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अब नहीं होगी पसीने की समस्या अपनायें ये तरीका, Remedies for getting rid of sweat


 बहुत से लोगों को शिकायत होती हैं कि उनके पसीना बहुत आता हैं। जिससे शरीर और कपड़ों में दुर्गंध पैदा हो जाती हैं। जिससे किसी भी पब्लिक में जाने से उन्हें शर्मिन्दगी उठानी पड़ सकती हैं। 

अब जबकि गर्मी शुरू हो चुकी हैं तो पसीना आना तो आम बात हैं इसे आने से तो रोका नहीं जा सकता। लेकिन हां इससे पैदा होने वाली दुर्गंध को जरूर दूर रखा जा सकता हैं।

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इसके लिए बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट्स मौजूद हैं जिससे आप पसीने की दुर्गंध को दूर रख सकते हैं। जैसे परफ्यूम, टेलकम पाॅउडर आदि। कई बार भारी भरकम व्यायाम के कारण भी अंडर आम्र्स, हाथ और पैरों से ज्यादा पसीना आता है। इसके अलावा थायरॉइड, मलेरिया, डायबिटीज, पीरियड्स और मेनोपॉज के कारण भी व्यक्ति विशेष को ज्यादा पसीना आ सकता है।

एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति में इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ विशेष उपाय हम आपको बताने जा रहे है इसके लिए आपको अपने एक हाथ से दूसरे हाथ की हथेली के ऊपरी हिस्से पर मालिश करें। इसी तरह अपने तलवों पर हाथ से मालिश करें। ऐसा दिन में दो से तीन बार करें और हर बार इस क्रिया को कम से कम 20 सेकंड तक करने से लाभ होगा।

दो से तीन सप्ताह तक यह प्रयोग करने से ज्यादा पसीना आने और बदबू की समस्या दूर हो जाती है। आप इन पसीने की ग्रंथियों पर मुल्तानी मिट्टी के पाउडर की मसाज भी कर सकते हैं। तो ये घरेलु उपाय हैं जो आप आसानी से अपने घर पर आजमा सकते हैं और इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

सर्दी, खांसी और जकड़न को दूर भगाने वाला घरेलू काढ़ा


सर्दी, खांसी और जकड़न, कई कारणों से हो सकती है। मौसम बदलने के दौरान, यह समस्‍या सबसे ज्‍यादा लोगों में पाई जाती है। इसके अलावा, धूल और प्रदूषण के कारण भी ये दिक्‍कतें हो सकती हैं, जिसकी वजह से सांस लेने में काफी तकलीफ होती है । सर्दी, खांसी और जकड़न के लिए डॉक्‍टर जो दवाएं देते हैं वो तुरंत लाभ पहुँचा देती हैं लेकिन उनके साइडइफेक्‍ट होते हैं, साथ ही उनके सेवन से नींद भी बहुत आती है। बार-बार सर्दी, खांसी या जकड़न की समस्‍या होने पर बेहतर होगा कि घरेलू उपचार किया जाएं, यह पूरी तरह से हर्बल होता है और इससे जल्‍दी ही आराम मिलता है। इसके लिए आपको अपनी किचेन में से कुछ खाद्य सामग्री, जैसे- प्‍याज, अदरक, लहसून आदि को इक्‍ट्ठा करना होगा। हम आपको घर पर ही काढ़ा बनाने की विधि बता रहे हैं जिससे सर्दी, खांसी और जकड़न में फटाक से आराम मिल जाएगा।


आवश्‍यक सामग्रियां :
1. बिना छना हुआ और कच्‍चा सेब का सिरका - एक चौथाई कप
2. नींबू का रस - एक चौथाई कप
3. कच्‍चा शहद - 2 चम्‍मच
4. सोंठ पाउडर - 1 चम्‍मच
5. लाल मिर्च पाउडर या मिर्च पाउडर या कुटी हुई मिर्च - आधा चम्‍मच
6. काली मिर्च पाउडर - एक चुटकी
7. हल्‍दी पाउडर - आधा चम्‍मच
8. एक कटोरा
9 मापने के लिए कप
10. रखने के लिए बर्तन

बनाने की विधि :
सबसे पहले कटोरे को लें और उसमें कच्‍चा सेब का सिरकार मिला लें। इसमें नींबू का रस मिला लें और चला लें। अब इसमें शहद को मिलाएं और सोंठ पाउडर को डालकर अच्‍छे से फेंट दें। बाद में मिर्च को मिलाएं। मिर्च पाउडर के बाद बारी है हल्‍दी पाउडर को डालने की, इसे भी अच्‍छे से मिला लें। इसके बाद, एक चुटकी काली मिर्च पाउडर डालें और अच्‍छी तरह चला दें। इस प्रकार, आपका खांसी और सर्दी के लिए काढ़ा तैयार है।

किस प्रकार इस्‍तेमाल करें:
इस काढ़े को किसी जार में भरके रख लें और रोगी को नियमित रूप से उचित खुराक दें। बड़े लोगों को दो चम्‍मच और छोटे बच्‍चों को एक चम्‍मच देना सही रहता है। 1 साल के कम उम्र के बच्‍चे को इसका सेवन न करवाएं। हर बार अगर ताजा बनाएं तो बेहतर होगा, अन्‍यथा इसे अच्‍छे से चला लें और उसके बाद ही इसका सेवन करें।
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काढ़े के लाभ:

1. इसके सेवन से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में मजबूती आती है और मांसपेशियों को भी आराम मिलता है। साथ ही छाती में हुई जकड़न भी सही हो जाती है।

2. इस काढ़े में विटामिन सी मौजूद होता है जो सर्दी और खांसी में लाभदायक होता है और संक्रमण को होने से रोकता है।

3. काढ़े में मौजूद शहद में हीलिंग गुण होते हैं जो शरीर को अंदर से सही कर देते हैं।

4. काली मिर्च पड़े होने के कारण काढ़े से सेवन से साइनस की समस्‍या भी दूर हो जाती है। साथ ही नाक बहना भी बंद हो जाता है।

5. गला पक जाने या भारी हो जाने पर भी यह काढ़ा फायदा करता है क्‍योंकि इसमें अदरक होती है जो गले की खराश और समस्‍या को हल कर देती है।

6. हल्‍दी में कई लाभकारी गुण होते हैं जिसका सीधा फायदा इस काढ़े को पीने से मिलता है। इससे संक्रमण भी सही हो जाता है।

7. इसमें पड़ी काली मिर्च से कफ भी निकल जाता है और छाती की जकड़न भी कम हो जाती है।
इसे खांसी, सर्दी व जकड़न के दौरान, घर पर बनाकर अवश्‍य पीना चाहिए

फोड़े-फुंसी के लिए वरदान है काली मिर्च


फोड़े-फुंसी को दूर करने के लिए काली मिर्च बहुत फायदेमंद होती है इसमें मौजूद एंटी-ऑक्‍सीडेंट और एंटीबैक्‍टीरियल गुणों के कारण यह प्राकृतिक औ‍षधि है यह फोड़े-फुंसी के कारण होने वाली सूजन और दर्द को दूर करती है और इससे फुंसी वही बैठ जाती है 


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बनाने के लिए सामग्री

काली मिर्च - कुछ(2-3) दाने
पानी  3-4 बुन्दे 


पेस्ट बनाने और इसके इस्तेमाल का तरीका

काली मिर्च के कुछ दाने लेकर उसे अच्‍छी तरह से कूट लें
फिर इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर इसका पेस्‍ट बना लें
अब इस पेस्‍ट को फोड़े फुंसी वाली त्‍वचा पर लगा लें
आपको एक मिनट के बाद इसका असर दिखाई देने लगेगा

बच्चे की अंगूठा चूसने की लत को इस तरह छुड़वाएं, Children's thumb sucking habit


बच्चों के लिए अंगूठा चूसने की आदत अचानक से छोडऩा थोड़ा मुश्किल होता है। यह आदत सालों से विकसित हो रही होती है। हम यह नहीं सोच सकते कि यह पल भर में ही ख़त्म हो जायेगी।जब उसे ऐसा करने से रोका जाता है, तो वह रो-रोकर पूरे घर में कोहराम मचा देता है। 

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माता-पिता को बहुत ही समझदारी का परिचय देना होता है बच्चों को इस आदत से बचाकर निकालने के लिए। उन्हें सबसे पहले अपने बच्चे के अकेलेपन को दूर करने के लिए प्रयत्न करना होगा। बच्चों को यह आश्वासन देना होगा कि उनके माता-पिता उनके साथ हैं वे अकेले नहीं हैं। कैसी भी परिस्थिति हो उन्हें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है कि अपने वे बच्चे को बेसहारेपन या अकेलेपन का दश नहीं देंगे। जब बच्चे का अकेलापन दूर होगा तो वह इस आदत से मुक्त हो सकेगा।

कई मां तो मजबूर होकर अपने बच्चे का अंगूठा खुद ही उसके मुंह में डाल देती हैं। बहरहाल, जो भी हो बच्चे की और ऐसी मांओं की यह आदत कतई अच्छी नहीं है। कोई-कोई बच्चा तो अपनी सारी उंगलियों को ही अपने मुंह में डाल लेता है, तो कोई अपनी हथेली को चूसता रहता है।

शिशु में कैसे छुड़ाएं अंगूठा चूसने की आदत क्या आप अपने शिशु को मुंह में अंगुठा दबाए चूसते हुए देख तनाव में आ जाती हैं, खैर, अब इसमें तनाव में आने की कोई जरुरत नहीं है। 

ये बच्चे बहुत बड़ी आयु हो जाने पर भी इस आदत से मुक्ति पाने में सफल नहीं हो पाते। हाँ, तब किसी दूसरे के सामने होने पर उन्हें इस बात से शर्म वे महसूस करते हैं कि कोई देखेगा तो क्या कहेगा? उस समय वे लुक-छिपकर अंगूठा चूसते हैं पर आदत को छोड़ नहीं पाते।

क्योकि इसका सरल उपाय अब मिल चुका है, जिससे शिशु यह आदत पल भर में छोड़ देगा। अंगूठा‬ चूसने वाली तो बच्चों की पुरानी और आम आदत है। ऐसा करने से एंडोफिन्स नामक द्रव का उत्पादन होता है जिससे शिशु का दिमाग शांत हो जाता है और उसे जल्द नींद आ जाती है।

कभी-कभी ऐसा करने से कोई समस्या पैदा नहीं होती पर लगातार अंगूठा चूसते रहने से नाखून की गंदगी पेट में जाने से शिशु बीमार हो सकता है। अगर आपको शिशु की अंगूठा चूसने की आदत छुड़ानी है 

उपाय को जरुर अपनाए
गुस्सा दिखाने से बात नहीं बनेगी- बच्चे के सामने कभी भी गुस्सा या झुंझलाहट न दिखाएं। इससे बच्चे को क्रोध आएगा और वह इससे वह इस आदत को और भी अपना लेगा। सबसे बड़ा व महत्त्वपूर्ण कारण मुझे लगता है बच्चे का अकेलापन। घर के लोग जब बच्चे की ओर ले लापरवाह होते है तब वह अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए इस बुरी आदत का सहारा लेता है। उसे विचलित करें- मार्केट में कई प्रकार की चीज़े उपलब्ध हैं जिससे बच्चे की त्वचा और नाखून को बचाया जा सकता है। उसके मुंह में निप्पल या शुगर कैंडी डाल दें जिससे वह अपने अंगूठे को मुंह में न डाल सके। उसका ध्यान अंगूठे की ओर से हटा कर खिलौने, पज्जल या गाने की ओर आकर्षित करें। हमेशा वही करें जो शिशु को पसंद हो- जो भी आपका बच्चा करने को कहे उसे कभी भी नजरअंदाज न करें। बताया जाता है कि बच्चा तभी अंगूठा चूसता है, जब वह तनाव में आ जाता है। इसलिए उसकी कही हई बात को नकारे नहीं। थोड़ा स्मार्ट बने- प्राकृतिक तेल यानी की नीम या सरसों का तेल उसके अंगूठे पर लगा दें, जब उसे अपना अंगूठा कड़वा लगेगा, तो वह खुद ही अंगुठा चूसना बंद कर देगा। इस तरीके को कुछ दिनों तक चलाएं और फर्क देखें। उसको खुश रखें- जब भी वह अकेला महसूस करें, तो उसे कोई कार्य करेन को दे दें और जब वह उस कार्य में सफल हो जाए, तब उसे शाबाशी दें। इससे वह पुरस्कृत महसूस करेगा और अंगूठा चूसना बंद कर देगा। बच्चे के अंगूठे को उसके मुंह में देखें तो उसे दोनों हाथों से होने वाले कामों में व्यस्त रखें। वह काम हो सकते हैं सॉफ्ट टॉय को पकडऩा, किताब पढऩा या फिर पीएसपी पर मनपसंद गेम खेलना आप बच्चे के अंगूठे को बैंड ऐड, टेप या फिर ऊँगली वाले पपेट से बांधकर रखें तो बच्चे को अंगूठा चूसने में इतना मज़ा नहीं आएगा। सोते समय अगर आपका बच्चा अंगूठा चूस रहा है तो आप सॉक्स का इस्तमाल भी कर सकते हैं।

How to stop 
अंगूठे पर नीम्बू का रस लगा देंरू बच्चे अक्सर नीम्बू का रास पसंद नहीं करते। अगर आप उसके अंगूठे पर ढेर सारा नीम्बू का रस लगा देती हैं तो हो सकता है कि आप लकी हों। बच्चे के अंगूठे में नीम की पत्तियों को या चिरायता को पीसकर लगा दें। वह जब भी अंगूठे को चूसने की कोशिश करेगा, उसे कड़वा लगेगा और फिर धीरे-धीरे चूसना छोड़ देगा। कड़वा लगने पर वह रो भी सकता है, लेकिन आप अपने हृदय को कठोर बनाये रखें। 

बच्चे के अंगूठे पर फेमाइट [एक बदबूदार पाउडर] का लेप लगा दें। काले नमक को पीसकर इसका लेप भी लगा सकते हैं।बच्चों को बार-बार खाने की वस्तुएं जैसे फल, तरबूज का रस, गाय का दूध आदि पोषक, आहार के रूप में दें।बाजार में शहद से भरे निप्पल मिलते हैं। 

बच्चे की आदत को छुड़ाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा इनका इस्तेमाल न करें।थंब गार्ड का इस्तमाल करेंरू यह प्लास्टिक का ढांचा होता है जो अंगूठे में फिट हो जाता है और यह अंगूठा चूसने की आदत को काफी हद तक सीमित रखता है। पर इसे ज़बरदस्ती अपने बच्चे पर इस्तमाल करने से उसके मन पर बुरा असर भी पड़ सकता है। इसलिए सावधान रहे। 

ऐसा तो हो नहीं सकता कि उनकी इस लुका-छुपी की आदत का किसी को पता न चले। जब घर के या बाहर के लोग उनका मजाक उड़ाते हैं तो उन्हें शर्मिन्दगी का सामना करना पड़ता है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का तो दूसरे बच्चे हर समय मजाक बनाते हैं चाहे वे स्कूल में हों या खेल के मैदान में हों।यह तो चर्चा हुई बच्चों की समस्या की। अब हमें विचार यह करना है कि इस समस्या से इन मासूमों को छुटकारा कैसे दिलाया जाए 
बच्चा का जब माता-पिता के साथ अपनापा जुड़ता है तो वह उनके करीब हो जाता है। उनके साथ जब वह अपनी परेशानियों को बाँटने लगता है तब उसका डर और अकेलापन सब गायब हो जाते हैं। उस समय वह भी स्वयं को दूसरे बच्चों की तरह सौभाग्यशाली समझने लगता है।

अनानास का जूस पीने के 20 फायदे, जरूर जानें 20 benefits of drinking pineapple juice,

अनानास का फल बहुत स्वादिष्ट होता है | इसके कच्चे फल का स्वाद खट्टा तथा पके फल का स्वाद मीठा होता है । इसके फल में थाइमिन,राइबोफ्लेविन,सुक्रोस,ग्लूकोस,कैफीक अम्ल,सिट्रिक अम्ल,कार्बोहाईड्रेट तथा प्रोटीन पाया जाता है।

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अनानास के स्वास्थ्य लाभ 
1. गर्मियों में अनानास का रस या शर्बत पीने से तेज गर्मी व पसीने की समस्या दूर होती है।

2. ताजे अनानास का सौ ग्राम रस बच्चे को पिलाने से उसके कृमि (बारीक कीड़े) नष्ट हो जाते है। ये ध्यान रखिए अनानास का रस खाली पेट नहीं पिलाना चहिए।

3. अननास को छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके खाने से पित्त-विकार दूर होते हैं।

5. शरीर पर सूजन हो जाने की स्थिति में अनानास लाभ देता है।

6. अनानास पर काली मिर्च और काले नमक का चूर्ण डालकर सेवन करने से बदहजमी की समस्या दूर होती है।

7° शरीर को बल प्रदान करता है ।

8. अनानास का रस गले तथा मुंह के जीवाणुजन्य रोगों में लाभकारी सिद्ध होता है।

9. अनानास के सेवन से पिसाब में रूकावट नहीं आती।

10.अनानास,जायफल, पीपल, काला नमक व जीरा सभी चीजें बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। तीन ग्राम चूर्ण जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से बहुमूत्र की समस्या में बहुत लाभ होता है।

11. बुखार में भी अनानास के रस का सेवन करना चाहिए।

12. अजीर्ण के रोगी को अनन्नास पर काली मिर्च का चूर्ण छिड़ककर, सेंधा नमक डालकर सेवन करना चाहिए।

13. अनानास के शर्बत को पीने से गर्मियों की गरमाहट दूर होती है।

14. विटामिन ,सी, व अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के अभाव के कारण स्कर्वी रोग होने पर अनानास खाने व रस पीने से बहुत लाभ होता है।

15. अनानास शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का काम करता है।

16. यदि शरीर में खून की कमी हो तो अनानास का रस पीजिए बहुत ही लाभ देगा।

17. अल्प मात्रा में ऋतुश्राव होने पर रोजाना अनानास का रस पीने से ऋतुश्राव उचित रूप में होने लगता है।

18. गर्मियों में ह्रदय की घबराहट बढ़ जाने व अधिक बेचैनी होने पर अनानास का रस या शर्बत पीने से बहुत लाभ होता है। तेज प्यास भी शांत होता है।

19. अनानास का गूदा फोड़े-फुन्सियों पर लेप करने से बहुत फायदा होता है।

20. गले में शोथ होने पर और टांसिल होने की स्थिति में अनानास खाने से बहुत फायदा होता है।

21. प्यास को कम करने और शरीर को पुष्ट बनाने में मदद करता है अनानास |

22 गर्मी का मौसम वजन कम करने का सबसे अच्छा मौसम होता है । इस मौसम में आप बिना ज्यादा वर्क आउट किए आसानी से वजन कम कर सकते हैं ।

आपको हमेशा जवान रखेंगे ये आयुर्वेदिक टिप्स, These Ayurvedic tips will always keep you young


जीवन को जीना मात्र ही मनुष्य का उद्देश्य नहीं है, बल्कि सुखपूर्वक निरोगी जीवन बिताना आवश्यक है। आयुर्वेद के कुछ टिप्स अपनाकर आप सुखपूर्वक निरोगी जीवन व्यतीत कर सकते हैं। माना जाता है कि नियमपूर्वक इनके सेवन से।


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•  प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त (4-6 बजे ) के मध्य अर्थात सूरज उगने से पूर्व बिस्तर छोड़ दें।

•  सुबह दंतधावन एवं शौचादि से पूर्व ताम्बे के लोटे में रात्रि को रखा पानी पीयें,इससे मल खुलकर आता है तथा कब्ज की शिकायत नहीं होती है।

•  नाश्ता या भोजन हमेशा भूख से थोड़ा कम करें तथा योग्य आहार का ही सेवन करें तथा  भोजन के साथ -साथ पानी पीने क़ी प्रवृति से बचें।

•  दिनचर्या में जानबूझकर,अनजाने में या असयंमित होकर किये गए आचरण को प्रज्ञापराध की श्रेणी में रखा जाता है,इससे से बचें क्योंकि यह सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक रोगों का कारण है।

•  आहार स्वयं एक औषधि है,अत:ज्ञानेन्द्रिय को वश में करते हुए ही भोजन सहित अन्य आचरण करना स्वस्थ रहने में मददगार होता है।

•  शुद्ध जल एवं वायु का सेवन आयुर्वेद अनुसार रोगों से मुक्ति का मार्ग है।

•  भोजन में गाय के दूध का सेवन आयुर्वेद में जीवनीय माना गया है तथा यह स्वयं में एक रसायन औषधि है जिसके नित्य सेवन से बुढापा देर से आता है।

•  एक हरड का नित्य सेवन लम्बी आयु देता है,कहा भी गया है क़ी' माँ कभी नाराज हो सकती है परन्तु हरड नहीं।

• साल में एक बार शरीर रूपी मशीन का शोधन पंचकर्म चिकित्सक के निर्देश में अवश्य करवाएं, जिससे लम्बी एवं रोगरहित आयु प्राप्त होती है।

• रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए आंवले  का सेवन नित्य करें।

• आहार में रेशेदार फल सब्जियों के अलावा दालों का सेवन, शरीर में किसी भी प्रकार के क्षय (टूट- फूट ) को ठीक करने में मददगार होता है।

• आहार में स्नेह अर्थात घी का नियंत्रित मात्रा में प्रयोग बढ़ती उम्र में होनेवाले शारीरिक विकास के लिए आवश्यक है।

•   भोजन में लाल मिर्च का सेवन अम्लपित (हाइपरएसिडीटी) एवं भूख को कम कर कब्ज उत्पन्न कर अर्श (पाइल्स) का कारण बन सकता है ,अत: आयुर्वेद में अपनी अग्नि का ध्यान रखकर ही भोजन लेने का निर्देश है।

ये कुछ आयुर्वेदिक फंडे हैं,जिनको आप अपनी दिनचर्या में शामिल कर हमेशा जवां और स्वस्थ रहकर लंबी उम्र प्राप्त कर सकते हैं।

गुलाब जल के 12 बेहतरीन फायदे, Rose Water Benefits in Hindi


गुलाब जल एक सुगन्धित जल है जो को गुलाब की पंखुड़ियों और पानी को मिला कर बनाया जाता है | आज कल तो गुलाब जल का इस्तेमाल ज्यादातर skin को सवारने और साफ़ करने के लिए किया जाता है | परन्तु इसका उपयोग और भी कई चीजों के लिए होता है | ज्यदातर  लोग गुलाब जल का इस्तेमाल अपने खूबसूरती बढ़ाने के लिए करते है, इसके अलावे गुलाब जल हमारे त्वचा को निखारने में बहुत मददगार साबित होता है | तो अगली बार अगर आप gulab jal ka use करने जा रहे हों तो निचे दिए गए लाभ के बारे में जरुर याद रखे |

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गुलाब जल के फायदे 
इससे पहले की आपको gulab jal ke fayde के बारे में बतलाया जाये, कुछ चिजे जानना आवस्यक है | गुलाब जल आसानी से आपके नजदीकी दुकान या किसी shopping mall में आसानी से मिल जायेगा, यह सस्ता है और gulab jal ko ghar par bhi banaya जा सकता है |  तो चलिए जानते है Gulab jal ke benefits और  इससे होने वाले labh के बारे में |



Dark Circle  

अगर आपके आखों के निचे काले दाग या धब्बे हो गये हो तो इसका ilaj संभव है | इसके लिए एक रुई (cotton) के टुकड़े को गुलाब जल में डुबो कर आपने आंखे पर रख कर 10 मिनट कर छोड़ दे, ऐसा करने से से आँखों पर पड़े dark circle कम हो जायेंगे  |  अगर आप पुर्णतः रूप से dark circle ka ilaj खोज रहे है तो आपको इसके अलावे आपको अपने diet और सोने (sleeping) के तरीके को दुरुस्त करना होगा |

Softer Lips

अगर आपके होठ (lips) सुख गए हो तो इसका भी इलाज गुलाब जल के पास है |  1/4 चुकंदर (Beetroot) को पिस कर उसमे एक चम्मच गुलाब जल को मिला कर लेप बना लें और अपने होठ पर लगा कर 10 मिनट छोड़ दे, ऐसा करने से होठ नर्म रहते है |

Cleaning Face
अगर आप रोजाना बाहर आना जनका करते हैं और धुल और गंदिगी से सामना होता है तो जुलाब जल के य्प्योग करने से चेहरे साफ़ हो सकते हैं | रोजाना गुलाब जल से अपने चेहरे को साफ करने से चेहरे में नमी बरकरार रहता है जिससे आप का skin glow करता है और साथ ही साथ skin के छिद्र (pores) में जमे dust को बाहर निकाल देता है |

Makeup Remover गुलाब जल को एक Natural makeup remover के तौर में भी इस्तेमाल किया जा सकता है | रुई के टुकड़े पर जुलाब जल के कुछ बुँदे ले कर उसमें 2 बूंद बूंद नारियल तेल (coconut oil) मिला कर अपने makeup को आसानी से remove कर सकते है |

Burned Skin 
अगर खाना बनाते समय आपके हाथ जल गए हो तो फ़ौरन ठंडे पानी गिराना चाहिये | इसके बाद जले skin पर गुलाब जल लगाने चाहिये, जिससे जलन से आराम मिलती है और घाव जल्दी ठीक होता है |

Wrinkles  
अगर आपके चेहरे पर झुर्रियो start हो रही हो तो रोजाना गुलाब जल का इस्तेमाल करने से चेहरे की झुर्रियो कम होती है |

Head Pain 
अगर आपके सर पर दर्द रह रहा हो तो जुलाब जल में रुमाल को भींगा कर उसे सीधे सर पर 15 से 20 मिनट लगा कर छोड़ दें | ऐसा करने से sar ka dard गायब हो जायेगा |

Face Mask 
अगर आप beauty parlor में जा कर face mask लगवाने की सोच रहे है तो आपको यह जरुर पढना चाहिए |  घर में उपलब्ध नींबू के रस, चन्दन और जुलाब जल को मिला कर paste बना लें और इसे अपने चेहरे पर लगा कर 20 मिनट छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो डाले |

2  चमम्च नींबू के रस को लीजिये
4 चमम्च चंदन powder लीजिये
2-3 चमम्च गुलाब जल लीजिये
अब इन तीनो को मिला कर paste बना लें और पाने चेहरे पर लगाये |

Dandruff 
अगर आपके सर पर सुरुवाती रुसी के लक्षण हो तो गुलाब जल इसे हटाने में मदद कर सकता है | इसके लिए सोने से पहले अपने सर पर 5 चमम्च जुलाब जल को ले कर मालिश करें और सुबह होने पर अच्छे से शैम्पू कर लें |

Pimples 
अगर आपके चेहरे पर फोड़े या फुंसी हो गयी हो तो गुलाब जल इसे हटाने में मदद कर सकता है | गुलाब जल के regular इस्तेमाल से आप pimples ko rok sakte hai और pimples से छुटकारा भी पा सकते है |

Look Younger – Hamare skin ko jawan dikhne ke liye pH balance ka hona kafi jaruri hai, aur rose water ise maintain karne mein madad bhi karta hai | इसके अलावे elbow ke daag का भी treatment इस गुलाब जल से किया जा सकता है |

चिरौंजी के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज


चिरौंजी के पेड़ विशाल होते हैं। चिरौंजी के पेड़ महाराष्ट्र, नागपुर और मालाबार में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इसके पत्ते लम्बे-लंबे महुवे के पत्ते के समान मोटे होते हैं। इसकी पत्तल भी बनाई जाती है। इसकी छाया बहुत ही ठण्डी होती है। इसकी लकड़ी से कोई चीज नहीं बनती है। इसमें छोटे-छोटे फल लगते हैं। फलों के अन्दर से अरहर के समान बीज निकलते हैं। इसी को चिरौंजी कहा जाता है। चिरौंजी एक मेवा होती है। इसे विभिन्न प्रकार के पकवानों और मिठाइयों में डाला जाता है। इसका स्वाद मीठा होता है। इसका तेल भी निकलता है। यह बादाम के तेल के समान ठण्डा और लाभदायक होता है।
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चिरौंजी मलस्तम्भक, चिकना, धातुवर्द्धक, कफकारक, बलवर्द्धक और वात विनाशकारी होता है। यह शरीर को मोटा और शक्तिशाली बनाता है। चिरौंजी कफ को दस्तों के द्वारा शरीर से बाहर निकाल देता है। यह चेहरे के रंग को साफ करता है। चिरौंजी का हरीरा बादाम और चीनी के साथ उपयोग करने से बहुत अधिक मात्रा में धातु की वृद्धि होती है। इसका तेल बालों में लगाने से बाल गिरना बंद हो जाते हैं।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

रक्तातिसार (खूनी दस्त):
चिरौंजी के पेड़ की छाल को दूध में पीसकर शहद मिलाकर पीने से रक्तातिसार (खूनी दस्त) बंद हो जाता है।

पेचिश:
चिरौंजी के पेड़ की छाल को दूध में पीसकर शहद में मिलाकर पीने से पेचिश रोग ठीक हो जाता है।

खांसी:
खांसी में चिरौंजी का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है। चिरौंजी पौष्टिक भी होती है। इसे पौष्टिकता की दृष्टि से बादाम के स्थान पर उपयोग करते हैं।
छठवें महीने के गर्भाशय के रोग: चिरौंजी, मुनक्का और धान की खीलों का सत्तू, ठण्डे पानी में मिलाकर गर्भवती स्त्री को पिलाने से गर्भ का दर्द, गर्भस्राव आदि रोगों का निवारण हो जाता है।शीतपित्त:

चिरौजी की 50 ग्राम गिरी खाने से शीत पित्त में जल्दी आराम आता है।
चिरौंजी को दूध में पीसकर शरीर पर लेप करने से शीतपित्त ठीक होती है।
चिरौंजी और गेरू को सरसों के तेल में पीसकर मलने से पित्ती शान्त हो जाती है।

शारीरिक सौंदर्यता:
ताजे गुलाब के फूल की पंखुड़िया, 5 चिरौंजी के दाने और दूध की मलाई को पीसकर होठों पर लगा लें और सूखने के बाद धो लें। इससे होठों का रंग लाल हो जाता है और फटे हुए होंठ मुलायम हो जाते हैं।

चेहरे की फुंसियां:
चेहरे की फुंसियों पर चिरौंजी को गुलाबजल में पीसकर मालिश करने से चेहरे की फुंसियां ठीक हो जाती हैं।

रंग को निखारने के लिए:
2 चम्मच दूध में आधा चम्मच चिरौंजी को भिगोकर लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के बाद चेहरे को धो लें। यह क्रिया लगातार 45 दिन तक करने से चेहरे का रंग निखर जाता है और चेहरे की चमक बढ़ जाती है। इसको लगाने से रूखी और सूखी त्वचा भी कोमल हो जाती है।

सौंदर्यप्रसाधन:
त्वचा के किसी भी तरह के रोग में चिरौंजी का उबटन (लेप) बनाकर लगाने से आराम आता है।
चिरौंजी के तेल को रोजाना बालों में लगाने से बाल काले हो जाते है।


अकूते के फोड़े:
चिरौंजी को दूध के साथ पीसकर लगाने से अकूते के फोड़े में आराम आ जाता है।

बच्चों की लंबाई बढ़ाने और हड्डियों को मज़बूत करने का सबसे असरदार तरीका

1-एक किलो खड़ी हल्दी (बिना रंगी हुई)

2- दो किलो बिना बुझा चूना (जो पुताई के काम आता है)

सबसे पहले किसी मिटटी के बर्तन में चूना डाल दे इसके ऊपर से इतना पानी डाले कि चूना डूब जाये। पानी पड़ते ही चूना उबाल मारने लगेगा और खौलने लगेगा एक लकड़ी की सहायता से मिलाते रहें अब इस खौलते चूने में पूरी हल्दी डाल दें।


बर्तन को ढाँक कर रख दें इस मिश्रण को दो महीने तक रहने दें बीच बीच में पानी चेक करते रहें अगर पानी सूख जाये तो इतना पानी डाल दें कि हल्दी डूबी रहे।
दो महीने बाद हल्दी निकाल कर धो लें फिर सुखा कर पीस कर कांच के बर्तन में भर लें

सुबह शाम बड़ों को 3 ग्राम और बच्चों को 2 ग्राम हल्दी का चूर्ण दूध में मिला कर दें।

हड्डियां वज्र की तरह मज़बूत होंगी बच्चों की लंबाई बढ़ने लगेगी कितना भी

पुराना जोड़ों का दर्द हो या गठिया हो इस दवा से चला जायेगा।

खुद भी प्रयोग करें औरों को भी बताएं
किसी osto calcium की ज़रूरत नही रह जायेगी।

हर उम्र की महिला के लिए वरदान है ये बूटी Women of all ages


इससे बेहतर उपहार महिलाओं के लिए के लिए नहीं होगा , विशेष रूप से पुरुष इस बात पर ध्यान दें .

दुनियाँ में ऐसी बूटियाँ बहुत कम ही पैदा होती हैं जो महिलाओं को हर उम्र में उनकी जरूरतों के अनुसार फायदा पहुंचाएं . 

ऐसी ही एक बूटी है जो दक्षिण पूर्व एशिया में पैदा होती है , इसे कसिप फातिमा कहते हैं . त्वचा की रंगत और चमक सुधारने से लेकर डिलीवरी आसान करने, स्त्रियों में कामेच्छा जगाने से लेकर बेहतर चरमसुख पाने , योनी टाईट करने से लेकर स्तनों को सुडौल बनाने, बढती उम्र के लक्षणों को दूर करने से लेकर बुढापा रोकने तक , 
पीरियड्स बंद होने के समय होने वाली समस्याओं तक में बहुत लाभकारी है 

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1. 20 से 30 की उम्र की महिलाओं की त्वचा को मुलायम और सौम्य बनाती है .

2. 30 से 40 की उम्र की महिलाओं के स्तनों को सुडौल बनाती है . सम्भोग की इच्छा बढ़ाकर बेहतर आर्गेस्म पाने में मदद करती है , योनी को टाईट करती है . कामेच्छा कम होने से जिनका वैवाहिक जीवन नीरस हो रहा हो , उनके लिए बहुत बढ़िया चीज़ है .

3. 40 से 50 की उम्र की महिलाओं (ये ऐसा समय होता है जब पीरियड्स बंद होने लगते हैं ) के दाम्पत्य जीवन को सहारा देता है और सम्भोग की इच्छा बढ़ाकर बेहतर आर्गेस्म पाने में मदद करता है . पीरियड्स बंद होने के समय (मीनोपोज ) होनेवाली समस्याओं जैसे , चमक का दिखना , अजीब सपने आना , आँखों के नीचे काले घेरे आना , मूड ठीक न रहना आदि से निपटने में मदद करता है .

4. 50 की उम्र के बाद जब पीरियड्स बंद हो जाते हैं , तब सम्भोग की इच्छा बढ़ाकर बेहतर आर्गेस्म पाने में मदद करता है .

5. डिलीवरी के समय इसका सेवन कराने से डिलीवरी आसानी से हो जाती है .

6. अनियमित माहवारी और दर्द जैसी अन्य सम्बंधित समस्याओं में लाभ पहुंचाती है .

7. थकान को दूर करती है .
8. हाँथ – पैर ठन्डे होने की समस्या में लाभ पहुंचाती है .

9. लम्बे समय तक प्रयोग करने पर महिला की फिगर में सुधार होता है , त्वचा मुलायम बन जाती है और आँखों में चमक आ जाती है . कुल मिलकर हर उम्र की महिला की खूबसूरती को बढ़ाती है .

10. पेट से गैस और कब्ज की समस्या को दूर करती है .

11. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है . शरीर में रक्त संचार को बेहतर करती है .

12. बालों की रिपेयरिंग करती है .
इसके इन गुणों के कारण कई लोग इसे ‘वूमेन वियाग्रा ‘ भी कहते हैं . इसका इस्तेमाल सैकड़ों सालों से स्त्रियों में सम्भोग की इच्छा को बढाने , योनी को टाईट करने और स्तनों को सुडौल बनाने में किया जाता रहा है .

इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है .
क्योंकि इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं इसलिए ये काफी सस्ती मिलती है , जैसे जैसे लोग जानेंगे , संभव है की इसके भी दाम यार्सागुम्बा की तरह आसमान छूने लगे .

स्वस्थ भारत – मजबूत भारत

फटे पैरों के उपचार के लिए आसान घरेलू नुस्‍खे Easy home remedies for treating torn feet


अगर पैरों की देखभाल अच्छे तरीके से न किया जाए तो पैर फट जाते हैं। नंगे पैर चलने के कारण या फिर खून की कमी से पैर फटते हैं। अगर आप पैरों की सफाई पर ध्यान नहीं देते हैं तो एड़ियां फट जाती हैं और उनमें दरारे आ जाती हैं। उसे बिवाई भी कहते हैं।

अगर किसी के पैर फट जाते हैं तो वह बहुत गंदा लगता है। अक्सर लोगों को फटे पैरों के कारण शर्मिंदा भी होना पड़ता है। एड़ियां फटने के बाद उनकी देखभाल न की जाए तो खून निकलने लगता और बहुत दर्द होता है। आइए हम आपको फटे पैरों के लिए कुछ घरेलू उपचार (Gharelu Nuskhe) के बारे में बताते हैं।

फटे पैरों के लिए घरेलू उपचार
अमचूर का तेल 50 ग्राम, मोम 20 ग्राम, सत्यानाशी के बीजों का पावडर 10 ग्राम और 20 ग्राम शुद्ध घी ले लीजिए। इन सबको मिलाकर एक जार में डाल दीजिए। सोते समय पैरों को धोकर साफ कर लें और पोंछकर यह दवा बिवाई में भर दें और मोजे पहनकर सो जाइए।


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त्रिफला चूर्ण को खाने के तेल में तलकर मलहम जैसा गाढ़ा कर लीजिए। रात में सोते वक्त इस पेस्ट को फटे पैरों पर लगा लीजिए। कुछ दिनों तक इस लेप को लगाने से फटी एड़ियां ठीक हो जाएंगी और पैर कोमल होंगे।

रात में सोने से पहले पैरों को अच्छी तरह से साफ कर लीजिए। उसके बाद कच्चे घी में बोरिक पाउडर मिलाकर दरारों में भर दीजिए। उसके बाद मोजे पहनकर सो जाइए। ऐसा 3-4 दिन करने पर फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाएंगी।

एड़ियों के फटने पर आम के कोमल और ताजे पत्तों को तोडने से निकलने वाले द्रव को घावों पर लगा दीजिए। ऐसा करने से बहुत जल्दी फायदा होता है और फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

गेंदे के पत्तों के रस को वैसलीन में मिलाकर लगाने से फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

कच्चा प्याज पीसकर एड़ियों पर बांधने से बिवाईयां ठीक हो जाती हैं।

पैरों को गर्म पानी से धुलकर उसमे एरंड का तेल लगाने से फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

देशी घी और नमक को मिलाकर फटी एड़ियों पर लगाएं। ऐसा करने से फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं और पैरों की त्वचा भी कोमल रहती है।

मोम और सेंधानमक मिलाकर फटी एड़ियों पर मलने से बिवाईयां ठीक हो जाती हैं।

पपीते के छिलकों को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण में ग्लिसीरीन मिलाकर दिन में दो बार फटी हुई एड़ियों में लगाने से बहुत जल्दी फायदा होता है।

जब एड़ियों से खून निकल रहा हो तो उनको रात में गर्म पानी से धुलकर उनमें गुनगुना मोम लगाने से खून निकलना बंद हो जाता है और फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

जब एड़ियां फट गई हो तो नंगे पैर जमीन पर चलने से परहेज करना चाहिए और पानी में ज्यादा देर तक पैरों को नहीं भिगोना चाहिए।

दाद खाज खुजली की आयुर्वेदिक घरेलू चिकित्सा, Home Remedies of herpes itch scabies

दाद या रिंग वर्म एक प्रकार का त्वचा रोग है । 

त्वचा शरीर का बाह्रय अंग होने के कारण सीधे बाहरी वातावरण के सम्पर्क में आती है । 

इसके बाह्रय जगत के सम्पर्क के कारण ही इसे अनेक वस्तुओं से हानि पहुंचती है।  

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त्वचा सरलता से देखी जा सकती है, इस कारण इसके रोग चाहे चोट से हो अथवा संक्रमण / इंफेक्शन से, रोगी का ध्यान अपनी ओर तुरंत आकर्षित कर लेते है। 


दाद को आयुर्वेद शास्त्र में दद्रू मण्डल नामक व्याधि से संबोधित करते है। जिसके लक्षण प्राय: दाद से मिलते जुलते है। 

दाद/ रिंग वर्म एक प्रकार इन्फ़ेक्शन स्वरूप रोग है। दाद एक फफूंद ( fungus ) द्वारा होने वाला इन्फ़ेक्शन है, जो शरीर तर कहीं भी हो सकटा है। इसलिए जिसे दाद हो , उससे दूर रहना चाहिए। 
दाद वाली जगह पर बहुत खुजली होती है। जिससे लोग बहुत ही परेशान रहते है। 

जानिये दाद के प्रकार उनके लक्षण और उपाय। 
1 बालों की जड़ों में खुजली होना 
2 छोटी - छोटी फुंसी होना 
3 बाल झड़ना, चमड़ी का तड़कना , पस होना 
4 अंदरूनी स्थानों पर लाल चकते होना 
5 त्वचा पर लाल रंग के ग़ोल आकृती के दाग़ होना 
6 प्रभावित स्थान पर सुजन भी आ जाती है । 
7 दाद धीरे - धीरे बढ़कर बहुत फैल जाती है । 
8 थोड़ी सी भी खुजली करने से यह फैलने लगता है । हम प्राय: देखते हैं कि दाद हेने पर रोगी व्यक्ति एलोपेथी की दवा लेने में शीघ्रता करता है , परंतु देखा जाए, तो इस दाद स्वरूप त्वचा रोग का उपचार आयुर्वेद तथा घरेलू उपचार से भी हो सकता है। 

हर दिन स्नान करें तथा सम्पूर्ण शरीर की सफ़ाई करें। 
कपूर तेल को नीम तेल के साथ मिलाकर दिन में कम से कम दो बार लगाने से लाभ होता है। 
एलोवेरा का अर्क भी हर तरह की दाद को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है। 
गंधक मलहम का लेप करें। 

कहीं आप सुबह के नाश्ते में जहर तो नहीं खा रहें हैं


नाश्ता या ब्रेकफास्ट ऐसा होना चाहिए जो हमें नुकसान ना पहुचाये. जहर खाने से बेहतर है कि आप नाश्ता ना ही करें. सीधे लंच ही कर लें.

अगर आपको स्वस्थ रहना हैं तो इन सबका भूलकर भी नाश्ता न करें

1. ब्रेड और उसके जैसे पदार्थ कभी ना खाओ
आप अगर ब्रेड खाते हो और उसी से दिन की शुरुआत करते हो तो आप खुद के शरीर के साथ न्याय नहीं कर रहे हो. ब्रेड हमारे पेट में जाकर पचता नहीं है. जैसा खाते हैं वैसा ही वह रखा रहता है. ब्रेड जिस मैदा या गेहूं ब्रेड जिस आटे से बनता है वह खुद ही काफी दिनों पुराना आटा होता है. पेट में जाकर वह सड़ता है.

2. तली हुई चीजों से दूर रहें नाश्ते में तली हुई चीजों का सेवन न करें ।
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3. नाश्ते में बर्गर
आज कल कुछ बड़ी विदेशी कम्पनियों के बर्गर से नाश्ता कराना शुरू करा दिया है. यह काम पहले पश्चिमी देशों में होता था. वहां जिस तरह से मोटापा बढ़ा है वह इसी नाश्ते का असर है. अब अगर आपको भी पश्चिम की तरह से बीमार होना है तो आप सुबह-सुबह यहाँ जरूर जायें.

4. नाश्ते में फ्रिज में रखा कोई भोजन ना करें
कई बार हम नाश्ता भी रात को बनाकर फ्रिज में रख देते हैं और सुबह उठकर उसको गर्मकर खा लेते हैं. लेकिन ऐसा करना हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक है. यहाँ तक कि फ्रिज में रखे फलों को भी कम से कम 1 घंटे पहले बाहर निकालकर रख दें तब इनका नाश्ता करें.

5. टोस्ट-नमकीन सुबह का नाश्ता नहीं होता है
अगर आप सुबह उठते ही चाय के साथ नमकीन या टोस्ट खा लेते हैं तो यह भी आपके शरीर के लिए नुकसानदायक चीज हैं. सुबह शरीर को प्रोटीन की आवश्यकता होती है और आप उसी से दूर रहते हैं.

क्या है खाना
1. कच्चे चनों से नाश्ता करें

जी हां, आप सुबह का नाश्ता कच्चे चनों से करें. स्वाद के लिए इसमें आप प्याज या टमाटर काट सकते हैं. याद रखें कि चनों को उबालना नहीं है और ना ही इनको तेल में फ्राई आदि करना है.

2. नारियल पानी के साथ कोई फल
शरीर को अच्छा भोजन नाश्ते में दे दिया जाये तो यह सर्वोतम होता है और आपको बिमारियों से बचाता है. तो सुबह आप नारियल पानी का उपयोग जरूर करें.

3. एक सेब आपको स्वस्थ रखता है
आप घर से बाहर रहते हैं और नाश्ता बनाने का वक़्त आप पर नहीं होता है तो कोई बात नहीं. उल्टी-सीधी चीज खाने से अच्छा है कि आप एक सेब लें और उसको खाते हुए ही ऑफिस निकलें. एक सेब प्रतिदिन नाश्ते में उपयोग करने से आप पूरी तरह से स्वस्थ रहेंगे.

4. घर में बना पोहा या उपमा
घर में बना पोहा या उपमा भी आप सुबह नाश्ते में प्रयोग कर सकते हैं. इसमें अच्छे से कुछ हरी सब्जियों को डालकर आप पोहा या उपमा बना सकते हैं.

5. अंकुरित दाल
सुबह के नाश्ते में आप अगर जूस और अंकुरित दालें उपयोग कर रहे हैं तो यह तो सबसे अच्छा होता है. इससे शरीर को अच्छी मात्रा में प्रोटीन मिल जाता है.
वैसे सबसे अच्छा नियम सुबह का खाना जल्दी खाने का होता है ।

योनी का ढीला पन और बार बार पेशाब लगने की बीमारी के लिये आयुर्वेदिक नुस्खे


औरतों को डिलिवरी के बाद अक्सर पेट का बढना और योनी का ढीला हो जाने का मर्ज हो जाता है और किसी २ को तो पेट मे दाग तक रह जाते हैं पेट कम करने मोटापा दुर करने के लिये  रुब्बे इंद्रायण इस्तेमाल करायें उससे पेट का बढा होना वा दाग दूर होंगे और मोटापा बगैर कसरत के ठीक होगा बदन सिलिम हो जायेगा मैं यहां सिरफ योनी का ढीला पन और बार बार पेशाब लगने की बीमारी के लिये दो नुसखे देता हूं फायदा उठायें

योनी की खुजली और सूजन के लिये 
फिटकिरी ४ ग्राम  ले और दस ग्राम पानी मे घोल कर उस पानी से धोयें और थोडा कपडा भिगाकर  अंदर ऱखे सुबह शाम कर लिया करें खुजली सूजन दूर होगी

 मिया और बीबी के मिलने से पांच मिनट पहले रखें (क्या रखें नीचे लिखा है )और तीन मिनट बाद निकाल दें  कुवारी जैसी ही हो जायगीऔर यही दवा धातु जाना भी बंद कर देगी आम के आम गुठलियों के दाम

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फिटकिरी आठ ग्राम सुपारी धावा के फूल बेरी की छाल का अंदर वाला छिलका तीनो चार २ ग्राम पहले अलग २ पीसें फिर सबको तौल कर मिला दे और पानी डालकर दो२ ग्राम की लंबी २,गोलियां बनाकर धूप मे सुखालें याद रखे पांच से  दस  मिनट पहले  अंदर रखलें और तीन चार मिनट बाद निकाल दें 

कभी भी १५ मिनट ना रखे वरना कोई वीर गेट खोल ही ना पायेगा तो अंदर कैसे जायेगा किसी को परेशान ना करे सिर्फ बीमारी को दूर करने या समस्या के समाधान के लिये ही करें

वात रोगों के लिए चमत्कारिक घरेलु उपचार


वात रोग जिनमे जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, यूरिक एसिड का बढ़ना आदि विशेष है। आज हम आपको इन रोगों के लिए बहुत ही सरल और उपयोगी घरेलु उपचार बता रहे हैं। 

जिनको अपना कर आप इस कष्ट से मुक्ति पा सकते हैं।
हल्दी, मेथी-दाना व् सौंठ ये तीनो 100-100 ग्राम लीजिये और अश्वगंधा 50 ग्राम ले कर इन सब का चूर्ण कर लीजिये. इस चूर्ण को 1-1 चम्मच नाश्ते व् रात को खाने के एक घंटे के बाद गुनगुने पानी के साथ लीजिये। इसके नियमित सेवन से जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द आदि वातज रोगों में चमत्कारिक लाभ होता है।

लहसुन कि 1 से 3 कली खाली पेट पानी से लेने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है. साथ ही बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड सामान्य होता है. हृदय की शिराओं में आये अवरोध (ब्लड क्लोटिंग) को भी दूर करने में लहसुन बहुत कारगर है।
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मोथा घास की जड़, जो कि एक गाँठ कि तरह होती है, उसका पाउडर करके 1 से 2 ग्राम सुबह शाम पानी या दूध से लेने से जोड़ों के दर्द व् गठिया में आश्चर्यजनक लाभ मिलता है।

निर्गुन्डी के पत्तों का चूर्ण एक एक चम्मच सुबह शाम खाना खाने के एक घंटे के बाद पानी के साथ सेवन करने से वात रोगों का शमन होता है।

अरंड के पत्तों को पीसकर हल्का गर्म करके जोड़ों पर लगाने से लाभ मिलता है।

आवश्यकता अनुसार उपरोक्त कोई भी प्रयोग नियमित करने से वातज विकारों में चमत्कारिक रूप से लाभ होता है।

बिस्तर के पास कटा हुआ नींबू रखने के फायदे जानकर माथा चकरा जाएगा

: नींबू में भारी मात्रा में विटामिन सी और फाइबर पाया जाता है। सुबह इसे पीने से आप अपने को दिनभर तरोताजा महसूस करेगें। साथ ही इससे स्फूर्ति बढ़ती है और मौसमी रोगों से बचाता है।

नींबू पानी का इस्तेमाल आदि काल से किया जा रहा है। अब तो इसको पीने की सलाह डाक्टर और डाइटिशियन भी देते है।
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नींबू का इस्तेमाल सेहत के साथ-साथ सौंदर्य के रुप में भी किया जाता है। लेकिन इसके अलावा भी इसके कई ऐसे फायदे है। जिनके बारें में आप नहीं जानते होगे। जी हां इसे सिर्फ काटकर पास में रखने के भी कई ऐसे फायदे है। जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएगे। जानिए बिस्तर के पास कटा नींबू रखने से क्या फायदे मिलेगे।

डिप्रेशन से दिलाएं निजात
अगर आपको डिप्रेशन के कारण नींद नहीं आती है। जिसके कारण आप रात भर जगते रहते है। इसका मुख्य कारण आपके दिमाग का संतुलित न होना है। जिसके कारण डिप्रेशन और घबराहट के कारण आपको नींद नहीं आती है। इसके लिए आप कटा हुआ नींबू इस्तेमाल कर सकते है। नींबू में भरपूर मात्रा में एंटीबैक्टीरियल पाएं जाते है। जो कि आपके दिमाग को शांत रखते है। इसलिए एक नींबू काटकर बिस्तर में रख लें। जिससे आपको आसानी से नींद आ जाएगी।

सर्दी में नाक बंद की समस्या से दिलाएं निजात
जुकाम के कारण नाक बंद हो जाने से कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जिससे निजात पाने के लिए आप दवाओं का सहारा लेते है, लेकिन कभी-कभी दवाओं के साइड इफेक्ट भी होते है। अगर आपकी नाक बंद है। जिसके कारण आपको सांस लेने में समस्या हो रही है, तो आप नींबू का इस्तेमाल कर इस समस्या से निजात पा सकते है। इसके लिए कटे हुए नींबू के टुकड़े अपने बिस्तर के पास रख लें। इससे आपको आराम मिलेगा। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि सर्दियों में इसका इस्तेमाल न करें। इससे आपको सर्दी लग सकती है।

15 मिनट में नेचुरल ब्लीच से चमकाएं त्वचा, Natural bleach in 15 minutes


आज के समय में चेहरे की रंगत सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रही है ऐसे में हर लड़की को अपनी त्वचा को निखारने के लिए मंहगे उत्पादो का सहारा लेना पड़ता है या फिर पार्लर में जाकर पैसे बर्बाद करने पड़ते है लेकिन ऐसे में जरुरी नहीं की हर केमिकल उत्पाद आपके चेहरे के लिए बना हो और उससे आपकी त्वचा में निखार आ ही जाए, क्योंकि आजकल ऐसे उत्पादों में भी कई केमिकल मिलाए जाते है जिससे त्वचा रुखी और बेजान हो जाती है साथ ही धूप, प्रदूषण और बाहरी चीजों का प्रभाव भी हमारी त्वचा पर ज्यादा ही जल्दी पड़ता है जिससे त्वचा जल्दी प्रभावित होती है ऐसे में चेहरे की रंगत दिन ब दिन गिरती चली जाती है जिसकी वजह से हमारी खूसबरती उम्र से पहले ही खत्म हो जाती है ।

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ऐसे में चेहरे की रंगत को वापस पाने का सबसे आसान तरीका है ब्लीच कराना लेकिन क्या आप ने सोचा है ब्लीच से त्वचा पर कितना बुरा असर पड़ता इससे त्वचा की चमक खो जाती है साथ ही कई बार उसमें दाने और मुंहासे निकल आते है, बाजार में बिकने वाले ब्लीच से त्वचा पर कुछ समय के लिए तो निखार आता है लेकिन उसका असर ज्यादा देर तक के लिए नहीं होता है ऐसे में बेहतर होगा की आप नेचुरल ब्लीच का सहारा ले इससे त्वचा में ग्लो भी बना रहेगा और आपकी त्वचा को किसी भी प्रकार का नुकसान भी नहीं होगा ।

हालांकि बाजार में कई ऐसे ब्रांड हैं जो ये दावा करते हैं कि उनके इस्तेमाल से त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा लेकिन संदेह तो बना ही रहता है. आप चाहें तो इन घरेलू ब्लीच का इस्तेमाल करके कुछ ही मिनटों में गोरी-निखरी त्वचा पा सकती हैं. ।

इसलिए हम आपको आज बता रहे है कैसे घर पर बैठे आप आसानी से कर सकती है ब्लीच वो भी सिर्फ 15 मिनट मे तो चलिए जानें इसे करने के तरीके

नींबू और शहद का पेस्ट
नींबू और शहद को बराबर मात्रा में अच्छे से मिला ले और इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगा ले, लेकिन पेस्ट लगाने से पहले चेहरे को अच्छे से धोकर सुखा लें, जब पेस्ट लग जाए तो उसके बाद करीब 15 मिनट तक पेस्ट को यूं ही लगा रहना दे जब पेस्ट सूख जाए तो अपने चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से धो ले, ऐसा करने से आपका चेहरा खिल उठेगा इस पैक को सप्ताह में दो से तीन बार लगाकर आप और भी बेहतर परिणाम पा सकती हैं.

मसूर दाल की पेस्ट
सबसे पहले मलूर दाल को रात भर पानी में भिगोकर रख दे उसके बाद सुबह महीन पेस्ट पीस लें, अगर आपके पास कच्चा दूध है तो इसमें थोड़ा सा मिला लें दोनों का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं और कुछ देर के लिए ऐसे ही छोड़ दे जब पेस्ट सूख जाए तो चेहरे को साफ पानी से धो ले इससे आपका चेहरा मुलायम हो जाएगा

दही-बेसन का पेस्ट
दही हमारे चेहरे के लिए कितना जरुरी है ये तो सभी जानते है साथ ही बेसन से भी हमारी त्वचा को एक अलग सा निखार मिलता है ऐसे में आप दही और बेसन को अच्छे से मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं लेकिन इसका पेस्ट सही तरीक से बनाएं. इसके पेस्ट को बनाने के लिए सबसे पहले दो चम्मच दही में एक चम्मच बेसन को अच्छे से मिला ले उसके बाद पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और सूख जाने पर ठंडे पानी से चेहेर को धो ले इससे आपका चेहरा साफ हो जाएगा और चेहरे में जमा गंदगी भी निकल जाएगी

तो देखा आपने घर पर कितनी आसानी से आप जब चाहे अपने चेहेर को निखार सकते है ऐसे में आपको पार्लर जाने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं है आप आऱाम से छुट्टियों के दिनों में अपने चेहेर पर इन पेस्ट का इस्तेमाल कर चेहरे की देखभाल अच्छे से कर सकती है और इनके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है।।