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मुरब्बा खाने का फायदा जो भागे दे आप की गर्मी, murabba khane ka phayada



गर्मी के मौसम में मुरब्बा खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह शरीर को ठंडक देता है और कई बीमारियों से भी छुटकारा देता है। आंवले के मुरब्बे के अलावा और भी कई तरह के मुरब्बे होते हैं जैसे गाजर, सेब और बेल का मुरब्बा। इसमें विटामिन,कैल्शियम,आयरन,फाइबर और मिनरल्स होते हैं जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अलग-अलग तरह के मुरब्बों के सेवन से सेहत को भी कई लाभ होते हैं। आइए जानिए मुरब्बे और उससे जुड़े फायदे

1. आंवला 
अांवले के मुरब्बे में विटामिन-सी, आयरन और फाइबर काफी मात्रा में होते हैं जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके सेवन से कई बीमारियों से राहत मिलती है। रोज सुबह खाली पेट आंवले का मुरब्बा खाने से हाई ब्लड प्रैशर की संमस्या में फायदा होता है। यह शरीर में खून की कमी को पूरा करता है और कब्ज एवं एसिडिटी की परेशानी को भी दूर करता है। इसके अलावा आंवले के सेवन से एनर्जी आती है जिससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है।

2. सेब 
इसमें आयरन, फास्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-बी भरपूर मात्रा में होते हैं जो शरीर को ऊर्जा देते हैं। इसके सेवन से याददाश्त बढ़ती है और दिमाग भी ठंडा रहता है। इसके अलावा सेब का मुरब्बा खाने से मोटापे की समस्या दूर होती है। जिन लोगों को रात में नींद न आने की परेशानी होती है उनके लिए यह मुरब्बा खाना बहुत फायदेमंद होता है।

3.गाजर 
गाजर के मुरब्बे में आयरन और विटामिन-ई होता है जो आंखों की रोशनी बढ़ाता है। इसके सेवन से पेट की गैस और जलन दूर होती है। गाजर का मुरब्बा खाने से दिमाग तेज होता है औ यह डिप्रेशन की समस्या को भी दूर करता है। रोजाना इसको खाने से उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियां भी ठीक हो जाती है।

4. बेल 
बेल के मुरब्बे में प्रोटीन, फास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और फाइबर होता है जो दिमाग और हृदय रोगों में फायदेमंद होता है। इसके अलावा यह पेट की कई समस्याओं को दूर करता है। इससे एसिडिटी, अल्सर और कब्ज की परेशानी नहीं होती। बेल के मुरब्बे से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे शरीर कई बीमारियों से दूर रहता है।

आम की पत्तियों के असरदार फायदे जरूर आजमाऐ Amazing Benefits of Mango Leaves


गर्मियों में सबसे ज्यादा मिलने वाला और खाया जाने वाला फल आम, स्वाद में बेहद स्वादिष्ट होता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आम की पत्तियां भी कोई कम गुणकारी नहीं होतीं।

आम की पत्तियों में थेराप्यूटिक और अन्य मेडिकल प्रॉपर्टी होती हैं। इसके अलावा इसमें अच्छी खासी मात्रा में विटामिन सी, बी और ए भी पाया जाता है। जब आप की पत्तियां ताजी, छोटी और लाल तथा बैंगनी रंग लिये हुए होती हैं, तभी उन्हें तोड़ कर प्रयोग किया जा सकता है। बड़ी और पुरानी होने पर यह अपना असर नहीं दिखा पाती।

आम की पत्तियां एक ऐसा खजाना हैं, जो आपको फ्री में ही मिल जाएगा इसलिये इसे अच्छी ढंग से प्रयोग करें। आम की पत्तियां साल भर मौजूद रहती हैं इसलिये आपको बीमारी दूर करने के लिये किसी खास मौसम का इंतजार करने की जरुरत नहीं है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टी होने के नाते यह लगभग हर बीमारी का खात्मा कर सकती है।

मधुमेह से बचाए - 
आम की नाजुक और ताजा पत्तियों की मदद से आप मधुमेह को भी कंट्रोल कर सकते हैं। यह ब्लड शुगर को कंट्रोल कर के आपके हेल्थ को ठीक रखती है। इसमें मौजूद हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव से ब्लड शुगर लो हो जाता है।

दमा से बचाए - 
यह सांस की बीमारी को भी कंट्रोल करती है। यह चाइनी$ज मेडिसिन में काफी ज्यादा प्रयोग की जाती हैं। आप आम की पत्तियों को पानी में उबाल कर बनाया गया काढा पियें। इसमें थोड़ी सी शहद भी मिक्स कर सकते हैं।

ब्लड़ प्रेशर लो करने में मददगार -
इसमें हाइपोटेंसिव प्रॉपर्टी होती है जिसके चलते यह ब्लड प्रेशर को लो करने में सहायक होती है। यह खून की नाडियों को मजबूती देती है और खून के थक्कों को जमने से रोकती भी है।

गॉल ब्लैडर और किडनी स्टोन से बचाए - 
रोजाना आम की पत्तियों के पावडर से बना घोल पीने से किडनी के स्टोन दूर करने में मदद मिलती है। आम की पत्तियों को छाया में सुखा कर पावडर बनाना चाहिये।

पेचिश का इलाज - 
यह खून आने वाली पेचिश का भी इलाज करती है। आम की पत्तियों को सुखा कर पावडर बनाएं और फिर इसे दिन में दो बार पानी के साथ खाएं। इससे आराम मिलेगा।

कानों का दर्द दूर भगाए - 
आम की पत्तियों का जूस निकाल कर कानों में डालिये, इससे दर्द बंद हो जाएगा। जूस को प्रयोग करने से पहले हल्का गरम करना ना भूलें।

हिचकी और गले की समस्या से राहत - 
अगर आपको हिचकी आ रही है या गले में कोई परेशानी है तो थोड़ी सी मुलायम आम की पत्तियों को जला लें और फिर उसका धुंआ सांस के दृारा अंदर खींचे।

पेट के लिये रामबाण - 
थोड़ी सी आम की पत्तियों को गरम पानी में डालें, बर्तन को ढंक दें और रातभर के लिये इसे ऐसे ही छोड़ दें। दूसरे दिन पानी को छान कर खाली पेट पी जाएं। इसे नियमित पीने से पेट की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है और पेट का कोई रोग नहीं होता।

कैसे करें प्रयोग

आप चाहें तो छोटी, नाजुक पत्तियों को तोड़ कर मुंह में डाल कर चबा भी सकते हैं। अगर इसका पेय बनाना हो तो पत्तियों को तोड़ कर हल्के गुनगुने पानी में डाल कर बर्तन को ढंक दें और सुबह पानी छान कर पी जाएं। अगर इसका पावडर बनाना हो, तो नाजुक पत्तियों को तोड़ कर धो कर छाया में सुखा लें और फिर सूखने के बाद इसका पावडर बना कर सेवन करें।

खाली पेट चाय पिने से पहले पढ़ ले ये बाते


हमने अक्सर देखा हैं लोग सुबह की चाय खाली पेट पीना पसंद करते हैं. लेकिन खाली पेट चाय पिने से बहुत सारे नुकसान हो सकते हैं.

*चाय में ढेर सारा एसिड होता है, खाली पेट सुबह पीने से पेट के रस पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिये कई लोगों को सुबह चाय पीनी अच्‍छी नहीं लगती|

*अगर चाय में दूध ना मिलाया जाए तो वह काफी फायदा पहुंचाती है, जैसे मोटापा कम करना। पर अगर अधिक ब्‍लैक टी का सेवन किया जाए तो वह सीधे पेट पर असर करती है।अध्‍ययन के अनुसार पाया गया है कि जो लोग खाली पेट बहुत अधिक दूध वाली चाय पीते हैं, उन्‍हें थकान का एहसास होता है।

*खाली पेट कड़ी चाय पीने से पेट को नुकसान पहुंच सकता है। कड़ी चाय से पेट में अल्‍सर और एसिडिटी हो सकती है।

*चाय के साथ बिस्‍कुट या अन्‍य चीज़ें खाने से पेट दृारा चाय अच्‍छी तरह से पचा ली जाती है। दूसरी ओर चाय के साथ नमकीन या मीठा खाने से शरीर को सोडियम की प्राप्‍ती होती है, जिससे अल्‍सर नहीं होता।

*चाय में टैनिन होता है, ऐसे में वह आपके खाने में मौजूद आयरन के साथ रिएक्‍ट कर सकती है इसलिये दोपहर में खाना खाने के बाद चाय ना पियें।
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बच्चों की भूख और तंदुरुस्ती बढ़ाने का एक बहुत बढ़िया नुस्खा


बच्चों की भूख और तंदुरुस्ती बढ़ाने  वाली सेहतमंद जौ की खीर
बच्चों को तंदरुस्त रखने, भूख और सेहत बढ़ाने का एक बहुत बढ़िया नुस्खा :-

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एक कटोरी दूध लें. इसमें छिलका उतार कर भीगे हुए जौ को मोटा-२ पीसा हुआ या साबुत डाल कर इतना उबालें की जौ अच्छी तरह गल जाएँ. अगर बच्चे की पाचन शक्ति कमज़ोर है तो दूध में थोड़ा पानी मिला लें, ताकि पकाने पर बहुत गाढ़ा न हो जाए. इसमें एक-दो दाने छोटी इलाइची के चाहें तो स्वाद के लिए पीस कर डाल दें और थोड़ी चीनी या मिश्री मिला लें. ६ महीने से बड़े बच्चे को १-२ चम्मच, १ साल से बड़े बच्चे को ५-६ चम्मच और इस से बड़े बच्चे को इसी प्रकार से मात्र बढ़ा सकते हैं. यह कुल मात्र एक दिन की है. इसे एक बार में, या बाँट कर दिन में २-३ बार में खिलाएं. 

अगर बच्चा चबाना नहीं सीखा तो जौं के दानों को थोड़ा चम्मच से दबा कर और नरम कर लें या फिर मिक्सी में हल्का सा पीस लें. आप को कुछ ही सप्ताहों में बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगें.

अगर बड़े भी एक-दो कटोरी इस खीर कि खाएं, तो उन्हें कई तकलीफों इन आराम मिलेगा, स्वास्थ्य बेहतर होगा और मधुमेह में भी लाभ होगा. पर जिनका वजन अधिक् है या मधुमेह है, उन्हें बिना चीनी के इसे प्रयोग करना चाहिए.

सफेद बाल हो जाएंगे दोबारा काले, ये हैं 100% पक्का नुस्खा


आजकल अधिकत्तर हर दूसरे व्यक्ति के उम्र से पहले ही काले बाल सफेद हो जाते हैं। जिससे व्यक्ति अपनी उम्र से पहले ही बूढ़ा लगने लगता है और वो इन सफेद बालों को छुपाने के लिए डाई या कलर लगाता है। जिसके बहुत से साइड-इफैक्ट होतें हैं या कई लोंगों को इन कलर्ज से एलर्जी भी हो जाती है। सही खानपान न होने के कारण या फिर किसी बीमारी के चलते या फिर शरीर में विटामिन बी 12 की कमी,प्रदूषण भरे वातावरण के कारण भी कई बार बाल जल्दी सफेद होने लग जाते हैं। लेकिन आज हम एक एेसा कारगर नुस्खा आप लोंगो को बताएंगे जिससे 100 %पक्का आपको बाल काले हो जाएंगे।

जरूरी सामान
- करी पत्ते
- दही या छाछ

बनाने और लगाने की विधि
सबसे पहले 20 करी पत्तों को लेकर अच्छे से धो लें। फिर उन्हें मिक्सी में दही के 4-5 चम्मच के साथ बीट करके पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को पैक की तरह बालों की जड़ो में लगाएं। पहले इससे 5 मिनट तक मसाज करें। फिर इस पैक को बालों में 20 से 25 मिनट तक लगाकर रखें। इसके बाद बालों को अच्छे से धो लें। आप इस पैक को महीने में दो बार अपने बालों में लगाते रहें। फिर देखें कमाल, किस तरह आपके बाल हमेशा के लिए रहेंगे काले। डाॅक्टर तक भी इस नुस्खे को मान गए हैं। फिर क्यों लगाना इन कैमिकल्स वाली डाई या कलर को।
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ये लक्षण नजर आए तो समझो किडनी खराब है If you see these signs, then think kidney is bad



किडनी शरीर का एक ऐसा अंग होता है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को छानकर पेशाब के रूप में निकालने में मदद करती है.

रक्त को साफ करने का काम करने वाली किडनी आमतौर पर हमारी लापरवाही का शिकार होती है.

आज विश्व किडनी दिवस है तो इस मौके पर आप अपनी किडनी के बारे में जानें और उसे स्वस्थ रखने का प्रण ले.

हमारी किडनी शरीर के बीचो बीच कमर के पास होती है. यह अंग मुट्ठी के बराबर होता है. हमारे शरीर में दो किडनियां होती हैं. अगर एक किडनी पूरी तरह से खराब हो जाए तो भी शरीर ठीक चलता रहता है.

हृदय के द्वारा पम्प किए गए रक्त का 20 प्रतिशत किडनी में जाता है, जहां यह रक्त साफ होकर वापस शरीर में चला जाता है. इस तरह से किडनी हमारे रक्त को साफ कर देती है और सारे टॉक्सिन्स पेशाब के जरिए शरीर से बाहर कर देती है.

खराब जीवनशैली और कभी-कभी दवाईयों के कारण किडनी के ऊपर बूरा प्रभाव पड़ता है. किडनी के बीमारी के बारे में सबसे बूरी बात यह है कि इसका पता प्रथम अवस्था में नहीं चलता है.

जब ये अंतिम अवस्था में चला जाता है तब इसका पता चलता है, इसलिए इसको साइलन्ट किलर कहते हैं. इसलिए किडनी के बीमारी के प्रथम अवस्था को समझने के लिए उसके लक्षणों के बारे में पता लगाना ज़रूरी होता है.

किडनी के खराब होने के दूसरे लक्षण उसके 80% खराब होने के बाद नजर में आते हैं.

किडनी खराब होने के हैं ये 14 लक्षण:

1. पेशाब करने की मात्रा और समय में बदलाव आना: किडनी के बीमारी के प्रथम अवस्था में पेशाब की मात्रा और होने के समय में बदलाव आने लगता है. यूरिनरी के कार्य में बदलाव.

2. पेशाब की मात्रा बढ़ जाना या एकदम कम हो जाना: पेशाब की मात्रा या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती है.

3. पेशाब का रंग बदल जाना: पेशाब का रंग गाढ़ा हो जाना या रंग में बदलाव आना.

4. बार-बार पेशाब आने का अहसास होना: जब आपको बार-बार पेशाब होने का एहसास होने लगे मगर करने पर नहीं होना कि़डनी में खराबी की तरफ असर करता है.

5. बार-बार पेशाब आना या उसकी मात्रा बढ़ जाना: रात में पेशाब होने की मात्रा या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती है. रात को बार-बार उठकर पेशाब करने जाना. किडनी के अस्वस्थ्य होने का सबसे प्रहला और प्रधान लक्षण होता है.

6.पेशाब करते वक्त दर्द महसूस होना: जब पेशाब करते वक्त दर्द और दबाव जैसा अनुभव होने लगे तो तब समझ जाना चाहिए कि मूत्र मार्ग (urinary tract ) में कोई संक्रमण हुआ है.

7. पेशाब करते वक्त जलन महसूस होना: कभी-कभी ऐसे अवस्था में बुखार या मूत्र मार्ग में जलन जैसा अनुभव होने लगता है. कभी-कभी पीठ का दर्द भी दूसरे लक्षणों में शामिल होता है.

8.पेशाब करते वक्त रक्त का आना : जब पेशाब में रक्त आने लगता है तब बिना एक मिनट सोचे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह किडनी के खराब होने का निश्चित संकेत होता है.

9. झाग (foam) जैसा पेशाब आना. मूत्र त्याग करने के बाद जब उसमें झाग जैसा पैदा होने लगता है तब यह किडनी के खराब होने के प्रथम लक्षणों के संकेत होते हैं.

10. किडनी में सूजन आना: किडनी का प्रधान कार्य होता है शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना, लेकिन जब यह कार्य बाधित होने लगता है तब शरीर में अतिरिक्त फ्लूइड जमने लगता है.
किडनी खराब होने के कारण शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक नहीं निकल पाता है. फलस्वरूप पांव, टखना (ankle), हाथ और चेहरे में सूजन आ जाती है इस अवस्था को इडिमा (oedema) कहते हैं.

11. अतिरिक्त थकना और कमजोरी आना: किडनी से एथ्रोप्रोटीन (erythropoietin) नाम का प्रोटीन निकलता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को ऑक्सिजन लाने में मदद करता है.
जब इस कार्य में बाधा उत्पन्न हो जाती है तब इस हार्मोन का स्तर गिर जाता है. जिसके कारण अनीमीआ का रोग होता है, जो शरीर में कमजोरी और थकान का कारण बन जाता है.

12.चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी: किडनी के बीमारी के कारण मस्तिष्क में ऑक्सिजन की कमी हो जाती है जिसके कारण चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी आ जाती है.

13. हर समय ठंड महसूस होना: किडनी के बीमारी के कारण जो अनीमीआ का रोग होता है उससे गर्म परिवेश में भी ठंडक महसूस होती है.

प्याज का रस दिलाता है चेहरे के दाग धब्बो से छुटकारा



अगर आप अपने चेहरे के बदसूरत काले दागों के कारन कही भी आने जाने में शर्मिंदगी का अहसास करते है तो अब आपको परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है. क्योकि हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे है जिनके इस्तेमाल से आप अपने चेहरे के दाग धब्बो को आसानी से हटा सकते है.

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1-चेहरे के दाग धब्बो को हटाने के लिए नीबू का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है.निम्बू में बहुत अधिक मात्रा में विटामिन सी अन्य पोषक तत्व मौजूद होते है. जो हमारी स्किन का ख्याल रखने में मदद करते है. निम्बू के रस को रुई की मदद से चेहरे के कील मुंहासों पर रस लगाएं. इसे तब तक रहने दें जब तक त्वचा नीबू के रस को सोख ना लें फिर चेहरा गुनगुने पानी से धो लें.
निम्बू का रस चेहरे के काले धब्बों को खत्म कर चेहरे को चमकदार बनाता है.

2-प्याज का रस भी दाग धब्बो को दूर करने में मदद करता है. प्याज के रस को शहद के साथ मिलाकर अपने चेहरे के दाग धब्बो पर लगाने से दाग धब्बों से निजात पाया जा सकता है.

3-हल्दी में शहद नीबू के रस को मिलाकर पेस्ट बना ले. इस पेस्ट को अपने चेहरे के दाग धब्बो पर लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें. फिर एक घंटे के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. इससे कील-मुंहासों दाग धब्बों से छुटकारा मिलेगा.

अखरोट खाना पुरुषों के शुक्राणुओं के लिए है बहुत फायदेमंद



यूँ तो अखरोट से आप इसके विभिन्न गुणों के कारण परिचित होंगे ,लेकिन आज आपको हम  यू. सी.एल.ए. के वैज्ञानिकों की एक नयी रिसर्च के बारे में बताते हैं। 

इस रिसर्च के अनुसार अगर पचहतर ग्राम की मात्रा में अखरोट का सेवन नित्य किया जाए तो यह शुक्राणुओं को शक्ति ,ऊर्जा और गति प्रदान करता है। 
अखरोट का यह प्रभाव विशेष रूप से 21 से 25 वर्ष की आयु वर्ग में पाया गया है। 

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यूनिवर्सिटी ऑफ केलीफोर्निया में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ.विंडी राबिन्स और उनकी टीम द्वारा किये गए शोध के अनुसार अखरोट को पालीअन्सेचुरेटेड फेटी एसिड्स का प्रमुख सोर्स माना गया है और इसमें विशेष प्रकार ओमेगा -3 फेटी एसिड एल्फो लिनोलीक एसिड पाया जाता है। 21 से 35  आयु वर्ग के 117 स्वस्थ व्यक्तियों में कराये गए अध्ययन में लोगों को दो समूह में बांटा गया। 58 पुरुषों को किसी प्रकार के बादाम या अखरोट रहित आहार का सेवन कराया गया जबकि 59 पुरुष नियमित 75 ग्राम अखरोट खिलाया गया। इस शोध से पूर्व सभी के सीमन का परीक्षण किया गया  और पुन: शोध के 12 वें सप्ताह में इसे दुबारा देखा गया। 

इस शोध में यह पाया गया कि दोनों समूह के शरीर के बाडी मास इंडेक्स, वजन एवं सक्रियता के स्तर में कुछ खास फर्क नहीं पड़ा,लेकिन जिस समूह को 75 ग्राम की मात्रा में नियमित अखरोट दिया गया था, 

उनके सीमेन स्थित शुक्राणुओं  में गजब का सकारात्मक प्रभाव  देखा गया और इससे यह पाया गया  निष्कर्ष मिला कि 75 ग्राम नियमित अखरोट का सेवन शक्राणुओं को ऊर्जा,शक्ति एवं सक्रिय बनाता है।

ज़ख्मों और घावों के आयुर्वेदिक उपचार


 चन्दन की लेई घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।

कच्चे केले का रस घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।

लहसुन का रस और हल्दी तिल के तेल के साथ मिलाकर बनाये हुए मिश्रण से सूजन कम हो जाती है और घाव जल्दी भर जाते हैं।

तिल और नीम के पत्ते एरंडी के तेल के साथ भूनकर और हल्दी और कपूर के साथ पीसकर घरेलू मरहम बनाया जा सकता है। इस मरहम को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

नारियल के तेल में कपूर उबाल लें और इसेसूजी हुई जगह पर लगा लें। अगले दिन उसे गरम पानी से धो लें। इससे अंदरूनी चोट के कारण हुई सूजन कम हो जाती है।

संतरे, अंगूर, लहसून, गाजर का सेवन करने से घावों के भरने में सहायता मिलती है।

पिसे हुए पुदीने को एक कपड़े में बांधकर घाव पर रखने से घाव जल्दी भर जाते हैं और संक्रमण का डर भी नहीं रहता।

तुलसी के पत्तों का चूर्ण भुरभुराने सेया बेल के पत्तों को पीसकर लगाने से घावजल्दी भर जाते हैं।


पैर की मोच दूर करने के 5 असरदार नैचुरल उपचार Monch Ke Gharelu Upay


कभी कभी चलते-चलते पैर के मुड़ जाने से मोच आ जाती है. पैर में मोच आ जाने पर असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है. पर कुछ घरेलु उपाय ऐसे है जिनके इस्तेमाल से मोच के दर्द को ठीक किया जा सकता है.


1-बर्फ के टुकड़े के इस्तेमाल से मोच के दर्द को कम किया जा सकता है. बर्फ के टुकड़ों को रुमाल में बांधकर मोच वाली जगह पर सिकाई करने से सूजन कम हो जाती है और दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है.


2-पैर में मोच आ जाने पर एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच फिटकरी मिलाकर पीने से मोच ठीक हो जाती है.


3-मोच के दर्द को दूर करने के लिए हल्दी में थोड़ा सा पानी मिला कर गाढ़ा पेस्ट बना लें. अब इसे गर्म करके मोच वाली जगह पर लगाएं. फिर 2 घंटे तक इसे अपने पैरो पर लगा रहने दे. फिर गुनगुने पानी से अपने पैरो को धो लें. दर्द कम तक इसका नियमित रूप से इस्तेमाल करे. हल्दी का एन्टी-इन्फ्लैमेंटरी गुण सूजन को कम करने में बहुत मदद करता है.

4-पैर में मोच आ जाने पर शहद और चूने दोनों को मिला कर मोच वाली जगह पर हल्की मालिश करने से मोच के दर्द में आराम मिलता है.

पीरियड्स में कभी ना करें ये गलतियां!



पीरियड्स एक एेसा विषय है जिसके बारे में लोग बात करने से कतराते हैं। यहीं नहीं, कई जगहों पर इन दिनों लड़कियों के साथ काफी बुरा व्यवहार भी किया जाता हैं। हर महिला को पीरियड के दिनों से गुजरना पड़ता है। इन दिनों में महिलाओं को कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। इसके बारे में समाज में कई वहम पाले जाते है।
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1. कई लोगों का मानना हैं कि इन दिनों में लड़कियां अशुद्ध हो जाती हैं। एेसे में उन्हें किचन या मंदिर में नहीं जाना चाहिए लेकिन एेसा कुछ नहीं होता। दरअसल, इस प्रक्रिया में शरीर में से अनफर्टिलाइज्ड एग बाहर निकलते है।

2. अगर किसी लड़की का पीरियड मिस हो गया तो इसका मतलब वह प्रैंग्नेंट है लेकिन इसका पीछे कारण कुछ और भी हो सकता है। कई बार तनाव और खराब डाइट की वजह से भी पीरियड मिस हो जाते है।

3. कहा जाता है कि पीरियड्स के दौरान गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए लेकिन यह सेहत के लिए अच्छा होता है। गुनगुने पानी से नहाने से दर्द कम होता है और आराम मिलता है।

4. पहले समय से आपने एेसे कहते सुना होगा कि इन दिनों में अचार को छूने से वह खराब हो जाता है लेकिन यह एक वहम है। किसी चीज को छूने से वह खराब नहीं होती।

5. कुछ लोगों का यह सोचना हैं कि इन दिनों में एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए लेकिन एेसा नहीं है। अगर परेशानी ज्यादा हो तब एक्सरसाइज कभी नहीं करनी चाहिए लेकिन अगर परेशानी कम हो तो एक्सरसाइज करने से मसल्स जरूर रिलैक्स होती है।

खून का थक्का बनने के कारण (Causes of Blood Clotting)


शरीर में खून का थक्का (Blood Clotting) बनने और उसके घुलने की प्रक्रिया सहज रूप में चलती रहती है। हमारे प्लाज्मा में मौजूद प्लेटलेट्स और प्रोटीन, चोट की जगह पर रक्त के थक्के का निर्माण करके रक्त के बहाव को रोकते हैं। अगर ऐसा न हो तो चोट लगने पर शरीर में खून का बहाव रोकना कठिन हो जाए। आमतौर पर चोट के ठीक होने पर रक्त का थक्का अपने आप घुल जाता है। पर जब इस प्रक्रिया में अड़चन आती है तो खून का थक्का बना ही रह जाता है।

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खून का थक्का जमने के जोखिम (Risk Factors of Blood Clotting)
बिना उपचार लंबे समय तक रहने पर रक्त के थक्के धमनियों या नसों में चले जाते हैं और शरीर के किसी भी हिस्से जैसे आंख, हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े और गुर्दे आदि में पहुंच उन अंगों के काम को बाधित कर देते हैं। दिमाग में खून का थक्का पहुंचने पर भारी नुकसान पहुंचाता है। 
खून का थक्का केवल चोट लगने के कारण ही बनता। इसके कई अन्य कारण भी होते हैं जैसे 

खून का थक्का बनने के कारण (Causes of Blood Clotting)
अगर आप गर्भ निरोधक गोली (Oral Contraceptive Pills) लेते हैं।अगर आपको मोटापा है।अगर आपको मेनोपोज (menopause) हो चुका है।समाचार पत्र 'द मिरर' के अनुसार एक नए अध्ययन में कहा गया है कि जो लोग लगातार 10 घंटे तक काम करते हैं और इस दौरान कोई विराम नहीं लेते तो उनमें खून का थक्का जमने का खतरा दोगुना हो जाता है। यह अध्ययन 21-30 साल आयु सीमा के लोगों पर किया गया। अध्ययन में शामिल 75 फीसदी लोगों ने माना कि वे काम के दौरान विराम नहीं लेते।

सामान्य उपचार
खून का थक्का बनने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह करें। यह बीमारी बेहद खतरनाक हो सकती है इसलिए पहले अच्छी तरह जांच कराने के बाद ही उपचार शुरु करें। 

ब्लड क्लॉटिंग से ब़चने के उपाय
रक्त का थक्का जमना रक्तनलिका के बंद हो जाने से होता है और अगर तत्काल इसका इलाज नहीं किया गया तो यह जानलेवा हो जाता है। मोटे लोगों में ब्लड क्लॉट होने का खतरा ज्यादा रहता है, लेकिन कई और रोग-परिस्थितियों में रक्त का थक्का जमता है जो काफी खतरनाक होता है।

बिना सर्जरी के ब्लड क्लॉटिंग का कोई इलाज ही नहीं है और कभी-कभी तो शरीर के उस हिस्से या अंग में छेद कर या काट कर इसका इलाज किया जाता है।  खासकर सिर में चोट लगने के बाद अगर ब्लड क्ल़ॉट होती है तो यह काफी गंभीर हो जाती है , जिसमें मरीज को ब्रेन हेमरेज का खतरा रहता है और मौत तक हो सकती है।

ध्यान रहे कि ब्लड क्लॉटिग होने के बाद कोई घरेलू उपचार काम नहीं करता है। हालांकि, ब्लड क्लॉट न हो या जिन लोगों इसका खतरा ज्यादा है उनके लिए कई घरेलू उपचार हैं।

ब्लड क्लॉटिंग से ब़चने के घरेलू इलाज (Home remedies to prevent from Blood clotting)

स्किम्ड मिल्क या छाली उतारा हुआ दूध (Skimmed milk)
स्किम्ड मिल्क या छाली उतारे दूध में फैट यानि वसा नहीं होती और इसमें कैल्शियम भी रहता है, जिससे रक्त की नलिका में फैट जमा होने का खतरा नहीं रहता है और कैल्शियम से ब्लड के प्लेटलेट्स सही ढ़ंग से काम करते हैं। रक्त नलिका में फैट जमा नहीं होने से रक्त का प्रवाह सही ढ़ंग से होता है।

मोटापा कम करें (Loose obesity)
काफी वसा युक्त भोजन करने से मोटापा बढ़ता है और इसका नतीजा होता है कि रक्त नलिका के दीवार पर फैट की परत जम जाती है। अगर रक्त नलिका के मुंह की चौड़ाई कम हुई तो रक्त के प्रवाह में कठिनाई होगी और नतीजा ब्लड क्लॉट होगा। बल्ड क्लॉट होने से दिल का दौरा पड़ सकता है और ब्रेन हैमरेज का खतरा रहता है।

नियमित व्यायाम करें (Exercise Regularly)
नियमित रुप से व्यायाम करने से शरीर में फैली सभी रक्त नलिकाओं में रक्त का संचरण सही ढ़ंग से होता है।

धूम्रपान से करें तौबा (Avoid Smoking)
धूम्रपान करने से ऑक्सीजन कार्बन डाइऑक्साइड में बदलता है और इससे रक्त नलिका की मांसपेशियां कमजोर होती है नतीजा ब्लड क्लॉटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

प्याज और लहसुन का सेवन (Eating onion and garlic)
प्याज और लहसुन खाने से शरीर में फाइब्रिन की कमी होती है और इसके परिणांस्वरुप प्लेटलेट्स सही ढ़ंग से बनते हैं और ब्लड की क्लॉटिंग नहीं होती है।

हाइड्रोथेरेपी (Hydrotherepy)
ब्लड क्लॉट वाले स्थान पर अगर गर्म औऱ ठंडे पानी का पैक लगातार दिया जाए तो संभव है वहां रक्त का संचरण हो सकता है।

मसाज (Massage)
अगर आप नियमित रुप से शरीर की मसाज करवाते हैं तो शरीर में रक्त का प्रवाह सुचारु ढ़ंग से होता है। रक्त की नलिकाएं भी ब्लॉक नहीं होती है औऱ ब्लड क्लॉट का खतरा कम रहता है।

जानिए ऐसी 5 बातें जो शादी के बाद छीन सकती हैं आपका सुकून…


ज्योतिष के अनुसार सिर्फ ग्रहाें का दुष्प्रभाव ही प्रगति में अवरोध पैदा नहीं करता बल्कि दैनिक जीवन में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं भी शुभ प्रभाव में बाधा बन सकती हैं। वास्तु शास्त्र इस बात की पुष्टि करता है कि जीवन में ब्रह्मांड की ऊर्जा सुख-दुख का कारण बन सकती है। शास्त्रों में ऐसी बातों का उल्लेख किया गया है जो गृहस्थ जीवन के लिए शुभ नहीं होतीं। वास्तु के ये दोष गृहस्थ जीवन बाधक होते हैं। अतः इन्हें वर्जित माना गया है। जानिए ऐसी 5 बातें जो शादी के बाद छीन सकती हैं आपका सुकून…

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घर में झाड़ू को खड़ा कर नहीं रखना चाहिए। झाड़ू को पैर से भी स्पर्श नहीं करना चाहिए। झाड़ू हमेशा ऐसे स्थान पर रखें जहां इसके ऊपर से न जाना हो। वास्तु के अनुसार अगर झाड़ू के ऊपर से कोई जाता है तो उसके घर में समृद्धि का आगमन कठिन होता है।

घर की पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे पितृदेव तथा इष्टदेव प्रसन्न होते हैं। द्वार पर आई गाय अगर वहां से भूखी जाए तो उस घर की लक्ष्मी रुष्ट हो जाती है।

पूजन में इस्तेमाल होने वाली ऐसी चीजें जिनमें पवित्र अग्नि हो, जैसे दीपक, धूप, अगरबत्ती आदि को फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए। इससे परिवार को अपयश प्राप्त होता है और जीवन में कष्ट आते हैं।

घर में जहां भी मकड़ी के जाले लगे हों उन्हें हटा देना चाहिए। मकड़ी के जाले भाग्य में बाधक होते हैं। इनसे मेहनत का परिणाम नहीं मिलता।

घर में जूते-चप्पल और बिस्तर अव्यवस्थित नहीं रहने चाहिए। इससे घर में नकारात्मकता का प्रसार होता है। जूते-चप्पल और बिस्तर व्यवस्थित तथा साफ होने चाहिए। इससे जीवन में सफलता मिलती है।

मसूर की दाल के फायदे जिनसे अनजान है आप


मसूर का प्रयोग दाल के रूप में प्राय: हर जगह किया जाता है। मसूर में कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, सल्फर, क्लोरीन, आयोडीन, एल्युमीनियम, कॉपर, जिंक, प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट एवं विटामिन डी आदि तत्व पाये जाते हैं।

मसूर दाल की प्रकृति गर्म, शुष्क, रक्तवर्द्धक एवं रक्त में गाढ़ापन लाने वाली होती है। इस दाल को खाने से बहुत शक्ति मिलती है। 

दस्त, बहुमूत्र, प्रदर, कब्ज व अनियमित पाचन क्रिया में मसूर की दाल का सेवन लाभकारी होता है। सौदर्य के हिसाब से भी यह दाल बहुत उपयोगी है।

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मसूर के औषधीय गुण –
मसूर की दाल को जलाकर, उसकी भस्म बना लें, इस भस्म को दांतों पर रगड़ने से दांतो के सभी रोग दूर होते हैं।

मसूर के आटे में घी तथा दूध मिलाकर,सात दिन तक चेहरे पर लेप करने से झाइयां खत्म होती हैं।

मसूर के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारा करने से गले की सूजन तथा दर्द में लाभ होता है ।

मसूर की दाल का सूप बनाकर पीने से आंतों से सम्बंधित रोगों में लाभ होता है ।

चेहरे के दाग-धब्बे को हटाने के लिए मसूर की दाल और बरगद के पेड़ की नर्म पत्तियां पीसकर लेप करें

जब चेहरे पर दाग धब्बे और मुहांसे हो जाये तो चेहरे की रंगत और रूप दोनों ही बेकार हो जाते है । इसका छोटा सा उपाय है कि रात को एक मुट्ठी मसूर की दाल थोड़े से पानी में भिगो दे सुबह जब वो पानी दाल सारा सोख लेती है उसे पीस कर पेस्ट बना ले और उसमे थोड़ा सा दूध मिलाकर उस पेस्ट को दोनों समय अपने चेहरे पे लगाये और फिर दस या पंद्रह मिनट बाद मुंह को सादे पानी से धो ले । इससे चेहरे के सभी दाग धब्बे मुहांसे आदि थोड़े से दिनों में ही खत्म हो जायेंगे और चेहरा दमक उठता है |

मसूर की भस्म बनाकर, भस्म में भैंस का दूध मिलाकर प्रात: सांय घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है।
मसूर दाल के सेवन से रक्त की वृद्धि होती है तथा दौर्बल्य का शमन होता है।

आयुर्वेदिक औषधियों के कुछ दुष्प्रभाव:--

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अदरख : 
अदरख या अदरक की प्रकृति गर्म होने के कारण जिन व्यक्तियों को ग्रीष्म ऋतु में गर्म प्रकृति का भोजन न पचता हो, कुष्ठ, पीलिया, रक्तपित्त, घाव,ज्वर, शरीर से रक्तस्राव की स्थिति,  मूत्रकृच्छ, जलन जैसी बीमारियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। खून की उल्टी होने पर और गर्मी के मौसम में अदरक कासेवन नहीं करना चाहिए और यदि आवश्यकता हो तो कम से कम मात्रा में प्रयोगकरना चाहिए।
 
आंवला : 
आंवला प्लीहा (तिल्ली) के लिए हानिकारक होता है, लेकिन शहद के साथ सेवनकरने से यह दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है। शहद और बादाम का तेल आंवले के दोषों को दूर करता है तथा इसके गुणों में सहायक होता है।

धनिया : 
सावधान धनिया याददाश्त को कमजोर करता है।

टमाटर : 
सावधान टमाटर पथरी,  अम्लपित्त,  आमवात, शीतपित्ती, सूजन, संधिवात के रोगियों के लिए हितकर नहीं है| 

टमाटर : 
सावधान जिनके शरीर में गर्मी की मात्रा अधिक हो, मांसपेशियों में दर्द रहता हो,तेज खांसी चलती हो, पेट आंतों व गर्भाशय में उपदंश हो, उन्हें टमाटर से परहेज करना चाहिए,न ही टमाटर का सूप आदि पीना चाहिए।

पालक : 
सावधान पालक को पनीर जैसे मिल्क प्रोडक्ट के साथ नहीं बनाना चाहिए।

पालक : 
पालक की भाजी वायुकारक है, इसलिए वर्षा के मौसम में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

गाजर : सावधान इस बात का ख्याल रखें- आप डाइट में गाजर का ओवर डोज न लें। वरना आपको कैरोटेनीमिया हो सकता है। इसमें स्किन येलो हो जाती है। 

गाजर : सावधान गाजर के भीतर का पीलापन भाग (डंठल) नहीं खाना चाहिए। क्योंकि,वह अत्यधिक गरम होता है। जिसके सेवन से छाती में जलन होती है।

गाजर : सावधान गाजर के गाजर के बीज गरम होते हैं। अत: गर्भवती महिलाओं को उनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

गाजर : सावधान गाजर और नींबू का रस मिला कर पीने से दस्त आना बंद हो जाते हैं। इस कारन ये अतिसार (दस्त) की दवाई भी है! अत: जिनको दस्त नहीं आने की शिकायत रहती हो, उन्हें गाजर और नीम्बू के रस को मिलाकर नहीं लेना चाहिए!

गाजर : गाजर का जूस सभी लोगो को पीना चाहिए, लेकिन जिन लोगो को शुगर की बिमारी है उन्हें गाजर का जूस नहीं पीना चाहिए!

दूब : 
दूब का सामान्य से अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह आमाशय को नुकसान पहुंचा सकती है और कामशक्ति में कमी ला सकती है। हरी दूब का अधिक मात्रा में सेवनकरने से स्त्रियों को उल्टी आने लगती है।

पत्तागोभी : 
पत्तागोभी का रस एक सीमित मात्रा में (एक-डेढ़ कप) ही लेना चाहिए। नवीन शोधों से ज्ञात हुआ है कि अधिक मात्रा में लिया गया पत्तागोभी का रस थाइराइड ग्रंथि के स्राव (बहना) को बढ़ा देता है जो हानिकारक भी हो सकता है।

बथुआ : 
पथरी के रोगीओं को बथुए के साग का सेवन नहीं करना चाहिये, क्योंकि इसमें लौह तत्व अधिक होने के कारण  पथरी का निर्माण होता है|

सोयाबीन : 
गर्भधारण करने वाली स्त्रियों को सोयाबीन का प्रयोग बिलकुल नही करना चाहियें, क्योंकि इससे जन्मने वाली सन्तान पर बुरा असर पड़ता है।

नानी मां के ये नुस्खे आपको रखेंगे दवाइयों से कोसों दूर!


बिजी लाइफस्टाइल के चलते लोगों को सिरदर्द, कब्ज, तनाव, खांसी-जुकाम आदि कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अधिकतर लोग सिरदर्द होने पर पेनकिलर का सेवन करते हैं। कुछ लोग हर रोज इसका इस्तेमाल करते हैं जिससे सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दरअसल, इस दवाइयों से हमें कुछ देर के लिए आराम मिलता है लेकिन भविष्य में इनके कारण कई परेशानियां भी झेलनी पड़ती है। एेसे में इन छोटी-छोटी परेशानियों में घरेलू नुस्खे अपनाएं। आज हम आपको कुछ नुस्खे बताएंगे जिसे अपनाने से जल्द आराम मिलता है।

1. सिर दर्द
सिर दर्द होने पर पेनकिलर की जगह नाक में शुद्ध गाय के घी की कुछ बूंदे डालेें। इससे दर्द से राहत मिलेगी। अगर आपका लगातार सिर दर्द होता है तो रोज अपनी नाक में गाय के घी की 2-2 बूंदे डालें।

2. कब्ज
अधिकतर लोगों को कब्ज की समस्या रहती है। रात को थोड़े से पानी में अंजीर भिगो दें। सुबह उठकर इसे खा लें और साथ में पानी भी पी लें। एेसा करने से कुछ ही दिनों में कब्ज की समस्या दूर होगी।

3. फटे होंठ
फटे होंठ की समस्या से निजात पाने के लिए रोज नाभि में सरसों का तेल लगाएं। इससे होंठ मुलायम हो जाते है।

4. खांसी
अदरक में गुड़ और घी मिलाकर खाने से सूखी खांसी से आराम मिलता है। आप चाहें तो घी की जगह शहद का इस्तेमाल भी कर सकते है।

5. मस्से
मस्से चेहरे की खूबसूरती को कम कर देते है। मस्सों को हटाने के लिए प्याज का इस्तेमाल करें। प्याज के रस को मस्सों पर लगाएं। एेसा लगातार कुछ दिन करें। इससे मस्से जड़ से खत्म हो जाएंगे।

मेहँदी का गहरा रंग और उसे लम्बे समय तक रखने के तरीके


हर दुल्हन सुंदर मेहंदी डिजाइन के बिना अधूरी होती है। जब तक दुल्हन के हाथों और पैरों में मेहंदी ना लगे तब तक उसकी सुंदरता नहीं दिखाई देती।

हालांकि मेहंदी हर तरह के समारोह या फंग्शन में महत्वपूर्ण अनुष्ठान मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि अगर लड़की की मेहंदी डार्क रची है तो उसे बहुत प्यार करने वाला पति मिलेगा तो अगर आप भी अपनी मेहंदी को सुंदर और डार्क करना चाहती हैं तो नीचे दी गई इन बातों को अच्छे से जान लें।

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1 साफ हाथों में मेहंदी लगाएं
मेहंदी लगाने या लगवाने से पहले अपने हाथों को अच्छे से धोकर साफ कर लें। अगर मेहंदी लगाने से पहले आपने अपने हाथों में किसी तरह का लोशन या फिर ऑयल लगाया है तो साबुन से हाथों को धोने से वह निकल जाएगा।

2 चीनी और नींबू का मिक्चर
इस बात को हर कोई जानता है कि मेहंदी लगाने के बाद जब वह सूख जाए, तो उसमें चीनी और नींबू का मिक्चर लगाने से वह काफी डार्क हो जाती है। इस पेस्ट के चिपचिपे होने की वजह से यह मेहंदी को निकलने नहीं देता और आपकी मेहंदी ज्यादा समय तक डार्क रहेगी।

3 सरसों का तेल लगाएं
मेहंदी को हटाने से 30 मिनट पहले सरसों के तेल को अपने हाथों में लगा लें। सरसों का तेल हथेलियों पर लगाने से मेहंदी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा यह मेहंदी को डार्क भी करती है।

4 मेहंदी को कभी भी पानी से ना धोएं
कई महिलाएं मेहंदी लगाने के बाद मेहंदी वाले हाथों को पानी से धो लेती हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए ऐसा करने से मेहंदी साफ होने के साथ अपना रंग भी छोड़ देती है। मेहंदी छुटाने का सबसे आसान तरीका है कि आप या तो अपने हाथों को एक दूसरे के साथ अच्छे से रब कर लें या तो आप एक बटर नाइफ की मदद भी ले सकती हैं। इसके बाद आप अपनी मेहंदी को देखेंगे तो वह गहरे नारंगी रंग की दिखाई देगी। इसके बाद आप अपने हाथों पर पसीना ना होने दें, क्योंकि जैसे जैसे समय बितेगा, मेहंदी उतनी ही डार्क हो जाएगी।

5 सूरज की गर्मी से दूर रहें
मेहंदी लगाते समय सूरज में बैठने से बचना चाहिए। क्योंकि यह आपकी मेहंदी को जल्दी सूखा देगा और आपकी मेहंदी को हल्का बना देगी। डार्क मेहंदी पाने के लिए हमें सूरज की रोशनी से दूरी बनाकर चलना पड़ता है।

रोगप्रतिकारक शक्ति बनाये रखने के उपाय व सावधानियाँ


1- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।

2- कुल 13 असाधारणीय शारीरिक वेग होते हैं । उन्हें रोकना नहीं चाहिए ।।

3-160 रोग केवल मांसाहार से होते है

4- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।

5- 80 रोग चाय पीने से होते हैं।

6- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।

7- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।

8- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।

9- ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ीआंत सिकुड़ जाती है।

10- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।

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11- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।

12- बाल रंगने वाले द्रव्यों(हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।

13- दूध(चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।

14- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।

15- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।

16- टाई बांधने से आँखों और मस्तिश्क हो हानि पहुँचती है।

17- खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है।

18- खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।

19- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।

20- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।

21- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।

22- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय(टीबी) होने का डर रहता है।

23- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।

24- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।

25- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।

26- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है।

27- हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औशधियां हैं।

28- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।

29- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।

30- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।

31- जल सदैव ताजा (चापाकल, कुएं आदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।

32- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।

33- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।

34- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।

35- भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए । उसके पश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।। 

36- मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोशकता 100% कांसे के बर्तन में 97% पीतल के बर्तन में 93% अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।

37- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।

38- मनष्य को मैदे से बनीं वस्तुएं (बिस्कुट, ब्रेड, पीज़ा समोसा आदि)
कभी भी नहीं खाना चाहिए।

39- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।

40- जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते।

41- सरसों, तिल,मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और
वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।

42- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।

43- खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।

44- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है।
हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।

45- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी (कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।

46- कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए।

47-बर्तन मिटटी के ही परयोग करन चाहिए।

48- टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे ।
(आँखों के रोग में दातून नहीं करना)

49- यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़े और लिखने का काम तो न ही करें तो अच्छा है ।

50- निरोग रहने के लिए अच्छी नींद और अच्छा(ताजा) भोजन अत्यन्त आवश्यक है।

51- देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमजोर हो जाती है। भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता है आँखों के रोग भी होते हैं।

52- प्रातः का भोजन राजकुमार के समान, दोपहर का राजा और देर रात्रि का भिखारी के 
समान ।  आपने पढ़ा अब आगे ओर सब भी पढ़ें ऐसा कुछ करें ।