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आधे घंटे में ब्रेन मेमोरी इम्प्रूव करिये

मेमोरी ट्रेनिंग से पहले जो बात मुझे जानकारी में आई थी वो स्पीड रीडिंग थी। ये बहुत ही सामान्य सी बात है कि अगर हम अपनी वर्तमान पढ़ने और समझने की स्पीड को दो गुणा कर दे तो हमारा दिमाग 4 गुणा तेजी से काम करने लगेगा । तो पढ़ने की स्पीड को 2 गुणा बढ़ाकर आप ये शक्ति बढा सकते हैं। आज के मेमोरी ट्रेनिंग वर्कशॉप में ये अभ्यास करेंगे। अभी बस में हुन और हो सकता है रात को क्लास के समय भी बस में रहूँ। टैब तक ये पोस्ट पढ़िए और  प्रैक्टिस करिये।

अभी यूरोप और अमेरिकन देशों में इसपर काफी रिसर्च हुआ है कि पढ़ने की स्पीड कैसे तेजी के साथ बढ़ा सकते हैं। कई सॉफ्टवेयर और एप्प भी बनाये गए हैं। कई ट्रेनिंग स्कूल भी खोले गए है। मैने के एप्प और महंगे सॉफ्टवेयर से प्रैक्टिस की और देखा कि क्या परिणाम आते हैं। अंत मे उन सभी को और उनसे उत्पन होने वाली समस्या को दूर करने के लिए कुछ एक्सरसाइज डेवलप किया। ये आसान है सस्ते है। सस्ता मतलब खर्च तो आता ही नही है। वैसे सबसे सस्ते सॉफ्टवेयर का मूल्य भी आपको 120 डॉलर या 7000 रुपये से ज्यादा है। उस से अच्छे परिणाम आपको मेरे 3 अभ्यास से मिल जाएंगे।
पहला है nk writing
दूसरा है eye fixation
तीसरा है mental dictation

आप सभी को nk writing  और mental dictation के बारे में जानकारी मिल चुकी है इस पोस्ट में मेरे सबसे भरोसेमंद और पुराने तकनीक eye fixation के बारे में जानिए । इसको सबसे पहले राज बापना की किताबो में पढ़ा था । मेरे कई विद्यार्थी इस तकनीक का प्रयोग करके अपने पढ़ने और समझने की स्पीड को आधे घंटे में ही कई गुणा बढ़ा चुके है।

Eye फिक्सेशन

इसमे आपको जरूरत होगी पेन या पेंसिल की पढ़ने के लिए एक न्यूज़पेपर की एक टाइमर की।

स्टेप 1
सबसे पहले अपनी मौजूदा पढ़ने की स्पीड नापिये। घड़ी या मोबाइल में 1 मिनट का टाइमर लगाइये।
किसी दोस्त की मदद ले सकते है। टाइमर स्टार्ट होते ही पेपर या जो भी आपके पास पढ़ने के लिए है उसे पढ़िए। और जब एक मिनट हो जाये तो रुक जाइये। इस एक मिनट में आपने जितने शब्द पढ़े हैं उनको गिनिए। ये शब्द की संख्या ही आपकी स्पीड हुई। मान लीजिए कि आपने 320 शब्द पढ़े हैं इस एक मिनट में तो आपकी पढ़ने की स्पीड 320 शब्द प्रति मिनट (wpm) हैं। अलग अलग विषय और भाषा के अनुसार ये स्पीड में अंतर होगा। पर फिलहाल इस प्रैक्टिस में ये आपकी स्पीड है।

स्टेप 2
अब आपको एक पेज पढ़ना है। पर कुछ नियम है।

बोलकर नही पढ़ें। मन मे ही पढ़ें।
जीभ को दाँत के बीच मे दबाकर रखना है पढ़ने के दौरान।
बच्चे जिस तरह पढ़ते हैं अँगुली लाइन पर रखकर उसी तरह आपको पेन या अंगुली पेज पर रखकर पढ़ना है।एक लाइन पढियेगा तब ही अंगुली उठानी है।लाइन के बीच मे अंगुली  उठनी नही चाहिए।

इस तरह पूरा पेज पढ़िए।
स्टेप 3
आब आपको इसी पेज को 4 बार फिर से पढ़ना है पर उल्टा  पेज करके पढ़ना है।
पेज को ऐसे रखिये की नीचे वाला हिस्सा ऊपर और ऊपर वाला हिस्सा नीचे की ओर हो जाये।
अगर w लिखा है तो आपको अब वो m दिखेगा ।
इसके पहले स्टेप में आप जैसे पढ़ रहे थे उसी तरह पढेंगे पर पेज उल्टा रहेगा।
आप उसी पेज को पढेंगे जिसे इसके पहले पढ़ा था पर 4 बार उल्टा कर के पढ़ना है।सभी नियम पहले जैसे ही हैं।
आपको जल्दी जल्दी पढ़ना है जैसे कि आपको हड़बड़ी है और कहीं जाना है। अगर किसी शब्द को आप हड़बड़ी में नही समझ पाए उसपर अटकिये नही आगे बढ़ जाये।

स्टेप 4
अब आपको एक बार फिर से पेज सीधा रखकर पढ़ना है। तेजी के साथ। ये अंतिम बार आप पढ़ रहे हैं। स्टेप 2 के नियम ही रहेंगे हमेसा। स्टेप 4 और स्टेप 2 समान है। कोई भी अंतर नही हैं। पर इस बार एक पेज पढलेने के बाद आपको रुकना नही है। इस तरह ही आपको लगातार 5 मिनट तक पढ़ते जाना है। नए पेज लीजिये। पर 5 मिनट पढ़िए। इन 5 मिनट में जितना ज्याद हो सके उतना पढ़िए।

स्टेप 5
स्टेप 1 की तरह स्पीड चेक करना है। आपको अपना नया स्पीड को wpm में चेक करना है। आपकी स्पीड बढ़ी हुई होगी।

प्रातिदिन एक बार ये अभ्यास करिये। nk writing और मेन्टल डिक्टेशन भी करिये ।ये 3 साथ मे करके आप अपनी ब्रैंन पावर और मेमोरी को कई गुणा शार्प कर सकते हैं।

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हस्तमैथुन का दुष्परिणाम


हस्तमैथुन के दुष्परिणाम बहुत ही ज्यादा है यो आप को बाद में मालूम पड़ते है।यो भी इस बुरी आदत से पीड़त है,पहले तो वोह इस आदत को छोड़ दे और औरो को भी इस आनंददायक बुरी आदत के दुष्परिणामो की जानकारी दे।यो इस बुरी आदत से छुटकारा पाना चाहते है और अपनी खोई हुई शक्ति,ऊर्जा को पाना चाहते है यह योग उन के लिए बहुत ही लाभकारी है।

१. मकरध्वज वटी एक गोली + मन्मथ रस एक गोली + त्रिबंग भस्म १२५ मिग्रा. इन औषधियों की एक खुराक बना लें व दिन में इस तरह की तीन खुराक दूध के साथ लीजिए।

२. पुष्पधन्वा रस एक गोली दिन में दो बार शहद से लीजिये।
ध्यान रखें कि कब्जियत न रहे यदि कब्ज हो तो आवश्यकतानुसार त्रिफला चूर्ण ले लिया करें।

शरीर के संकेतो को अनदेखा ना करें। हो सकता है बीमारी


हमारा शरीर खुद एक डॉक्टर होता हैं। हर आने वाली बीमारी या शरीर में होने वाले परिवर्तन को वो खुद बता देता हैं लेकिन हम शरीर के इन संकेतों को अनदेखा कर देते हैं। अगर हम अपने शरीर के इन संकेतों को वक्त रहते समझ जाएं तो बहुत सी बीमारियों का सही समय पर इलाज करा सकते हैं। जैसे कुछ के बारे में मैं यहाँ जानकारी दे रही हूँ-

• जीभ पर सफेद या भूरे रंग का मैल जमना पेट की खराबी को बताता है।

• निमोनिया, प्लूरिसी आदि रोग में नाक के नथुने तेजी से फड़कते हैं।

• अधिक थकावट या पुराने कब्ज में आखों के नीचे कालापन आ जाता है।

• कमजोरी, खून की कमी, ल्यूकोरिया (श्वेत-प्रदर) आदि में आंखों के चारों तरफ कालापन आ जाता है।
• किडनी के कार्य में रुकावट आने पर आंखों के नीचे सूजन आ जाती है।

• बुखार आने पर होठों के कोने पर सफेद छाले हो जाते हैं।

• पीरियड्स कम आने पर गालों पर झाइयां हो जाती हैं।

• फेफड़ों (lungs) में इन्फेक्शन होने पर गाल लाल हो जाते हैं।

• टायफाइड में शाम को शरीर का तापमान एक डिग्री बढ़ जाता है।

• पेट में कीड़े होने पर बच्चे सोते समय दांत किटकिटाते हैं या सोते समय बिस्तर पर यूरिन कर देते हैं।

• पेट में कीड़े होने पर बच्चों को नाक और मलद्वार में खुजली होती है।

• तिल्ली बढ़ने पर जीभ का रंग सफेद हो जाता है।

• आंतों और पेट के रोग में जीभ पर छाले या घाव हो जाते हैं।

• पेट में कीड़े होने पर चेहरे पर हल्के सफेद रंग के धब्बे हो जाते हैं।

• लो ब्लडप्रेशर और खून की कमी होने पर आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है।

• महिलाओं में यूट्रस (बच्चेदानी) में रोग होने पर हाथ की उंगलियों के पीछे कालापन आ जाता है।

• अधिक वीर्यनाश से गाल पिचक जाते है।

• पेट के रोग या किसी लंबी बीमारी में होंठ फटने लगते हैं।
• हाइपोथायरॉइडिज्म (थाइरॉइड ग्लैंड का हरमोन कम निकलना) में गले में सूजन आ जाती है।

यदि आप बड़ी बीमारी से बचना चाहते हैं तो अपने शरीर के छोटे से छोटे परिवर्तन को भी अनदेखा न करे।

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शिलाजीत के सेवन से आ सकती है आपकी जिंदगी में खुशियाँ


शिलाजीत के सेवन से आ सकती है आपकी जिंदगी में खुशियाँ 
स्वाद में शिलाजीत काफी कड़वा, कसैला, उष्ण और वीर्य पोषण करने वाला होता है। देखने में यह तारकोल की तरह बेहद काला और गाढ़ा होता है जो सूखने के बाद एकदम चमकीला रूप ले लेता है।

इसके सेवन के न केवल सेक्स पॉवर बढ़ती है वरन इसके शरीर पर कई अन्य प्रभाव भी होते हैं जिनकी सहायता से बुढापा भी दूर रहता है।

मधुमेह, स्वप्नदोष, यौन दुर्बलता, शारीरिक दुर्बलता दूर करने के लिए शिलाजीत का प्रयोग उत्तम माना जा सकता है।

शिलाजीत के प्रकार
शिलाजीत के चार प्रकार होते हैं- रजत, स्वर्ण, लौह और ताम्र। हर प्रकार की शिलाजीत के गुण व लाभ अलग-अलग हैं।

रजत शिलाजीत पित्त तथा कफ के विकारों को खत्म करता है।
स्वर्ण शिलाजीत वात और पित्तजनित बीमारियों के लिए असरदार है।
लौह तथा ताम्र शिलाजीत कफ से हुए रोगों के इलाज के लिए कारगर दवा है।
आइये जाने कैसे शिलाजीत दे सकता है आपको खुशियां

उम्र घटाए
उच्च ऊर्जा और जैव उत्पादक गुणों से भरी शीलाजित नई कोशिकाओं को दुबारा बनाती है और पुरानी कोशिकाओं को मेंटेन करती है, जिससे उम्र कम लगती है।

दिल के सेहत का भी रखता ख्याल
शिलाजीत दिल के सेहत के लिए भी अच्छा है। दिल के साथ-साथ यह रक्त चाप को भी नियंत्रित करता है।

पाचनतंत्र के लिए
शिलाजीत शरीर के पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। इसके सेवन से अपच, गैस, कब्ज और पेट के दर्द जैसी बिमारियां खत्म होती हैं।

शरीर की सूजन मिटाए
यह आपके स्‍वास्‍थ्‍य को बना सकती है। अगर आपके शरीर में दर्द, सूजन या गठिया रोग है तो, शिलाजीत को रोजाना प्रयोग करें।


ऊजा बढ़ाए
शिलजीत के सेवन से शरीर में तुरंत ही ऊर्जा आती है। इससे प्रोटीन और विटामिन ज्‍यादा मात्रा में मिलता है।

किडनी और अंत:स्राव ग्रंथि
शिलाजीत के सेवन से किडनी, पैनक्रियाज और थायराइड ग्लैंड भी सही से काम करते हैं। यह ब्लड सर्कुलेशन के लिए भी अच्छा है।

मधुमेह ठीक करे
अच्‍छी डाइट और शिलाजीत का नियमित सेवन ब्‍लड शुगर लेवल को बैलेंस कर के मधुमेह को कंट्रोल करता है।

दिमाग की शक्ति बढाए
ये तनाव , थकान को मिटा कर नर्वस सिस्टम को मज़बूत बनाती है। यह याददाश्त को तेज बनाती है और ध्‍यान को केन्‍द्रित करने में मदद करती है।

तनाव दूर करे
यह तनाव पैदा करने वाले हार्मोन को बैलेंस करती है और शरीर तथा दिमाग को शांत और स्‍वस्‍थ बनाती है।

एंटी एजिंग
शिलाजीत के सेवन से एजिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। अगर आप समय से पहले बूढ़े या थके-थके नजर आ रहे हैं तो शिलाजीत का सेवन करें। इसमें 85 फीसदी से ज्यादा मिनरल्स पाए जाते हैं जो बिमारियों को दूर भगाते हैं और रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करते हैं। यह हड्डियों में कैल्शियम बनाकर हड्डियों को मजबूत बनाती है।

पुरुष यौन शक्ति में वृद्धि
शिलाजीत पुरुष प्रजनन प्रणाली और कामेच्छा को बढ़ाती है। यह नपुंसकता और प्रीमिच्‍योर इजैक्‍यूलेशन की समस्‍या को दूर करती है।
हड्डियों की बीमारी दूर करे: यह हमारी हड्डियों में मजबूती भरती है और गठिया तथा जोड़ों आदि के दर्द से राहत दिलाती है।

रक्‍त शुद्धी
यह नसों में खून के सर्कुलेशन को बढाती है और बीमारी को दूर रखने में मदद करती है।

शिलाजीत के सेवन में बरते सावधानियां
शिलाजीत का सेवन दूध और शहद के साथ सुबह सूयोर्दय से पहले कर लेना चाहिए। इसके ठीक प्रकार पाचन के बाद अर्थात तीन-चार घंटे के बाद ही भोजन करना चाहिए।

गठिया
जो मरीज गंभीर गठिया से ग्रस्त हों उन्हें शिलाजजीत सेवन से बचना चाहिए। ऐसे मरीजों को शिलाजीत के सेवन से खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाने का खतरा रहता है।

गर्भावस्था
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली औरतों को भी इसके सेवन से परहेज करना चाहिए।

एलर्जी
कभी-कभी शिलाजीत के सेवन से एलर्जी, दिल की धड़कन तेज और उल्टी भी होती है।

>>उपवास के फायदे (Health Benefits of Fasting)

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कामदेव चूर्ण - नाम ही काफी है काम शक्ति के लिए बेजोड़ चूर्ण।


कामदेव चूर्ण :- नाम ही काफी है काम शक्ति के लिए बेजोड़ चूर्ण।

सामग्री
गोखरू ,पान की जड़ ,शतावर, विदारीकंद 40- 40 ग्राम कौंच के बीज ,उटंगन के बीच ,खरैटी के बीज ,अश्वगंधा 120-120 ग्राम छोटी इलायची ,तेजपत्ता, पिपली, आमला, केसर, लाल चंदन, बालछड़, नागकेसर ,लौंग, गिलोय, तवासीर असली ,चातरजात (दालचीनी तेजपत्र नागकेसर छोटी इलायची) 5 - 5gm

कामदेव चूर्ण बनाने की विधि :--
इन सभी चीजों को लेकर पाउडर कर ले , सिंबल का काढ़ा बनाकर 21 भावना दो। फिर इसी तरह से कुशा के रस की 21 भावना दो ।(भावना का मतलब होता है जिस जड़ी बूटी की भावना देनी होती उसका रस निकाल कर यहां काढ़ा बनाकर दवाई को उस में भिगोकर रख तो जब वह सूख जाए तब एक भावना हो जाएगी) जब यह पाउडर बिल्कुल सूख जाए ,तब इसके वजन जितनी मिश्री डालकर अच्छे से मिक्स कर लो ,फिर किसी कांच के बर्तन में डाल कर रख लो।

कामदेव चूर्ण के फायदे:--
यह चूर्ण शीतल, पौष्टिक और कामोत्तेजित हैं । यह चूर्ण उन लोगों के लिए अमृत सम्मान काम करता है जिन लोगों ने बचपन में अपनी बुरी आदतों के कारण अपने वीर्य कान नाश कर लिया हो । ऐसे लोगों के लिए यह एक वरदान के समान है।कामदेव चूर्ण के सेवन से हमारे शरीर में जो अधिक गर्मी होती है वह सम्मानीय हो जाती है । जिससे हमारी कामवासना शांत हो जाती है और वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

आजकल बाजार में काम उत्तेजित दवाइयों का बहुत प्रचलन शुरू हो चुका है । सोशल मीडिया, फिल्में और सही संगत ना होने की वजह से अक्सर बच्चे छोटी उम्र में ही काम संबंधों की तरफ आकर्षित हो जाते हैं और इन दवाइयों का सेवन करना शुरू कर देते हैं । जिस वजह से उनकी इंद्रियों का पूरा विकास होने से पहले ही उनका ब्रह्मचार्य टूट जाता है । काम संबंधों  की सही समझ ना होने के कारण अब अपनी काम ऊर्जा कोई नष्ट कर बैठते हैं। उसके बाद वह अपने मन में नामर्द होने का भरम पैदा कर लेते हैं। किसी अच्छे वैद्य या डॉक्टर से सलाह मशवरा करने की बजाए । वह  so called सेक्स स्पेशलिस्ट के चक्कर में फस जाते हैं । वह उन्हें गर्म और उत्तेजित  दवाइयां दे कर  उनकी कामवासना और भी तीव्र कर देते हैं । ऐसे रोगियों के लिए कामदेव चूर्ण अमृत समान  है । जो अधिक काम वासना को शांत करता है।यह चूर्ण वीर्य को बहुत ताकतवर और मूत्र रोगों को दूर करता है । इसके सेवन से चेहरे पर निखार आ जाता है । कमजोर पड़े हुए शरीर भी तंदुरुस्त हो जाते हैं और कामदेव जैसा रूप आ जाता है।

कृपया इस्तेमाल करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ले।

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एक गिलास ड्रिंक से अपने लीवर को करिये पहले जैसा ताकतवर

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अच्छी जीवनशैली और स्वस्थ आहार ही दो ऐसी चीज़ें हैं जो जिगर (liver) को स्वस्थ रखने के लिए बेहद ज़रूरी हैं |लेकिन आज कल की भाग दौड़ की जिंदगी में हम बहुत सारी बुरी आदतों जैसे बाहर का खाना ,सही समय पर भोजन ना करना आदि के शिकार हो जाते हैं जिस से हमारे शरीर में बहुत सारे विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं|

ऐसे में हमें ज़रूरत है लिवर की सेहत का ध्यान रखने की और शरीर से विषाक्त पदार्थों को भर निकालने की |हमारे जिगर को लगातार detoxify करने की जरूरत है क्योंकि ये शरीर में detoxification, और प्रोटीन के अवशोषण का काम करता है |

आज हम आपको इसी ड्रिंक बताएँगे जो जिगर को detoxify करेगा जिगर की किसी भी बिमारी को सामने आने में बहुत वक़्त लग जाता है इस लिए ज़रूरी है के लीवर को साफ किया जाये और सवस्थ भोजन खाया जाये |जिगर के सही तरीके से काम न करने की वजह से बहुत सारी सेहत से जुडी समस्याएँ पैदा हो जाती हैं |

जिगर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करना बहुत ही आसान है , और आप इस आसान ड्रिंक के इस्तेमाल से आसानी से जिगर को साफ कर सकते हैं

ड्रिंक बनाने की सामग्री
3 निम्बू का रस
2 संतरों का रस
कुछ पुदीने के पत्ते
1 लीटर साफ पानी

ड्रिंक बनाने की विधि
पानी को किसी बर्तन में निकाल के उबलने के लिए रख दें | पुदीने के पत्ते पानी में डालें और इसे 5 मिनट तक उबालें | उबलने के बाद इसे गैस से हटा लें और ठंडा होने के लिए रख दें | ठंडा होने के बाद निम्बू और संतरे का रस मिला लें निम्बू के छिलके को भी पीस कर इस में डालें | स्वाद के लिए इसमे थोडा शहद मिला लें |

आप इसे ठंडा या गर्म जैसे भी आपको पसंद हो पी सकते हैं | ये आपके जिगर को साफ रखता है और पेट और पाचन तन्त्र के लिए भी बहुत फायदेमंद है |

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इसको दो महीने तक सेवन करने से नामर्द भी मर्द बन जाता है


नपुंसकता 
सफेद मूसली और अश्वगंधा और शतावर कौंच के बीज को बराबर मात्रा में पीसकर इसका चूर्ण बना लें और लगातार दो महीने तक सुबह शाम एक एक चम्मच इस मिश्रण का गुनगुने मीठे दूध के साथ खाएं 2 महीने के अंदर अंदर आप की नपुसंकता की बीमारी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी!!

 लिंग वृद्धि लिंग को बढ़ाने के लिए
असगंधा, शालपर्णी को तेल में पकाकर लिंग पर लगातार दो महीने तक इसकी मालिश करने से लिंग की लंबाई और मोटाई बढ़ जाएगी ! असगंध, बच, शतावरी आदि को तिल में अच्छी तरह से पकायें। सब औषधियों के जल जाने पर ही उसे आग से उतारे और लिंग पर मालिश करें। कम से कम लिंग पर 15 मिनट मालिश करें और रोज सोने से पहले आपका दिन पूरा कड़क हो जाएगा टाइट हो जाएगा टाइटनेस आपके लिंग में भरपूर आएगी!! आपकी अंदर से कुछ इच्छा शक्ति बढ़ेगी आपका स्टेमिना पड़ेगा यह सेवन करने के बाद! का छोटापन दूर हो जाता है।

स्तनों के आकार में वृद्धि  
शतावर और अश्वगंधा को मिलाकर स्कोर 10 दिन तक गेहूं की टंकी में दबाकर फिर इसे निकाल कर हर रोज एक एक चम्मच सुबह शाम पानी के साथ खाने से किसी भी महिला के सपनों में विकास हो सकता है और उसके स्तन पहले से सुडौल व मोटे हो सकते हैं!
असंगध नागौरी, गजपीपल और बच आदि को बराबर लेकर पीसकर चूर्ण बना लें, फिर मक्खन के साथ मिलाकर स्तनों पर लगायें सस्तन काफी सुंदर एवं टाइट होंगे!

 स्तनों को सुंदर सुडोल करना 
असगंध और शतावर को बारीक पीसकर पांच-पांच ग्राम मिशन बनाकर उसे शहद के साथ खाने से सतन सुडोल बनते हैं!!

 वीर्य रोग में 50 ग्राम अश्वगंधा 50 ग्राम कौंच के बीज 50 ग्राम शतावर 50 ग्राम मूसली और 50 ग्राम सालमपंजा और 50 ग्राम सालम मिश्री 20 ग्राम सफेद मिश्री 30 ग्राम शिलाजीत 1 ग्राम स्वर्ण भस्म इन सबको मिलाकर अच्छे से बना लें चूर्ण टाइमिंग फिर इसका उपयोग एक एक चम्मच सुबह शाम दूध के साथ करो वीर्य गाढ़ा हो जाएगा ! और आपकी सेक्स टाइमिंग ऑटोमेटिकली बढ़ जाएगी!!

योनि रोग 
सौ ग्राम दूध में 20 ग्राम अश्वगंधा मिलाकर अच्छे से गैस की हज पर दूध को पकाएं और जब वह ठंडा हो जाए तो उसमें दो चम्मच शहद के डालकर दूध के साथ उसे खाएं आप के सभी प्रकार के यौन रोग इसे समाप्त हो जाएंगे!

>>सुंदरता के लिए होमियोपैथी दवाएँ, 

>>तनाव मुक्ति व सकारात्मक बनने के सरल उपाय

>>वीर्य को जल्दी गिरने से रोकने और सम्भोग का समय को बढ़ाने के घरेलु उपाय

>>इस पेड़ का सिर्फ़ 1 पत्ता मात्र 3 दिन में दमा या अस्थमा को जड़ से सफाया करता है

>>चलते-फिरते इन छोटे-छोटे उपायों को आजमाएं और खूबसूरत बन जाएं.....

 गर्भधारण मैं अश्वगंधा का उपयोग 
अश्वगंधा का चूर्ण 50 ग्राम, पानी 2 लीटर गाय का दूध 3 50 मिलीलीटर तीनों को हल्की आंच पर पकाकार मिश्री और 6 ग्राम गाय का घी मिलाकर सेवन करें! स्त्री अवश्यगर्भ धारण करती है।

अश्वगंधा का चूर्ण, गाय के घी में मिलाकर मासिक-धर्म स्नान के पश्चात् प्रतिदिन गाय के दूध के साथ या ताजे
पानी से 4-6 ग्राम की मात्रा में 1 महीने तक निरंतर सेवन करने से स्त्री गर्भधारण अवश्य करती है।

 श्वेतप्रदर  
अश्वगंधा के एक चम्मच को गुड के साथ लेने से बहुत लाभ होता है!! सफेद मूसली और अश्वगंधा को 10 10 ग्राम मिलाकर दूध के साथ पीने से स्टेमिना बढ़ता है और नपुसंकता दूर होती है!


 कमजोरी 
अश्वगंधा के सेवन से कमजोर से कमजोर व्यक्ति भी शक्तिशाली बन जाता है एक चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण शहद में मिलाकर खाने से शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है!!

अश्वगंधा का चूर्ण 10 ग्राम चूर्ण में 5 ग्राम शहद और 5 ग्राम शिलाजीत मिलाने से बुड्ढा आदमी भी जवान जैसा महसूस करने लग जाता है अंदर से स्टेमिना बढ़ जाता है और जोश आता है शरीर की सारी कमजोरी दूर हो जाती है!!

 बांझपन दूर करना 
असगंध, नागकेसर और गोरोचन इन तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस कर सेवन करने से बांझपन की बीमारी खत्म हो जाती है और आप आराम से बच्चा पैदा कर सकते हो!

 गर्भधारण 
असगंध के काढे़ में दूध और घी मिलाकर 15 दिनों तक पिलाने महिला गारंटी के साथ गर्भधारणा हासिल कर सकती है!

 मासिक-धर्म 
अगर आप का मासिक धर्म सही समय पर नहीं आता है तो 15 ग्राम गिलोय 10 ग्राम दालचीनी और 20 ग्राम अश्वगंधा और 5 ग्राम कौंच के बीज इन सबको पीसकर लगातार खाने से आप का मासिक धर्म बिल्कुल सही समय पर आएगा!
 

इस पौधें की पत्ती का रस पीलिया, पथरी, मधुमेह,दस्त और अजीर्ण का जड़ से सफाया करता है


छुई मुई का पौधा अपने आप में थोडा अजीब तरह का पौधा है साथ ही छुई मुई का दूसरा नाम लाजवंती भी है. इसके इन दोनों नामों के पीछे भी कारण है, जैसे ही हम इस पौधे को छूते हैं ये खुद को सिकोड़कर छोटे रूप में बदल जाता है. उस समय ऐसा प्रतीत होता है मानो ये हमसे शर्मा रहा होऔर यही कारण है कि इसका नाम लाजवंती पड़ा.

छुई मुई का वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदींका भी है जबकि देसी नाम लजोली भी है. इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं, जो देखने में बहुत आकर्षक और सुन्दर प्रतीत होते हैं.

छुई-मुई के क्षुप (पौधे) छोटे होते हैं। यह भारत में गर्म प्रदेशों में पाया जाता है। इसका पौधे जमीन पर फैला हुआ या थोड़ा सा उठा होता है। इसके 30 से 60 सेमी तक के क्षुप पाये जाते हैं। इसके पत्ते चने के पत्तों के समान होते हैं।

छुई-मुई के फूलों का रंग हल्का बैंगनी होता है और इस फूल के ही ऊपर गुलाबी रंग के 3 से 9 सेमी लंबी फली लगती है जिसमें 3 से 5 बीज होते हैं। बारिश के महीनों में छुई-मुई में फल लगते हैं। छुई-मुई की खासियत है कि इसको छूने से ही यह सिकुड जाती है। इसकी अनेक प्रजातिया होती हैं।

विभिन्न रोगों में प्रयोग
1. मधुमेह

छुई-मुई की जड़ का काढ़ा 100 मिलीलीटर बनाकर रोजाना सुबह-शाम देने से मधुमेह का रोग ठीक होता है।

2. अजीर्ण
छुई-मुई के पत्तों का 30 मिलीलीटर रस निकालकर पिलाने से अजीर्ण नष्ट हो जाता है।

3. पीलिया
छुई-मुई के पत्तों का रस निकालकर पीने से कामला या पीलिया रोग दो हफ्ते में दूर हो जाता है।

4.पथरी
छुई-मुई की 10 मिलीलीटर जड़ का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।
लाजवन्ती (छुई-मुई) के पंचांग का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीयें। इसके काढ़े से पथरी घुलकर निकल जाती है तथा मूत्रनलिका पर आई सूजन मिट जाती है।

5. रक्तातिसार (खूनी दस्त)
छुई-मुई की जड़ का चूर्ण 3 ग्राम, दही के साथ रोगी को खिलाने से खूनी दस्त जल्दी बंद होता है।
छुई-मुई की जड़ के 10 ग्राम चूर्ण को 1 गिलास पानी में काढ़ा डालकर बनायें जब थोड़ा सा रह जाये तब बचे काढ़े को सुबह-शाम पिलाने से खूनी दस्त बंद हो जाता है।

6.पेशाब का अधिक आना
छुई-मुई के पत्तों को पानी में पीसकर नाभि के निचले हिस्से में लेप करने से पेशाब का अधिक आना बंद हो जाता है।

>>इस पेड़ का सिर्फ़ 1 पत्ता मात्र 3 दिन में दमा या अस्थमा को जड़ से सफाया करता है

>>चाहे पुरुष हो या महिला ये जड़ीबूटी कर देगी आपकी हर समस्या का समाधान

>>किडनी रोग की महोषधि, 

चाहे पुरुष हो या महिला ये जड़ीबूटी कर देगी आपकी हर समस्या का समाधान


यह जड़ी बहुत ही उपयोगी है. यह सम्पूर्ण भारत में क्लाइंबर (climber) की तरह जो जंगल के क्षेत्रों पाई में जाती है. कई घरों और  निजी खेती में भी शतवारी का पौधा पाया जाता है. इस पौधे की जड़ अपने आप में अनेक औषधीय गुण लिए हुए है.

इस पर सफेद रंग के खुश्बुदार फूल और लाल रंग के बहुत छोटे फल लगते हैं. ये फल वास्तव में ज़हरीले होते हैं. इस पौधे की जड़ी औषधीय रूप में आयुर्वेद में प्रयोग होती है. यह अपने औषधीय गुणों के कारण पुरुषो और महिलाओ की हर समस्या का समाधान करने में कारगर है।

शतावरी के फायदे :
विश्व के कई क्षेत्रों में इस औषधि का प्रयोग घाव की सफाई के लिए किया जाता है. शतवारी फेफड़ों (lungs) में जलन और इनमें दमा जैसी दिक्कत से आई तकलीफ़ के कारण आए शोथ को शांत करने में भी सहयता करती है.

यदि पित्त के बढ़ने से शरीर में ख़ासकर रक्त या शरीर के रसों में यह तकलीफ़ उत्पन्न हुई हो तो शतवारी का प्रयोग अत्यंत सहायक है.

यह मस्तिष्क के स्नायु तंत्र की नसों को भी आराम और पोषण प्रदान करती है.

शरीर में जकड़न, दर्द, अनिद्रा इत्यादि मानसिक तनाव एवं वातज विकृति से उत्पन्न समस्यायों को भी शतावरी के सेवन से लाभ मिलता है.
शतावरी से ओजस का निर्माण भी होता है जो शरीर, मन और बुद्धि को रूप से उर्जा प्रदान करता है.

यह रोग प्रतिकारक क्षमता को बढ़ाने के लिए भी सहायक है. वास्तव में यह औषधि एक रसायन है जो शरीर को हर प्रकार से पुष्टि प्रदान करती है.

इस औषधि के द्वारा मन में सात्विक भावनाएँ भी जागृत होती हैं. इसके सेवन से आध्यात्मिक प्रेम फलीभूत होता है.

यह पुराने बुखार को ठीक करने में भी समर्थ है.

माहवारी के शुरू होने से लेकर माहवारी के समाप्त हो जाने तक शतावरी के औषधीय गुण महिलायों को लाभ देती है.

कैसे करे इसका सेवन :

शुरू में केवल इस औषधि का एक चौथाई चम्मच लेना शुरू करें. धीरे-धीरे जैसे-जैसे शरीर में इस औषधि के प्रति सामंजस्य जब बन जाए तो बढ़ा कर इसकी मात्रा आधा चम्मच कर दें.

इसे दूध और घी के साथ लेना चाहिए. यह अश्वगंधा के साथ लेने से महिलायों को बहुत लाभ देती है और दूध के साथ दोनो का सेवन करने से महिलयों को स्वास्थ में बहुत लाभ मिलता है.

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सेक्स रोगी पहले दिमाग की दवा खायें, ऐसी एक ही दवा जिसमे ये सारे गुण हों खाये फिर देखें

पहले और अबमे बस इतना फर्क है के पहले किसी गल्ती पर मां बाप की डांट पड़ने से पहले या मास्टरों की मार के डर से चड्डी गीली हो जाती थी

अब मां बाप या गुरू जी के डर से नही बल्कि हमारे नौ जवान इतने  सुद्ध मन के हैं

लड़कियों को देख कर ही जींस गीली हो जाती है और अगर गलती से छू लिया तो मारे डर के कांपने लगते है  तजुर्बा कर लेना कोई नौ जवान किसी दोशीजा को छू कर आया हो और ना कांपता मिले और पैंट गीली ना मिले तो कहना पर ओ पहले वाला डर अदब के लिये था और अब बे अदबी से ऐसा होता है

हां जिनकी हालत अब वालों जैसी हो वह दो तीन बातों पर ध्यान दे तभी इलाज संभव वरना पैसा की बरबादी छोड़  किसी दवा से आराम नही मिलने वाला आप लोग ये तो पूछने लगते हैं कि लिंग मोटा होने की दवा बता दो सीघ्र पतन की दवा बता दो मगर मै अक्सर जवाब इधर धपर के देकर टाल जाता हूं के  बगैर बुनियाद और  दीवारो के  बिना छत डालने की बात करते हैं और इतना टाईम देते नही बस जलदी बताओ

अगले महीने मेरी शादी है और मुझे डर लगता है मै जान दे दूंगा पर क्या करूं  सेक्स का संबंध लिंग से जोड़ ते है जब के लिंग तो एक तरह दिमाग के अधीन होता है और जब दिमाग लिंग से कहता है तुझमे ताकत हौ तू ऐसा कर सकता है तब वह एक्टिव होता है जब दिमाग कमजोर होगा तो लिंग को डराता है के तू हार जायेगा तुझमे ताकत नही और  लिंग ये मैसेज पकड़ लेता है और अपनी आधिपत्य नसों को यही संदेश दे देता है

कुल मिला कर जब सेक्स होता है तो सिर्फ लिंग ही काम नही करता बल्कि दिल दिमाग गुरदे कलेजा इन सब मे इसका असर और  कमजोरी आती है उसूली इलाज ये है के सेक्स रोगी पहले मकवी दिमाग की दवा खायें उसके बाद दिल जिगर गुरदे को ताकत देने वाली दवाये या ऐसी एक ही  दवा जिसमे ये सारे गुण हों खाये फिर देखें कीे जिकावत हिस है क्या अगर है तो उसे रोकें और फिर सीघ्र पतन और धातु जाने को रोके जब कहीं लिंग की कमियों को दूर करे और मोटा लंबा करने की दवायें पूछे तो बताना पूछना दोनो जायज हैं अगर कोई गुप्त रोग हों जैसे आतशक भगंदर बवासीर यूजाक ये भी दूर करलें इन उसूलों से हट कर इलाज जो करते हैं या कराते हैं तो जब तक दवा का सेवन करते  है तब तक गठबंधन सरकार चलती है जहां समरथन खतम सरकार गिरी फिर वही रोना पैसा भी गया समय भी देखिये बेहतरीन मनी की पहचान ये है की ना बहोत गाढी हो ना ही पानी जैसी और

जब मनी निकले तो गाढी हो और उछल उछल के निकल रही हो और निकलते निकलते  पतली होती जाती हो मर्द की मनी सफेद औरतों की मनी हलकी पीली रंग होती है अगर औरत की मनी सफेद निकले तो लिकोरिया कीू बीमारी है गर्भ योग्य नही है हस्त मैथुन से बार बार मनी निकलती है जिससे कीटाड़ु मर जाते हैं  और ऐसे लोगों को सेक्स मे कोई आनंद नही आता बस मरता क्या ना करता इनपर फिट बैठती है ऐसे ही लोगों के घरों मे आय दिन झगडे़ हाेते रहते हैंबहोत से लोगो को सिर्फ बात चीत या थोडी रगड़ से  या सेक्स की सोच से ही चड्डी गीली हो जाती है बस इसी काऱण लिंग दुहला पतला अपनी बे बसी पर रोता रहता है  याद रखो सच कह रहा हूं मान जाओ हस्त मैथुन से दिमाग मे बहोत बुरा असर पड़ ता है बाद मे जिगर  और अंड कोषों मे  मै डरा नही रहा बस इतना कहनी चाहेता हूं के जाे मर्ज बरसो की गड़बडी से पैदा हुऐ वो दोचार द्न की ताकत की दवा से कैसे दूर होगा चलो गैस सिलेॉडर फुल भरा कर ़ले आओ  और उसको फुल खोल दो मगर पाइप ७-८ साल पुराना हो जिसमे कचरा भरा हो गैस भी फुल चूल्हा भी ठीक है पर सपलाई के पाइप मे कचरा है तो आप खाना पका नही सकते

सबसे पहले तेज ह्स को इस दवा से खतम करो मै धीरे धीरो मार्ग दरशन करूगा मुझे ह्वाटसप काल ना करे सेट गरम होकर काला हो जाता है मै ऐसे लोगो को पसंद नही करता भले ही मुझे दस बीस हजार देने के लिये काल किया हो  क्योंकि सेट के फटने से डरता हूं कही कान उड़ गया तो दस बीस यही रह जायेगों हां तो नुसखा सुनो
कलई भस्म( बंग भस्म) ,पारा शोरा वाला ६ माशा पोटाशियम ब्रोमाइड 1 माशा दोनो को बारीक पीय कर मिला लें सबकी १२ पुडिया बना लें

सूबह बासी मुंह एक पुडि़या खाकर ऊपर से नख्खन या मलाई चम्मच जो चम्मच खा लिया करें  १२ दिन मे चड्डी गीली होना बंद हो जायेगी और तेज हिस अपनी असली हालत पर आजायेगी इससे जब मरजू होगी तभी काम हो सकता है वरना देखनेे लिपटने छूने सोचने से कुठ नही होगा

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२ दोशी कपूर  १ तोला,, अक्सट्रीट बेल्ला डोना १ तोला ., त्रिधाता भस्म( कलई सीसा जस्ता), १ तोला,, बंगभस्म पारा शोरा वाला १ तोला  अफीम ३ माशा  तमाम को बारीक पीस कर पानी की मदद से  २-२ रत्ती की गोलियां बना लें  सुबह दे पहर शाम 1-1 गोली नीलोफर के शर्बत या ताजे पानी से रोजाना सेवन करें १०-१२ दिनो मे ये बीमारी दूर होगी  और इसये धातु जाना और स्वप्न दोष भी खतम हो जाते हैं बंगभस्म और त्रिधाता का तरीका दो फिर पोस्ट करूंगा

प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख समस्याएं



किसी युवती के लिये पहली बार माँ बनना एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण क्रिया होती है ! गर्भावस्था के दौरान हार्मोंस बदलने के कारण समस्याएं होना आम बात है, लेकिन कुछ ऐसी बीमारियां होना जिससे स्‍वास्‍थ्‍य अधिक बिगड़ जाएं तो ये बीमारियां गर्भावस्था को खतरे में डाल सकती हैं। बच्चा एक ऐसी चीज़ है जिसे आप नौ महीने तक अपने अंदर रखती हैं, परंतु इस वरदान के साथ कुछ असुविधाएं भी जुड़ी हुई हैं तथा मां बनने के पहले प्रत्येक महिला को इन समस्याओं से जूझना पड़ता है। महानगरों में जहॉं लोग एकल परिवारों में रहते हैं वहाँ किसी अनुभवी महिला के न होने से दिक्कते पेश आती हैं । ऐसे में स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सलाह लेते रहना चाहिये । नीचे गर्भावस्था से संबंधित कुछ सामान्य समस्याएं बताई जा रही हैं!

इसके अलावा गर्भावस्था में आने वाली अन्य कई सामान्य समस्याएं जैसे सिरदर्द, उच्च रक्तदाब, कुछ विशिष्ट खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा होना और गले में खराश होना हैं। आपके लिए यह जानना भी बेहद जरूरी है कि आखिर ऐसी कौन-कौन सी बीमारियां हैं जिनका गर्भावस्था के दौरान होने की संभावना रहती है। जैसे गर्भावस्था के दौरान बच्चे का मूवमेंट कम होना, हाथ-पैरों में सूजन, कोई इंफैक्शन व एनीमिया आदि। ऐसे में आप हमेशा अपनी चिंताओं के बारे में डॉक्टर से सलाह लेते रहे

आइये गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होने वाली इन और इन्हीं जैसी अन्य समस्याओं पर विस्तार से बात करते हैं।

गर्भावस्था में एनीमिया: 
एनीमिया का मतलब है खून की कमी होना! एनीमिया से हिमोग्लोबिन कम होता है । हिमोग्लोबिन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सब उतकों, नाल को ऑक्सीजन ले जाने और भ्रूण के लिए है । अगर आरबीसी में हिमोग्लोबिन का स्तर कम होता है तो नाल, उतक और गर्भ में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है! इसका कारण यह है की भ्रूण को पर्याप्त पोषण नही मिल पता हैI थकान महसूस होना, चिडचिडापन, चीजों पर ध्यान न लगा पाना, साँस लेने में तकलीफ होना आदि एनीमिया की तरफ इशारा करते हैं!

मॉर्निंग सिकनेस (सुबह होने वाली मतली): 
हार्मोंस में परिवर्तन होने के कारण मॉर्निंग सिकनेस की समस्या आती है जो पूरे दिन रहती है। मॉर्निंग सिकनेस को रोकने का एक उपाय यह है कि थोड़ी थोड़ी देर में थोड़ा थोड़ा खाएं, भोजन के साथ तरल पदार्थ न लें तथा घर में वेंटिलेशन (हवा का प्रवाह) अच्छा बना रहने दें।

उल्टी आना: 
गर्भावस्था में स्त्री को उल्टी की दिक्कत आती है । यह गर्भावस्था में होने वाली एक बहुत आम समस्या है जिसका सामना प्रत्येक महिला को करना पड़ता है यह पेट में भोजन आगे न बढ़पाने के कारण होता है । इस वजह से पेट का फूलना, गैस बनना, हाजमा कमजोर होना, ऐसिडिटी, कब्ज इत्यादि की समस्या आती है । ऐसे में खाना थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिये । परंतु यदि यह समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए तो ऐसी स्थिति में चिकित्सीय परामर्श लेना आवश्यक होता है।

हाथ और पैर मैं सूजन: 
गर्भवती महिलाओं की यह एक अन्य सामान्य समस्या है हालाँकि सूजन का स्तर प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग अलग होता है। तीसरे चौथे महीने तक पहुंचते-पहुंचते गर्भवती महिलाओं को हाथ-पैरों में सूजन की समस्या बढ़ जाती हैं, जो कि कई बार स्वाभाविक होता है और कई बार किसी कमी के कारण होता है। इसलिए इस बदलाव को भी हल्के में न लें और सूजन ज्यादा होने पर डॉक्टरी सहायता लें। गर्भावस्था में करवट लेने में अकसर समस्याएं आती हैं, जिससे कमर दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। आमतौर पर वजन बढ़ने से भी ये समस्या हो जाती है। बहुत लंबे समय तक खडें न रहें और ऐसे जूते पहनें जो विशेष रूप से इस समस्या से निपटने के लिए बनाए गए हों।

वज़न बढ़ना: 
गर्भावस्था में प्रत्येक महिला का वज़न बढ़ता है! इस बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और इसके कारण खाना न छोड़ें। अपने डॉक्टर से बात करते रहें तथा रिकॉर्ड रखें.!

अनिद्रा (नींद न आना):
गर्भावस्था के दौरान हार्मोंस में परिवर्तन और असुविधा के कारण अनिद्रा की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गर्भावस्था में होने वाले तनाव या फिर समस्याओं से महिला को नींद न आने की समस्या होने लगती है जिससे अनिंद्रा की शिकायत होने लगती है। इस समस्या से निपटने के लिए कैफीन, शराब और चर्बी युक्त पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।

पेट दर्द: 
दूसरे और तीसरे तिमाही के दौरान पेट दर्द एक सामान्य समस्या है क्योंकि इस दौरान श्रोणि बच्चे के लिए जगह बना रही होती है। परंतु यदि दर्द लगातार रहे तो मेडिकल जांच आवश्यक होती है।

थकान: 
गर्भावस्था के दौरान थकान से बचने के लिए उचित नींद लें तथा आराम करें। एनीमिया से बचने के लिए आयरन (लौह तत्व) से समृद्ध आहार लें क्योंकि एनीमिया के कारण ही थकान महसूस होती है।

पीठ दर्द: 

पेट के आसपास वज़न बढ़ने के कारण महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पीठ दर्द का सामना करना पड़ सकता है। आरामदायक जूते पहनें तथा भारी वस्तुएं न उठायें क्योंकि इसके कारण आपकी समस्या बढ़ सकती है।

पैरों में ऐंठन:
रात में सोने से पहले पैरों की उँगलियों को गोल घुमाने की कसरत करें। हलकी मालिश करना भी इस समस्या से निजात दिला सकता है!। मैग्नीशियम और पौटेशियम से युक्त आहार लें।

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दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देता है एक चुटकी नमक.


वास्तुशास्त्र में नमक को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। नमक के अलग-अलग इस्तेमाल से घर से नकारात्मक ऊर्जा निकल जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानसिक शांति, सेहत, सुख-समृद्धि और पैसे के मामले में नमक की भूमिका अहम है। वास्तु के अनुसार यदि नमक का सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए, तो एक चुटकी नमक ही काफी है दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए...।

एक चुटकी नमक का कमाल...
यदि आप आए दिन बीमार रहते हैं। घर में परिवार के सदस्यों के बीच आए दिन झगड़े होते हैं। हर तरफ  नकारात्मकता नजर आती है, तो नमक वाले पानी से पूरे घर में पोंछा लगाएं। बस पोंछे वाले पानी में एक चुटकी काला नमक मिलाएं, फिर देखें इसका कमाल। कुछ दिनों में इसका असर देखने को मिल जाएगा। यदि हर दिन संभव ने हो, तो मंगलवार को जरूर नमक को पोंछा लगाएं। इस उपाय से न सिर्फ घर की नकारात्मकता दूर होगी, घर में सकारात्मक एनर्जी आएगी। परविार के सदस्य बीमार भी नहीं पड़ते हैं। सौभाग्य के दरवाजे खुलेंगे।

किसमें रखें नमक...
आप जरा अपने घर में यह देखिए कि जिस बर्तन मतें नमक रखा जा रहा है, वह किस चीज से बना है। स्टील यानी लोहे से बने बर्तन में नमक कभी नहीं रखना चाहिए। वास्तु में ऐसी मान्यता है कि नमक को हमेशा कांच के जार में भरकर रखना चाहिए। साथ ही इसमें एक लौंग डाल दें, तो फिर सोने पे सुहागा... इससे घर में सुख-समृद्धि तो रहती ही है। पैसों की भी कभी कमी महसूस नहीं होती। धन का फ्लो बना रहता है।

नमक मानसिक शांति भी देता है...
यदि आपका मन हर बेचैन रहता है। न तो घर में मन लगता, न बाहर, ना ही ऑफिस में...आप लाख कोशिश करते हैं, फिर मानसिक शांति नहीं मिल रही होती है। ऐसी समस्या से निजात पाने के लिए नमक का उपाय रामबाण का काम करता है। इस उपाय में भी एक चुटकी नमक कमाल करता है। जी हां, नहाते समय समय पानी में एक चुटकी नमक मिला लें और उससे स्नान करें। वास्तु विशेषज्ञों की मानें, तो ऐसा करने से मानसिक बेचैनी कम हो जाती है। तन-मन हमेशा तरोताजा रहता है। आलस्य से छुटकारा मिल जाता है।

डॉक्टर है नमक...
यदि घर में कोई लंबे समय से बीमार चल रहा हो, तो उसके बिस्तर के पास कांच की बोतल में नमक भरकर रखें और हर महीने इसे बदल दें। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, ऐसा करने से बीमार व्यक्ति की सेहत में काफी सुधार आ सकता है। यह उपाय तब तक करते रहें, जब तक वह व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ ने हो जाए।

पहाड़ी नमक का कमाल...
कौन व्यक्ति नहीं चाहेगा कि उसके घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहे, लेकिन हम देखते हैं कि व्यक्ति हर तरह से सम्पन्न होता है, लेकिन बावजूद इसके उसके घर में सुख आ अभाव रहता है। शांति भंग हो जाती है। असल में वास्तुदोष होने से घर में नकारात्मकता प्रवेश होता है और व्यक्ति परेशान रहता है। इससे छुटकारा पाने के लिए या वास्तुदोष खत्म करने के लिए इसमें एक नमक का उपाय बहुत कारगर साबित हो सकता है। बाजार में पहाड़ी नमक भी मिलता है। इसे लाकर अपने घर के एक कोने में रख दें। आप कुछ ही में महसूस करेंगे कि घर की सारी नकारात्मकत एनर्जी दूर हो जाएगी। परिवार के लोग खुश रहने लगेंगे। घर में सुख-शांति फैल जाएगी।

नमक को लेकर ये दो सावधानियां...
प्राचीन मान्यता है कि यदि आप नमक सीधे किसी के हथेली में रखकर देते हैं, तो इससे उस व्यक्ति के साथ आपका झगड़ा हो सकता है। इसलिए इस बात को हमेशा ध्यान रखें कि नमक कभी किसी को हाथ में न दें, बल्कि चम्मच से बर्तन के जरिए दें। इसके अलावा नमक को कभी जमीन में न गिरने दें। नमक को कभी बेकार भी मत होने दें। वास्तु के अनुसार, यदि नमक जमीन पर सीधे गिरता है, तो यह माने लें कि आप सीधे अपने दुर्भाग्य को दावत दे रहे हैं।

मौसमी बुखार के लिए कुछ घरेलू नुस्खे


1- एक गिलास पानी पतीले मे चढ़ा दें  इसके अंदर दस तुलसी की पत्तियाँ , पाँच काली मिर्च के दाने , एक लौंग , एक चुटकी सेंधव नमक , एक चुटकी अजवाइन कूट कर डाल दें । इसे उबलने दें जब यह उबल कर एक तिहाई बचे उतार कर छान लें । इसमे एक चम्मच शहद मिला कर रोगी को पीने दें । इसमे आप गुड भी मिला सकते है । चीनी न मिलाएँ । दिन मे तीन बार सुबह दोपहर शाम पिलाएँ । यदि बुखार के साथ अन्य कोई समस्या है तो डाक्टरी सलाह जरूर लें ।

2- अधिक तेज बुखार होने पर कच्चे आलू का टुकड़ा लेकर रोगी के तलुओं और हथेली मे रगड़ें , रोगी को खुला रखें उसके सिर पर ठंडी पट्टियाँ रखें ।

3- पाँच ग्राम इंद्र जौ रात भर पानी मे भिगो कर रखें प्रातः मसल कर छान लें सुबह शाम पीने को दें ।

4- बच्चों को बुखार आने पर इन्द्र जौ तवे पर सेंक ले और इसका छिलका उतार लें पीस कर पावडर बना लें और शहद के साथ मिलाकर खिलाएँ

5- एक गिलास पानी पतीले मे चढ़ा दें इसमे दो तेज पत्ते बारह करी पत्ते डाल दें एक टुकड़ा गुड डाल कर खौला लें आधा रह जाने पर छान लें और थोड़ा कर चाय की तरह पिलाएँ