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पसीने की बदबू से छुटकारा पाने के 10 घरेलू नुस्खे


पसीने की बदबू होना एक आम बात है खास तौर पर गर्मियों में तो यह बहुत से लोगो को हो जाती है । पसीने के बदबू की वजह से हमें कई बार शर्मिंदा भी होना पड़ता है ।

शरीर में पसीना आना एक जरूरी क्रिया है, यह सभी को आता है लेकिन अधिक मात्रा में पसीना आने से त्वचा में कई तरह के फंगल इंफेक्शन भी हो सकते है। जिन लोगों को बहुत अधिक पसीना आता है उनके शरीर में पानी की कमी ( डिहाइड्रेशन ) और नमक की कमी जैसी दिक्कतें भी हो जाती है ।

सामान्यता बगलों व पैरों की अंगुलियों के बीच में पसीना ज्यादा आता है।

आजकल पसीने की बदबू को दूर करने के लिए लोग डियोड्रेंट का प्रयोग करते है लेकिन इनसे जलन, खुजली , सरदर्द , चक्कर आना और त्वचा के काले होने की समस्या भी हो जाती है ।

हम यहां पर इससे छुटकारा पाने के आसान से घरेलू नुस्खे बता रहे है जिनसे कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होगा और जो आपके लिए अवश्य ही लाभदायक होंगे ।

1 . उबटन लगाएं :- जिन लोगो को ज्यादा पसीना आता है या जिनके पसीने की बदबू बहुत तेज होती है उन लोगो को सप्ताह में कम से कम 2 बार नहाने से 10 मिनट पहले अपने शरीर पर बेसन और दही को मिलाकर उसका उबटन लगाना चाहिए। इस उबटन को लगाने से त्वचा साफ हो जाती है और और उसके बंद रोम छिद्र भी खुल जाते हैं। जिससे पसीना कम निकलता है और उसमें बदबू होती है ।

2. अपने को रखें साफ - गर्मियों में पसीने की बदबू सेबचने का सबसे आसान तरीका है अपने आपको बिलकुल साफ-सुथरा रखना। पसीने की बदबू उन जीवाणुओं से होती जो आपकी त्वचा में रहते हैं, इसीलिए अपनी त्वचा को हमेशा साफ रखें। हमारे अंडरआर्म के बालो की वजह से जीवाणु ज्यादा पनपते है । हमारे शरीर से जो पसीना निकलता है उसे हमारे अंडरआर्म्स के बाल पूरी तरह से सोख लेते है इससे वहाँ पर बैक्टेरिया पनपने है और इसकी वजह से शरीर से बहुत बदबू आने लगती है, इससे बचने के लिए यह आवश्यक है की अंडरआर्म्स पर बाल समय समय पर साफ करते रहे ।
3. सिरका :-- आपको शायद यह जानकर आश्चर्य होगा कि विनिगर अर्थात सिरका पसीने की बदबू को खत्म करने का सबसे अच्छा और प्राकर्तिक उपाय है । सिरका आपके शरीर से ना केवल पसीने वरन किसी भी तरह की बदबू को को दूर करता हैं, ये प्राकर्तिक तरीके से हमारी त्वचा के pH लेवल को कम कर, हमारी त्वचा में बैक्टेरिया की पनपने की क्षमता को भी कम करता है, इसकी वजह से हमारे शरीर में होने वाली बदबू कम हो जाती है। आप नहाते समय एक बाल्टी में थोड़ा सा सिरका डाल कर नहाएं, इससे आप बिलकुल तरोताजा महसूस करेंगे । इसके अतिरिक्त आप सिरके को अपनी बाँह के अंदरुनी हस्से अर्थात बगल वाले हिस्से पर भी लगाएं , आप के शरीर से पसीने की बदबू बिलकुल भी गायब हो जाएगी ।

4. बेकिंग सोडा :- बेकिंग सोडा से भी आप बहुत ही आसानी से अपने पसीने की बदबू को दूर कर सकते है । एक चम्मच बेकिंग सोडा में ताजे नींबू का रस मिलाएं फिर इसे बदबू वाली जगह पर लगाएं खासकर अपने अंडरआर्म में लगाएं । इससे आपके शरीर से पसीने भी कम निकलेगा और उसकी बदबू भी घंटो तक दूर रहेगी ।

5. शहद :- शहद हमारे शरीर से बहुत ही आसानी से किसी भी तरह की बदबू को दूर करता है । इसके लिए नहाने के बाद थोड़े से पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर उसे पूरे शरीर में अच्छी तरह से मल लें फिर कुछ मिनटों के बाद थोड़ा पानी डालकर बदन को पोंछ लें। इससे त्वचा मुलायम होती है, पसीना कम निकलता है, पसीने की बदबू भी दूर रहती है,और आप पूरे दिन अपने को बिलकुल तरोताजा महसूस करते है ।

6. नींबू :- नींबू, भी हमारे शरीर की दुर्गंध को दूर करने में काफी असरदार होता है। नीबूं हमारी त्वचा के pH लेवल को नियंत्रित करता है। शरीर के जिन हिस्सों में हम नींबू के रस का इस्तेमाल करते है, वहां पर जीवाणु जल्दी पनप नहीं पाते है । नींबू को रूई के सहारे अपने शरीर खासकर अंडरआर्म में लगाएं या उस स्थान में नींबू के एक टुकड़े हल्के हल्के रगड़ें । इससे पसीने की बदबू आपसे कोसो दूर रहेगी ।

7.फिटकरी :- फिटकरी प्रकृति की बहुत बड़ी एंटीसेप्टिक है । फिटकरी हमारे शरीर से पसीने की दुर्गंध भी दूर करती है। इसके लिए नहाने के पाने में एक चुटकी फिटकरी का पाउडर मिलाएं इससे हमारे शरीर से पसीना कम निकलता है और बदबू भी नहीं होती है । लेकिन इस बात का अवश्य ही ध्यान रखे कि फिटकरी ज्यादा ना हो अन्यथा हमारी त्वचा रूखी हो सकती है।
8. गाजर का रस :- तन की / पसीने की दुर्गध को दूर भगाने के लिए गाजर के रस का नियमित रूप से सेवन करें ।

9 . टमाटर :- टमाटर को प्राकर्तिक का बहुत बड़ा एंटी-सेप्टिक कहा जाता है। टमाटर पसीने की बदबू के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को खत्म करने में बहुत प्रभावशाली माना जाता है। अपने शरीर की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए नहाने के पानी में 2 चम्मच टमाटर का थोड़ा रस मिलाकर नहाना चाहिए ।दिन में कम दो तीन बार टमाटर का जूस पीने से त्वचा स्वस्थ रहती है चमकने लगती है और शरीर से किसी भी तरह की बदबू भी नहीं आती है ।

10. गेहूँ के ज्वार का रस :- गेहूँ के ज्वार का रस शरीर की दुर्गंध को दूर करने के लिए बहुत कारगर माना जाता है। गेहूँ के रस में क्लोरोफिल होता है जो शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसे सुबह खाली पेट पिएं , इससे शरीर स्वस्थ और जवान रहता है और शरीर से किसी भी प्रकार की बदबू भी नहीं आती है ।

11. पान के पत्ते और आँवला :- पान के पत्ते और आंवला को बराबर मात्रा में पीस कर नहाने के पहले इसका पेस्ट लगाएं। इससे पसीना कम निकलता है और पसीने में बदबू भी नहीं होती है ।

12. गुलाब जल :- पसीने की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए अपने अंडरआर्म्स में रुई की मदद से गुलाब जल लगाएं इससे त्वचा साफ रहती है, जीवाणु भी पनप नही पाते है और पसीने से बदबू भी नहीं आती है ।

13. नीम का साबुन :- नहाने के लिए नीम युक्त साबुन या मुल्तानी मिट्टी से बने साबुन का प्रयोग करें विशेषकर गर्मियों के दिनों में तो इनका इस्तेमाल अवश्य जी करें।

14. आलू :- शरीर के जिस हिस्से पर ज्यादा पसीना आता है उन हिस्सों पर पर आलू को काटकर उसकी स्लाइस को मलें। इससे धीरे धीरे पसीना आना कम हो जाता है ।

15. तेजपत्ता :- तेजपत्ते को सुखाकर पीस लें फिर उसे उबालकर 24 घंटे के लिए छोड़ दें। इसके बाद इस पानी से शरीर के उन हिस्सों की रोज सफाई करें जहाँ पर आपको ज्यादा पसीना आता है। इसका नियमित रूप से प्रयोग करने पर धीरे धीरे पसीना आना कम हो जाता है और पसीने से दुर्गन्ध भी गायब हो जाती है ।

इन बातो का भी ध्यान रखे
पसीने की बदबू से दूर रहने के लिए इस बात का विशेष ध्यान दें कि आप बिना धुले हुए कपड़े न पहनें, गंदे कपड़ो में जीवाणु जल्दी पनपते है इससे ना केवल पसीना ही ज्यादा आता है वरन शरीर से बदबू भी आने लगती है।

सप्ताह में कम से कम एक बार एक टब / बाल्टी में गुनगुना पानी लेकर उसमें नींबू का रस मिला लें फिर अपने पैरों को उसमें कुछ देर के लिए डुबोकर रखें। इससे शरीर विशेषकर हमारे पैरों से आने वाली दुर्गध दूर होती है ।

संतुलित आहार लेने की आदत डालें । बहुत गर्म, मिर्च मसाले वाले और बहुत तले हुए खाद्य पदार्थों से दूर रहे । दिन में 10 - 12 गिलास पानी पीने की आदत डालें । ताजे मौसमी फल और सब्जियां अवश्य जी खाएं ।
अपना पेट अवश्य जी साफ रखें। कब्ज की वजह से हमारे शरीर में बहुत सी परेशानियाँ उत्पन्न हो जाती है, उससे भी पसीना / दुर्गन्ध युक्त पसीना अधिक आता है ।

बहुत ज्यादा लहसुन, प्याज जैसी गर्म, तीव्र गंध वाली चीजे खाने से बचें, इनकी वजह से भी हमें पसीना अधिक आता है और उसमें दुर्गन्ध भी त्रीव होती है ।

बहुत टाइट या तंग फिटिंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए । विशेषकर गर्मी के मौसम में कॉटन के कपड़े हमारे शरीर के लिए ज्यादा अनुकूल रहते हैं, उसमें हवा भी आती जाती है जिससे कीटाणु भी नहीं पनपते है, पसीना कम आता है और पसीने की दुर्गन्ध भी दूर रहती है। 

दुनिया की 70% सेक्स वर्धक दवाइयां इसके बिना बन ही नहीं सकती


आयुर्वेदिक दवाइयों में सेक्सवर्धक औषधि के रूप में इसे सबसे उत्तम स्थान प्राप्त है
नपुंसकता प्राप्त हुए इंसान को यह जीवन दान देती है

जिनके लिंग में अत्यधिक मैथुन के कारण हस्तमैथुन के कारण उम्र के कारण ढीलापन आ गया हो उन्हें इसका प्रयोग किसी व्यक्ति या चिकित्सक की देख रेख में कम से कम 2 से 3 महीने करना चाहिए

और हर साल में एक बार कम से कम 2 महीने इसका सेवन करते रहने से बुढ़ापे के लक्षण नहीं आते और सेक्स भरपूर बना रहता है

मकरध्वज के बारे में सभी लोग जानते हैं कि यह ताक़त बढ़ाने वाली दवा है और इसके इस्तेमाल से हर तरह की बीमारी दूर होती है

यह हार्ट और नर्वस सिस्टम पर बहुत जल्दी असर करता है, मकरध्वज के इस्तेमाल से शरीर का वज़न बढ़ता है

बल वीर्य बढ़ाने, शीघ्रपतन, नपुंसकता नामर्दी दूर करने के लिए यह बेस्ट दवा है।

आईये सबसे सबसे पहले जानते हैं कि मकरध्वज है क्या चीज़ और मकरध्वज किसे कहते हैं ?

पारा का नाम आपने सुना होगा, इसे अंग्रेजी में Mercury कहते हैं, पारा का आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान है

पारा को आयुर्वेदिक प्रोसेस से शुद्ध करने के बाद इस्तेमाल किया जाता है, कच्चा पारा बहुत ही नुकसानदायक होता, जबकि शुद्ध करने के बाद यह रसायन बन जाता है

शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक में सोने का वर्क मिलाकर बालुका यंत्र में तीव्र अग्नि देने के बाद मकरध्वज का निर्माण होता है

रस सिन्दूर में स्वर्ण भस्म या सोने का वर्क मिलाने पर भी मिश्रण को मकरध्वज कहा जाता है
अब आप सोच रहे होंगे कि रस सिन्दूर क्या है?

यहाँ मैं बता देना चाहूँगा कि रस सिन्दूर का रिश्ता उस सिन्दूर से दूर-दूर तक नहीं है जिसे महिलाएं अपनी माँग में डालती हैं, इसीलिए कंफ्यूज न हों

शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक को जब आयुर्वेदिक प्रोसेस से  बालुका यन्त्र में अग्नि दिया जाता है तो उसके बाद प्राप्त होने वाला पदार्थ रस सिन्दूर कहलाता है

रस सिन्दूर भी एक चमत्कारी औषधि है जिसे आयुर्वेदिक चिकित्सक सफलतापूर्वक प्रयोग करते हैं

असली मकरध्वज क्या है और इसे कैसे बनाया जाता है?

यहाँ मैं बता रहा हूँ रस तरंगिणी में बताया गया मकरध्वज बनाने का तरीका -

सोने का वर्क 10 ग्राम, शुद्ध पारा 80 ग्राम और शुद्ध गंधक 160 ग्राम ले लीजिये

अब शुद्ध पारा को खरल में डालकर उसमे थोड़ा-थोड़ा सोने का वर्क मिलाते हुवे घोटें, जब पूरा सोने का वर्क घुट जाये तो थोड़ा-थोड़ा शुद्ध गंधक मिलाकर घोटना चाहिए

सब मिल जाने के बाद रोज़ 6-7 घंटा 7-8 दिनों तक घोटना है, इसके बाद ग्वारपाठा का रस ताज़ा निकाल कर इसे मिलकर घुटाई करें और फिर लाल कपास के फूल के रस में  भी घोटना है

इसी तरह से 1-2 दिन तक ग्वारपाठा और लाल कपास के फूल के रस में  घोटने के बाद सुखा कर सात बार कपरौटी की हुयी आतशी शीशी में भरकर बालुका यंत्र में रखकर 24 घंटे तक मृदु, मध्य और तीव्र आँच देना है

पूरी तरह से ठंडा होने पर शीशी के गले में लगा हुवा लाल मकरध्वज निकाल कर रख लिया जाता है

जबकि शीशी के तली में मिलने वाला सोने का भस्म को अलग काम में यूज़ किया जाता है
तो यह है मकरध्वज बनाने का आयुर्वेदिक प्रोसेस

असली मकरध्वज की पहचान - 


जो मकरध्वज कड़ा न हो, अंगुली से हल्का दबाने पर ही टूट जाये, जिसका चूर्ण रवेदार हो, चमकदार और स्मूथ दीखता हो वही असली और बेस्ट मकरध्वज होता है

दिव्य वाले तो इसे पिसा हुवा पैक करते हैं, जबकि बैद्यनाथ का रवेदार यानि क्रिस्टल की तरह मिलता है

आईये अब जानते हैं कि सिद्ध मकरध्वज क्या है ?

अभी जो मैंने मकरध्वज का प्रोसेस बताया है उसमे सोने का वर्क 10 ग्राम लेने को कहा है, अगर सोने के वर्क को 40 ग्राम लिया जाये और बाकी चीज़ और प्रोसेस सेम हो तो इसके बाद तैयार होने वाला मकरध्वज सिद्ध मकरध्वज कहलाता है

शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले भगवान शंकर ने इसे बनाकर सिद्धों को इसका सेवन करवाया था, इसीलिए इसे सिद्ध मकरध्वज कहा जाने लगा

यह सबसे बेस्ट महौषधि है, इसके जैसे सर्व-रोगनाशिनी यानि सारी बीमारियों को दूर करने वाली दवा दुनिया के किसी भी पैथी में नहीं है, यह बात बड़े-बड़े डॉक्टर भी मान चुके हैं कि इसके जोड़ की दवा दुनिया के किसी भी चिकित्सा में नहीं है

कहते हैं कि मरने वाले आदमी को भी अगर मकरध्वज खिला दिया जाये तो कुछ मिनट तक बच जाता है

बच्चों से लेकर बूढों तक में फायदा करने वाली यह बेजोड़ दवा है, यह कितना असरदार दवा है आप इस बात से ही समझ सकते हैं कि जब मरने वाले को भी यह असर करती है तो साधारण, साध्य और कष्टसाध्य रोगों में इसका क्या प्रभाव होगा

किसी भी कारण से शरीर में कमज़ोरी आ जाने पर या फिर खून की कमी हो जाने पर मकरध्वज के इस्तेमाल से बहुत तेज़ी से फायदा होता है

यह कफ़ दोष के कारण होने वाली बीमारीओं को बहुत जल्दी दूर करता है, हार्ट की कमजोरी दूर कर हार्ट को मज़बूत बनाता है, शरीर से बैक्टीरिया का नाश करता है, स्पर्म को Healthy बनाता है, वीर्य गाढ़ा कर शीघ्रपतन, नपुंसकता इत्यादि

इसे घर पर बनाने की कभी भी कोशिश नहीं करनी चाहिए 

मधुमेह का सबसे अच्छा होमियोपैथिक इलाज, Diabetes Treatment In Homeopathy


मधु और मेह की संधि से मधुमेह शब्द बना है, जिसका भावार्थ है मधु के समान मूत्र विसर्जित होना। मूत्र में माधुर्य यानी शक्कर की मौजूदगी मधुमेह रोग का प्रमुख लक्षण है, किन्तु ऐसा हमेशा और हर एक अवस्था में नहीं होता। अत: ‘प्रायोमध्विवमेहति’ के अनुसार प्राय: मधु के अनुसार मूत्र होना शास्त्र में कहा गया है।

आयुर्वेद ने मधुमेह की गणना ‘प्रमेह’ के अंतर्गत की है। ‘प्रमेह’ शब्द का अर्थ अधिक मात्रा में विकृत मूत्र होना है। यही रोग आगे चलकर, यदि आहार-विहार में उचित सुधारन किया जाए, तो उपेक्षा करने से धीरे-धीरे मधुमेह रोग में बदल जाते हैं।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में ‘मधुमेह’ का वर्णन ‘डायबिटीज’ नाम से मिलता है। डायबिटीज रोग के दो भेद बताए गए हैं –

1. डायबिटीज मेलीटस।

2. डायबिटीज इंसीपीडस।

डायबिटीज मेलीटस : पेशाब में तो शक्कर बिलकुल ही नहीं होनी चाहिए, लेकिन रक्त में 100 मिलि होनी चाहिए. रक्त में उपवास की स्थिति में 80 से 120 मिग्रा. मात्रा के बीच शक्कर हो, तब तो ठीक, अन्यथा इससे ज्यादा मात्रा में शक्कर हो, तो इसे ‘डायबिटीज मेलीटस’ कहेंगे। मधुमेह रोग होने पर पेशाब में भी शक्कर जाने लगती है और रक्त में भी इसकी मात्रा बढ़ जाती है।

शुगर के कारण
‘पेंक्रियाज’ (अग्नाशय) नामक अंग जब इन्सुलिन (मधुनिबूदिनी) नामक हारमोन बनाने में असफल होने लगता है, तब यह डायबिटीज नामक रोग उत्पन्न होता है। शरीर में शक्कर की मात्रा (उचित मात्रा) को कायम रखना और शरीर में इसका सदुपयोग होने की व्यवस्था बनाए रखना इन्सुलिन का काम होता है।

अग्नाशय नामक अंग की निष्क्रियता का कारण अभी भी अज्ञात है, लेकिन सम्भव है कि कुछ वंशानुगत प्रवृत्तियां डायबिटीज रोग को उत्पन्न करती हों।

• यदि यह रोग वंशानुगत कारणों से हो, तो किसी भी आयु में हो सकता है।
• अधिक दिमागी काम करने पर।
• चिंता व तनावग्रस्त रहने पर।
• शारीरिक परिश्रम या व्यायाम न करने पर।
• आरामतलब जीवन जीने की स्थिति में।
• ज्यादातर बैठे ही रहने वाले लोग।
• विलासी रहन-सहन।
• ज्यादा मात्रा में आहार करने।
• मीठे पदार्थों के अति सेवन एवं।
• चर्बी और मोटापा आदि कारणों से मधुमेह रोग की उत्पत्ति होती है।

मधुमेह के लक्षण

• त्वचा रूखी-सूखी होना,सिर में भारीपन दर्द
• प्यास का बढ़ना
• मूत्र की मात्रा और मूत्र-विसर्जन की संख्या बढ़ना
• भूख ज्यादा लगना
• मूत्र में शक्कर जाना
• शरीर कमजोर और दुबला होने लगना
• रात में पेशाब के लिए मजबूरन बार-बार उठना
• खून की जांच करवाने पर शर्करा की बढ़ी मात्रा आदि लक्षण इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

डायबिटीज इंसीपीडस : यह डायबिटीज रोग का दूसरा प्रकार है, जिसमें पेशाब की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। पीयूष ग्रंथि के पश्चिमी खंड के स्राव में कमी होने पर यह रोग होता है। इस रोग में न तो मूत्र में शक्कर पाई जाती है और न रक्त में शक्कर की मात्रा बढ़ी हुई होती है। इसमें मूत्र का वर्ण (रंग) और सापेक्षिक घनत्व जल के समान ही हो जाता है। ‘प्रकर्षेण प्रभूत’ अर्थात् बार-बार भारी मात्रा में पेशाब आना इसका मुख्य लक्षण है। अत: इसे ‘बहुमूत्र’ रोग भी कहते हैं। पेशाब स्वच्छ जल जैसा होता है, गंदला व दुर्गंधवाला नहीं होती, न उसमें एल्युमिन पाया जाता है और न ही शक्कर पाई जाती है। इस रोग के रोगी को भूख व प्यास बहुत लगती है, कब्ज रहता है या पतले दस्त होते हैं, शरीर दुबला व कमजोर होता जाता है, त्वचा रूखी-सूखी हो जाती है, नींद कम हो जाती है, बेचैनी रहती है और मुंह बार-बार सूखता है। आयुर्वेद इसे ‘उदकमेह’ या ‘बहुमूत्र’ रोग कहता है।

इस रोग के होने का सर्वमान्य कारण पीयूष ग्रंथि की क्षति पहुंचना होता है, जो कि सिर में भारी आघात लगने, कोई शल्य क्रिया (आपरेशन) होने या रेडियो थरेपी (सेंक करना) आदि किसी कारण से पहुंची हो सकती है। किसी ट्यूमर (गांठ) के होने से पड़ने वाले दबाव के कारण भी ऐसी क्षति पहुंच सकती है या एन्सेफलाइटस (मस्तिष्क शोथ) या मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क आवरण शोथ) होने के बाद भी कभी-कभी ऐसा हो जाता है।

मधुमेह के जटिलताएं

‘डायबिटीज मेलीटस’ में जब प्रारंभिक लक्षण खूब बलवान हो जाते हैं, तो प्रारंभिक लक्षणों के साथ ही अन्य लक्षण भी प्रकट होने लगते हैं। यथा, त्वचा रूखी-सूखी हो जाती है, कब्ज बनी रहती है, सिर में भारीपन एवं दर्द, भूख एवं प्यास की अधिकता, बार-बार पेशाब होना आदि ऐसा रोगी जिस जगह पर पेशाब करता है, वहां चीनी जैसा सफेद पदार्थ जम जाता है और वहां चींटें-चींटियां और मक्खियां बैठती हैं। जब रोग की अवस्था काफी बढ़ जाती है, तो भूख कम हो जाती है, शरीर कमजोर व दुबला होता जाता है। नेत्रज्योति घटने लगती है, किसी-किसी को पीठ में फोड़ा हो जाता है, रक्त में शक्कर बढ़ जाने से घाव भरने की प्राकृतिक शक्ति (हीलिंग पावर) नष्ट हो जाती है। अतः मधुमेह के रोगी को जरा-सा घाव हो जाए, तो वह भयंकर रूप धारण कर लेता है। कभी-कभी तो अत्यधिक शर्करा होने की स्थिति में अंगों में गलाव पड़ जाता है और अच्छा-खासा व्यक्ति काल का ग्रास बनने की स्थिति में पहुंच जाता है। साथ ही कई बार व्यक्ति अत्यधिक शर्करा की मात्रा रक्त में बन जाने के कारण अचेतन भी हो सकृता है। ऐसी परिस्थितियों में इलाज कर पाना अत्यंत जटिल हो जाता है।

शुगर की दवा

‘आर्सेनिक ब्रोमेट्रम’, ‘कोका’, ‘कोडीनम’, ‘सीजिजियम’, ‘फॉस्फोरस’, ‘इंसुलिन’, ‘यूरेनियम नाइट्रिकम’, ‘ओरम’, ‘हेलोबोरस’ आदि।

यूरेनियम नाइट्रिकम : अत्यधिक कमजोरी, वजन गिरते जाना, एब्डोमिनल केविटी में द्रव भरने की प्रवृत्ति, पेशाब बार-बार, पेरीटोनियलकेविटी में गैस वगैरह की वजह से अनियमित फैलाव, यूरेथ्रा (पेशाब के मार्ग) में जलन, रात में पेशाब निकलना, अत्यधिक भूख, उल्टी होना, पेट फूलना, चिड़चिड़ाहट आदि लक्षणों के आधार पर द्वितीय शक्ति एवं 6 शक्ति की दवा कारगर रहती है। दवा लगातार कुछ दिन खिलानी चाहिए। साथ ही, शक्कर का विशेष परहेज आवश्यक है।

सीजिजियम जेम्बोलेनम : यह ‘डायबिटीज मेलीटस’ की अत्यधिक उपयोगी दवा है। अन्य कोई भी दवा इतनी शीघ्रता से पेशाब में शर्करा को कम नहीं करतीi शरीर के ऊपरी हिस्से में खुजली, जलन एवं गमीं मालूम देना, अत्यधिक प्यास, कमजोरी, वजन गिरना, अत्यधिक मात्रा में पेशाब, सापेक्षिक घनत्व (पेशाब का) अधिक, त्वचा के पुराने घाव।

इंसुलिन : पेंक्रियाज से एकत्रित कोशिकाओं के स्राव (इंसुनिल) को होमियोपैथिक पद्धति से शक्तिकृत करके 3 × से लेकर 30 शक्ति तक में, कुछ समय में सेवन कराना अत्यन्त फायदेमंद रहता है।

लैक्टिक एसिड : सुबह के समय बुखार, जीभ सूखी हुई, प्यास अधिक, भूख अधिक, मुंह से बदबूदार लार एवं बदबू आना, उल्टी महसूस होना, अधिक मात्रा में बार-बार पेशाब आना, पीला-जर्द बदन, रक्ताल्पता, चुभने वाली गर्म डकारें, खाना खाने के बाद बेहतर महसूस करना, सिगरेट पीने के बाद अधिक कमजोरी महसूस करना आदि लक्षणों के आधार पर 3 से 30 शक्ति तक की दवा की 5 से 10 बूंदें आधा कप पानी में सुबह-शाम पिलाने से फायदा मिलता है।

कोडीनम : सारे शरीर में कंपन, हाथ-पैरों की मांसपेशियों की अनैच्छिक ऐंठन, खुजली, गर्मी, चेतनाशून्यता के साथ डायबिटीज होने पर अत्यधिक प्यास एवं कड़वे पदार्थों की खाने की इच्छा होने पर, मदरटिंचर (मूल अर्क) अथवा 3 x शक्ति की दवा कुछ दिन नियमित लेना लाभकारी है। इन सब दवाओं के साथ ही लक्षणों की समानता के आधार पर कांस्टीट्यूशनल (प्रकृतिजनित) दवा लेना श्रेयस्कर एवं शीघ्र और उचित लाभ प्रदान करने वाला हैं। जैसे फॉस्फोरस आदि।

इन सबके साथ ही निम्नमिश्रण नियमित रूप से कम-से-कम 20 दिन सेवन कराने पर चमत्कारिक असर प्राप्त किए हुए हैं। जामुन की गुठलियां, करेले के बीज, निबोली (नीम का फल), मूली के बीज, ये सूभी चीजें समान मात्रा में 5-5 ग्राम सुबह-शाम सादा पानी के साथ 21 दिन लेने पर अत्यंत फायदा मिलता है।

•शर्करा का प्रयोग बिलकुल बंद करना चाहिए
• आलू, शकरकंद, चुकंदर आदि का प्रयोग भी निषिद्ध है
• मूली, करेला, जामुन, नीम की निबोली खाना अत्यंत फायदेमंद होता है
•चालीस वर्ष की उम्र के पश्चात् नियमित रूप से हर छह माह बाद रक्त एवं पेशाब में शर्करा की जांच करवाते रहना चाहिए
• मोटापे से बचना चाहिए एवं हर उम्र में हल्के-फुल्के व्यायाम करते रहना चाहिए।

इससे हम सिर्फ डायबिटीज से ही नहीं बचते, वरन शरीर भी चुस्त-दुरुस्त बना रहता है। याद रखिए‘ इलाज से बचाव बेहतर है।’

बायोकेमिक औषधियां मधुमेह रोगियों के लिए

‘कैल्केरिया फॉस’ 3 x ,’फेरमफॉस’ 12 x, ‘कालीफॉस’ 3 x, ‘मैगफॉस’ 3 x, ‘नेट्रमफॉस’ 3 x, ‘नेट्रमसल्फ’ 3 x सारी औषधियों को बराबर-बराबर लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर घोल लें इसके चार भाग करके सुबह-दोपहर-शाम व रात को सोने से पहले पी लिया करें दवा लेने के आधा घंटा पहले व बाद में कुछ खाएं-पिएं नहीं। पानी सिर्फ एक बार ही गर्म लेना है, बाद में गर्म करने की जरूरत नहीं।

कोई भी होमियोपैथिक औषधि लेने के आधा घंटा पहले व बाद में कुछ भी न खाना-पीना ही हितकर रहता है।

वसा खाने से बचे
बहुत ज्यादा सैचुरेटेड वसा खाने से दिल की बीमारी की आशंका बढ़ जाती है। और दिल की बीमारी कितनी खतरनाक है, यह तो आप जानते ही हैं। इससे बचने के लिए कुछ एहतियात बरतना बहुत जरूरी है जैसे बहुत ज्यादा वसा वाले मांस, तले-भुने भोज्य पदार्थ, आईसक्रीम, केक और मक्खन खाने से बचे खाना पकाने के लिए कम वसा वाले वनस्पति तेलों का प्रयोग करें। इसके विपरीत फाइटोएस्ट्रोजेंस से भरपूर भोजन कैंसर की आशंका को कम करता है। सोया उत्पाद, मटर, अनाज, सूखे मेवे, फल-सब्जियों और दालों में भी यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

कोई भी दवाई अपने आप लेने से बचे डॉ. से सलाह जरूर लें 

नामर्द को भी मर्द बना देंगे ये 3 नुस्खे जरुर आजमायें


इन नुस्खों के इस्तेमाल में कुछ बातो का ध्यान रखे. एक तो कब्ज न रहने दे. कोई भी नुस्खा अपनाए तो अपनी पाचन शक्ति के अनुसार अपनाए. सबसे बड़ी बात खानपान का पूरा ध्यान रखे. खट्टे मिर्च वाले भोजन कभी न करें. अनारदाना तो जैसे मर्द को नामर्द बना देता है. यह नपुंसकता की जड है.

नामर्द को भी मर्द बना देंगे ये 3 नुस्खे जरुर आजमायें


उपाय #1

इसको दूर करने के लिए कुछ छुहारे लें इन छुहारों की गुठली निकालकर अलग कर ले. गुठलियों के स्थान पर आक के पौधे का दूध भर केर इस पर आटा लगाकर आग पर पकने के लिए रख दें . जब आटा पक कर जल जाये तो छुहारे निकाल कर पीस ले. फिर इसकी छोटी – छोटी गोलियाँ बनाकर रात को सोते समय खाएं और ऊपर से दूध पी ले. इस उपयोग से स्तम्भन में लाभ मिलता है और गुप्तांग में कठोरता भी आएगी.

उपाय #2
शिश्न के रोग का उपचार करने के लिए शहद और गाय के घी में आक के पौधे का दूध बराबर मात्रा में मिलाकर किसी शीशी में 4-5 घंटे तक रख दें. फिर इसकी मालिश करे किन्तु सुपारी और इंद्री की सीवन से बचा कर रखें. और ऊपर से एरंड का पत्ता और पान बांधकर कुछ देर रखे. इस प्रकार लगातार सात दिनों तक मालिश करें. फिर 15 दिन बाद, एक महीने में 2 बार मालिश करे. इससे शिश्न के सारे रोगो को फायदा मिलता है.

उपाय #3
आक के पौधे की जड़ को छाया में सुखाकर इसे पीस ले.  लगभग 20 ग्राम की मात्रा का चूर्ण को आधा किलो दूध में उबालकर इसकी दही जमा दें. फिर इस दही में से घी निकल ले. इस प्रकार का तैयार घी को खाने से नामर्दी की शिकायत दूर हो जाती है.

सभी प्रयोग चिकित्सक की सलाह पर ही करें नहीं तो लाभ की जगह हानि उठानी पड़ सकती है 

लंबे समय तक युवा बने रहने के लिए अपनाएं ये कारगार देसी नुस्खे


आज के समय में अनियमित दिनचर्या के चलते अधिकांश युवा बहुत ही जल्द बुढ़ापे में होने वाले रोगों से पीड़ित हो जाते हैं। असमय बाल सफेद होना, कमजोरी बने रहना, जल्दी थक जाना, जोड़ों में दर्द होना, नजर कमजोरहो जाना आदि ये सभी बुढ़ापे में होने वाली परेशानियां हैं। इन परेशानियों से बचने के लिए आयुर्वेद में कई देसी नुस्खे बताए गए हैं।

इन नुस्खों को नियमित रूप से अपनाते रहने पर लंबे समय तक बुढ़ापे के रोगों से बचे रह सकते हैं।

जानिए कुछ खास नुस्खे जो लंबे समय तक युवावस्था बनाए रखते
हैं...
.
रोज सुबह अपनाएं ये नुस्खा...
हर रोज आंवले का रस, गाय का घी, शहद व मिश्री, इन चारों को 15-15 ग्राम की मात्रा में मिला लें। सुबह-सुबह खाली पेट इस मिश्रण का सेवन करें। इसके बाद 2 घंटे तक कुछ नहीं खाए। नियमित रूप से इसे लेते रहने से कई प्रकार के रोग दूर होते हैं। ये मिश्रण बुढ़ापा दूर रखने के लिए काफी कारगर उपाय है।
.प्रतिदिन अनार का सेवन करने से भी बुढ़ापे के रोग दूर रहते हैं। जवानी बनी रहती है। अनार के सेवन से रक्त संबंधी कई विकार दूर होते हैं। यह रक्त की कमी दूर करने में भी मदद करता है।

संतुलित आहार लें...
प्रतिदिन संतुलित आहार ग्रहण करना चाहिए। ऐसा भोजन करें जो आसानी से पच सके और शरीर के पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव न डालता हो। भोजन में विटामिन, प्रोटीन, खनिज तत्वों की भरपूर मात्रा होनी चाहिए। गरिष्ठ भोजन, तेल, घी, शर्करायुक्त चीजें खाने से बचें।

तनाव से दूर रहें...
तनाव से दूर रहें। जो लोग अधिक सोचते हैं और मानसिक तनाव महसूस करते हैं, उन्हें बुढ़ापे के कई रोग युवावस्था में ही सताने लगते हैं। यदि मानसिक तनाव अधिक रहता हो तो अच्छे दोस्तों के साथ समय व्यतीत करें।

मधुर संगीत सुनें। अच्छी किताबें पढ़ें। 
इससे मानसिक तनाव दूर होता है। तनाव दूर होगा तो कई प्रकार के रोग नहीं होंगे।

लहसुन का नुस्खा
शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए रोज रात को सोने से पहले लहसुन की दो कलियां निगल लें। फिर
थोड़ा-सा पानी पिएं। ऐसा नियमित रूप से करें। इस नुस्खे के नियमित प्रयोग से कमजोरी की शिकायत में
राहत मिलती है।

आंवले के नुस्खे
शक्ति बढ़ाने के लिए आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिलाएं। इस मिश्रण को प्रतिदिन एक चम्मच मात्रा में रात को सोने से पहले ग्रहण करें। इसके बाद थोड़ा-सा पानी पिएं।

आंवले का मुरब्बा नियमित रूप से लेते रहेंगे तो सभी प्रकार की कमजोरी दूर हो जाएगी।

सफेद मुसली का नुस्खा
कमजोरी के दूर करने के लिए यह उपाय नियमित रूप से करें। सफेद मूसली या धोली मूसली का चूर्ण बनाएं। इस चूर्ण में एक चम्मच पिसी मिश्री मिला लें। सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ पिएं। ऐसा करने पर शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है और सभी दैनिक कार्य करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा बनी रहती है।

दूध की मलाई और मिश्री का नुस्खा

दूध की मलाई और बारीक पिसी हुई मिश्री को एक साथ मिलाएं और इसका सेवन नियमित रूप से करें। ऐसा करने से कमजोरी दूर होती है और लंबे समय तक शरीर बलवान बना रहता है। चेहरे पर रौनक बनी रहती है।

ध्यान रखें ये बातें भी...
सुबह जल्दी उठना चाहिए और रात को सही समय पर सो जाना चाहिए।

दिन के समय में या शाम के समय में सोने से बचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बीमारी की अवस्था में है या वृद्ध है तो वह दिन के समय में सो सकता है। युवा और स्वस्थ लोगों को दिन में नहीं सोना चाहिए।

असमय सोने से भी कई प्रकार की बीमारियां पनप सकती हैं।

प्रतिदिन सुबह व्यायाम करें। योग से बुढ़ापा दूर रहता है। शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। सुबह-
सुबह टहलना भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

प्रतिदिन नींद का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नींद की कमी कई रोगों को जन्म देती है। अत: प्रतिदिन कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए।

ध्यान रखें, यहां दिए नुस्खों को प्रारंभ करने से पूर्व किसी चिकित्सक से भी परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए।

बुढ़ापे में नहीं होंगे घुटने दर्द, जरूर खाएं ये चीज


अगर आप भी चाहते हैं कि बुढ़ापे में आपके घुटनों में दद न हो तो अपनी डायट में कैल्शियम रिच फूड को शामिल करें। आप रोजाना कच्चा पनीर खा सकते हैं। अगर कच्चा पनीर पसंद न हो तो आप मखमली पनीर टिक्का बना सकते हैं। यहां पढ़ें मखमली पनीर टिक्का की रेसिपी -



सामग्री 3 कप पनीर , 50 मिमी (2") के टुकड़ो में कटे हुए

मिलाकर मेरीनेड बनाने के लिए 3/4 कप ताज़ा गाढ़ा दही 1/4 कप चीज़ स्प्रैड 1 टी-स्पून हरी मिर्च का पेस्ट 2 टेबल-स्पून काजू का पाउडर 1/2 टी-स्पून गरम मसाला नमक सवादअनुसार विधि - पनीर के टुकड़ो को मेरीनेड के साथ मिलाकर हलके हाथों मिला लें। १५ मिनट के लिए एक तरफ रख दें।

पनीर के टुकड़ो को तार से बने रैक में रखें और पहले से गरम अवने में 200°c (400°f) के तापमान पर पनीर के पकने तक ग्रिल कर लें (लगभग 15 मिनट के लिए)।

अवन से निकालकर गरमा गरम परोसें।

महिलाये की सेक्स शक्ति बढ़ाने में असरदार घरेलू नुस्खे


शतावरी का पौधा उत्तर भारत में अधिक पाया जाता है। इसकी जड़ औषधि की तरह इत्तेमाल की जाती है। इसके इस्तेमाल से शरीर में बल और वीर्य बढ़ाता है। यूं तो शतावरी स्त्री व पुरुष दोनों ही के लिए उपयोगी और लाभप्रद है लेकिन स्त्रियों के लिए विशेष रूप से गुणकारी व उपयोगी होती है।

क्या है शतावरी
शतावरी एक ऐसी औषधि है जिसे कई रोगों के इलाज में उपयोग किया जाता है, खासतौर पर सेक्स शक्ति को बढ़ाने में इसका विशेष योगदान होता है। इसका पौधा झाड़ी की तरह होता जिसमें फूल व मंजरियां एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं। इसका फल मटर के दाने जितना होता है जो पकने पर लाल रंग का हो जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक शतावर के प्रयोग से पुराने से पुराने रोगी के शरीर में भी रोगों से लड़ने की ताक़त आ जाती है। इसके अलावा इसका उपयोग शरीर को पुष्ट और सुडौल बनाने में किया जाता है।

शतावरी को शुक्रजनन, शीतल, मधुर एवं दिव्य रसायन
रसायन माना जाता है। महर्षि चरक भी शतावरी को चिर यौवन को कायम रखने वाला मानते थे। आधुनिक शोध भी शतावरी की जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मानते हैं। शतावरी के लगभग 5 ग्राम चूर्ण को सुबह और रात के समय गर्म दूध के साथ लेना लाभदायक होता है। इसे दूध में चाय की तरह पकाकर भी लिया जा सकता है। यह औषधि स्त्रियों के स्तनों को बढ़ाने में मददगार होती है। इसके अलावा शतावरी के ताज़ा रस को 10 ग्राम की मात्रा में लेने से वीर्य बढ़ता है। शतावरी मूल का चूर्ण 2.5 ग्राम को मिश्री 2.5 ग्राम के साथ मिलाकर पांच ग्राम मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री-मैच्योर इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष) में लाभ मिलता है। यही नहीं शतावरी की जड़ के चूर्ण को दूध में मिलाकर सेवन करने से धातु वृद्धि भी होती है।

यदि आप पहले से किसी चिकित्सकीय स्थिति जैसे, अवसाद या तनाव, गर्भावस्था आदि से गुजर रहे हैं तो आपको इसे लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लेना चाहिए।

आयोडीन नमक विश्व का सबसे बड़ा जनसंख्या नियंत्रण षड्यंत्र । आयोडीन युक्त नमक खाओ, नपुंसक हो जाओ


आज से लगभग 30-40 साल पहले जनता को आयोडीन नमक के बारे में बिलकुल पता नहीं था , जनता में आयोडीन की कमी नहीं थी,

यदि मानव इतिहास देखे तो जीसस क्राइस्ट काल या उससे भी पहले पाँच हज़ार वर्ष पूर्व महाभारत या दस लाख वर्ष पूर्व रामायण पुराण आदि में एक भी उदहारण प्राप्त नहीं होता जहां आयोडीन के कमी के लक्षण दिखाई देवे।

अचानक ही लगभग 30 साल पहले सरकार ने लाखों करोडो का टीवी और समाचार पत्र में विज्ञापन दे दे कर ब्रेनवाश शुरू किया कि भारत में आयोडीन की कमी है बच्चो के मानसिक विकास के लिए आयोडीन युक्त नमक ही खाये और भोली भारत की जनता ने इसे आदर्श मान लिया, तब भारत में बर्थ रेट 40 प्रति 1000 था.

आज तीस वर्ष बाद भारत में आयोडीन नमक के कारण बर्थ रेट लगभग 8 प्रति 1000 है. ठीक है जनसँख्या कम होनी चाहिए लकिन ये तरीका ??

भारत में आयोडीन की बिलकुल कमी नहीं है और इसकी पूर्ति दूध और हरी सब्जियों से पूरी हो जाती है आवश्यकता से अधिक आयोडीन खाने से कंठ में स्थित थाइरॉइड ग्रंथि अधिक हार्मोन बनाती है जिससे स्त्रियों में बाँझपन  pco अनियमित मासिक स्राव इत्यादि रोग होते है

आज भारत में 70% स्त्रियों में बाँझपन और बच्चे नहीं होने का कारण आयोडीन नमक से उत्पन्न थाइरॉयड समस्या है.

वहीँ पुरुषों में भी आयोडीन नमक से hyperthyroidism के कारण उच्च रक्तचाप मानसिक तनाव अनिद्रा ह्रदय में तेज़ धड़कन नपुंसकता आदि रोग होते है आज भारत की जनता को गिनी पिग बना कर आयोडीन नमक के एक्सपेरीमेन्ट के कारण कई परिवारों के अस्तित्व समाप्त हो गए है

यदि भारत में आयोडीन नमक (इसका विकल्प सादा खुला बिकने वाला समुद्री नमक और सेन्धा नमक है) , रिफाइंड तेल (इसका विकल्प मूंगफली सरसो जैतून तिल आदि खरीद कर तेल निकलवाए) फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट , अंग्रेजी दर्दनिवारक दवाएं जैसे ब्रूफिन डिक्लोफेनेक असेक्लोफेनेक, आटे और ब्रेड में ब्रोमाइड ,पेप्सी कोला आदि कूलड्रिंक ,पानी में क्लोरीन ब्लीच (इसका विकल्प ओज़ोन है)और एंडोसल्फान जैसे कीटनाशक बन्द हो गए तो भारत में कैंसर ह्रदय थाइरॉइड और किडनी रोग ख़त्म और भारत के 80-90% अस्पताल बन्द हो जाएंगे

1) फ्लोराइड जो टूथपेस्ट में मिलाया जाता है वह जहर है आप केवल बिना फ्लोराइड के टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल कीजिये

2) ओरल पोलियो वेक्सीन जिसमे sv40 नामक कैन्सर उत्पन्न करने वाले वाइरस को मिलाया गया है (गूगल सर्च कीजिये)

3)टेटनस टैक्सओइड वेक्सीन (टीटी इंजेक्शन) में स्त्रियों को बाँझ बनाने की दवा की मिलावट .. अपनी लाडली बेटियों को कभी भी टीटी का इंजेक्शन न दिलाये शायद वे जिंदगी में कभी माँ न बन पायेगी क्योकि उसमे anti -HCG antibody की मिलावट की गयी है,विश्वास नहीं हो रहा है tetanus HCG Kenya लिख कर गूगल कीजिये अभी तो केन्या की रिपोर्ट आई है लेकिन भारत में बीस साल पहले यह प्रयोग हो चुका है अब भी जारी है.

मित्रो साँसे थाम के इंतज़ार किजिए,जल्द ही मै एक ऐसा उपाय के बारे में लिखुंगा कि जिससे भारत विश्व के नंबर वन गोमाता के माँस के निर्यातक के पोज़िशन से शून्य गौमांस निर्यातक बन जाएगा अर्थात भारत में गौवध ही नहीं होगा ,आपने इस पोस्ट को पूरा पढ़ा इसके लिए आपका तहे दिल से धन्यवाद. आप  से एक रिक्वेस्ट है इसे इतना शेयर करो की हर कोई इस को पढ़ कर सचेत  हो जाए और इस जहर की चपेट में कभी ना आए .

लिंग का टेढ़ापन और नसों में कमजोरी दूर करने का घरेलु उपचार


 कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ लेने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और वीर्य की कमी होना जैसे रोग जल्दी दूर हो जाते हैं।

  मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।

  कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से भी जाना जाता है। संभोग करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोग करने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए। इसके बाद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए।

इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

 एक किलो इमली के बीजों को तीन-चार दिनों तक पानी में भीगे पड़े रहने दें। इसके पश्चात उन बीजों को पानी से निकालकर और छिलके उतारकर ठीक तरह से पीस लें। इसमें इससे दो गुना पुराने गुड़ को मिलाकर इसे आटे की तरह गूंथ लें।

फिर इसकी बेर के बराबर गोलियां बना लें। सेक्स क्रिया करने के दो घंटे पहले इसे दूध के साथ इस्तेमाल करें। इस तरह का उपाय सेक्स करने की ताकत को और अधिक मजबूत बनाता है।

 शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है।

 मोचरस, कौंच के बीज, शतावरी, तालमखाना को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर लगभग 400 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से बुढ़ापे में भी संभोग क्रिया का पूरा मजा लिया जा सकता है। इस योग को लगभग 2-3 महीने तक सेवन करना लाभकारी रहता है।

 लगभग 6 चम्मच अदरक का रस, 8 चम्मच सफेद प्याज का रस, 2 चम्मच देशी घी और 4 चम्मच शहद को एक साथ मिलाकर किसी साफ कांच के बर्तन में रख लें। इस योग को रोजाना 4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।

 बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां और गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रख लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योग शीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।

सफेद मूसली के चूर्ण और मुलहठी के चूर्ण को बराबर की मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम शुद्ध घी के साथ मिलाकर चाट लें और ऊपर से गर्म दूध पी लें। इस योग को नियमित सेवन करने से धातु वृद्धि होती है, नपुंसकता दूर होती है और शरीर पुष्ट और शक्तिशाली बनता है।

10-10 ग्राम धाय के फूल, नागबला, शतावरी, तुलसी के बीज, आंवला, तालमखाना और बोलबीज, 5-5 ग्राम अश्वगंध, जायफल और रूदन्तीफल, 20-20 ग्राम सफेद मूसली, कौंच के बीज और त्रिफला तथा 15-15 ग्राम त्रिकटु, गोखरू को एक साथ जौकुट करके चूर्ण बना लें। इसके बाद इस मिश्रण के चूर्ण को लगभग 16 गुना पानी में मिलाकर उबालने के लिए रख दें। उबलने पर जब पानी जल जाए तो इसमें 10 ग्राम भांगरे का रस मिलाकर दुबारा से उबाल लें। जब यह पानी गाढ़ा सा हो जाए तो इसे उतारकर ठंडा करके कपड़े से अच्छी तरह मसलकर छान लें और सुखाकर तथा पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में 20 ग्राम शोधी हुई शिलाजीत, 1 ग्राम बसन्तकुसूमाकर रस और 5 ग्राम स्वर्ण बंग को मिला लें। इस औषधि को आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम चाटकर ऊपर से गर्म दूध पी लें। 

मिर्गी दूर करने के आसान और घरेलू उपाय । Home Remedies For Epilepsy

 मिर्गी के रोगी के लिए शहतूत का रस लाभदायक होता है। 

 अंगूर का रस मिर्गी रोगी के लिये अत्यंत उपादेय उपचार माना गया है। आधा किलो अंगूर का रस निकालकर प्रात:काल खाली पेट लेना चाहिये।

  रोजाना तुलसी के 20 पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है।

मिर्गी रोगी को 250 ग्राम बकरी के दूध पीने से दौरे बंद हो जाते हैं।

 रोजाना तुलसी के 20 पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है।

तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघाने से मिर्गी के रोगी को होश आ जाता है।

 राई पीसकर चूर्ण बना लें। जब रोगी को दौरा पड़े तो सुंघा दें इससे रोगी की बेहोशी दूर हो जायगी।

तुलसी के पत्तों के रस में जरा सा सेंधा नमक मिलाकर 1 -1 बूंद नाक में टपकाने से मिरगी के रोगी को लाभ होता है।

 मिरगी के रोगी को ज़रा सी हींग को निम्बू के साथ चूसने से लाभ होता है ।

 मानसिक तनाव और शारिरिक अति श्रम रोगी के लिये नुकसान देह है। इनसे बचना जरूरी है।

क्या आपको पीठ दर्द, टांगो में दर्द या फिर रीड की हड्डी में दर्द की समस्या है?


ये समस्या बहुत ज़यादा शरीरिक काम या देर तक बैठने से होता है |लेकिन खुशकिस्मती से चिंता करने की कोई बात नही है कियोंकि इस लेख में हम आपको 100% प्राक्रतिक और असरदार तरीका बताएँगे जिस के इस्तेमाल से आप इन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं|इसके इस्तेमाल के कुछ के दिन बाद आपको सकारात्मक नतीजे नजर आने शुरू हो जायेंगे और 2 महीने से कम समय में आप पूरी तरह से ठीक हो जायेंगे |

तो इस प्राक्रतिक नुस्खे को अजमाने में जरा भी संकोच न करें और इस असहनीय दर्द से छुटकारा पायें| ये एक बहुत हे आसान औषधि है इसे रात को सोने से पहले खाए |

सामग्री :
5 सूखे अलुबुखरे
1 सुखी खुबानी
1 सुखी अंजीर

इन सबको एक साथ आप सीधे ही चबा चबा कर खाएं जैसे कोई फल खातें हैं. या जैसे भी आपको सही लगे वैसे इनको एक साथ सेवन करें. इसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है 2 महीने तक सिर्फ सोने से पहले इन को  खाए और आपका दर्द प्राक्रतिक तरीके से ख़तम हो जाएगा |

हर फल के अपने अपने सवास्थ्य लाभ होते हैं:

सुखी अंजीर : इस में फाइबर होता है जो हमारे पाचन तन्त्र को मज़बूत करता है और दिल को सेहतमंद  रखने में मदद करता है |फाइबर से कब्ज़ भी ठीक होती  है| ये फल कई खनिज पदार्थो से भरपूर होता है जैसे के magnesium, iron, calcium, और  potassium. ये खनिज हडिओं की मजबूती के लिए ज़रूरी होते हैं साथ ही  प्रतिरोधक क्षमता और चमडी के लिए भी फायदेमंद होता है|अंजीर शरीर से हानिकारक  estrogen को कुर्द्र्ती निकालने में मदद करता है| शरीर में  estrogens के ज़यादा मत्रा कई समस्याओं को उत्पन करती है जैसे के सर दर्द, uterine और  breast cancer भी हो सकता है|

सुखी खुबानी: ये फल antioxidants, potassium, non-heme iron, और dietary fiber का बहुत हे अच्छा स्रोत है| खुबानी में  पाए जाने वाले anti oxidants हमारे शरीर में  प्रतिरोधक क्षमता , सेल की वृद्धि और आँखों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं

गर्मी में यह 5 चीजें, तेजी से घटाएंगी वजन


1 दही - गर्मी के दिनों में दही का प्रयोग आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। यह आपको पोषण तो देगा ही, शरीर में गर्मी बढ़ने से भी रोकेगा और आपका वजन भी घटाएगा। इसके अलावा यह देर तक आपका पेट भरा रखेगा जिससे आप ओवर ईटिंग से भी बचे रहेंगे।

2  छाछ - छाछ का प्रयोग कर आप छरहरी काया पाने में कामयाब हो सकते हैं। चाहें तो इसे मसालों के साथ पी सकते हैं या फिर सब्जियों के साथ अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं।

3 व्यायाम या पैदल चलना  - खास तौर से गर्मी के दिनों में ज्यादा से ज्यादा पैदल चलना आपका वजन तेजी से कम कर सकता है। इन दिनों में शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है, और फैट कम होता है। इसके साथ-साथ आप व्यायाम को भी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।

4 लौकी - गर्मी के दिनों में लौकी, गिल्की जैसी सब्जियां हल्की और फायदेमंद होती हैं। यह आपका वजन कंट्रोल करने के साथ-साथ बेहतर पाचन में भी बेहद फायदेमंद साबित होती हैं।

5 नींबू - गर्मियों में नींबू पानी का सेवन खूब किया जाता है। यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ, तरलता बनाए रखने और वजन कम करने में भी बेहद फायदेमंद साबित होता है।

बहुत काम आ सकते हैं ये 10 छोटे-छोटे घरेलू नुस्ख

1. संतरे के छिलकों का महीन चूर्ण बनाकर उसमें गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाएं। चेहरे के मुंहासे नष्ट होते हैं और चेचक के दाग भी दूर होते हैं।

2. स्किन रूखी और बेजान लगती हो तो जौ का आटा, हल्दी, सरसो का तेल पानी में मिलाकर उबटन बना लें। रोजाना शरीर की मालिश कर गुनगुने पानी से नहाएं। दूध को केसर में मिलाकर पीएं, रूप निखर जाएगा।

3. अमरबेल के पौधे से रस तैयार किया जाए और सिर पर प्रतिदिन सुबह एक सप्ताह तक लगाया जाए तो सिर से डेंड्रफ नदारद हो जाएगी। साथ ही, बाल झड़ने का सिलसिला भी कम हो जाता है।

4. घाव के पक जाने पर आक की पत्तियों की सतह पर सरसों तेल लगाकर घाव पर लगाने से घाव फूटकर मवाद बाहर निकल आता है और घाव जल्दी सूखने लगता है।

5. एक दिन में 8-9 केले तीन से चार दिन तक खाएं आर्थराइटिस के कारण होने वाला दर्द कम हो जाएगा।

6. व्हीट-ग्रास का जूस सुबह खाली पेट पीने से चेहरे की लालिमा बढ़ जाती है और खून भी साफ होता है।

7. नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाने से रूसी एवं खुश्की से छुटकारा मिलता है।

8. बालों में रूसी होने पर मेथी दानों का पेस्ट बालों में लगाएं और आधा घंटे बाद धो लें और बालों को सूती कपड़े से हल्का-हल्का मालिश कर सुखा लें, रूसी दूर हो जाएगी।

9. धनिया और जीरा और चीनी तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से अम्ल पित्त या एसिडिटी के कारण होने वाली जलन शांत हो जाती है।

10. रोजाना सुबह एक से दो लहसुन की साबूत कलियां पानी से निगल लेने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

कास्मेटिक प्रॉडक्ट्स को छोड़ो- चीनी गोरा करे देगी आप के काले और दाग-धब्बे वाले अंडरआर्मस को।



आज हम आप की personality को बढ़ने के लिए एक खास नुस्खा लायें है जो आप की काले अंडरआर्मस से आप को निजात दिलवाएगा तो आये जानते है चीनी से अंडरआर्मस का कालापन दूर कैसे करे ।

इस समस्या से निजात पाने के लिए लोग तरह-तरह के कास्मेटिक प्रॉडक्ट्स को इस्तेमाल करते हैं। जिनसे कई बार हमारी स्किन पर रिएक्शन हो जाते हैं। वैसे तो आपने अंडरआर्मस का कालापन दूर करने के लिए कई तरह के घरेलू नुस्खो के बार में पढ़ा होगा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसा घरेलू नुस्खा बता रहे हैं जिसके सिर्फ एक बार के प्रयोग से ही अंडरआर्मस का कालापन कम हो जाएगा।

अंडरआर्मस का कालापन कई वजहों से हो सकता है। कुछ लोग वहां ठीक से सफाई नहीं करते हैं तो कुछ लोग अंडरआर्मस के बाल हटाने के लिए घटिया कंपनी के प्रॉडक्ट्स इस्तेमाल करते हैं। आज हम यहां जिस घरेलू नुस्खे के बारे में बता रहे हैं वो हर किचन में पाई जाने वाली ​चीनी है। जी हां, चीनी सिर्फ चाय में मिठास ही नहीं बल्कि अंडरआर्मस का कालापन दूर करने के लिए चीनी वरदान साबित हुई है।

स घरेलू उपाय को लगाने के लिए आपके पास चीनी के साथ अगर शहद भी है तो बहुूत फायदा होगा। इसे लगाने के लिए एक बॉउल में इतनी चीनी और शहद रखें जितना आपको काले एरिये में लगाना है। अब इन्हें आपस में अच्छी तरह मिक्स करें और प्रभावित एरिये पर पहले हल्के हाथों से मसाज करें फिर इसे लगभग 15 मिनट तक छोड़ दें। अब गुनगुने पानी से धो लें।

इसके बाद आपको एक ​लेप और लगाना है। आपको बाजार में कहीं भी सस्ती कीमत पर चारकोल (कोयला) मिल जाएगा। चारकोल और शहद का मिश्रण बनाएं। अब इस मिश्रण को अंडरआर्मस पर लगाएं। इसे 15 मिनट तक छोड़ दें। अब गुनगुने पानी से धोएं। इस घरेलू नुस्खे को एक बार ट्राई करके के बाद फर्क आप खुद देखेंगे।

योग सामान्य कसरत नही विज्ञान है Yoga is a science,



योग के आसन दूसरे शारीरिक आसनों  निर्मित किए गए हैं। ऋषि-मुनियों ने योगासन का अविष्कार रोगों को दूर कर लम्बी आयु के लिए किया था, क्योंकि वे स्वस्थ रहकर ज्यादा से ज्यादा जीना चाहते थे ताकि मोक्ष पाया जा सके।

योग के आसनों द्वारा कोई सा भी रोग दूर किया जा सकता है। किसी भी व्यक्ति को रोगी बनाकर जल्दी ही मृत्यु की ओर धकेलने वाले शारीरिक मल और जहर को दूर कर योग एक स्वस्थ और शक्तिशाली जीवन प्रदान करता है। यह काया को सुंदर और कांतिमय बनाता है। इसीलिए योग चिकित्सा का महत्व बढ़ा है।

योग चिकित्सा के लाभ :

1.हड्डियां : रीढ़ की हड्डी शरीर की महत्वपूर्ण हड्डी है। इसी पर शरीर की सभी हड्डियां निर्भर रहती है। निरंतर योग करते रहने से रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत हो जाती है जिसके कारण व्यक्ति को कभी बुढ़ापा नहीं आता।

इसके अलावा हाथ और पैरों की हड्डियां भी लचकदार बनी रहती है जिसके कारण छोटी-मोटी जगह से गिरने या छुटपुट दुर्घटना होने से कभी फ्रेक्चर की नौबत नहीं आती। हड्डियों के मजबूत और लचीले बने रहने से मांसपेशियों को भी ताकत मिलती है।

2.मांसपेशियां : आसनों को करते रहने से शरीर की मांसपेशियों को ताकत मिलती है। इससे जहां कमजोर व्यक्ति हष्ट-पुष्ट हो जाते हैं वही मोटे लोग दुबले पतले होकर स्वस्थ बने रहते हैं। मांसपेशियों का मजबूत और स्वस्थ रहना जरूरी है क्योंकि इससे भीतरी अंगों को ताकत मिलती है और रक्त वाहिनियां भी दुरुस्त होती है।

3.धमनियां : योग के आसनों को करने से रक्त वाहिनियां भी लचीली बनी रहती है जिसके कारण हृदय तक आसानी से रक्त पहुंचता है और वह स्वस्थ बना रहता है। इस क्रिया से खून भी साफ बना रहता है। रक्त वाहिनियों के अलावा अन्य प्रकार की नाड़ियां और धमनियां भी मजबूत रहकर फेंफड़ों, मस्तिष्क और आंखों को लाभ पहुंचाती रहती है।

4.भीतरी अंग : योग के आसनों को निरंतर करते रहने से शरीर के भीतरी अंगों में जमा मल और जहर बाहर निकल जाता है जिससे कि वह पुन: सुचारू रूप से कार्य करने लगते हैं। इस क्रिया से वे लम्बे काल तक स्वस्थ बने रहते हैं।

5.बाहरी अंग : जबकि शरीर भीतर से स्वस्थ और ताकतवर बनेगा तो स्वाभाविक रूप से ही बाहरी अंगों और चमड़ी को इसका लाभ मिलेगा। संपूर्ण देह कांतिमय, सुंदर और स्वस्थ नजर आएगी। आसनों के द्वारा शरीर को एक सुंदर शेप दिया जा सकता है।

गन्ने का रस पीने के नुकसान और कब इसे नहीं पीना चाहिए ।


ताजा गन्ने के रस का एक बड़ा ग्लास टेस्टी तो होता ही है, साथ ही डीहाइड्रेशन से बचने का सबसे अच्छा विकल्प है।

गर्मियों के दिनों में डीहाइड्रेशन से बचाना है तो गन्ने का रस सबसे बेहतर विकल्प है। इसके साथ ही यह जॉन्डिस जैसी घातक बीमारी में कारगर है वहीं तो गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहतरीन पेय है। इसका रस एनीमिया, कैंसर आदि तमाम बीमारियों से गन्ने का रस हमें बचाता है। इतने सारे फायदों के साथ इसके कई नुकसान भी हैं।

आईए जानते हैं हमें गन्ने के रस से क्या नुकसान हो सकते हैं-
अक्सर जहां से आप गन्ने का रस लेते हैं वहां गन्नों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता। रास्तों में खड़ी किसी भी दुकान से गन्ने का जूस न पीयें, इससे संक्रमण होने का खतरा होता है। ऐसी दुकानों से गन्ने का रस पीने से पेट में दर्द आदि समस्या भी हो सकती है।

गन्ने का जूस पीते वक्त दुकान की साफ सफाई का ध्यान रखें। कहीं दुकान में बहुत ज्यादा मक्खियां हुई तो ऐसी दुकानों से गन्ने का जूस पीने से बचें।

गन्ने का रस निकालने के लिए ज्यादातर दुकानें मशीन का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन आपको शायद नहीं पता कि मशीनों को चलाने का एक खास किस्म के तेल का उपयोग होता है। ये तेल यदि पेट में चला जाए तो इसका बुरा असर हमारे स्वास्थ्य पर साफ देखने को मिल सकता है।

जानिए कब ना पिएं गन्ने का रस-
गन्ने का जूस उसी स्थिति में लाभकर होता है जब आप उसे ताजा पीयें। यदि आपको कोई फ्रीज किया हुआ जूस दे तो उसे न पीयें। बासी गन्ने के जूस में मक्खियां पनप सकती हैं। इतना ही नहीं उसमें कीड़े आदि भी लग सकते हैं।

गन्ने का जूस पीते वक्त इस बात का ख्याल रखें कि आपके रस में कोई अन्य चीज की मिलावट न हो। इसके साथ ही विशेषज्ञों के मुताबिक एक दिन में दो गिलास से ज्यादा गन्ने का रस न पीयें। दरअसल स्वस्थ आदमी की महज दो गिलास गन्ने के रस की ही जरूरत होती है।

यदि संभव है तो गन्ने का जूस बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्नों पर अवश्य नजर दौड़ाएं। कहीं आपको सड़े गन्ने का रस तो नहीं दिया जा रहा। यह पेट में बीमारी पैदा कर सकता है।



सफेद बालों को जड़ से काला करने व बालों का झड़ना रोककर उनको लम्बा करने का बेमिसाल नुस्खे

कम उम्र में जिन लोगों के बाल सफेद हो जाते हैं, उनके लिए ये एक बड़ा चिंता का विषय होता है। बालों की हेल्थ पर खानपान का विशेष प्रभाव पड़ता है।

बालों के असमय पकने को रोकने के लिए चाय, कॉंफी का सेवन कम करना चाहिए। साथ ही, एल्कोहल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। खाने में ज्यादा खट्टा, अम्लीय भोज्य-पदार्थ लेने से बालों पर असर पड़ता है। तेल और तीखा भोजन भी बालों से जुड़ी समस्या को और बढ़ा देते हैं।

इन सबके अलावा मानसिक तनाव, चिंता, धूम्रपान, दवाओं का लंबे समय तक उपयोग, बालों को कलर करना आदि से बालों के पकने, झड़ने और दोमुंहा होने का सिलसिला और तेज हो जाता है। यदि आप इन परेशानियों से बचना चाहते हैं तो अपनाइए ये नुस्खे, जो बालों के लिए वरदान की तरह काम करते हैं।

अदरक को कद्दूकस कर शहद के रस में मिला लें। इसे बालों पर कम से कम सप्ताह में दो बार नियमित रूप से लगाएं। बालों का पकना कम हो जाएगा।

दही के साथ टमाटर को पीस लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं। इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार करें। बाल लंबी उम्र तक काले और घने बने रहेंगे।

सूखे आंवले को पानी में उबालें। इस पानी को इतना उबालें कि वह आधा रह जाए। इसमें मेहंदी और नींबू रस मिलाकर बालों पर लगाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से असमय बालों का पकना रुक जाता है।

मेथी के दानों को पीसकर मेहंदी में मिला लें। इसमें तुलसी की पत्तियों का रस और सूखी चाय की पत्तियों को मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बालों पर लगाकर 2 घंटे तक रखें। फिर किसी हर्बल शैम्पू से बालों को धो लें, फायदा होगा।
1/2 कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म करें। इसमें 4 ग्राम कर्पूर मिला लें। जब कर्पूर पूरी तरह से घुल जाए तो इस तेल से मालिश करें। इसकी मालिश सप्ताह में एक बार जरूर करनी चाहिए। कुछ ही समय में रूसी खत्म हो जाएगी।

नारियल तेल में थोड़ा-सा दही डालकर सिर पर मालिश करें। इससे बाल दोमुंहे नहीं होंगे। साथ ही, गिरना भी बंद हो जाएंगे।

गुड़हल के फूलों को पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बालों पर लगाएं। यह पेस्ट एक नेचुरल कंडिशनर की तरह काम करता है। इस पेस्ट का लगातार उपयोग करने पर बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
बालों में सप्ताह में एक बार तिल का तेल जरूर लगाएं। इस तेल के लगातार उपयोग से बाल गिरना बंद हो जाते हैं।

लौकी को सुखाकर नारियल तेल में उबाल लें। इस तेल को छानकर बोतल में भर लें। इस तेल की मसाज करने से बाल काले हो जाएंगे।
आधा कप दही में एक ग्राम काली मिर्च और थोड़ा नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं, फायदा होगा।

अमरूद की पत्तियों का पेस्ट बनाकर बालों में लगाएं, लाभ होगा।
तुरई को काटकर नारियल तेल में तब तक उबालें, जब तक वह काली न हो जाए। इस तेल को रोजाना बालों में लगाने से बाल काले हो जाते हैं।

आंवले के साथ आम की गुठली को पानी मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को बालों में लगाकर एक घंटे बाद बाल धो लें।

काली अखरोट को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा करके बाल धोएं। कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर से काले हो जाएंगे।
बालों को हमेशा ठंडे और साफ पानी से धोएं।

हरे आंवले का पेस्ट बनाकर बालों की जड़ों में लगाएं या आंवला पाउडर में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं।

आंवले का रस, नींबू का रस और बादाम का तेल मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं।

मेथी दानों को रातभर पानी में भिगो दें। सुबह मेथी दानों को दही में पीसकर बालों में लगाएं। एक घंटे बाद बाल धो लें।

एक नींबू के रस में उतना ही पानी मिलाकर मिश्रण बना लें। शैम्पू करने के बाद बालों में डालें। कुछ देर रहने दें और फिर साफ पानी से धो लें।

हाथ-पैर सुन्‍न पड़ जाएं तो अपनाएं ये घरेलू उपचार

अगर हाथ पैरों में जन्‍नाहट होती है तो अपने आहार में ढेर सारे विटामिन बी, बी6 और बी12 को शामिल करें। इनके कमी से हाथ, पैरों, बाजुओं और उंगलियों में सुन्‍नता पैदा हो जाती है।

आपको अपने आहार में अंडे, अवाकाडो, मीट, केला, बींस, मछली, ओटमील, दूध, चीज़, दही, मेवे, बीज और फल शामिल करने चाहिये। आप चाहें तो vitamin B-complex supplement भी दिन में दो बार खा सकते हैं।हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां, मेवे, बीज, ओटमील, पीनट बटर, ठंडे पानी की मछलियां, सोया बीन, अवाकाडो, केला, डार्क चॉकलेट और लो फैट दही आदि खानी चाहिये।

आप रोजाना मैग्‍नीशियम 350 एम जी की सप्‍पलीमेंट भी ले सकती हैं। पर इस बारे में डॉक्‍टर से जरुर बात कर लें।हाथ और पैरों के खराब ब्‍लड सर्कुलेशन से ऐसा होता है। इसलिये उस प्रभावित हिस्‍से को ऊपर की ओर उठाइये जिससे वह नार्मल हो सके। इससे सुन्‍न वाला हिस्‍सा ठीक हो जाएगा। आप अपने प्रभावित हिस्‍से को तकिये पर ऊंचा कर के भी लेट सकते हैं।

सबसे पहले प्रभावित जगह पर गरम पानी की बोतल का सेंक रखें। इससे वहां की ब्‍लड सप्‍पलाई बढ़ जाएगी। इससे मासपेशियां और नसें रिलैक्‍स होंगी। एक साफ कपड़े को गरम पानी में 5 मिनट के लिये भिगोएं और फिर उससे प्रभावित जगह को सेंके। आप चाहें तो गरम पानी से स्‍नान भी कर सकती हैं।

व्‍यायाम करने से शरीर में ब्‍लड र्स्‍कुलेशन होता है और वहां पर ऑक्‍सीजन की मात्रा बढ़ती है। रोजाना हाथ और पैरों का 15 मिनट व्‍यायाम करना चाहिये। इसके अलावा हफ्ते में 5 दिन के लिये 30 मिनट एरोबिक्‍स करें, जिससे आप हमेशा स्‍वस्‍थ बने रहें।

बंद माहवारी को चालू करने के घरेलु उपाय



मासिक धर्म स्त्री में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है| किसी कन्या को जो सबसे पहली बार ऋतूस्राव होता है उसे रजोदर्शन कहते हैं यह मासिक धर्म हर एक 28 दिन के अंतराल से लगभग 45 से 50 वर्ष की उम्र तक बना रहता है ! यह स्राव 3 दिनों से लेकर 6 दिनों के समय के लिए होता है ! माहवारी या हत्रल गर्भाशय से आता है एवं योनी मार्ग से बहार निकलता है यह बहुत न गाड़ा और न बहुत पतला है इसका रंग कुछ कालिमा लिए हुए लाल है ! इससे पता चलता है की कन्या अब युवा हो गयी है !

लक्षण :- 
महिलाओं में या युवा लड़कियों में आमतौर पर रजोप्रव्रती के समय पेट में अत्यधिक दर्द होना मासिक धर्म का नियमित न होना एवं कभी जल्दी या कभी देर से आना और खून के थक्कों के साथ आना ऋतुस्राव का अनियमित होना कहलाता है ! ऐसी स्थिति में पुरुष अगर सम्भोग करता है तो उसे संक्रमण होने की संभावना रहती है इसीलिए ऋतुस्राव के दौरान कभी सेक्स नहीं करना चाहिए तथा मासिक धर्म का दर्द युवतियों की आम समस्या रहती है ! जिसमे खासतौर से बीज वाहिनी एवं अंडाशय की विक्रति के साथ साथ मलावरोध की भी शिकायत रहती है महिलाओं को अनेक रोगों के साथ कमर में विकराल पीड़ा सर में दर्द उलटी आदि लक्षण होते है !

कारण :-
शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी – इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता|

पहचान :-
गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान
कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं|

नुस्खे :-
1. 3 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से माहवारी ठीक हो जाती है|

2. दूब का रस एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय पीने से रुकी माहवारी खुल जाती है|

3. कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर कुछ दिनों तक खाने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|

4. ग्वारपाठे का रस दो चम्मच की मात्रा में खाली पेट लगभग दो सप्ताह तक सेवन करें|

5. 10 ग्राम तिल, 2, ग्राम कालीमिर्च, दो नग छोटी पीपल तथा जरा-सी शक्कर-सबका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|

6. 3 ग्राम तुलसी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें|

7. 50 ग्राम सोंठ, 30 ग्राम गुड़, 5 ग्राम बायबिड़ंग तथा 5 ग्राम जौ – सबको मोटा-मोटा कूटकर दो कप पानी में औटाएं| जब पानी आधा कप रह जाए तो काढ़े का सेवन करें| रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|

8. बरगद की जटा, मेथी और कलौंजी – सब 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूट लें| फिर आधा किलो पानी में सब चीजें डालकर काढ़ा बनाएं| जब पानी आधा रह जाए तो छानकर शक्कर डालकर पी जाएं|

9. प्याज का सूप एक कप बनाएं| उसमें थोड़ा- सा गुड़ घोल लें| इस पीने से रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|

10. दिन में तीन बार 2-2 ग्राम नामा गरम पानी से सेवन करना चाहिए| इससे मासिक धर्म खुल जाता है|

मासिक धर्म को नियमित करने के उपाय :-
जहाँ तक हो स्त्रीयों को भय, क्रोध, शोक, चिंता, तनाव, अत्यधिक सोने, अत्यधिक भूखे प्यासे रहने से बचना चाहिए एवं मासिक धर्म के दौरान सफाई आदि का ध्यान रखना जरूरी है !..

अगर आपको अपने सेक्स लाइफ को अच्छी तरह आनंद करनी हो तो .......


त्वचा में निखार लाता है लीची: 
लीची का नियमित सेवन से आपकी खूबसूरती को चार चाँद लग जाता है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स आपके एजिंग को धीमा कर देता है। और चेहरे में पाए जाने वाले छोटे छोटे धब्बे को भी कम करता है। लीची त्वचा के रंग में निखार लाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण फल है। इसके नियमित रूप से सेवन करने से बढ़ती उम्र का प्रभाव कम मालूम पड़ता है।

मोटापा घटाने के लिए लीची: 
आप लीची को वजन घटाने के लिए भी खा सकते हैं। इसमें फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिसके खाने के बाद भूख बहुत देर तक नहीं लगती है। इस तरह से आप अपने वजन को कंट्रोल कर सकते हैं।

बेहतर सेक्स लाइफ के लिए लीची: 
अगर आपको अपने सेक्स लाइफ को अच्छी तरह आनंद करनी हो तो लीची का सेवन जरूर करें। लीची आपके सेक्स ड्राइव को बढ़ाता है और आपको पूर्ण संतुष्टि की ओर ले जाता है।

लीची ठंड से बचाता है :
इस फल के खाने से आपको ठंड में बहुत हद तक राहत मिलती है। इसमें विटामिन सी पाया जाता है जो आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है और सर्दी -जुकाम से भी नजात दिलाता है।

 लीची हार्ट अटैक रोकता है:
 इसमें पोटैशियम प्रचुर में पाया जाता है जो ह्रदय को स्वस्थ रखते हुए हार्ट के विभिन्य परेशानियों से बचाता है।

लीची कैंसर को रोकता है: 
इसमें कैंसर रोधी बायो-केमिकल पदार्थ पाये जाते हैं जो कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोकता है। इसलिए कहा जाता है कि खासकर महिलाओं को इस फल का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए ताकि स्तन कैंसर की संभावना कम हो।

लीची एसिडिटी कम करता है:
 लीची में फाइबर की बहुलता होती है जो आपके पाचन को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है तथा कब्ज, जलन और अनपच जैसी समस्याओं से बचाता है।

लीची के पोषण तत्व:
लीची में कार्बोहायड्रेट, विटामिन सी, विटामिन

क्या आप जानते हैं कि श्मशान से आने के बाद नहाते क्यों हैं,

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जानें इसके वैज्ञानिक और धार्मिक कारण को!

आप तो जानते ही होंगे कि इस पृथ्वी पर जिसने भी जन्म लिया है, उसे एक दिन मरना ही है। कोई भी कैसा ही क्यों ना हो हो उसे मरना ही होता है। आपने देखा होगा जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके शव को घर से श्मशान तक ले जाया जाता है। इस दौरान उसकी शव यात्रा में काफी लोग इकठ्ठा होते हैं। किसी के शव को कन्धा देने व उसकी शवयात्रा में शामिल होने को सभी धर्मों में पवित्र माना गया है। उसी समय इंसान को जीवन की सच्चाई का आभास होता है।

शवयात्रा में भाग लेने वाले सभी लोग करते हैं स्नान:
आपने एक और चीज देखी होगी कि जो लोग भी इस शवयात्रा में शामिल होते हैं, सभी स्नान करते हैं। बहुत सारे तो उनमें से ऐसे होते हैं, जिन्हें इसके कारणों के बारे में भी पता नहीं होता है। क्या आप भी उन्ही में से हैं, जिन्हें श्मशान के बाद नहाने की वजह नहीं पता है तो जानिए अंतिम संस्कार के बाद स्नान करने के धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या हैं।

अंतिम संस्कार के बाद स्नान के धार्मिक कारण:
श्मशान से आने के बाद नहाने का धार्मिक कारण यह है कि श्मशान एक ऐसी जगह होती है जहाँ पर नकारात्मक शक्तियों का वास होता है। यह कमजोर दिल वाले व्यक्ति पर बहुत जल्द अपना कब्ज़ा कर लेती हैं। आपको बता दें पुरुषों की अपेक्षा महिलायें ज्यादा भावुक और मानसिक रूप से कमजोर होती हैं, इसलिए उन्हें श्मशान जाने की इजाजत नहीं होती है। ऐसा माना जाता है कि अंतिम किया हो जाने के बाद भी मृतआत्मा का सूक्ष्म शरीर कुछ समय तक वहाँ मौजूद रहता है। जो किसी पर भी बुरे प्रभाव डालने की शक्ति रखती है।

अंतिम संस्कार के बाद स्नान के वैज्ञानिक कारण:
अंतिम संस्कार के बाद स्नान करने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। अंतिम संस्कार से पहले ही शव काफी देर तक बाहर रहता है, 

बिना मेहनत करे पेट की चर्बी कम करने के तरीके, ऎसा करने से 1 माह में मोटापा कम होने लगेगा।


चाय में पुदीना डालकर पीने से मोटापा कम होता है।

खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद कालीमिर्च व नमक छिड़क कर खाएं। इससे आपको विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन एक साथ मिलेंगे।

रोज पपीता खाएं। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर एक्ट्रा फेट्स कम होती है।

दही का सेवन करने से शरीर की एक्ट्रा फेट्स घटती है।

छोटी पीपल का बारीक चूर्ण कर उसे कपड़े से छान लें। इस चूर्ण को रोजाना तीन ग्राममात्रा में
सुबह के समय छाछ के साथ लें। इससे निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है और कमर पतली हो जाती है।

पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।

सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से वसा में कमी होती है।
एक चम्मच पुदीना रस और 2 चम्मच शहद मिलाकर लें। इससे मोटापा कम होता है।

अगर मोटापा कम नहीं हो रहा है, तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके वजन को काबू में किया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है।

मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से जलन पैदा होती है, जो भूख कम करती है।
इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।

 दो बड़े चम्मच मूली के रस में शहद मिलाएं। इसमें बराबर मात्रा में पानी मिलाएं और पिएं। ऎसा करने से 1 माह के बाद मोटापा कम होने लगेगा।

 रोज सुबह-सुबह एक गिलास ठंडे पानी में दोचम्मच शहद मिला कर लीजिए। इस घोल को पीने से
शरीर से वसा की मात्रा कम होती है।

ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।

केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।

उत्कटासन योग विधि करिये योग रहिये निरोग.. Utkatasana Yoga

यहां पर आपको उत्कटासन के सरल तरीके के बारे में बताया जा रहा है जिसका अनुसरण करके आप इस आसन का अभ्यास अच्छी तरह से कर सकते हैं।

पैर को थोड़ा दूर रखकर और रीढ़ एवं सिर को सीधा रखते हुए बैठ जाएं।

सांस खींचते हुए पंजों पर बैठकर अच्छी तरह से दोनों एडि़यों को उठाएं।

दोनों कोहनियों को घुटनों पर रखें।
एक हाथ को दूसरे पर रखकर इसको अपनी ठोड़ी पर टिका दें।
सांस छोड़ते हुए नितंबों को एडि़यों पर टिकाएं।

धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े और साथ ही साथ इसी स्थिति में बने रहें।

स्थिति में बने रहने की अवधि आप पर निर्भर करता है। धीरे धीरे आप इस अवधि को बढ़ाते रहें।

फिर धीरे-धीरे आरंभिक अवस्था़ में लौट आएं।
यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप तीन से पांच चक्र करें

उत्कटासन योग लाभ I Utkatasana benefits
उत्कटासन पंजों को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाता है।
यह जांघों को स्वस्थ रखता है।
घुटनों को शक्ति प्रदान करता है।
इस तरह से आपके पैरों को मजबूत बनाता है और चलने फिरने में मदद करता है।

पाचन तंत्र की सक्रियता बढ़ाने में मदद करता है।

गठिया रोग में इसका अभ्यास करने से फायदा मिलता है।

यह रीढ़ की हड्डी के लिए लाभदायक है।

छाती के मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

पीठ के निचले हिस्से को स्वस्थ एवं मज़बूती प्रदान करता है |

शरीर में संतुलन बनाने में सहायक है।

इस आसन का अभ्यास से शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है।

इसका नियमित अभ्यास से भूख खूब लगती है।

यह आसन स्त्रियों के लिए एक अलग मकाम रखता है।

कब्ज को कम कर गैस समस्या को रोकता है।

इस आसन के अभ्यास से आप पथरी एवं हर्निया से बच सकते हैं।
इसके नियमित अभ्यास से वीर्य का प्रभाव सही तरीके से होने लगता है और पुरुष इसको बहुत देर तक रोक सकते हैं।

जिनको पाइल्स की समस्या है उनको प्रायः इस आसन का अभ्यास करनी चाहिए।
इसके अभ्यास से वायुदोष को ठीक करने में मदद मिलती है।

उत्कटासन योग सावधानी I Utkatasana precaution
गंभीर गठिया रोग होने से इसको करने से बचें।

चककर आने पर इस अभ्यास को करने से बचें।

टखने में चोट होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।

घुटने का दर्द होने पर इसका अभ्यास न करें।

सिर दर्द और अनिद्रा की स्थिति में कुर्सी आसन का अभ्यास ना करें।
मासिक धर्म के दौरान इस आसन के अभ्यास में विशेष ध्यान रखें।

इसको खाली पेट अभ्यास करनी चाहिए।

ह्रदय रोग वाले इसको किसी विशेषज्ञ के निगरानी में करनी चाहिए।