्त की जाँच कर उसकी पहचान की जाती है, फिर उसे पर्याप्त मात्रा में एंपीसिलिन अथवा अन्य दवाएँ खिलाते हैं, ताकि रोग के जीवाणु खत्म हो जाएँ और वह टाइफाइड दूसरे व्यक्तियों में न फैला सके।

टाइफाइड के टीके

आजकल तीन प्रकार के टीके (Vaccines) उपलब्ध हैं (1) मोनोवेलेंट टीका, (2) बाईवेलेंट टीका तथा (3) टी.ए.बी. (B.) टीका। यह टीका तीन वर्ष तक रोग से रक्षा करता है, तीन वर्ष बाद इसे पुनः लगवाना होता है। इसे टीके की प्रभावी मात्रा या बूस्टर डोज कहते हैं।

आजकल पोलियो वेक्सीन की तरह मुँह द्वारा ली जानेवाली टाइफाइड वेक्सीन भी विकसित की गई है। टीकाकरण के मामले में अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

टाइफाइड में परहेज :
टाइफाइड बुखार में मरीज को गरिष्ठ, भारी, पेट में गैस पैदा करने वाला भोजन सेवन न करें। शराब आदि का सेवन भी ना करें | मक्खन, घी, पेस्ट्री, तले हुए आहार, मिठाईयाँ, गाढ़ी मलाई आदि ना लें |
टाइफाइड की बीमारी में खुले हुए दूषित खाद्य पदार्थ या पानी न पिएं। दस्त और गैस की तकलीफ मौजूद हो, तो दूध न पिएं। पूरी तरह रोगमुक्त होने तक चपाती का सेवन करने से बचें।

typhoid ka ayurvedic ilaj

टाइफाइड बुखार के मरीज को पर्याप्त मात्रा में पानी और पोषक तरल पदार्थ लेना चाहिए। क्योंकि रोगी के शरीर में पानी की कमी नही होनी चाहिए | कुनकुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना टाइफाइड में काफी फायदेमंद होता है। इस रोग से विशेष रूप से बच्चो को बचाना चाहिए क्योंकि अकसर वो साफ सफाई से सम्बंधित नियमो का ठीक से पालन नहीं करते हैं

दमा (अस्थमा) का आयुर्वेदिक नुस्खे, Asthma ka ayurvedic nuskhe

Asthma ka ayurvedic nuskhe
Asthma ka ayurvedic nuskhe

दमा का प्रकोप विश्व की जनसंख्या पर बढ़ता जा रहा है. रोज़मर्रा उपयोग होने वाली कीटनाशक दवायें इस रोग में अभिवृद्धि कर रही हैं. आयुर्वेद के अनुसार यह रोग इसकी गंभीरता और लक्षणों के हिसाब से पाँच प्रकार का है जो कि तीन तत्वों (वायु, अग्नि, जल) के असंतुलन के कारण उत्पन्न होता है.

वायु तत्व के असंतुलन से शुष्क अथवा ड्राइ-टाइप (dry-type) दमा उत्पन्न होता है.
अग्नि-तत्व के असंतुलन से संक्रमण अथवा इन्फेक्षन -टाइप (infection-type) दमा उपार्जित होता है.

जल तत्व के असंतुलन से संकुलन अथवा कंजेस्षन-टाइप (congestive-type) दमा उत्पन्न होता है.
ड्राइ-टाइप अस्थमा (Dry-type asthma): यह उन व्यक्तियों में पाया जाता जिनमें त्वचा शुष्क हो, जिनका संगठन पतला और जिनमें क़ब्ज़ की शिकायत पाई जाती है.

इन्फेक्षन-टाइप अस्थमा (Infection-type asthma): यह पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति जिनमें सराइयसिस (psoriasis) और चर्म रोग की संभावना अधिक होती है तथा जो लोग में ब्रॉंकाइटिस से ग्रस्त हों, उनमें पाया जाता है.

कंजेस्षन-टाइप अस्थमा (Congestion-type asthma): यह गठीले शरीर वाले लोगों में पाया जाता है जिनकी हड्डियाँ मज़बूत हों अतएव जो सर्दी-खाँसी जल्दी ही प्रभावित हो जाते है और जिनके शरीर में जल का अवरोधन (water-retention) होने की प्रवृत्ति अधिक होती है.

दमा के लक्षण

Symptoms of Asthma in Hindi

अस्थमा के लक्षण व्यक्ति की संरचना पर निर्भर करते हैं. यदि इसका इलाज समय पर ना हो तो यह बढ़ जाता है और रोगी को हस्पताल में दाखिल करने की नौबत आ जाती है. इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति को शारीरिक काम करने में दिक्कत अनुभव होती है तथा सामान्य कार्यों को करने में भी असमर्थता का अनुभव होने लगता है.

 परंतु सामान्यतः दमा में रोगी को साँस लेने में अवरोध महसूस होता है. इस रोग के मुख्य लक्षण हैं की इसमें बार-बार श्वास की क्रिया में दिक्कत उत्पन्न होती है. सीने व अन्य श्वसन तंत्र के अंगों में अचानक जकड़न व संकुलन उत्पन्न हो जाता है. श्वसन तंत्र में यह प्रतिक्रिया प्रायः किसी आलर्जन अथवा ट्रिग्गर (trigger) के कारण होती है.

श्वास की नलिकायों के संकुचन से साँस में घरघराहट होती है. सीने में जकड़न एवं खाँसी का होना दमा के लक्षण है

दमा से बचाव के उपाय

Various Types of Asthma and Preventive Measures in Hindi According To Ayurveda

दमा से निवरत्ति हेतु रोगी की संरचना के अनुसार उपचार एवं बचाव के उपाय किए जाते हैं.
ड्राइ हीट अस्थमा (dry-heat) अस्थमा: जलीय पदार्थों का सेवन अधिक करें एवं नाक, हाथ, पैर, पीठ को हवा से बचाना चाहिए और ठंडे प्रदेश में इन्हें ढक कर रखना चाहिए. सरसों या तिल के तेल से शरीर पर मालिश करें और गर्म तासीर का स्निघ्द भोजन करना हितकर है. ठंडे और बासी भोजन का सेवन बिल्कुल न करें.

इन्फेक्षन-टाइप (infection-type) अस्थमा: इस प्रकार के रोगियों को सब्जी और फल का सेवन अधिक करना चाहिए एवं रात्रि 10 बजे के बाद कुछ ना खावें. इस रोग में हल्दी का अधिक सेवन करना चाहिए. Echinacea की चाय बनाकर लें.

प्राणायाम और योग का अभ्यास करना भी इन रोगियों में श्रेयस्कर है क्योंकि प्रायः इनमें यह रोग मानसिक तनाव और क्रोध के कारण हो कनजेस्टिव टाइप अस्थमा (Congestive type): इस स्तिथि में रोगी को दूध और इससे बने पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए. भोजन में तीक्ष्ण, कसैले और मसालेदार पदार्थों का सेवन करना हितकर है. इससे जमी हुई श्लेष्मा के संचार में सहायता मिलती है.

जीवनचर्या Beneficial Diet and Lifestyle In Asthma in Hindi
गहरी श्वास का अभ्यास करने से भी यह समस्या बहुत हद तक नियंत्रण में आ जाती है. जब गहरी श्वास का प्रयोग रीढ़ की हड्डी सीधी रख कर किया जाए तो इससे चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते हैं. श्वास भरते समय इस बात का ध्यान रखें की पहले छाती फूलती है, उसके पश्चात पेट फूलता है तथा शरीर के सभी अंगों में इसी प्रकार फुलावट को महसूस करें. इस प्रयोग से श्वास में दीर्घता आती है और शवसन तंत्र मजबूत हो जाता है. इसका प्रयोग 15 मिनिट रोज़ करें तथा यथाशक्ति इसे बढ़ाते जाएँ.

जिन व्यक्तियों को श्वास लेने में दिक्कत हो उन्हें भोजन में काली मिर्च, हल्दी, अदरक जैसे औषधीय मसालों ( ayurvedic spices) का इस्तेमाल अधिक करना चाहिए.

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज

अलर्जिक अस्थमा में शरीर की आलरजेन्स (allergens) के प्रति प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है जिसमे धूल , मिट्टी, ड्रग्स, प्रदूषण इन सबका असर पड़ता है.

अलर्जिक अस्थमा सक्रिय करने वाले अन्य कारण : डर, घबराहट, चिंता, तनाव, संसाधित खाद्य (processed foods), अधिक नमक-युक्त पदार्थ, आनुवांशिक कारण (hereditary factors).

दमा रोग के उपचार के लिए कुछ सरल घरेलू उपाय

Ayurveda Home Remedies For Asthma In Hindi

मेथी, अदरक और शहद युक्त औषधि: 2 चम्मच मेथी दाना, 1 लीटर पानी में मिलाएँ और आधे घंटे तक इसे उबाल कर छान लें. 2 चम्मच अदरक का पेस्ट बनाएँ और उसे उसका रस पूरी तरह से निचोड़ लें.
इस रस को उबले हुए पानी में मिलाएँ. इसमें एक चम्मच शहद मिलाएँ. इसे अच्छी तरह घोल लें और रोज़ इसका 1 गिलास सेवन करें.

अस्थमा की आयुर्वेदिक नुस्खे

शहद से भरा हुआ कटोरा नाक के नीचे रख श्वास लेने में सहायता मिलती है.
2 चम्मच बेर का पाउडर लें और इसमें शहद मिला लें. इस मिक्स्चर को रोज़ प्रातः काल उठकर लें.

चर्म रोग दूर करने के आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय, Ayurvedic nuskhe for removing skin diseases

 Ayurvedic nuskhe for removing skin diseases
चर्म रोग दूर करने के आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय

चर्म रोग कई प्रकार के होते हैं। जैसे कि- दाद, खाज, खुजली, छाछन, छाले, खसरा, फोड़े, फुंसी आदि। बहुत से मामलों में हम आयुवेदिक व घरेलू उपचार से रोग को ठीक कर सकते हैं, पर कई मामलो में एक अच्छे dermatologist से सलाह लेना उचित होता है। Skin disease में बहुत से लोगों को होमियोपैथी की दवाओं से भी काफी लाभ मिलता है। आज इस लेख में हम चर्म रोग ठीक करने के आयुर्वेदिक तरीकों के बारे में बात करेंगे।

चर्म रोग दूर करने के आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय

चर्म रोग होने के कारण / Cause of Skin Disease in Hindi

चर्म रोग होने के कई कारण हो सकते हैं:
अधिकतर समय धूप में बिताने वाले लोगों को चर्म रोग होने का खतरा ज्यादा होता है।
किसी एंटीबायोटिक दवा के खाने से साइड एफेट्स होने पर भी त्वचा रोग हो सकता है।
महिलाओं में मासिक चक्र अनियमितता की समस्या हो जाने पर भी उन्हे चर्म रोग होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।
शरीर में ज़्यादा गैस जमा होने से खुश्की का रोग हो सकता है।
अधिक कसे हुए कपड़े पहेनने पर और नाइलोन के वस्त्र पहनने पर भी चमड़ी के विकार ग्रस्त होने का खतरा होता है।
नहाने के साबुन में अधिक मात्रा में सोडा होने से भी यह रोग हो सकता है।
खुजली का रोग ज़्यादातर शरीर में खून की खराबी के कारण उत्पन्न होता है।
गरम और तीखीं चिज़े खाने पर फुंसी और फोड़े निकल आ सकते हैं।
त्वचा रोग के लक्षण / Symptoms Of Skin Disease in Hindi
दाद-खाज होने पर चमड़ी एकदम सूख जाती है, और उस जगह पर खुजलाने पर छोटे छोटे दाने निकल आते हैं। समान्यतः किसी भी प्रकार के चर्म रोग में जलन, खुजली और दर्द होने की फरियाद रहती है। शरीर में तेजा गरमी इकट्ठा होने पर चमड़ी पर सफ़ेद या भूरे दाग दिखने लगते हैं या फोड़े और फुंसी निकल आते हैं और समय पर इसका उपचार ना होने पर इनमें पीप भी निकलनें लगता है।

त्वचा रोग होने पर भोजन में परहेज़ / Food Sobriety in Skin Disease in Hindi

त्वचा रोग हो जाने पर, समय पर सोना, समय पर उठना, रोज़ नहाना, और धूप की सीधी किरणों के संपर्क से दूर रहेना अत्यंत आवश्यक है।

भोजन में अचार, नींबू, नमक, मिर्च, टमाटर तैली वस्तुएं, आदि चीज़ों का सेवन बिलकुल बंद कर देना चाहिए। (चर्म रोग में कोई भी खट्टी चीज़ खाने से रोग तेज़ी से पूरे शरीर में फ़ेल जाता है।)।

त्वचा रोग में आयुर्वेदिक व घरेलू उपचार / Home Remedies & Ayurvedic Treatment for Skin Disease in Hindi

नहाते समय नीम के पत्तों को पानी के साथ गरम कर के, फिर उस पानी को नहाने के पानी के साथ मिला कर नहाने से चर्म रोग से मुक्ति मिलती है।

नीम की कोपलों (नए हरे पत्ते) को सुबह खाली पेट खाने से भी त्वचा रोग दूर हो जाते हैं।

त्वचा के घाव ठीक करने के लिए नीम के पत्तों का रस निकाल कर घाव पर लगा कर उस पर पट्टी बांध लेने से घाव मिट जाते हैं। (पट्टी समय समय पर बदलते रहना चाहिए)।

जहां भी फोड़े और फुंसी हुए हों, वहाँ पर लहसुन का रस लगाने से फौरन आराम मिल जाता है।
लहसुन और सूरजमुखी को एक साथ पीस कर पोटली बना कर गले की गांठ पर (कण्ठमाला की गील्टियों पर) बांध देने से लाभ मिलता है।

सरसों के तेल में लहसुन की कुछ कलीयों को डाल कर उसे गर्म कर के, (हल्का गर्म) उसे त्वचा पर लगाया जाए तो खुजली और खाज की समस्या दूर हो जाती है।
दाद, खाज और खुजली जैसे रोग, दूर करने के लिए त्वचा पर करेले का रस लगाना चाहिए।

खीरा खाने से चमड़ी के रोग में राहत मिलती है। ककड़ी के रस को चमड़ी पर लगाने से त्वचा से मैल दूर होता है, और चेहरा glow करता है। ककड़ी का रस पीने से भी शरीर को लाभ होता है।

चर्म रोग दूर करने के आयुर्वेदिक व घरेलू उपाय
चर्म रोग कई प्रकार के होते हैं। जैसे कि- दाद, खाज, खुजली, छाछन, छाले, खसरा, फोड़े, फुंसी आदि। बहुत से मामलों में हम आयुवेदिक व घरेलू उपचार से रोग को ठीक कर सकते हैं, पर कई मामलो में एक अच्छे dermatologist से सलाह लेना उचित होता है। Skin disease में बहुत से लोगों को होमियोपैथी की दवाओं से भी काफी लाभ मिलता है। आज इस लेख में हम चर्म रोग ठीक करने के आयुर्वेदिक तरीकों के बारे में बात करेंगे।

गैस और बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे, gas aur badhazmi Ka Ayurvedic nuskhe

गैस और बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे, gas aur badhazmi Ka Ayurvedic nuskhe
gas aur badhazmi Ka Ayurvedic nuskhe

गैस और बदहजमी का कारण
गैस को चिकित्सीय भाषा में अपच के रूप में जाना जाता है। गैस के लक्षण सूजन, डकार, जलन और मतली हो सकते है। गैस और अपच हमारे पेट में पाचक रस के स्राव से होने वाली समस्याएं हैं। पेट में मौजूद एसिड पेट के अंदर जलन पैदा करना शुरू कर देता है। इसमें व्यक्ति को बेचैनी, सीने और पेट में जलन महसूस होती है।

गैस और बदहजमी दूर करने के लिए अपनाएं ये घरेलु उपाय : -
गैस की समस्या ज्यादा तैलीय या मसालेदार खाना खाने से होती है, साथ ही यदि पेट खाली है तब भी गैस की समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा चाय या कॉफ़ी पीने वालों को भी गैस की समस्या हो सकती है। गैस की समस्या यदि बढ़ जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है इसलिए समय रहते इस पर काबू करना आवश्यक होता है। आइए आपको बताते हैं कुछ घरेलू उपाय जिन्हें अपनाकर आप गैस की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

गैस और बदहजमी काआयुर्वेदिक नुस्खे

धनिया के इस्तेमाल से पेट में गैस के कारण होने वाली जलन में राहत महसूस कर सकते हैं। एक गिलास छाछ में भुना हुआ धनिया मिलाकर पीने से गैस से राहत मिलती है।

मसालेदार या वसायुक्त भोजन करने के कारण गैस और अपच जैसी समस्याएं होती हैं, इसके लिए सौंफ के बीच से इसका इलाज संभव है। सौंफ के बीज में मौजूद तेल, मतली और पेट फूलना जैसी समस्याओं से राहत देता है। सौंफ को सुखाकर, भूनकर उसका पाउडर बना लें। दिन में दो बार इस पाउडर के इस्तेमाल से गैस से काफी हद तक राहत मिल जाती है।

खाना हजम कैसे करे
हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कमी को पूरा करने के लिए काली मिर्च का उपयोग बहुत कारगर हो सकता है। काली मिर्च से आमाशय रस का प्रवाह बढ़ता है, जिससे यह पाचन में मदद करती है। गुड़ में काली मिर्च का पाउडर मिलाकर अपच के दौरान छाछ के साथ लिया जा सकता है। इसके अलावा काली मिर्च, सूखे पुदीना के पत्ते, सौंठ पाउडर और धनिया बीज बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से भी अपच में फायदा होता है।

अम्लपित्त की आयुर्वेदिक दवा

लौंग आंत गतिशीलता और जठरांत्र स्राव को बढ़ाती है जिससे गैस और अपच की समस्या खत्म हो जाती है। इसके लिए लौंग को चबाएं। पेट में जलन से छुटकारा पाने के लिए लौंग का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है।
सेब का सिरका गैस और अपच दोनों से राहत देता है। यह हमारे पेट को आवश्यक एसिड प्रदान करता है। गैस के इलाज के लिए इसे पानी और शहद के साथ लिया जा सकता है।

अपच के घरेलू उपाय

अपच और गैस के इलाज के लिए छाछ बहुत फायदेमंद है। इसमें अधिक लैक्टिक एसिड होता है और यह दूध की तुलना में पचने में आसान होता है।

apachan ki dawa

बेकिंग सोडा में अतिरिक्त एसिड का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी और सामान्य रूप से एंटासिड उपलब्ध रहता है। सोडा का मूल स्वभाव नमक और पानी के गठन से पेट में अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनाना होता है। जिससे गैस से राहत मिलती है।

खट्टी डकार का इलाज

हर्बल चाय पाचन सहजता में प्रभावी ढंग से काम करती है। पुदीना, रैस्बेरी और ब्लैकबेरी चाय को अपच को कम करने के लिए खाना खाने के बाद लिया जा सकता है। पुदीना और कैमोमाइल (Mint and Camomile) तेज पेट दर्द होने पर फायदेमंद है।

एसिडिटी की दवा

लहसुन से मुँह में तेज गंध आ सकती है लेकिन इसकी छोटी सी कली में गैस की समस्या से राहत पाने के अभूतपूर्व गुण होते हैं। गैस को दूर करने में लहसुन बहुत फायदेमंद है। लहसुन का इस्तेमाल सूप में करने से यह पाचनशक्ति को और मजबूत करता है। इसके अलावा पानी में लहसुन को उबालकर उसमें काली मिर्च और जीरा डालें, इस घोल को ठंडा होने दें। इसे एक दिन में दो से तीन बार पीएं।

बदहज़मी का घरेलू इलाज

अदरक खाने में न केवल सुगंध और चरपराहट जोड़ता है बल्कि खाने को पचाने में भी सहायक है। अदरक खाद्य पदार्थ के रूप में या अदरक की चाय में इस्तेमाल किया जाता है जिससे यह लार, पित्त रस और आमाशय रस में उत्तेजना पैदा करने में मदद करता है। कॉफी और सोडा की तुलना में अदरक की चाय पीना बहुत अधिक लाभदायक है।

अपच का आयुर्वेदिक इलाज

इलायची पेट में गैस और अपच में बहुत आरामदायक होता है। इसमें मौजूद वाष्पशील तेल पाचन विकार को दूर कर गैस और अपच से राहत देते हैं। इलायची के बीज का यूं ही सेवन किया जा सकता है या खाना पकाने, चाय आदि में भी इलायची या इलायची पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

गैस की आयुर्वेदिक दवा

गैस की रोकथाम और अपच के इलाज करने वाले प्राकृतिक उपायों में से एक नींबू है। गर्म पानी के साथ नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टी, गैस और डकार से छुटकारा मिल सकता है। यह एक सफाई एजेंट के रूप में, एक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है और पित्त रस का उत्पादन करके शरीर में पाचन तेज करता है। सुबह एक गिलास ताजे पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से भी पाचनतंत्र मजबूत होता है।

gas aur badhazmi Ka Ayurvedic nuskhe

हींग से पेट फूलना, पेट दर्द और कब्ज जैसी कई पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। एक चुटकी हींग दिन में दो से तीन बार गर्म पानी के साथ ली जा सकती है।

बदहजमी का उपचार

गैस से छुटकारा पाने के लिए दादी-नानी का नुस्खा है। इसके इस्तेमाल से पेट की लगभग हर समस्या का इलाज कर सकते हैं। तत्काल राहत के लिए अजवाइन में नमक मिलाकर पानी के साथ लें।

अपच. की आयुर्वेदिक दवा

अन्य जड़ी बूटियों और मसालों के साथ इस्तेमाल करने के अलावा सिर्फ गर्म पानी भी आपको गैस और अपच से तत्काल राहत दे सकता है। यह शरीर में मौजूद सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर हमारे शरीर की सफाई में मदद करता है। सुबह एक गिलास गर्म पानी और खाने के बाद गर्म पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है।

दिमाग को शांत रखने के आयुर्वेदिक उपाय, dimag ko shant rakhane ke upay

दिमाग को शांत रखने के आयुर्वेदिक उपाय
दिमाग को शांत रखने के आयुर्वेदिक उपाय

दिमाग को शांत रखती हैं ये आयुर्वेदिक औषधियां, तनाव दूर करने के लिए भी करें इनका सेवन

डिप्रेशन हमारे शरीर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचाता है। एलर्जी, अस्थमा, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं डिप्रेशन की वजह से जन्म लेती हैं।

दिमाग को ठंडा रखने के उपाय

आज के दौर की जीवनशैली में तनाव और चिंता के कई कारण होते हैं। हर कोई कभी न कभी इसकी वजह से परेशान जरूर रहता है। ऐसे में उसे कुछ समझ नहीं आता कि क्या किया जाए। डिप्रेशन से बचने के लिए बाजार में कई तरह की दवाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही साथ कई तरह के ध्यान और व्यायाम भी तनाव और चिंता को दूर करने में कारगर होते हैं। लेकिन आज हम आपको आयुर्वेद के कुछ ऐसे नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल कर आप तनाव से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं।
मन को शांत रखने का मंत्र
डिप्रेशन हमारे शरीर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचाता है। इसकी वजह से शरीर में पित्त, कफ और वात का असंतुलन हो जाता है। इसके अलावा एलर्जी, अस्थमा, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं डिप्रेशन की वजह से जन्म लेती हैं। कुछ आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन से तनाव से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तो आइए, जानते हैं कि ऐसी कौन सी हर्बल युक्तियां हैं जो तनाव भगाने का काम करती हैं-

दिमाग को शांत रखने के नुस्खे

ब्राह्मी तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने का काम करता है। यह तनाव के प्रभावों पर प्रतिक्रियात्मक कारवाई करने के लिए भी जाना जाता है। ब्राह्मी दिमाग को शांत रखने के साथ-साथ एकाग्रता बढ़ाने में भी काफी मददगार है।

दिमाग को कंट्रोल करने का उपाय

भृंगराज चाय दिमाग को निरंतर एनर्जी देने का काम करती है। इससे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह दुरुस्त रहता है। यह दिमाग को शांत तो रखता ही है, साथ ही साथ पूरे शरीर को भी काफी आराम पहुंचाता है।

मन को शांत करने का उपाय

जटामासी एंटी स्ट्रेस हर्ब के रुप में काफी लोकप्रिय है। तनाव भगाने के लिए जटामासी की जड़ों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। यह जड़ें हमारे दिमाग और शरीर को टॉक्सिन्स से मुक्त बनाती हैं। तथा ब्रेन फंक्शन्स को दुरुस्त रखने में काफी मदद करती हैं।

दिमाग को शांत रखने के उपाय

अश्वगंधा एमीनो एसिड्स और विटामिन का बेहतरीन संयोजन है। यह दिमाग में एनर्जी को बूस्ट करने तथा स्टेमिना मजबूत करने में काफी मदद करता है।

चुटकी में सरदर्द से छुटकारा पाने के 10 नुस्खे, 10 Tips to Get Rid for Headaches in hindi

सरदर्द से छुटकारा पाने के 10 नुस्खे,
सरदर्द से छुटकारा पाने के 10 नुस्खे

सिर दर्द क्यों होता है

आज के युवाओं में सिर दर्द की समस्या आम होती जा रही है। चाहे वह स्टूडेंट हो या जॉब करने वाला, हर कोई काम के बोझ और कई समस्याओं के चलते सर दर्द से परेशान हैं।
लोग सर दर्द से तुरंत छुटकारा पाने के लिए दवाओं का सहारा लेते है, जिनके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। पेनकिलर दवायें सिर्फ कुछ देर के लिए आराम तो दे सकती है लेकिन इससे आपकी बॉडी पर बुरा प्रभाव भी छोड़ जाती है।

इन 10 तरीकों से चुटकी में पाएं सरदर्द से छुटकारा

ऐसे में आपको बता रहा है कि दवाओं के बजाय दादी-नानी के बने कुछ घरेलू नुस्खे इस्तेमाल करें तो बिना किसी साइड इफेक्ट के आपको जल्द आराम दिला सकता है।

रोजाना सिर दर्द के कारण

ऐसा कई बार होता है कि तनाव और थकान के कारण सिर में ऐसा दर्द होता है कि बर्दाश्त नहीं होता है। हालांकि ऐसा कई बार गैस के कारण भी सिर में दर्द होता है, क्योंकि पेट की गैस पास न हो पाने पर बॉडी के ऊपर चढ़ती है तो यह दिल और दिमाग पर असर करती है जिसके कारण सरदर्द और चेस्ट पेन की प्रॉब्लम हो जाती है। ऐसे में घरेलू उपचार सबसे कारगर सिद्ध होता है।

सिरदर्द से बचने के घरेलू उपचार

सिरदर्द होने पर बिस्तर पर लेटकर दर्द वाले हिस्से को बेड के नीचे लटका दीजिए। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो रहा हो उस तरफ वाले नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाल दीजिए, उसके बाद जोर से सांसों को ऊपर की तरफ खींचिए इससे सिरदर्द से राहत मिलेगी।

सिरदर्द से बचने के घरेलू नुस्खे

सिरदर्द होने पर दालचीनी को पानी के साथ महीन पीसकर माथे पर पतला लेप कर लगा लीजिए। लेप सूख जाने पर उसे हटा लीजिए। 3-4 लेप लगाने पर सिरदर्द होना बंद हो जाएगा।

सिरदर्द का आयुर्वेदिक इलाज

मुलहठी को कूट-पीसकर महीन चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण को नाक के पास ले जाकर सूंघने से सिरदर्द में राहत मिलती है।

सिरदर्द का आयुर्वेदिक नुस्खे

गर्म मसाला चाय सिर के दर्द के लिए एक कारगर उपाय है। आप इस चाय में एक लौंग और तिलसी के कुछ पत्ते भी डाल सकते हैं। यह चाय नींद को भगा कर दिमाग को सचेत करती है। आप इसमें थोड़े से अदरख के साथ इलायची भी मिला सकते हैं। इससे आपका सिरदर्द तो गायब होगा ही साथ में आप तरोताज़ा भी महसूस करेगें।

सिरदर्द का आयुर्वेदिक उपाय

सिरदर्द होने पर पीपल, सोंठ, मुलहठी, सौंफ, कूठ इन सबको लगभग 10-10 ग्राम लेकर पीसकर चूर्ण बना
लीजिए। उसके बाद इस चूर्ण में एक चम्मुच पानी मिलाकर गाढा लेप बना बना लीजिए। इस लेप को माथे पर लगाइए।सिरदर्द होना बंद हो जाएगा।

अधिक तनाव और दिन भर की भाद दौड़ की वजह से भी सिरदर्द हो सकता है। इसे दूर करने के सिए किसी अच्‍छे हर्बल तेल से अपने सिर की मालिश करवाएं। मालिश के पहले तेल का हल्‍का सा गर्म कर लें। तेल लगाते समय उंगलियों को सिर पर हल्के दबाव के साथ धीरे धीरे मालिश करें। इससे न केवल सिरदर्द दूर होगा। बल्कि इस तरह की मसाज से बालों की जड़े भी मजबूत होती हैं और बाल अच्छी तरह से बढ़ते हैं।

सिरदर्द का घरेलू उपचार

तौलिये को हल्के गर्म पानी में डालकर उस तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश कीजिए। इससे सिरदर्द में फायदा होगा।
पुराना सिर दर्द का इलाज
अगर आपके सिरदर्द का कारण एक हैंग ओवर की वजह से है तो नींबू पानी हर्बल उपाचार आपके बडे़ काम आता है। अधिक शराब पी लेने से शरीर में डीहाईड्रेशन यानी पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में जरुरी है कि आप ज्‍यादा से ज्‍यादा पानी पिएं। एक ग्‍लास हल्‍के गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर उसमें थोडा सा नमक और चीनी मिला कर पिएं। ऐसा करने से सिरदर्द कम खत्म हो जाता है।

सिरदर्द का घरेलू नुस्खे

अदरक पाउडर या सोंठ का एक चम्मच पाउडर लें, इसे थोड़े पानी में मिलाकर गर्म कर लें। हल्का ठंडा होने के बाद इसे माथे पर लगाएं।
सिर दर्द की मेडिसिन
सिरदर्द कई बार अचानक शुरू होता है और अक्सर अपने आप ठीक भी हो जाता है। सिरदर्द में हाथों के स्पर्श से मिलनेवा ला आराम किसी भी दवा से ज्यादा असरदायक होता है। अगर इन नुस्खों को अपनाने के बावजूद भी सिरदर्द से राहत नमि ले तो चिकित्सक से संपर्क अवश्य कीजिए।

एड्स के 3 मुख्य लक्षण, सावधान अनदेखा न करें, main symptoms of AIDS in hindi

main symptoms of AIDS in hindi
main symptoms of AIDS in hindi

एड्स के लक्षण

एचआईवी संक्रमण तीन चरणों में होता है। उपचार के बिना, यह समय के साथ बदतर हो जाएगा और अंततः आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को खत्म कर देगा।

एचआईवी के प्रारंभिक लक्षण

तीव्र एचआईवी संक्रमण

ज्यादातर लोग एचआईवी से संक्रमित होने पर तुरंत नहीं जानते हैं, लेकिन थोड़े समय बाद, उनके लक्षण हो सकते हैं। यह तब होता है जब आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली एक लड़ाई रखती है, आमतौर पर वायरस प्राप्त करने के बाद 2 से 6 सप्ताह के भीतर। इसे तीव्र रेट्रोवायरल सिंड्रोम या प्राथमिक एचआईवी संक्रमण कहा जाता है।
लक्षण अन्य वायरल बीमारियों के समान होते हैं, और उनकी तुलना अक्सर फ्लू से की जाती है। वे आम तौर पर एक या दो सप्ताह तक चलते हैं और फिर पूरी तरह से चले जाते हैं। उनमे शामिल है:
सरदर्द, दस्त, मतली और उल्टी, थकान, मांसपेशियों में दर्द, गले में खरास, सूजी हुई लसीका ग्रंथियां, एक लाल धमाका जो आमतौर पर आपके धड़ पर खुजली नहीं करता है

पुरानी एचआईवी संक्रमण

आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली एचआईवी के साथ लड़ाई खोने के बाद, फ्लू जैसे लक्षण दूर हो जाएंगे। डॉक्टर इसे असम्बद्ध या नैदानिक ​​अव्यक्त अवधि कह सकते हैं। अधिकांश लोगों में ऐसे लक्षण नहीं होते हैं जिन्हें आप देख सकते हैं या महसूस कर सकते हैं। आपको एहसास नहीं हो सकता कि आप संक्रमित हैं और एचआईवी को दूसरों को पास कर सकते हैं। यह चरण 10 साल या उससे अधिक तक चला सकता है।

इस समय के दौरान, इलाज न किए गए एचआईवी सीडी 4 टी कोशिकाओं को मार देगा और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट कर देगा। आपका डॉक्टर यह जांच सकता है कि आपके पास रक्त परीक्षण के साथ कितने हैं (सामान्य गणना 450 माइक्रोलिटर प्रति 450 और 1,400 कोशिकाओं के बीच होती है)। जैसे ही संख्या बूँदें, आप अन्य संक्रमणों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं।

सौभाग्य से, दवाओं का एक संयोजन, या "कॉकटेल" एचआईवी से लड़ने में मदद कर सकता है, अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली का पुनर्निर्माण कर सकता है, और वायरस फैलाने से रोक सकता है। यदि आप दवा ले रहे हैं और स्वस्थ आदतें हैं, तो आपका एचआईवी संक्रमण आगे बढ़ नहीं सकता है।

एड्स

एड्स एचआईवी संक्रमण का उन्नत चरण है।आमतौर पर यह तब होता है जब आपका सीडी 4 टी-सेल नंबर 200 से नीचे गिर जाता है। यदि आपके पास "एड्स परिभाषित बीमारी" है, तो कपोसी के सारकोमा (त्वचा कैंसर का एक रूप) या न्यूमोकिस्टिस निमोनिया (फेफड़ों की बीमारी) जैसी एड्स के साथ निदान भी किया जा सकता है।
यदि आपको पता नहीं था कि आप पहले एचआईवी से संक्रमित थे, तो आप इन लक्षणों में से कुछ के बाद इसे महसूस कर सकते हैं:

3 महीने के बाद एचआईवी लक्षण

आपकी गर्दन या ग्रोइन में सूजन लिम्फ नोड्स बुखार जो 10 दिनों से अधिक समय तक रहता है, रात को पसीना, अस्पष्ट वजन घटाने, अपनी त्वचा पर बैंगनी धब्बे जो दूर नहीं जाते हैं, साँसों की कमी गंभीर, लंबे समय तक चलने वाले दस्त ब्रूस या खून बह रहा है आप समझा नहीं सकते हैं

एचआईवी/एड्स के उपचार

एड्स वाले लोग जो दवा नहीं लेते हैं केवल 3 साल तक जीवित रहते हैं, अगर उन्हें खतरनाक संक्रमण हो तो भी कम। लेकिन सही उपचार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ, आप लंबे समय तक जी सकते हैं।

राखी बांधने का सही तरीका, The right way to bind the rakhi

राखी बांधने का सही तरीका, The right way to bind the rakhi
राखी बांधने का सही तरीका

श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है.
शास्त्रों के अनुसार भद्रा समय में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों ही नक्षत्र समय अवधि में राखी बांधने का कार्य करना वर्जित होता है. 


रक्षा बंधन 2018  की तारीख़ और शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan 2018  Date and Time


इस वर्ष 2018 में रक्षा बंधन का त्यौहार 26 अगस्त, को मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 25 अगस्त 2018 को 15:17 से आरंभ होगा और 26 अगस्त 17:26 तक व्याप्त रहेगी. 25 को किंतु भद्रा व्याप्त रहेगी. इसलिए शास्त्रानुसार यह त्यौहार 26 अगस्त को संपन्न किया जाए तो अच्छा रहेगा. परंतु परिस्थितिवश यदि भद्रा काल में यह कार्य करना हो तो भद्रा मुख को त्यागकर भद्रा पुच्छ काल में इसे करना चाहिए. 26 अगस्त को रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय- 05:59 से 17:25 अपराह्न मुहूर्त- 13:39 से 16:12.


रक्षा बंधन का त्यौहार कैसे मनाएं

How to celebrate Raksha Bandhan


अपनी सुविधा के अनुसार बहन या भाई के घर राखी बांधी जाती है। ज्यादातर बहन भाई के यहाँ राखी बांधने जाती है। भाई के साथ ही भाभी , भतीजा , भतीजी को भी राखी बांधकर पारिवारिक रिश्ते को मजबूती दी जाती है। सुबह जल्दी नहा धोकर सुन्दर वस्त्र पहनकर रक्षा बंधन की थाली तैयार कर लें।


राखी बांधने का सही तरीका,

The right way to bind the rakhi


राखी के रुप में किसी रंगीन सूत की डोर को लिया जा सकता है. डोरी रेशम की भी हो सकती है. डोरी में सुवर्ण, केसर, चन्दन, अक्षत और दूर्वा रख कर इसकी पूजा करें, पूजा करते समय जितने भी समय के लिये पूजा की जा रही है, उतने समय में व्यक्ति को अपना ध्यान केवल पूजा में ही लगाना चाहिए.

डोरी की पूजा करने के बाद, अपने भाई को तिलक करते हुए, रोली, कुमकुम से टीका करें, तथा टीका करते हुए अक्षत का प्रयोग करना चाहिए. राखी दांहिने हाथ में बांधी जाती है.


राखी कैसे बांधे

rakhi kaise bandhe


राखी बांधते समय बहन का मुंह पश्चिम दिशा में और भाई का मुंह पूर्व दिशा में होना चाहिए। ये शुभ माना जाता है।

सबसे पहले भाई को रोली से टीका करें। टीका करने के लिए पहले अनामिका अंगुली ( Ring Finger ) में रोली लगाकर इससे भाई के मस्तक पर भौहों के बीच बिंदी लगाएं जहां से टीका शुरू होगा।

अब अंगूठे में रोली लगाकर ऊपर की तरफ टीका बना दें। रोली में पानी ना तो बहुत कम हो ना बहुत ज्यादा। ज्यादा पानी होने से टीका नाक तक फ़ैल जाता है।

अंगूठे व तर्जनी अंगुली से अक्षत ( चावल ) उठाकर टीके पर चिपका दें। इसमें तीन , पांच , सात या ग्यारह चावल चिपकते है तो शुभ मानते है।

भाई के दाएं हाथ की कलाई कर राखी बांधें। राखी का धागा बहुत टाइट या बहुत ढ़ीला नहीं होना चाहिए।
नारियल पर रोली से टीका लगाकर उस पर एक नोट ( श्रद्धा अनुसार ) रखकर भाई के हाथ में दें । भाई दोनों हाथ से नारियल पकड़े।

भाई को अपने हाथ से मिठाई खिलाएं।
बहन अपने भाई की तीन बार बलाइयां लें और भाई को उन्नति , प्रगति की और खुश रहने की शुभ कामना दें। बलाइयां लेने के लिए बहन अपने दोनों हाथों की अँगुलियों को भाई की कनपटी के पास टच करके फिर अपने कनपटी के पास टच करें।

दीपक वाली थाली से भाई की आरती उतारें
भाई अपनी बहन को उपहार , रूपये आदि दें। बहन को अपने हाथ से मिठाई खिलाएं। हमेशा सुख दुःख में साथ निभाने का वादा करें।

पेट दर्द का इलाज के 10 आसान देसी नुस्खे, Stomach Pain Treatment in hindi

पेट दर्द का इलाज के 10 आसान देसी नुस्खे,
पेट दर्द का इलाज के 10 आसान देसी नुस्खे
पेट दर्द में रामबाण का काम करती है बिना दूध की चाय, जानें ऐसे ही 10 तरीके
हम अक्सर बाहर का तेल-मसाला और नुकसानदायक खाद्य पदार्थों को खाते रहते हैं। ऐसे में हमारा पेट हर बार डाइजेस्ट नहीं कर पाता। जिसकी वजह से पेट दर्द की समस्या हो जाती है। मसालेदार खाने से अमाशय से आंत तक दर्द पैदा होने लगता है। अपच से होने वाले पेट दर्द से परेशान होने की जरूरत नहीं है आपको ऐसे कुछ रामबाण उपाय बता रहा है, जिससे आप आसानी से पेटदर्द से छुटकारा पा सकते हैं।

पेटदर्द के 10 आसान उपचार

बिना दूध की चाय पीने से भी पेट दर्द में आराम महसूस होता है।

बच्चों के पेट दर्द का घरेलू उपचार

अदरक के रस में शहद मिलाकर लेने से पेट का दर्द दूर हो जाता है।
आधा चम्मच नमक व आधा चम्मच हल्दी मिलाकर ठंडे पानी से लें। पेटदर्द में आराम मिलेगा

पेट दर्द का इलाज

अदरक का रस नाभी पर लगाने और हल्की मालिश करने से पेट दर्द में लाभ होता है।

पेट दर्द का इलाज के आसान देसी नुस्खे

एक गिलास पानी में थोड़ा सा मीठा सोड़ा डालकर पीने से पेट दर्द में फ़ायदा होता है।
आधा चम्मच अदरक का रस व आधा चम्मच नींबू के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर लेने से पेटदर्द का नाश होता है।

नाभि के पास पेट दर्द

एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच बेकिंग सोड़ा मिलाकर पीने से पेट दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
गर्म अच्छी तरह पके हुए चावलों को कॉटन के कपड़े में निथार कर पेट पर सेंक करें। इससे तुरंत लाभ मिलेगा।

पेट दर्द और गैस

सौंठ, जीरा और काली मिर्च को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ एक चम्मच मात्रा में लें। पेट दर्द में आराम मिलेगा।

पेट दर्द का घरेलू उपचार

एक ग्राम काला नमक व दो ग्राम अजवाइन पीसकर गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द में लाभ होता है।

सफेद बाल को काला करने के 5 नुस्खे balo ko kala karne ke 5 nuskhe

balo ko kala karne ke 5 nuskhe
balo ko kala karne ke 5 nuskhe

अगर आप सफेद होते बालों से परेशान हो चुके हैं तो इन. उपायों से आपके बाल काले हो सकते हैं और इनका कोई दुष्परिणाम भी नहीं होगा
उपाय जानने के लिये लेख को ध्यान से पढ़ें
कम उम्र में ही बाल सफेद होना अब आम बात हो गई है. जबकि पहले बाल सफेद होना बूढ़े होने की निशानी मानी जाती थी. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. आज के लोगों की दिनचर्या ऐसी हो गई है कि उनके खान-पान के साथ-साथ पूरा टाइम टेबल ही बदल गया है. फिर भी अगर आप अपने सफेद बाल को काल करना चाहते हो तो कुछ ऐसे उपाय हैं जिसकी मदद से अपने बाल को काला कर सकते हो

सफेद बाल को काला करने के ये 5 उपाय

1- सफेद बाल को काला करना है तो आप कच्चा पपीता ले लें और उसे पीस कर पेस्ट बना ले. अब इसे सप्ताह में दो से तीन बार अपने बालों पर लगाएं. दस से पंद्रह मिनट तक इसे बालों में ही लगे रहने दें उसके बाद केवल पानी ने धो ले. ऐसा करने पर आपके बालों का झड़ना भी बंद होगा और सफेद बाल भी धीरे-धीरे काले हो जाएंगे.

बाल काले करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

2- एलोवेरा का नाम तो सब जानते हैं. लेकिन इसकी उपयोगिता कुछ हो लोगों को पता है. बालों में एलोवेरा लगाने से बालों का झड़ना तो कम होता ही है साथ में बालों की सफेदी को भी कम करता है. बाल काला करने के लिए आप एलोवेरा जेल इस्तेमाल कर सकते हैं. या फिर एलोवेर का पौधा है तो उसके पत्ते के उपरी परत को हटा देने के बाद उसे अंदर के जेल को अपने बालों में लगाए. सफेद बाल जल्द ही काले हो जाएंगे.

बाल काले करने के आयुर्वेदिक उपाय

3- बालों के लिए आंवला का भी उपयोग किया जाता है. आंवला को मेंहदी और रीठा में मिलाकर इसको बालों पर लगाए. लगभग एक घंटे बाद बाल को पानी से धो लें. सप्ताह में दो-तीन दिन ऐसा करने से आपके सफेद बाल काले होने लगेंगे

सफेद बालों को काला करने की दवा

4 - आमतौर पर प्याज का उपयोग तो केवल खाने में ही प्रयोग किया जाता है लेकिन आपको बता दें कि प्याज का रस बालों में लगाने ने सफेद बाल भी काले होते हैं. इसको लगाने से न सिर्फ बालों की सफेदी में कमी आएगी बल्कि बालों को चमद भी देगा.

बाल काले करने का नेचुरल तरीका

5- सफेद बालों से मुक्ति पाने के लिए काली मिर्च भी कारगर उपाय है. काली मिर्च को पानी में डालकर उबाल ले और नहाते समय इसे नहाने वाले पानी में मिलाकर नहाए. कुछ ही दिनों बाद इसका असर दिखने लगेगा. सफेद बाल दिन पर दिन काले होते नजर आएंगे.

खांसी को आसानी से दूर करने का 11 नुस्खे, Ayurvedic nuskhe for cough in hindi

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज


किसी भी खांसी को आसानी से दूर करें ये 11 नुस्खे

मौसम बदलने के साथ हमारे शरीर का टेम्परेचर भी ऊपर-नीचे होता है। ठंडा-गर्म खाना या फिर किसी एलर्जी के कारण हमें खांसी की समस्या हो जाती है। खांसी होने पर शुरुआत में हम इग्नोर करते है, लेकिन जब यह आपके लिए परेशानी बढ़ा देती है, तो आप डॉक्टर के पास या दवा लेते है। ऐसे में क्यों न हमें खांसी के शुरुआत में ही घरेलू नुस्खे अपनाकर इसे जड़ से मिटा दें। तो चलिए आपको खांसी को आसानी से दूर करने के 11 नुस्खे बता रहा है, जिसे अपनाकर आप भी जल्द ठीक हो सकते हैं।

खांसी का बढ़ियां घरेलू उपचार

रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। इससे खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।
सुबह-शाम चने बराबर मात्रा में भूनी हुई फिटकरी का पाउडर लेने से भी खांसी की समस्या दूर हो जाती है।

खांसी की बेस्ट नुस्खे

शहद और कच्चे प्याज का रस समान मात्रा में लेकर मिलाएं। इसे 3 से 4 घंटे के लिए किसी अंधेरे वाले स्थान पर रख दें। बाद में इसका सेवन करें, यह खांसी की दवाई के रूप में सटीक कार्य करता है।

खांसी की बेस्ट इलाज

धनिया, जीरा और बच बराबर मात्रा लेकर मिलाएं और काढ़ा बना लें। सर्दी और खांसी से परेशान बच्चों को खाने के बाद लगभग 10 ML तक यह काढ़ा पीने के लिए दें। खांसी की समस्या दूर हो जाएगी।

लौंग को घी में सेंककर मुंह में रखने से बार-बार खांसी नहीं आती है।

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज

लगभग 2 कप पानी मे अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े और कुछ पत्तियां इमली की डालें। इसे तब तक उबालें जब तक कि ये एक कप न रह जाए। इसमें 4 चम्मच शक्कर डालकर धीमी आंच पर कुछ देर और उबालें और फिर ठंडा होने दें। ठंडा होने पर इसमें 10 बूंद नींबू रस की डाल दें, हर तीन घंटे में इस सिरप का एक बार सेवन करने से खांसी छू-मंतर हो जाती है।
खांसी होने पर हल्दी की छोटी गांठ मुंह में रख कर चूसें। इससे जल्द आराम मिलता है।

खांसी का रामबाण इलाज

तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में रामबाण दवा की तरह काम करती है।

खांसी का आयुर्वेदिक नुस्खे

पानी में गुड़, अदरक, नींबू का रस, अजवाइन, हल्दी को बराबर की मात्रा में डालकर उबालें और फिर इसे छानकर पिएं। खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलेगा।

सूखी खांसी का बढ़ियां घरेलू उपचार

अदरक, लौंग, हींग और नमक को मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां तैयार करें। दिन में 3-4 बार एक-एक गोली चूसें। सूखी खांसी में यह असरदार है।
मुलेठी की चाय बनाकर पीने से भी खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।