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कैसे बनाएं आँखों को खूबसूरत और आकर्षक, How to make eyes beautiful and attractive


सुंदर और स्वस्थ आंखें चेहरे का आकर्षण बढ़ा देती हैं | अगर आपकी आंखों की बनावट सुंदर और आकर्षक है तो आप बहुत भाग्यशाली हैं | लेकिन अगर किसी की आंखें प्राकृतिक रूप से सुंदर नहीं हैं तो भी परेशान होने की जरुरत नहीं है | उचित देखभाल और सही मेकअप के जरिये उन्हें भी आकर्षक बनाया जा सकता है |


ख्याल रखें 
आज की जीवनशैली में आंखों की देखभाल अधिक जरुरी हो गई है | जानिए आपको क्या करना चाहिए |

1. पेट की बीमारी से भी आंखों की समस्या पैदा हो सकती है | इसके लिए सुबह-सुबह एक ग्लास गर्म पानी में एक नीबू का रस निचोड़कर पीने से पेट साफ रहता है |

2. हफ्ते में एक दिन आंखों पर ठंडे पानी में टी बैग को डुबोकर आंखों पर 10-15 मिनट तक रखें | इसके अलावा खीरे के पतले गोल टुकड़े करके फ्रिज में आधे घंटे के लिए रख दें | फिर लेट कर अपनी आंखों पर एक टुकड़ा रखकर बीस मिनट तक आंखें बंद करके आराम करें | ऐसा करने से आंखों को बहुत आराम मिलेगा और आप तरोताजा महसूस करेंगी | इससे आंखों में चमक आएगी |

3. आंखों को स्वस्थ और सुंदर बनाने के लिए पर्याप्त नींद बहुत जरुरी है |

4. थकी हुई और लाल आंखों को ताजगी प्रदान करने के लिए खीरे के गोल टुकड़े काटकर आंखों पर दस मिनट तक रखें | फिर गुलाबजल में रुई भिगोकर आंखों पर लगाएं | एक मिनट बाद ठंडे पानी से छीटें मारकर आंखें साफ करें |

5. आंखों के नीचे काले घेरे हों तो एक कच्चे आलू को कसकर काले घेरों पर लगाएं | आधे घंटे बाद ठंडे पानी से आंखें धो लें और मायस्चराइजर लगा लें |

6. आंखों की सूजन दूर करने के लिए एक कप गर्म पानी में एक टी स्पून नमक मिलाकर दो छोटे कॉटन पैड डुबोएं और हल्का नीबू निचोड़कर आंखों पर तब तक रखें जब तक कि पैड ठंडा न हो जाए | फिर ठंडे पानी से आंखें धो लें |

7. रात में सोने से पहले आंखों के नीचे अंडर आई क्रीम या जेल लगाकर सोएं |

8. धूप में बाहर जाना हो तो सनग्लासेज लगाएं और सनब्लाक लगाना न भूलें |

9. डाइटीशियन कहते हैं कि आंखों की सेहत के लिए आपका आहार भी बहुत महत्वपूर्ण है | अपने आहार में विटमिन ए प्रचुर मात्रा में लें | यह दूध और दूध से बने पदार्थों, मछली, अंडे, पीले फलोंऔर हरी सब्जियों, गाजर, पालक, आड़ू और पपीते आदि में पाया जाता है |

10. अगर आंखों के आसपास झुर्रियां नजर आने लगी हैं तो प्रतिदिन सैलेड और हरी सब्जियों में एक टी स्पून वेजटेबल ऑयल डालकर खाएं |

11. आंखों पर एंटी रिंकल क्रीम लगाएं | इसके लिए कैस्टर ऑयल, ऑलिव ऑयल और पेट्रोलियम जेली को बराबर मात्रा में अच्छी तरह मिलाकर एक जार में रख लें | इसे रोजाना आंखों पर और उसके आसपास लगाकर हल्की मालिश करें |

12. पानी में एक चुटकी बोरिक एसिड मिलाकर उबालें | ठंडा करके इस पानी से आंखें धोएं | ऐसा करने से आंखों को आराम व ठंडक मिलेगी |

13. अगर आपकी आंखों में जलन होती हो तो यह उपाय अपनाएं- एक टी स्पून उबले पानी में दो टेबल स्पून गुलाबजल मिलाएं | इससे आंखें साफ करें |

एक्सरसाइज भी है जरुरी
1. फिटनेस एक्सपर्ट के मुताबिक आंखों को आराम देने और सुंदर बनाने के लिए नियमित एक्सरसाइज भी जरुरी है | इसके लिए एक शांत कमरे में लाइट बंद करके अपने दोनों हाथों को आंखों पर रखें | पांच मिनट तक आंखें बंद करें | फिर आंखें खोलकर फैलाएं और अंधेरे में देखने की कोशिश करें | आंखों को आराम मिलेगा |

2. अगर आपकी आंखें कमजोर हैं और आप चश्मा लगाती हैं तो काम के हर एक घंटे बाद चश्मा उतार कर आंखें बंद करके पांच मिनट के लिए उन्हें आराम दें |

3. आराम की मुद्रा में बैठ जाएं | अपनी आंखों को गोलाई में घुमाएं | पहले एक दिशा में फिर दूसरी दिशा में घुमाएं |

4. अपनी चार उंगलियों को आंखों के सामने लाएं फिर धीरे-धीरे दूर ले जाएं | यह प्रक्रिया कम से कम पांच बार दोहराएं |

5. आप जब भी बाहर जाएं तो पेड़-पौधों को ध्यान से देखती रहें | हरियाली या हरा रंग आंखों को बहुत सुकून देता है |

आई पैक
सौंदर्य विशेषज्ञ कहती हैं कि आंखों के नीचे काले घेरे, सूजन और झुर्रियां दूर करने के लिए सबसे जरुरी है पर्याप्त नींद, पर्याप्त पानी, संतुलित आहार, अल्ट्रा वायलट किरणों से बचाव और तनावमुक्त  रहना | इसके अलावा आप इस आई पैक का भी इस्तेमाल कर सकती हैं-

एक टी स्पून दूध और एक टी स्पून खीरे का रस मिलाकर फ्रिज में ठंडा करें | इसमें रुई भिगोकर आंखों पर दस मिनट के लिए रखें | ठंडे पानी से धोकर आंखें साफ़ कर लें |

कैसा हो मेकअप
सौंदर्य विशेषज्ञ कहती हैं कि आंखों के मेकअप के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भौहें (आईब्रोज) सही आकार में बनी होनी चाहिए | भौहें बनाने का सबसे सही समय नहाने के बाद होता है | भौहें सही आकार में और साफ-सुथरी न हों तो आई मेकअप बहुत ख़राब लगता है | भौहें नेचुरल रखें | ‘सी’ आकार वाली और बेहद पतली भौहें चलन से बाहर हैं | जो बाल आकार से बाहर हों, बस उन्हीं फालतू बालों को हटवाएं | चेहरे पर बेस लगाने के बाद सबसे पहले आंखों का मेकअप किया जाना चाहिए |

1. आइशैडो से शुरुआत करें | आजकल लाइट शिमरी कलर्स चलन में हैं | पलकों पर पहले अपने कपड़े और त्वचा के रंग से मेल खाता हुआ आइशैडो ब्रश की सहायता से लगाएं | फिर थोड़ा हाइलाइटर आइशैडो में मिलाएं | इसके बाद आइलैशेज को कर्ल करें | वाल्यूमाइजिंग या ट्रांस्पेरेंट मस्कारा के दो कोट लगाएं |

2. सबसे अंत में आइलाइनर से आंखों को खूबसूरत आकार दें | आंखों का मेकअप करने के बाद अपनी आइब्रोज को कोंब करें | अंत में आइब्रो पेंसिल से उन्हें हल्का गहरा करें |

3. रात में आंखों का मेकअप उतारना न भूलें | अगर आप कृत्रिम बरौनियां (आइलैशेज) लगाती हों तो सबसे पहले उन्हें हटाएं | फिर क्लींजिंग जेल और गीली रुई की सहायता से आईलाइनर और आइशैडो हटाएं |

4. आंखें बंद करके गीली रुई से भीतरी कोने से बाहरी कोने तक हलके से पोंछें | ध्यान रखें त्वचा पर खरोंच न आए |

कोकाकोला पेप्सी के फायदे, Benefits of Coca Cola, Pepsi,



कोकाकोला हर घर में रखनी चाहिए। इससे होने वाले 16 बहुत बड़े लाभ हैं जो इसकी हर कमी को दूर कर देते हैं| यह पोस्ट खूब शेयर करें ताकि कोकाकोला के बारे में दुर्भावना दूर हो  इसकी एक बोतल हर समय घर में रहनी चाहिए !!

(1) चीनी मिटटी के बर्तनों पर लगे हर धब्बे को दूर करता है|

(2) घर में गलीचे पर लगे हर धब्बे को दूर करता है|

(3) खाने के बर्तनों पर हुए जलने के हर निशान को दूर करता है

(4) कपड़ों पर लगी चिकनाई जो साबुन से दूर नहीं होती को मिटा देता है|

(5) बालो पर लगे रंग को तुरंत उतार देता है|

(6) किसी भी धातु पर लगे पेंट के धब्बों को तुरंत मिटा देता है|

(7) कार बैटरी और इन्वर्टर की बैटरी के टर्मिनलों पर जरने यानि जंग को तुरंत दूर कर देता है|

(8) सबसे बढ़िया कीटनाशक का काम करता है|

(9) टाइलों पर लगे धब्बों को तुरंत दूर कर देता है|

(10) टॉयलेट की सफाई सबसे बढ़िया करता है|

(11) पुराने सिक्कों में चमक ला देता है|

(12) अल्युमिनियम फॉयल को साफ़ कर देता है|

(13) च्युइंग गम के निशानों को दूर कर देता है|

(14) कपड़ों पर लगे खून के धब्बों को तुरंत साफ़ कर देता है|

(15) गंदे बालों की सफाई बहुत अच्छी तरह कर देता है|

(16) घर में इसको पानी में मिलाकर पोचा बहुत अच्छा लगता है|

घर को कीटाणु रहित कर देता है|
एक लाभ और है उनके लिए जो शीघ्र मरना चाहते हैं,, वे इसका नियमित सेवन करें| आंतें खराब हो जायेंगी और यमराज से शीघ्र भेंट हो जायेगी|

इससे लाभ ही लाभ है| अतः हर घर में यह अवश्य रखना चाहिए !

इतना शेयर करो की कोई भी भारतीय फायदे से चूके नही

15 दिन में बॉडी बनाए इन जोरदार तरीको से


सुबह
एक मुट्ठी काले चनों को अच्छे से धोकर साफ पानी में भिगो दें। रात में सोने से पहले इनका पानी निकालकर इन्हें एक साफ गीले कपड़े में लपेटकर हवा में रख दें। अगले दिन सुबह तक ये चने अंकुरित हो जाएंगे। इन चनों को सीधे न खाकर इन्हें हल्के तेल में थोड़ा फ्राई करना ज्यादा बेहतर रहता है। चाहें तो इनमें बारीक कटी हुई सलाद मिला लें। इन्हें अच्छी तरह चबा-चबाकर खाना चाहिए। आइए जानते हैं इसके क्या फायदे हैं.

मिलेगी ताकत – 
अंकुरित काले चने ताकत और अनिल जी का बहुत बड़ा सोरस है रेगुलर खाने से कमजोरी दूर होती है..

बढ़ेगी फर्टिलिटी – 
रोज सुबह अंकुरित काले चने शहद के साथ लेने से फर्टिलिटी बढती है

बेहतर स्पर्म क्वालिटी – 
सुबह 1 चम्मच शक्कर मिलाकर अंकुरित काले चने खाने से स्पर्म क्वालिटी बेहतर होती है..

कब्ज से राहत – 
अंकुरित काले चने में ढेर सारे फाइबर होते है. ये पेट को साफ करते है और डाइजेशन बेहतर करते है..

यूरिन प्रॉब्लम होगी दूर – 
अंकुरित काले चने के साथ गुड खाने से बार-बार यूरिन जाने की प्रॉब्लम ठीक होती है. पाइल्स से भी राहत मिलती है..

हेल्दी स्किन – 
बगैर नमक डाले चबा चबाकर खाने से स्किन हेल्दी और ग्लोइंग होती है. खुजली, रेशेज जैसी स्किन प्रॉब्लम दूर होती है

बढ़ेगा वजन – 
काले चने बॉडी मास बढ़ाने में भी हेल्पफुल है.

रेगूलर खाने से वजन बढ़ता है और मसल्स स्ट्रोंग होती है..

सर्दी-जुकाम से बचाव – 
अंकुरित काले चने बॉडी की इम्युनिटी बढ़ाते है. सर्दी -जुकाम जैसी बिमारियों से बचाव होता है..

डायबटीज से बचाव –
रेगुलर अंकुरित काले चने खाने से मेटाबोलिज्म तेज होता है. डायबटीज से बचाव होता है..

खून की कमी होगी दूर – 

अंकुरित काले चने आयरन का बहुत बड़ा सोर्स है. ये खून की कमी तो दूर करते ही है, ब्लड प्यूरीफाय भी करते है

एसिडिटी और पेट में जलन का उपचार, Acidity Problem Ka Deshi Upchar


हमारे पेट में बनने वाला एसिड या अम्ल भोजन को पचाने का काम करता है, लेकिन कई बार पचाने के लिए पेट में पर्याप्त भोजन ही नहीं होता या फिर एसिड ही आवश्यक मात्रा से अधिक बन जाता है। ऐसे में एसिडिटी या अम्लता की समस्या हो जाती है। इसे पेट की जलन या हार्टबर्न भी कहा जाता है।

वसायुक्त और मसालेदार भोजन का सेवन आमतौर पर एसिडिटी की प्रमुख वजह है। इस प्रकार का भोजन पचने में जटिल होता है और एसिड पैदा करने वाली कोशिकाओं को आवश्यकता से अधिक एसिड बनाने के लिए उत्तेजित करता है।


क्यों होती है एसिडिटी
  
लगातार बाहर का भोजन करना। भोजन करना भूल जाना।

अनियमित तरीके से भोजन करना। दो बार के भोजन में अधिक अंतराल रखने से भी एसिडिटी हो सकती है।

मसालेदार खाने का ज्यादा सेवन करना।

विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव भी एसिडिटी का एक कारण है।

काम का अत्यधिक दबाव या पारिवारिक तनाव लंबे समय तक बना रहे तो शारीरिक तंत्र प्रतिकूल तरीके से काम करने लगता है और पेट में एसिड की मात्रा आवश्यकता से अधिक बनने लगती है।

इन घरेलू प्रयोग को करें

इलायची 
इलायची खाने की आदत आपको एसिडिटी से बचाए रखने में मदद करती है। जब भी आपको एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या हो, तो एक से दो इलायची को मुंह में रखकर चूसते रहें।

तुलसी 
तुलसी न केवल एसिडिटी में लाभदायक है बल्कि मानसिक और अन्य शारीरिक रोगों में भी बेहद प्रभावी औषधी है। खाने के बाद तुलसी के कुछ पत्तों को चबाएं या फिर गर्म पानी में डालकर इसका सेवन करें।

पुदीना 
पुदीना हमेशा से ही पेट व पाचन की समस्याओं के लिए फायदेमंद रहा है। मसालेदार भोजन से पेट में होने वाली जलन, पुदीने के पत्तों को चबाने से शांत होगी, या फिर पानी में नींबू और पि‍सी हुई पुदीना पत्ती को काले नमक के साथ मिलाकर पिएं। 

आंवला 
आंवला हमेशा से ही एक घरेलू पाचक उपायों में गिना जाता है। एसिडिटी में आंवले को काले नमक के साथ खाना लाभकारी होगा। आप चाहें तो इसका मुरब्बा, जूस या इसकी चॉकलेट अथवा सुपारी का सेवन भी कर सकते हैं।

दूध 
ठंडा दूध पीना, एसिडिटी के लिए पुराना रामबाण उपाय है। पेट या सीने में जलन होने पर दूध और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर पिएं या फिर ठंडे दूध का सेवन करें।

जीरे का पानी 
पेट की समस्याओं में जीरे का पानी भी बेहद लाभदायक होता है। जीरे को पानी में उबालकर, इसका प्रयोग करना एसिडिटी में फायदेमंद साबित होगा।

अदरक 
सर्दी, खांसी, जुकाम हो या फिर पाचन संबंधी समस्याएं, अदरक का इस्तेमाल एक कारगर उपाय है। इसे पानी के साथ उबालकर उस पानी को पिएं, या फिर इसका एक टुकड़ा काले नमक में लपेटकर चूसें। जल्द से जल्द लाभ मिलेगा।

सौंफ 
खाने के बाद सौंफ का सेवन, पाचन में मददगार होता है। पेट में जलन, एसिडिटी होने पर भी सौंफ उतना ही फायदेमंद है। सौंफ ठंडी प्रकृति की होती है और यह पेट में ठंडक पैदा कर एसिडिटी में राहत देती है।

इसके साथ ही ये उपाय भी करें

1. समय पर भोजन करें और भोजन करने के बाद कुछ देर वॉक जरूर करें।

2. अपने खाने में ताजे फल, सलाद, सब्जियों का सूप, उबली हुई सब्जी को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित अनाज खूब खाएं। ये विटामिन बी और ई का बेहतरीन स्रोत होते हैं जो शरीर से एसिडिटी को बाहर निकाल देते हैं।

3. खाना हमेशा चबा कर और जरूरत से थोड़ा कम ही खाएं। सदैव मिर्च-मसाले और ज्यादा तेल वाले भोजन से बचें। 

4. अपने रोजमर्रा के आहार में मट्ठा और दही शामिल करें। 

5. ताजे खीरे का रायता एसिडिटी का बेहतरीन उपचार हैं।

6. शराब और मांसाहारी भोजन से परहेज करें।

7. पानी खूब पिएं। याद रखें इससे न सिर्फ पाचन में मदद मिलती है, बल्कि शरीर से टॉक्सिन भी बाहर निकल जाते हैं।

8. खाने के बाद तुरंत पानी का सेवन न करें। इसका सेवन कम से कम आधे घंटे के बाद ही करें। 

9. धूम्रपान, शराब से बचें। 

10. पाइनेपल के जूस का सेवन करें, यह एन्जाइम्स से भरा होता है। खाने के बाद अगर पेट अधिक भरा व भारी महसूस हो रहा है, तो आधा गिलास ताजे पाइनेपल का जूस पीएं। सारी बेचैनी और एसिडिटी खत्म हो जाए

11. आंवले का सेवन करें हालांकि यह खट्टा होता है, लेकिन एसिडिटी के घरेलू उपचार के रूप में यह बहुत काम की चीज है। 

12. गैस से फौरन राहत के लिए 2 चम्मच ऑंवला जूस या सूखा हुआ ऑंवला पाउडर और दो चम्मच पिसी हुई मिश्री ले लें और दोनों को पानी में मिलाकर पी जाएं।

बार बार पेशाब आने की समस्‍या को दूर करने का घरेलू उपाय


ब्लैडर में यूरिन स्टोरेज की क्षमता कम होने या इसके अधिक सक्रिय होने से बार बार पेशाब लगती है।

डायबिटीज के रोगी को पेशाब अधिक जाना पड़ता है।

चाय, कॉफ़ी और शराब अधिक पीने से पेशाब ज़्यादा लगती है।

पेट में कीड़े होने पर भी यूरिन अधिक होती है। ख़ासकर ऐसा बच्चों में देखने को मिलता है।

प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ जाए तो भी यह परेशानी हो जाती है।

इलाज के लिए दी जाने वाली दवाइयां भी अधिक बाथरूम जाने का कारण हो सकती है। इसलिए डॉक्टर से इस बारे में बात कीजिए।

सर्दियों में भी पेशाब अधिक लगती है।

गर्भाधारण के बाद भी ऐसा होना स्वभाविक है।

अधिक पेशाब आने पर घरेलू उपाय

बुज़ुर्गों में बार बार पेशाब आना आम बात है, इसलिए उन्हें रात में सोने पहले छुहारा खाकर दूध पीना चाहिए।

रोज़ सेब खाने और गाजर का जूस पीने से भी इसका इलाज सम्भव है।

पालक भी अधिक पेशाब जाने की समस्या को कम करती है। इसलिए शाम को इसकी सब्ज़ी बनाकर खाएं।

बार बार पेशाब आने की दिक्कत होने पर अंगूर के सेवन से लाभ मिलता है।

ब्रेकफ़ास्ट करने के बाद आप दो केले खाएं तो अधिक पेशाब आने की समस्या कम हो जाएगी।

चुटकी भर हल्दी फांककर पानी पीने से ज़्यादा पेशाब आने की शिकायत जाती रहती है।

मसूर की दाल खाने से इस प्रॉब्लम से छुटकारा मिल सकता है।

1 कटोरी मेथी का साग नियमित खाने से भी बार बार पेशाब आने की समस्या नहीं रहती है।

दिन में 2 बार 3 पिस्ते, 3 मुनक्के और 5 काली मिर्च खाने से आराम मिल जाता है।

जाड़े के मौसम में तिल के लड्डू बनाकर खाने से पेशाब अधिक आने की समस्या दूर हो जाती है।

दही खाने से ब्लैडर के हानिकारक बैक्टीरिया की बढ़त कम हो जाती है।

राई एवं सरसों के आयुर्वेदिक गुण


राई घरेलू मसालों का अभिन्न अंग है।। इसका पूरे भारत में कृषि द्वारा उत्पादन किया जाता है।। राई भी दो प्रकार की होती है--काली राई तथा लाल राई।। दोनों के ही गुण समान होते हैं।। राई के पत्ते मूली के पत्तों की तरह होते हैं।। वसंत ऋतु में इसके फूल पीले रंग के बड़े मनमोहक होते हैं।। राई के हरे पत्तों का साग अत्यंत लाभकारी होता है।। यह साग वात और कफ को नष्ट करता है।। राई के ४-५ दाने खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।। राई में कृमि नाशक गुण है।। राई के दाने का अधिक मात्रा में प्रयोग हाइपर एसिडिटी के रोगी के लिए हानिकारक होता है।। राई के दाने सरसो से छोटे होते हैं।। आयुर्वेदिक चिकित्सा में चरक एवं सुश्रुत द्वारा राई का प्रयोग मिलता है।।

जठराग्नि मंद होने पर,, विषैले दुष्प्रभाव को मिटाने में,, हर्निया,, कृमि रोग,, श्वास रोग,, संधिवात की पीड़ा, सिर दर्द,, कान का पकना,, कान का दर्द,, पीनस,, बवासीर,, श्वास नलिका प्रदाह तथा हैजा आदि में राई का प्रयोग होता है।। राई से अचार लंबे समय तक तरोताजा बना रहता है।।

राई का उपयोग

मसूड़ों की तकलीफ में-- 
४ ग्राम राई पीसकर एक लीटर पानी में डालकर काढ़ा बनाकर थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर सहने योग्य गरम पानी से कुल्ला करने से लाभ होता है।।

सायटिका शूल में-- 

यह शूल जब कमर के हिस्से में सायटिका नर्व निकलने के स्थान पर होने पर राई को पीसकर लेप लगाने से लाभ होता है।।

ल्यूकोडर्मा में-- 
२०० ग्राम राई को पीसकर डेढ़ किलो पुराने गोघृत में मिलाकर प्रतिदिन त्वचा पर लेप करने से एक्जिमा,, दाद आदि में लाभ करता है।।

पेट में छोटे कृमि होने पर-- 
१ ग्राम राई पीसकर ५० ग्राम गोमूत्र के साथ निराहार प्रात:काल नित्य पीने से कुछ दिनों में कृमि नष्ट हो कर बाहर निकल जाते हैं।।

हैजा में-- 
हैजा प्रारंभिक अवस्था में हो तो १ ग्राम राई पीसकर देशी खाँड के साथ खिलाने से लाभ होता है।।

आमवत या पक्षाघात में-- 
१०० ग्राम राई के तेल में ५ ग्राम कपूर मिलाकर मालिस करने से लाभ होता है।।

पीनस में-- 
नाक के अंदर घाव होने से पीला बदबू- दार स्राव होता है।। उस पर राई को पीसकर १० ग्राम,, २ ग्राम कपूर और १०० ग्राम गोघृत लेकर अच्छी तरह घोंटकर मलहम बना कर लगाया जाता है।। इसे लगाने से श्लेष्मा निकल जाता है।। घाव शुद्ध हो जाता है।। तत्पश्चात सफेद कत्था को घी में मिलाकर मलहम बना कर लगाने से घाव जल्दी भरता है।।

बवासीर में-- 
(१) सुबह निराहार राई को पीसकर पके केले में चीरा लगाकर अंदर डाल कर केला खा लें ।। यह प्रयोग १-२ करने से खून आना बंद हो जाता है।
(२) बवासीर के मस्सों,, जिनमें खुजली होती हो तो वे कफज बवासीर के मस्से होते हैं।। उनपर राई का तेल नित्य लगाने से मस्से मुरझा जाते हैं।।

कान का पकना तथा दर्द होने पर--
राई १० ग्राम,, लहसुन की कली १० ग्राम तथा कपूर २ ग्राम तिल के १०० ग्राम तेल में आग पर पकाएँ।। तेल उबल जाने पर,, ठंढ़ा होने पर शीशी में भरकर रख लें।। यह सिद्ध तेल २-४ बूंद कान में डालते रहने से दर्द एवं बहना बंद हो जाता है।। घाव भर जाता है।।

दमा,, श्वास के दौरे में-- 
आधा ग्राम पीसी हुई राई १ ग्राम घी तथा ३ ग्राम शहद के साथ सुबह शाम चाटने से लाभ होता है।।

गांठ में-- 

किसी भी प्रकार की गांठ बढ़ रही है तो राई और काली मिर्च बराबर मात्रा में पीसकर गोघृत में मिलाकर लेप करने से वृद्धि रुक जाती है।।

कांटा चुभ जाने पर-- 
कांटा या कांच त्वचा में चुभ जाता है जो आसानी से नहीं निकलता।। उस स्थान पर पिसी हुई राई घी शहद में मिलाकर लेप लगाने से बाहर निकल जाता है।।

सर्दी,, जुकाम में-- 
आधा ग्राम पिसी हुई राई १ ग्राम देशी खाँड में मिलाकर पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।। राई के तेल से तलवों तथा नाक के आस पास मालिस करें।।

दाद में-- 
राई को सिरके के साथ पीसकर लेप करने से लाभ होता है।।

बच्चों की खांसी में-- 

राई के तेल से छाती की मालिस करने से लाभ होता है।।

पित्तज सूजन में-- 
पित्त की सूजन में राई की पुल्टिस बाँधने से लाभ होता है।। पुल्टिस बाँधने से एवं पहले गोघृत लगा दें जिससे त्वचा को हानि न हो।।

सरसों का उपयोग


तेल मालिस में-- 
मालिस के लिए सरसों का तेल लाभप्रद होता है।। इसे कुष्ठ नाशक भी कहते हैं।।

मसूड़ों से खून बहने पर-- 
३ ग्राम सरसों के तेल में चुटकी भर पिसी हुई सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।। दांतों,, मसूड़ों के रोग से मुक्ति मिलती है।।

चेहरे की त्वचा की श्यामलता-- 
सरसों को पीसकर दूध में उबालकर,, उबटन सा लगाकर मालिश करें।। आधा घंटे बाद धो दें,, त्वचा में चमक,, निखार आ जाता है।।

मुंहासों पर-- 
सरसों,, बच,,लोध्र और सेंधा नमक मिलाकर पानी में पीसकर फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।।

कफ युक्त खाँसी में-- 
सरसों को पीसकर शहद के साथ चाटने से लाभ होता है।।

कान दरद में-- 
(१) वात जन्य कान दर्द में  २-३ बूँद तेल कान में डालने से दर्द बंद हो जाता है।।
(२) पीपल के ८-१० पत्ते १०० ग्राम तेल में पकाकर,, छानकर १-२ बूँद सुबह शाम कान में डालने से लाभ होता है।।

सूजन में-- 
सरसों का चूर्ण लेप करने से लाभ होता है।।

एक्जिमा,, खुजली में-- 
१०० ग्राम तेल में आक के पत्तों का रस २० ग्राम और थोड़ी हल्दी मिलाकर आग पर पकाकर,, छान लें।। रोग ग्रस्त त्वचा पर लगाने से लाभ होता है।।

हाथी पांव की सूजन में--
सरसों के पत्ते,, कंटकारी के पत्तों को गोमूत्र में पीसकर लेप करने से लाभ होता है।।

हृदय रोगों से बचाव हेतु-- 
राई या सरसों के तेल में अनसेचुरेटेड फैट होता है।। ओमेगा थ्री पाया जाता है। यह तेल कैंसररोधी होता है।। यह तेल हृदय रोगी के लिए लाभप्रद होता है।। इस तेल में लिनोलेनिक अम्ल (एन-३) तथा (एन-६) का सही अनुपात हृदय संबंधी बीमारियों का खर्चा कम करने में प्रभावी होता है।। यह अनुपात राई या सरसों के तेल में ही मिल जाता है।। वैज्ञानिकों ने इसे पोषक तत्वों की गुणवत्ता के आधार पर जैतून के तेल के बाद सरसों के तेल को श्रेष्ठ माना है।।

बच्चों की पसली चलने पर-- 
सरसों के तेल में थोड़ा प्याज का रस मिलाकर गुनगुना करके बच्चों की छाती पर मालिश करने से लाभ होता है।।

दमा में-- 
१० ग्राम सरसों का तेल १० ग्राम गुड़ अच्छी तरह घोंटकर प्रात: सेवन करने से दमा,, खांसी एवं श्वास संबंधी रोगों में लाभ होता है।।

ओंठ फटने पर-- 

सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर नाभि पर लगाने से ओंठ फटना बंद हो जाता है।

ग्लोइंग स्किन 10 आयुर्वेदिक नुस्खे (Ayurvedic Tips for Glowing Skin)


1. हल्दी से हटते हैं मुहांसे 
हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक एंटी-फंगल है। इसके लेप लगाने से त्वचा पर मुहांसे, पिंपल और पिग्मेंटेशन नहीं होते हैं।

2. चंदन से स्किन में आता ग्लो
बाजार में त्वचा की देखभाल के लिए बिकने बनने वाले ज्यादातर कॉस्मेटिक में चंदन का इस्तेमाल होता है। चंदन से त्वचा में निखार आता है। चंदन त्वचा को ठंडक भी पहुंचाता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा पर दाने और मुहांसे नहीं होते हैं।

3. एलोवेरा त्वचा की करती सुरक्षा
एलोवेरा एक नेचुरल एंटी क्लिंजर (Natural Skin Cleanser) है। इससे त्वचा चमकदार बनती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी इंफ्लेमटरी गुण से त्वचा की बाहरी परत को सुरक्षा मिलती है। इसके इस्तेमाल से स्किन इंफेक्शन (Skin Infection) होने पर होने वाली जलन भी कम होती है।

4. नीम की पत्ती से त्वचा में आती चमक
त्वचा के लिए नीम की पत्ती काफी कारगर होती है। इससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। नीम की पत्ती के पाउडर और पिसी हुई गुलाब की पंखुड़ी को नींबू के रस के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा में चमक आती है।

5. एवाकाडो से स्किन को मिलता प्रोटीन
एवाकाडो (Avocado) से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। यह ड्राय स्किन वालों के लिए काफी कारगर है। एवाकाडो में प्रोटीन होता है, जो त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है।

6. नींबू से मिटती हैं झुर्रियां
चेहरे पर नींबू का रस लगाएं। निचोड़े गए नींबू के छिलके भी चेहरे पर कुछ दिन तक मल सकते हैं। इससे चेहरे की झुर्रियां मिटेंगी। मुंह धोते समय गालों को हथेलियों से थपथपाकर सुखाएं, इससे गालों में रक्त का संचार बढ़ता है और झुर्रियां मिट जाती हैं।

7. डार्क स्पॉट मिटाने के लिए टमाटर है कारगर
चेहरों का डार्क स्पॉट (Dark Spots) मिटाने में टमाटर काफी असरदार है। टमाटर के रस में नींबू का रस, हल्दी पाउडर और बेसन मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को गालों पर लगाएं। सूखने के बाद पानी से चेहरे को धो लें। रोज एक बार इसे आजमाएं। डार्क स्पॉट खत्म हो जाएँगे।

8. चुकंदर चेहरे को बनाएगी गुलाबी
चुकंदर का सेवन त्वचा में गुलाबी निखार लाता है। चुकंदर में काफी मात्रा में आइरन होता है, जिससे हीमोग्लोबिन मिलता है। इसे पीस कर चेहरे पर भी लगा सकते हैं। रोजाना इसे आजमाने से चेहरे पर गुलाबी निखार आता है।

9. अंकुरित चना और मूंग खाएं
अंकुरित चना और मूंग सुबह-शाम खाएं। इससे चेहरे की झुर्रियां खत्म होंगी। चना और मूंग में विटामिन ई होता है, जो झुर्रियां मिटाने में कारगर होता है। चना और मूंग नियमित खाने से स्किन में ग्लो आता है।

10. गाजर का रस पीएं

गाजर में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है, एक ग्लास गाजर का रस रोज पिएं। इससे त्वचा में निखार आता है, झुर्रियां गायब होती हैं।

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बालों का झड़ना रोके नीलगिरी का तेल


यूकेलिप्‍टस जिसको हम नीलगिरी के नाम से भी जानते हैं, काफी मज़बूत पेड़ होता है जिसका तेल बहुत सुगंधित होता है। यूकेलिप्‍टस तेल के कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ और कई सौंदर्य लाभ हैं जैसे कि बाल झड़ने और बालों की ग्रोथ के लिये इस्‍तमाल किया जाता है। कई लोग यूकेलिप्‍टस का तेल अपने बालों को बढाने और मोटा बनाने के लिये इस्‍तमाल करते हैं। इससे रूसी की समस्‍या भी दूर होती है। कई हेयर पैक्‍स में यूकेलिप्‍टस का तेल भी मिलाया जाता है। यदि आपके भी बाल बहुत झड़ रहे हैं या वे पतले हो चुके हैं तो देर ना करें और अभी से ही येकेलिप्‍टस यानी की निलगिरी का तेल लगाना शुरु कर दें। इससे आपको जरुर फायदा होगा।

दो मुंहें हैं बाल, तो करें ये उपाय यूकेलिप्‍टस तेल का प्रयोग करें ऐसे-

1. यूकेलिप्‍टस ऑयल मसाज- बालों की ग्रोथ को बढाने और सिर को साफ रखने के लिये गरम यूकेलिप्‍टस के तेल से रात को सिर की मसाज करें और दूसरे दिन शैंपू से बालो को धो लें। इससे बाल मुलायम भी बनेगे।

2. यूकेलिप्‍टस ऑयल और नींबू- यूकेलिप्‍टस तेल को गरम कर के उसमें नींबू का रस मिलाएं और उससे सिर की मसाज करें।
इससे ब्‍लड सर्कुलेशन बढता है, बाल उगते हैं और खोपड़ी भी साफ होती है। 10-15 मिनट मसाज करें। 

3. यूकेलिप्‍टस ऑयल और बादाम तेल- यदि बाल बहुत झड़ रहे हैं तो बादाम के तेल को यूकेलिप्‍टस तेल में मिला लें और उसे गरम करें। इस तेल को लगाने से बाल मजबूत होंगे और वे कोमल भी होंगे।

4. यूकेलिप्‍टस ऑयल और मेंहदी तेल- आप मेंहदी, कैस्‍टर ऑयल और यूकेलिप्‍टस ऑयल को साथ में मिला कर गरम कर के बालों में लगा सकती हैं। अपने बालों को गरम तौलिये से लपेट लें और 30 मिनट तक ढंकने के बाद बालों को शैंपू कर लें।

5. यूकेलिप्‍टस ऑयल और गुडहल फूल- गुडहल के फूलों को पानी में उबाल लें, छान कर पेस्‍ट बनाएं। पेस्‍ट में कुछ बूंद यूकेलिप्‍टस तेल की मिलाएं और बालों में लगाएं। इसे 30 मिनट छोड़ कर उबले हुए गुडहल के पानी से और शैंपू से बाल धोएं। गुडहल बालों के लिये बहतु ही अच्‍छा होता है और इससे बालों की ग्रोथ भी अच्‍छी हो जाती है।

प्रेग्नेंसी में पिएं यह खास ड्रिंक, बढ़ेगी बच्चों की लंबाई



बच्चों की लंबाई को लेकर अक्सर मां परेशान रहती हैं। उनके खानपान का पूरा ध्यान रखती हैं इसके बावजूद बच्चे की लंबाई ना बढ़ना उनके लिए चिंता का विषय बन जाता है, लेकिन हाल में हुए एक शोध में पता चला है कि अगर मां गर्भावस्‍था के दौरान अपने आहार के प्रति सजग रहें तो उनके होने वाले बच्‍चे की लंबाई पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है।

कई देशों के विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान रोज एक गिलास दूध के सेवन से बच्चे की लंबाई अच्छी होती है। शोध के दौरान 1980 के दशक में पैदा हुए बच्चों की लंबाई और गर्भवस्था के दौरान मां द्वारा दूध के सेवन से जुड़ी जानकारियों पर अध्ययन किया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि शुरुआती दौर में दूध का सेवन आगे के सालों में भी बच्चों की लंबाई से संबंधित है।

यूरोपीय जर्नल के क्‍लीनिकल न्‍यूट्रीशन में प्रकाशित परिणाम के अनुसार, इस दौरान पैदा हुए बच्चों के वजन और लंबाई का विवरण लिया गया और 20 साल बाद दोबारा उनके वजन व लंबाई का विवरण लिया गया है। उनके अनुसार, जो महिलाएं प्रतिदिन 150 मिलीलीटर से अधिक दूध यानी एक ग्लास दूध का सेवन गर्भावस्था के दौरान अधिक करते हैं उनके बच्चों की लंबाई अच्छी रहती है।

इतना ही नहीं, शोध में यह भी पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान रोजाना एक ग्लास दूध पीने वाली महिलाओं के बच्चों में किशोरावस्था के दौरान इंसुलिन तेजी से बनता है जिससे उन्‍हें टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी कम होता है।

हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि गर्भवस्‍था के दौरान अधिक दूध पीने से गर्भवती महिलाएं अपने बच्‍चों की आई क्‍यू लेवल को भी बढ़ा सकती हैं, क्‍योंकि दूध आयोडीन की भरपूर मात्रा होती है।
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यदि आप पेट, जांघ या भुजा के बढ़ते फैट से परेशान हैं तो ये रेसिपी आपके लिए ही बनी है।


ये एक घरेलू औषधि है जिसमें प्राकृतिक सामग्री होती है इससे बॉडी फैट दूर होता है और आप बिना किसी साइड इफेक्ट की परवाह किए बिना इसे अपना सकते हैं। इस रेसिपी से आपकी पाचन क्रिया बढ़ती है और वजन तेजी से कम करता है 

यदि आप पेट, जांघ या भुजा के बढ़ते फैट से परेशान हैं तो ये रेसिपी आपके लिए ही बनी है। यह रेसिपी वजन कम करने की एक मुख्य भारतीय घरेलू औषधि है।

आपने यदि कई एक्सरसाइज कर ली हैं लेकिन वजन कम करने में अभी तक सफलता नहीं मिली है तो निराश ना हों। ये औषधि है ज़रूर काम करेगी।

सामग्री :
½ गिलास पानी, 1 नींबू, 1 खीरा, 1 चम्मच ग्वारपाठे का रस, 1 चम्मच कद्दूकस अदरक, एक मुट्ठी हरा धनिया और अजवायन। आइए अब देखें इसे बनाने का तरीका।

यह मिश्रण इतना पावरफुल है कि एक बार एक गिलास पीते ही शरीर में बदलाव महसूस करते हैं। शानदार फैट बर्निंग तत्वों के कारण ऐसा होता है।

नींबू का रस शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को निकालकर सफाई करने में फायदेमंद है।

अदरक पाचन क्रिया को बेहतर करती है और फैट कम करने में मददगार है।

खीरे या ककड़ी में पावरफुल फाइटर्स होते हैं और इसलिए रोजाना के खाने में इसे शामिल किया जाना चाहिए।

घर पर हर्बल नेचुरल डाई बनाने का तरीका..!!


क्या आप बाल काला करने के लिए डाई या केमिकल युक्त हानिकारक कलर इस्तेमाल करते हैं। शायद आप नहीं जानते ये आपके बालो के लिए कितने हानिकारक हैं और साथ में ये आपकी त्वचा और स्वस्थ्य को भी बहुत नुक्सान पहुंचाते हैं। इनसे आपको बालो के गिरने पकने और गंजे पन की शिकायत हो सकती हैं। । तो अब आप भारतीय ज्ञान की मदद से घर पर ही बनाये अपने लिए बाल काला करने की सुरक्षित हर्बल और देसी डाई। और अपने बालो और त्वचा को बचाइये इन हानिकारक पदार्थो से।
आइये जाने इसको बनाने की विधि।

आवश्यक सामग्री

1. सूखी पीसी मेहँदी – 20 ग्राम

2. काफी पाउडर – 3 ग्राम
3. कत्था – 3 ग्राम
4. ब्राह्मी चूर्ण – 10 ग्राम
5. आंवला चूर्ण – 10 ग्राम
6. दही – 25 ग्राम
7. नीम्बू का रस – 4 चम्मच
1 से 5 तक सभी को कूट पीस कर आपस में मिला लीजये। आवश्यकता अनुसार मिला कर रख लीजिये। बाद में ५० ग्राम मिश्रित पाउडर में २५ ग्राम दही और ४ चम्मच नीम्बू का रस मिला कर बालो में आधे घंटे तक लगा कर रखे। फिर पानी से धो लीजिये। इसके प्रयोग से बाल काले घने तथा मुलायम हो जायेंगे।

विशेष – कई बार पहली बार में तुरंत काले बाल नहीं होते। तो जब आप तीन चार बार इसको नियमित करेंगे तो आपके बाल प्राकृतिक रूप से काले दिखने लगेंगे।

इसके साथ में आप बाल धोने के लिए घर पर ही बनाया हुआ या फिर गौ पंचगव्य से बना हुआ शैम्पू और साबुन इस्तेमाल करे

अगर छोटी उम्र में ही आपके बाल झड़ने पकने या सफ़ेद होने लग गए हैं तो आप अपनी नियमित खुराक पर ज़रूर ध्यान दे। भोजन में नियमित मिनरल्स और फोलिक एसिड को शामिल करे।

कलौंजी
काले बालों के लिए एक टिप्स और लीजिये, कलौंजी (50 Gram) को तवे पर खूब गरम कीजिये जल जाय, फिर उसे पीस कर राख बनाइये, इसी क्रम में एक कढाई में सरसों का तेल ( आधा किलो ) खूब गरम कर फिर ठंडा करके उसमें कलौंजी की राख मिला लें, कपड़े से छान कर सीसी भर लें , बाल काले होने के साथ झड़ना भी रूक जाता है गंजे के भी बाल आ जाते हैं।
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स्वाद और सेहत से परिपूर्ण चुकन्दर की सब्जी रेसिपी, Chukandar Ki Sabji Recipe


आयरन, मिनरल्स और विटामिन से भरे चुकन्दर को सलाद के रूप में सभी खाते हैं. आइए आज हम पौष्टिक चुकन्दर की स्वादिष्ट सब्जी बनाएं.

आवश्यक सामग्री - 
चुकन्दर - 2 (250 ग्राम) तेल - 2 टेबल स्पून हरा धनिया - 2-3 टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ)हरी मिर्च - 2 (बारीक कटी हुई)अदरक का पेस्ट - 1 छोटी चम्मच या 1 इंच टुकडा़ कद्दूकस किया हुआहींग - 1 पिंच जीरा - ½ छोटी चम्मच अमचूर पाउडर - ¼ छोटी चम्मचलाल मिर्च पाउडर - ¼ छोटी चम्मच से कमकाली मिर्च पाउडर - ¼ छोटी चम्मच हल्दी पाउडर - ¼ छोटी चम्मच धनिया पाउडर - 1 छोटी चम्मच नमक - ¾ छोटी चम्मच या स्वादानुसार

विधि - 
चुकन्दर को धोकर अच्छे से पानी सुखा लीजिए. फिर, पॉलीथीन के दस्ताने पहनकर चुकन्दर को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लीजिए.

कढ़ाही गरम कीजिए और इसमें तेल डाल दीजिए. तेल गरम होने पर, इसमें जीरा और हींग डाल दीजिए. इसके बाद, हल्दी पाउडर, अदरक का पेस्ट, हरी मिर्च और धनिया पाउडर डालकर मसाले को हल्का सा भून लीजिए. फिर, मसाले में कटे हुए चुकन्दर डाल दीजिए. काली मिर्च, नमक और लाल मिर्च पाउडर भी डाल दीजिए तथा सब्जी को 2 मिनिट चलाते हुए पकाइए ताकि मसाले की परत चुकन्दर के टुकड़ों पर आ जाए. इसके बाद, सब्जी को ढक दीजिए और 5 मिनिट तक धीमी आंच पर पकने दीजिए.

5 मिनिट बाद, सब्जी को फिर से चमचे से चला लीजिए. सब्जी के पकने में अभी भी कसर बाकी है. इसे दोबारा से ढककर 4 से 5 मिनिट और पकने दीजिए.

बाद में, सब्जी को अच्छे से चलकर चैक कर लीजिए. चुकन्दर का एक टुकड़ा दबाकर देखिए, यह हल्का सा दब रहा है, तो सब्जी बन गई है. इसमें अमचूर पाउडर और थोड़ा सा हर धनिया डालकर मिक्स कर दीजिए. तैयार सब्जी को एक प्याले में निकाल लीजिए.

स्वाद और सेहत से परिपूर्ण चुकन्दर की सब्जी को पूरी, परांठे, रोटी या चावल के साथ परोसिए. इतनी चुकन्दर की सब्जी परिवार के 4 से 5 सदस्यों को साइड डिश की भांति सर्व करने के लिए पर्याप्त है.

सुझाव
चुकन्दर काटते समय चुकन्दर के रस से हाथ लाल न हो, इसलिए दस्ताने पहने जाते हैं. सब्जी में पानी डालने की आवश्यकता नही होती क्योंकि चुकन्दर काफी रसीला होता है. इससे निकले जूस में ही सब्जी धीमी आंच पर पककर तैयार हो जाती है. चुकन्दर की सब्जी को बिल्कुल नरम नही बनाते, इसे हल्का सा ही सॉफ्ट होने तक ही पकाते हैं.

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16 साधारण पौधे, औषधीय गुणों की खान है।



1. दूब घास
दूब घास को दूर्वा भी कहा जाता है। आदिवासियों के अनुसार इसका रोजाना सेवन शारीरिक स्फूर्ति प्रदान करता है। शरीर को थकान महसूस नहीं होती है। आदिवासी नाक से खून निकलने पर ताजी व हरी दूब का रस 2-2 बूंद नाक के नथुनों में डालते हैं, जिससे नाक से खून आना बंद हो जाता है।

2. अकोना
इसे मदार या आक भी कहते हैं, इसके दूध को घावों पर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।

3. मक्का
मक्का खाने से शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है। इसके सेवन से पीलिया भी दूर हो जाता है।मक्के के बीज, रेशम जैसे बाल, मक्के की पत्तियां सभी जबरदस्त औषधीय गुणों की खान हैं।

4. लटजीरा
इसे अपामार्ग भी कहा जाता है। इसके सूखे बीजों को वजन कम करने के लिए कारगर माना जाता है। इसके तने से दातून करने से दांत मजबूत हो जाते हैं।

5. कनेर
कनेर को बुखार दूर करने के लिए कारगर माना जाता है। आदिवासी हर्बल जानकार सर्पदंश और बिच्छु के काटने पर इसका उपयोग करते हैं।

6. तुलसी
सूक्ष्मजीव संक्रमण में तुलसी को एक बेहतरीन दवा माना जाता है। सर्दी, खांसी और बुखार में उपयोग के अलावा तुलसी सोरायसिस और दाद-खाज के इलाज में भी काम आती है।

7. केवड़ाजिन महिलाओं को मासिक धर्म संबंधित विकार होते हैं। उनके लिए केवड़ा रामबाण दवा है। आदिवासी हर्बल जानकार विकारों को दूर करने के लिए केवड़े के पौधे का इस्तेमाल करते हैं।

8. शमी
शरीर की गर्मी दूर करने के लिए शमी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। बहुमूत्रता की समस्या में भी शमी की पत्तियों का रस सेवन किया जाता है।

9. बेलपत्र
आदिवासियों के अनुसार बेलपत्र दस्त और हैजा नियंत्रण में दवा का काम करते हैं। शरीर से दुर्गंध का नाश करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

10. अर्जुन छाल
दिल के रोगों में अर्जुन सर्वोत्तम माना गया है। अर्जुन छाल शरीर की चर्बी को घटाती है। इसलिए वजन कम करने की औषधि के तौर पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

11. पीपल
पीपल को याददाश्त बढ़ाने,बच्चों के तीव्र विकास और पेट दर्द में कारगर औषधि माना गया है।

12. मण्डूकपर्ण
बच्चों की याददाश्त बेहतर बनाने और ब्लडप्रेशर कंट्रोल करने के लिए मण्डूकपर्ण को उपयोग में लाया जाता है।

13. अशोक
महिलाओं के लिए अशोक वरदान है। गर्भाशय की बेहतरी, मासिक धर्म संबंधित रोगों के निवारण के लिए इसे अच्छा माना गया है।

14. जासवंत

इसे गुड़हल भी कहा जाता है। आदिवासी इसके फूलों को तनाव दूर करने और बेहतर नींद के लिए उपयोग में लाते हैं

15. शिवलिंगी
महिलाओं में गर्भधारण और शिशु प्राप्ति के लिए शिवलिंगी के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है।

16. विदारीकंद
आदिवासी इसे पौरुषत्व और ताकत बढ़ाने के लिए उपयोग में लाते हैं।

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