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100 बीमारी का एक इलाज, 100 bimari ka ek davaee


खाना खाने से 1 घंटे बाद पानी पिए और हमेशा स्वस्थ रहे ,कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए !
अब ये भी जानना बहुत जरुरी है ...हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद क्या कारण है |
सबसे पहले आप हमेशा ये बात याद रखें कि शरीर मे सारी बीमारियाँ वात-पित्त और कफ के बिगड़ने से ही होती हैं !

अब आप पूछेंगे ये वात-पित्त और कफ क्या होता है ???
बहुत ज्यादा गहराई मे जाने की जरूरत नहीं आप ऐसे समझे की सिर से लेकर छाती के बीच तक जितने रोग होते हैं वो सब कफ बिगड़ने के कारण होते हैं
छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के अंत तक जितने रोग होते हैं वो पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं !
और कमर से लेकर घुटने और पैरों के अंत तक जितने रोग होते हैं वो सब वात बिगड़ने के कारण होते हैं !

हमारे हाथ की कलाई मे ये वात-पित्त और कफ की तीन नाड़ियाँ होती हैं !
भारत मे ऐसे ऐसे नाड़ी विशेषज्ञ रहे हैं जो आपकी नाड़ी पकड़ कर ये बता दिया करते थे कि आपने एक सप्ताह पहले क्या खाया एक दिन पहले क्या खाया -दो पहले क्या खाया !!
और नाड़ी पकड़ कर ही बता देते थे कि आपको क्या रोग है !

आजकल ऐसी बहुत ही कम मिलते हैं !
शायद आपके मन मे सवाल आए ये वात -पित्त कफ दिखने मे कैसे होते हैं ???
तो फिलहाल आप इतना जान लीजिये ! कफ और पित्त लगभग एक जैसे होते हैं !
आम भाषा मे नाक से निकलने वाली बलगम को कफ कहते हैं ! कफ थोड़ा गाढ़ा और चिपचिपा होता है !
मुंह मे से निकलने वाली बलगम को पित्त कहते हैं ! ये कम चिपचिपा और द्रव्य जैसा होता है !!
और शरीर से निकले वाली वायु को वात कहते हैं !! ये अदृश्य होती है !

कई बार पेट मे गैस बनने के कारण सिर दर्द होता है तो इसे आप कफ का रोग नहीं कहेंगे इसे पित्त का रोग कहेंगे !!
क्यूंकि पित्त बिगड़ने से गैस हो रही है और सिर दर्द हो रहा है !
ये ज्ञान बहुत गहरा है खैर आप इतना याद रखें कि इस वात -पित्त और कफ के संतुलन के बिगड़ने से ही सभी रोग आते हैं !
और ये तीनों ही मनुष्य की आयु के साथ अलग अलग ढंग से बढ़ते हैं ! बच्चे के पैदा होने से 14 वर्ष की आयु तक कफ के रोग ज्यादा होते है ! बार बार खांसी ,सर्दी ,छींके आना आदि होगा !
14 वर्ष से 60 साल तक पित्त के रोग सबसे ज्यादा होते हैं बार बार पेट दर्द करना ,गैस बनना ,खट्टी खट्टी डकारे आना आदि !!
और उसके बाद बुढ़ापे मे वात के रोग सबसे ज्यादा होते हैं घुटने दुखना ,जोड़ो का दर्द आदि
कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना !!

अब आप कहेंगे हम तो हमेशा यही करते हैं ! 99% लोग ऐसे होते है जो पानी लिए बिना खाना नहीं खाते है |पानी पहले होता है खाना बाद मे होता है |बहुत सारे लोग तो खाना खाने से ज्यादा पानी पीते है दो-चार रोटी के टुकडो को खाया फिर पानी पिया,फिर खाया-फिर पानी पिया !
ये जानना बहुत जरुरी है ...हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद क्या कारण है |
बात ऐसी है की हमारा जो शरीर है शरीर का पूरा केंद्र है हमारा पेट|ये पूरा शरीर चलता है पेट की ताकत से और पेट चलता है भोजन की ताकत से|जो कुछ भी हम खाते है वो ही हमारे पेट की ताकत है |हमने दाल खाई,हमने सब्जी खाई, हमने रोटी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी कुछ भी दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि|ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है |आप कुछ भी खाते है पेट उसके लिए उर्जा का आधार बनता है |अब हम खाते है तो पेट मे सब कुछ जाता है|पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है अमाशय|उसी स्थान का संस्कृत नाम है जठर|उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है epigastrium |ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है ये |बहुत छोटा सा स्थान हैं इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है |हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय मे आ जाता है|
अब अमाशय मे क्या होता है खाना जैसे ही पहुँचता है तो यह भगवान की बनाई हुई व्यवस्था है जो शरीर मे है की तुरंत इसमें आग(अग्नि) जल जाती है |आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे जठराग्नि|ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है |ये आग ऐसी ही होती है जेसे रसोई गेस की आग|आप की रसोई गेस की आग है ना की जेसे आपने स्विच ओन किया आग जल गयी|ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी |यह ऑटोमेटिक है,जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई|ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है |आपने खाना खाया और अग्नि जल गयी अब अग्नि खाने को पचाती है |वो ऐसे ही पचाती है जेसे रसोई गेस|आपने रसोई गेस पर बरतन रखकर थोडा दूध डाल दिया और उसमे चावल डाल दिया तो जब तक अग्नि जलेगी तब तक खीर बनेगी|इसी तरह अपने पानी डाल दिया और चावल डाल दिए तो जब तक अग्नि जलेगी चावल पकेगा|
अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया|और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है |अब होने वाला एक ही काम है जो आग(जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी|आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी|अब हमेशा याद रखें खाना पचने पर हमारे पेट मे दो ही क्रिया होती है |एक क्रिया है जिसको हम कहते हे Digation और दूसरी है fermentation|फर्मेंटेशन का मतलब है सडना और डायजेशन का मतलब हे पचना|
आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा,खाना पचेगा तो उसका रस बनेगा|जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा|ये तभी होगा जब खाना पचेगा|
अब ध्यान से पढ़े इन् शब्दों को मांस की हमें जरुरत है हम सबको,मज्जा की जरुरत है ,रक्त की भी जरुरत है ,वीर्य की भी जरुरत है ,अस्थि भी चाहिए,मेद भी चाहिए|यह सब हमें चाहिए|जो नहीं चाहिए वो मल नहीं चाहिए और मूत्र नहीं चाहिए|मल और मूत्र बनेगा जरुर ! लेकिन वो हमें चाहिए नहीं तो शरीर हर दिन उसको छोड़ देगा|मल को भी छोड़ देगा और मूत्र को भी छोड़ देगा बाकि जो चाहिए शरीर उसको धारण कर लेगा|
ये तो हुई खाना पचने की बात अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..?

अगर आपने खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लिया तो जठराग्नि नहीं जलेगी,खाना नहीं पचेगा और वही खाना फिर सड़ेगा|और सड़ने के बाद उसमे जहर बनेंगे|
खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड(uric acid )|कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है ,मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ,वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो|यह यूरिक एसिड विष (जहर ) है और यह इतना खतरनाक विष है की अगर अपने इसको कन्ट्रोल नहीं किया तो ये आपके शरीर को उस स्थिति मे ले जा सकता है की आप एक कदम भी चल ना सके|आपको बिस्तर मे ही पड़े रहना पड़े पेशाब भी बिस्तर मे करनी पड़े और संडास भी बिस्तर मे ही करनी पड़े यूरिक एसिड इतना खतरनाक है |इस लिए यह इतना खराब विष हे नहीं बनना चाहिए |
और एक दूसरा उदाहरण खाना जब सड़ता है तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density lipoprotive) माने खराब कोलेस्ट्रोल(cholesterol )|जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP )हाय बीपी है आप पूछोगे कारण बताओ? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है |
इससे भी ज्यादा खतरनाक विष हे वो है VLDL(Very Low Density lipoprotive)|ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है |अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|
खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides|जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका triglycerides बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है |
तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे,कोई LDL - VLDL के नाम से कहे समज लीजिए की ये विष हे और ऐसे विष 103 है |ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है |
मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,कोई कहता हे मेराtriglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप ! की आपका खाना पच नहीं रहा है |कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है |
क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता|खाना पचने पर जो बनता है वो है मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र,अस्थि और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड,कोलेस्ट्रोल,LDL-VLDL| और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है !
पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप heart attack कहते हैं !
तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हे वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग(जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है |रसोई मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पका सकते और पेट मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं  पचा सकते|
महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है |आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं हे कोई कहता हे मैंने 100 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 200 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 300 ग्राम खाया वो कुछ महत्व का नहीं है लेकिन आपने पचाया कितना वो महत्व है |आपने 100 ग्राम खाया और 100 ग्राम पचाया बहुत अच्छा है |और अगर आपने 200 ग्राम खाया और सिर्फ 100 ग्राम पचाया वो बहुत बेकार है |आपने 300 ग्राम खाया और उसमे से 100 ग्राम भी पचा नहीं सके वो बहुत खराब है !!
खाना पच नहीं रहा तो समझ लीजिये विष निर्माण हो रहा है शरीर में ! और यही सारी बीमारियो का कारण है ! तो खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया !!
भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )
इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये !

अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ???
तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना ! अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ??
बात ऐसी है ! जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं है ! पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है ! (बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है )
पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है ! तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये !!
जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खीचने वाले पत्थर तोड़ने वाले !! उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है उनको एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए !
अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ???

तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं ! अब आप पूछेंगे ये 45 मिनट का calculation ????
बात ऐसी ही जब हम पानी पीते हैं तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है ! और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है ! तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है ! तो आप खाना खाने से 45 मिनट पहले ही पाने पिये !

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटी, Natural Herb to control blood pressure


मध्य प्रदेश के सुदूर जगंली अंचलों में बसे आदिवासी आज भी प्राकृतिक जडी-बूटियों की मदद से तमाम रोगों का इलाज करते हैं। जहां एक ओर इन आदिवासियों के पास सामान्य रोगों के उपचार के लिए आस-पास प्रकृति में पाए जाने वाले पौधे हैं, वहीं कई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल अनेक प्रकार के भयावह रोगों के इलाज के लिए भी इन आदिवासियों द्वारा किया जाता है। मध्य प्रदेश की पातालकोट घाटी और आस-पास के इलाकों में भुमका (स्थानीय पारंपरिक वैद्य) हर्बल जड़ी-बूटियों के जानकार हैं और सैकड़ों सालों से इस परंपरागत ज्ञान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनाए हुए हैं।
- आदिवासी हर्बल जानकार जटामांसी की जड़ों का काढ़ा तैयार कर निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) से ग्रस्त रोगियों को देने की सलाह देते हैं। इनके अनुसार प्रतिदिन दिन में 2 बार इस काढ़े का 3 मिली सेवन किया जाए, तो यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

- लेंडी पीपर के फल (2 ग्राम) और अश्वगंधा की जड़ों का चूर्ण (3 ग्राम) दिन में एक बार प्रात: गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से रक्तचाप नियंत्रित होता है। साधारणत: आदिवासी हर्बल जानकार निम्न रक्तचाप के रोगियों को इस फॉर्मूले को अपनाने की सलाह देते हैं।

-उच्च रक्त चाप से ग्रस्त लोगों को आदिवासी हर्बल जानकार कटहल की सब्जी, पके कटहल के फल और कटहल की पत्तियों का रस नियमित तौर पर पीने की सलाह देते हैं।

-पत्थरचूर की जड़ों का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर लेने से उच्च रक्तचाप में फायदा होता है। हर्बल जानकारों के अनुसार, इसका सेवन लगातार 2 माह तक करने से काफी फायदा होता है।
-कमल के फूलों (करीब 3) को गर्म पानी में डुबो दिया जाए और बाद में इन्हें मसल लिया जाए। इसे छानकर स्वादानुसार शक्कर मिलाकर उच्च रक्तचाप के रोगियों को प्रतिदिन सुबह दिया जाए, तो आराम मिलता है।

-सर्पगंधा की जड़ों का चूर्ण (2 ग्राम) प्रतिदिन दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ मिलाकर सेवन करने से एक माह के भीतर उच्च रक्त चाप के रोगियों पर असर दिखने लगता है

-हींग का सेवन भी उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए बढ़िया माना जाता है। आदिवासियों के अनुसार, यह खून को गाढ़ा करने में मददगार होता है और एक उद्दीपक की तरह काम करता है।

-लहसुन की कच्ची कलियां (2) प्रतिदिन सवेरे खाली पेट चबाने से भी रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

-आदिवासियों के अनुसार, प्याज हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए काफी कारगर है। प्रतिदिन कच्चे प्याज का सेवन हितकर होता है। आधुनिक शोधों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्याज में क्वेरसेटिन रसायन पाया जाता है जो कि एक एंटी-ऑक्सीडेंट फ़्लेवेनोल है, जो हृदय रोगों के नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

तेलिया कंद - एक चमत्कारिक जड़ी बूटी, Teliya kand


भारत के गौरव्मान इतिहास को कोन नहीं जानता,यह तो विश्व व्यापी है  की भारत एक ऋषि मुनियों का देश रहा है और सभी क्षेत्रों जैसे विज्ञानं गणित आयुर्वेद में बहुत पहले से सभी दुसरे देशों से आगे है| भारत में प्राचीन काल में ऐसे बहुत सी खोज हो चुकी थी जो की बाकी देशों ने कई सदियों बाद की| भारत शुरू से ही सोने की चिड़िया कहलाता रहा है जिसे न जाने कितने देश सदियों तक लूटते रहे लेकिन फिर भी इसका खजाना खाली ना कर पाए|

भारत के सोने की चिड़िया होने और यहाँ पर सोना बनाये जाने के बारे में हो सकता है कुछ जोड़ हो|
भारत देश में सेंकडों ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी आखों के सामने जड़ी बूटियों से पारा, ताम्बा, जस्ता, तथा चांदी से सोना बनते देखा है तथा आज भी देश में हजारों लोग इस रसायन क्रिया में लगे हुए हैं| अकेले बूंदी जिले (राज.) में ही सेंकडों लोग इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं| पूर्व में बूंदी के राजा हाडा प्रतिदिन क्विन्त्लों में चांदी का दान किया करते थे जो की मान्यताओं के अनुसार बुन्टियों के माध्यम से ही तैयार की जाती थी| इस पूरी प्रक्रिया में लोग पारे को ठोस रूप में बदलने की कोशिश करते हैं तथा गंधक के तेल से पारे का एक एलेक्ट्रोन कम हो जाता है तथा वो गंधक पारे को पीला रंग दे देता है|
2Hg+ S = Hg2S (-2e ) ( सोना)

देश के हजारों लोग मानते हैं की देश के कॉर्पोरेट जगत के बड़े बड़े उद्योगपतियों ने इन्ही जड़ी बूटियों के माध्यम से तथा साधुओं के सहयोग से टनों सोना तैयार किया है|

सोने के निर्माण में तेलिया कंद जड़ी बूटी का बहुत बड़ा योगदान है इसलिए पहले तेलिया कंद के बारे में जान लेते हैं|
तेलिया कंद एक चमत्कारी जड़ी बूटी है| देश विदेश के लोगों की रूचि को देखते हुए में तेलिया कंद के बारे में अपनी राय दे रहा हूँ|

तेलिया कंद एक चमत्कारिक पोधा है| जिसका सबसे पहला गुण परिपक्वता की स्थिति में जेहरीले से जेहरिले सांप से काटे हुए इंसान का जीवन बचा सकता है|
दूसरा ये पारे को सोने में बदल सकता है|

तेलिया कंद का पोधा 12 वर्ष उपरांत अपने गुण दिखता है| तेलिया कंद male और female 2 प्रकार का होता है|
इसके चमत्कारी गुण सिर्फ male में ही होते है| इसके male कंद में सुई चुभोने पर इसके तेजाबी असर से
वो गलकर निचे गिर जाती है| पहचान स्वरुप जबकि female जड़ी बूटी में ऐसा नहीं होता|

इसका कंद शलजम जैसा रंग आकृति लिए हुए होता है तथा पोधा सर्पगंधा से मिलती जुलती पत्ती जैसा
होता है| इसका पोधा वर्षा ऋतू में फूटता है और वर्षा ऋतू ख़तम होने के बाद ख़तम हो जाता है|
जबकि इसका कंद जमीन में ही सुरक्षित रह जाता है| इस तरह से लगातार हर मौसम में ऐसा ही होता है|
और ऐसा 12 वर्षों में लगातार होने के बाद इसमें चमत्कारिक गुण आते हैं| इसके पोधे के आसपास की जमीन का क्षेत्र
तेलिय हो जाता है तथा उस क्षेत्र में आने वाले छोटे मोटे कीड़े मकोड़े उसके तेलिये असर से मर जाते हैं|

हम लोगों ने पारस पत्थर के बारे में तो सुना ही होगा| पारस पत्थर पारे का ठोस रूप होता है जो प्रकर्ति में गंधक के साथ मिलकर उच्च दाब और उच्च ताप की
परिस्थितिओं में बनता है| उसी उच्च दाब और उच्च ताप की परिस्थितिओं में तेलिया कंद पारे को ठोस रूप में बदलने में सहायक होता है|

जैसा की आयुर्वेदिक के हिसाब से पारा शिवजी का रूप है और गंधक पार्वती का रूप है| उसी तर्ज पर पारा   
           
[hg,80] + गंधक (sulphar) ----> उत्प्रेरक ( तेलिया कंद )

                  तेलिया कंद
Hg + S =============> gold
                  उत्प्ररेक


पारे को गंधक के तेल में घोटकर उसमे तेलिया कंद मिलाकर बंद crucible में गरम करते हैं| इस क्रिया में
पारे का 1 अणु गंधक खा जाता है| गंधक पारे में अपना पीला रंग देता है| तेलिया कंद पारे को उड़ने नहीं देता
तथा पारा मजबूर होकर ठोस रूप में बदल जाता है और वो सोना बन जाता है|


ये बूटी कहाँ मिलती है| हमारे knowledge के हिसाब से ये बूटी भारत के कई जंगलों में पायी जाती है| 1982 तक भीलों का डेरा mount abu में बालू भील से देश के सभी क्षेत्र के लोग ये बूटी खरीद के
ले जाते थे| बालू भील का देहांत हो चूका है तथा उसके बच्चे इसकी अधिक जानकारी नहीं रखते|

इस बूटी का चमत्कार करते हुए अंतिम बार बूंदी में बाबा गंगादास के आश्रम 1982 में देखा गया था| आज भी देश में हजारों लोग खासकर काल्बेलिये और साधू इसके चमत्कारिक गुण का उपयोग करते हैं|

तेलिया कंद की जगह देश में अन्य चमत्कारिक बूटियां भी काम में ली जाती हैं जैसे रुद्रबंती, अंकोल का तेल, तीन धार की हाद्जोद इतियादी|

आज के व्यज्ञानिक युग में पारे और गंधक को मिलाकर अन्य जड़ी बुटिओं को इस्तेमाल करके भी व्यग्यानिकों को इसपर काम करना चाहिए| क्यूंकि पारे का 1 एलेक्ट्रोन कम होते ही और गंधक में जाते ही वो पारा ठोस रूप में आके सोने में बदल सकता है| ऐसे कोई भी जडीबुटी जो पारे को गरम करने पर उड़ने से रोक सकती है और गंधक के तेल के साथ क्रिया करने पर पारे को सोने में बदल सकती है|

आंखों को आकर्षक बनाने के 12 मेकअप टिप्‍स


1.कभी भी अपनी आंखों के रंग के समान रंग का आईशैडो न लगाएं। यह फबेगा नहीं।

2.भूरे रंग का आईशैडो लगाने से बचें, इससे आपकी आंखों में थकान नजर आने लगती है जो देखने में अच्छा नहीं लगता है।

3.डार्क मेकअप करने से आप आंखों में शाइन आती है लेकिन उसमें सिल्वर या गोल्ड शेड का टच देने से उसमें ग्लो आ जाता है।

4.पलकों पर लाइट कलर का इस्तेमाल करें। यह आंखों को आकर्षित बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।

5.चेहरे को सॉफ्ट और स्मोकी लुक दें, इससे आपकी आंखे अपने आप आकर्षित दिखेगी।

6.आंखों के मेकअप को हटाने के लिए थोड़ा सा नारियल तेल इस्तेमाल करें। यह प्रभावी और अच्छा होता है।

7.आंखों के नीचे सदैव आईक्रीम का उपयोग करें, पलकों के ऊपर भी इसी क्रीम का उपयोग करें। इससे आपकी आंखों में नयापन आएगा।

8.अगर आप चाहते हैं कि आपकी आंखें चमकदार और आकर्षक दिखें, तो ब्लू आईलाईनर का इस्तेमाल करें। आप इसकी जगह नेवी ब्लू कलर का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।

9.अगर आपकी आंखों के नीचे डार्क सर्कल हो गए हैं तो कंसीलर का इस्तेमाल जरूर करें। कंसीलर के इस्तेमाल के बाद एक कोट फाउंडेशन का भी लगाएं।

10.अपनी पलकों पर फ्लेश कलर आईलाइनर का उपयोग करें। इससे आंखें बड़ी और ब्राइटर दिखती हैं।

11.आंखों पर मस्कारा इस्तेमाल करें। इसके लिए सही ब्रश का उपयोग करें और मस्कारा को सही तरीके से सूखा लें और एक बार फिर से कोट करें,

12.अपनी आंखों के भीतरी किनारों पर कभी भी आईलाइनर का इस्तेमाल न करें। इससे आपकी आंखें छोटी लग सकती हैं। ये सभी 12 टिप्स आंखों को सुंदर और आकर्षित बनाते है।

कहीं आप भी मच्छर भगाने के नाम पर अपने बच्चो को जहर तो नहीं दे रहे ?



मित्रो मच्छर भगाने के लिए आप अक्सर घर मे अलग अलग दवाएं इस्तेमाल करते हैं ! कोई तो liquid form मे होती हैं ! और कोई कोई coil के रूप मे और कोई छोटी टिकिया के रूप मे !! और all out ,good night, baygon, hit जैसे अलग-अलग नामो से बिकती है ! इन सबमे जो कैमिकल इस्तेमाल किया जाता है ! वो डी एथलीन है,मेलफो क्वीन है और फोस्टीन है !! ये तीन खतरनाक कैमिकल है ! और ये यूरोप मे अन्य 56 देशो मे पिछले 20 -20 साल बैन है ! और हम लोग घर मे छोटे-छोटे बच्चो के ऊपर ये लगाकर छोड़ देते हैं ! 2-3 महीने का बच्चा सो रहा होता है ! और साथ मे ये जहर जल रहा होता है !! TV विज्ञापनो ने आम व्यक्ति का दिमाग पूरा खराब कर दिया है ! वैज्ञानिको का कहना है ये मच्छर मारने वाली दवाए कई कोई बार तो आदमी को ही मार देती हैं !! इनमे से निकलने वाली सुगंध मे धीमा जहर है जो धीरे – धीरे शरीर मे जाता रहता है !!और कोई बार आपने भी महसूस किया होगा इसे सुघने से गले मे हल्की-हल्की जलन होने लगती है !


ये जो तीन खतरनाक कैमिकल डी एथलीन है मेलफो क्वीन है और फोस्टीन है ! इन पर कंट्रोल विदेशी कंपनियो का है ! जो आयात कर यहाँ लाकर बेच रहे है ! और कुछ स्वदेशी कंपनिया भी इनके साथ इस व्यपार मे शामिल है ! और इन कंपनियो के द्वारा बनाई गई coil मे से जो धुआँ निकलता है वो भी बहुत अधिक खतरनाक है अभी एक दो वर्ष पहले की रिपोर्ट मे बताया गया एक coil से 100 सिगरेट जितना धुआँ निकलता है सोचिए ! ,मच्छर भगाना आपको आपके परिवार को कितना महंगा पर सकता है !

तो आप से निवेदन है कभी भी इसका इस्तेमाल न करे !! आप कहेंगे फिर मच्छर कैसे भगाये ?? सबसे आसान उपाय है ! आप मच्छरदानी का प्रयोग करे ! सस्ती है ! स्वदेशी है ! पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण सब जगह उपलब्ध है ! और आज कल तो अलग अलग तरह की मिल रही है ! एक गोल प्रकार की है ! एक ऊपर ओढ़ कर सोने जैसी भी है !!

और इससे भी एक बढ़िया उपाय है ! नीम एक तेल बाजार से ले आए ! और उसको दीपक मे डाल कर बत्ती बना कर जला दे ! जबतक दीपक जलेगा ! एक भी मच्छर आस पास नहीं फड़केगा !! एक लीटर नीम का तेल 2 से 3 महीने चल जाता है !! और सबसे बढ़िया एक और काम आप कर सकते है ! गाय के गोबर से बनी दूप या अगरबत्ती ले ! उसको जलाए सब मच्छर भाग जाएँगे ! आजकल काफी गौशाला वाले गोबर से बनी दूप अगरबत्ती आदि बना रहे ! आसानी से आपको उपलब्ध हो जाएगी !

1200 रूपये लीटर जहर खरीदने से अच्छा है 40 रूपये मे गौ माता के गोबर से बनी हर्बल coil खरीदे !
पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !!!

घर पर बनाएं कोई भी नशा छुड़ाने की दवा


किसी भी चीज़ की अधिकता हमारा नुकसान ही करती है, फिर चाहे वह मानसिक हो या शारीरिक नुकसान। नशा एक ऐसी चीज है जिसे यदि जरूरत से अधिक लिया जाए तो यह हमारे शरीर को अंदर से खोखला करने लगती है। वैसे सीमित मात्रा में नशा करने के भी नुकसान हैं, किंतु जैसे ही सीमा बढ़ा दी जाए इसके नकारात्मक प्रभाव कई गुणा बढ़ जाते हैं।

जब तक लोगों को इसके बुरे होने की बात समझ आने लगती है तब तक काफी देर हो चुकी होती है, शरीर विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाता है। लेकिन अगर समय से इलाज कर लिया जाए तो बचाव किया जा सकता है।

आज हम आपको नशा छोड़ने से संबंधित एक अचूक उपाय बताने जा रहे हैं। यह एक प्रकार की दवा है जो हर तरह का नशा छुड़ाने में सहायक सिद्ध होती है। नशा चाहे कोई भी – शराब, गुटखा, तम्बाकू आदि, किसी भी तरह के नशे से छुटकारा पाया जा सकता है।

इस दवा को तैयार करने के लिए सबसे पहले अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े काट लें। अब इन पर सेंधा नमक डालें और साथ ही नीम्बू निचोड़ दें।

अंत में टुकड़ों को धूप में सूखने के लिए रख दें। जब टुकड़े सूख जाएं तो इन्हें एक डिब्बे में रख लें। लीजिए बन गई नशा छुड़ाने की दवा ।

अब जब भी किसी नशे की लत लगे तो ये टुकड़ा निकालें और चूसते रहें। ये अदरक मुंह में घुलती नहीं है और इसे आप सुबह से शाम तक मुंह में रख सकते हैं, यकीन मानिए कि किसी दूसरे नशे को करने का मन भी नहीं करेगा।

इसके पीछे एक ठोस कारण है… 
दरअसल नशा युक्त पदार्थों में भारी मात्रा में सल्फर पाया जाता है और अदरक से बनाई गई यह दवा सल्फर युक्त होती है। इसलिए जैसे ही शरीर को सल्फर की मात्रा मिल जाएगी, किसी अन्य नशे को करने का मन नहीं करेगा।

इस तरह यदि एक बार नशे से मन उठ गया तो यह बुरी आदत हमेशा के लिए छूट जाएगी। इस पोस्ट को अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और अपने राज्य और देश को नशामुक्त बनाएं।

चुटकी बजाते सेकण्ड्स में ज़ुकाम हो जायेगा छू मंतर।

जुकाम कैसा भी हो, ये प्रयोग ऐसा है के इसको करते ही ऐसे असर आएगा जैसे कोई जादू. और अगर आपको अक्सर ही ज़ुकाम रहता हैं और आप ज़ुकाम की दवा खा खा कर परेशान हो गए हैं तब तो आपके लिए ये जानकारी बेहद महत्वपूर्ण हैं। आप इस घरेलु नुस्खे से चुटकी बजाते ही जुकाम से आराम पा सकते हैं। आइये जाने इसके बारे में।


जुकाम को दूर भगाने की चमत्कारिक औषिधि आपकी रसोई में ही मौजूद हैं। ये हैं रोज़ाना भोजन में इस्तेमाल होने वाला एक छोटा सा मसाला – जीरा। जी हाँ जीरा।

इस छोटे से जीरे में न सिर्फ ज़ुकाम और सिर दर्द भगाने के गुण हैं – यह फंगस और बैक्टीरिया से भी लड़ता है – जीरा इन्फेक्शन्स से भी बचाता है और इससे आपका इम्यून सिस्टम भी स्ट्रॉन्ग रहता है। जीरे में विटामिन ए और विटामिन सी भी हैं, ये सर्दी – ज़ुकाम से बचाते हैं।

जाने ज़ुकाम होने पर कैसे करे जीरे का इस्तेमाल :-
ज़ुकाम होने पर आप एक चम्मच जीरा कच्चा ही धीरे धीरे चबा चबा कर खाए। आपको तुरंत आराम मिल जायेगा। ज़ुकाम होने पर दिन में 3-4 बार खा सकते हैं। इसके साथ आप जीरा चाय भी पी सकते हैं।

जीरा चाय
दो कप पानी में एक चम्मच जीरा डालकर उबालें – जब पानी उबल जाए तो उसमें पिसी हुई अदरक चाय वाला आध पौन चम्मच और तुलसी की 8 – 10 पत्तीयां डालकर फिर से उबालें। इस पानी को छाने और फिर इसे धीरे – धीरे पिएं। जीरा डाल कर पानी की गर्म स्टीम भी ली जा सकती हैं।

जीरा स्टीम
पानी में जीरा उबालकर स्टीम भी ले सकते हैं – इसमें थोड़ी लौंग मिला लें !इससे आपकी बंद नाक खुल जाएगी और ज़ुकाम से राहत मिलेगी। ध्यान रहे कि स्टीम लेने के बाद थोड़ी देर अपना सिर और छाती चादर से ज़रूर ढक लें। अगर स्टीम लेने के बाद बाहर गए व ठंड लग गई – तो चेस्ट कन्जेशन के चांसेस होते हैं।

अगर आपको ज़ुकाम के साथ ठंड भी लग रही है – तो रात में गर्म दूध में थोड़ी हल्दी डालकर पिएं। इससे आपको ज़ुकाम के साथ – साथ खांसी से भी राहत मिलेगी। हल्दी के लिए ज़्यादा जानकारी के लिए आप हमारी ये पोस्ट पढ़ सकते हैं। [हल्दी वाले दूध पीने के फायदे]

जब बच्चा जिद्दी और झूठ बोले क्या उपाय करे


बच्चे जिस टेबल पर पढ़ाई करता हैं उस टेबल पर पर चांदी की कटोरी में जल भरकर रख दे , या अगर चांदी की कटोरी नहीं है तो किसी स्वच्छ बर्तन में पानी भरकर उसमें चांदी का एक टुकड़ा या चांदी का एक सिक्का दाल दे , बच्चे की एकाग्रता बढ़ेगी , उसे बैचैनी से शान्ति मिलेगी ।
यदि माता पिता को अगर इस चीज का पता चलता ही की बच्चा झूठ बोल रहा है तो उसके सिरहाने धतूरे की जड़ को चांदी के तार में लपेटकर रख दे ।

आवला और ब्राम्ही का सेवन बच्चे को करवाये इससे बच्चे का आत्मबल कमजोर नहीं होगा।
अगर बच्चा गलत आदत और संगत के कारण झूठ बोल रहा है तो लाल या काले धागे में यह बात सोचते हुए की " मै मेरे बच्चे को झूठ बोलने से बचाना चाहती/चाहता हूँ" 11 गांठे लगा ले और बच्चे के गले में पहन दे ।

यदि कोई बच्चा जरूरत से ज्यादा जिद करे व घर में उछल कूद के साथ कीमती सामानों की तोड़ फोड़ करने पर उतारू रहे तो चांदी का चंद्रमा बनवाकर उसे पूर्णिमा की रात्रि में शुद्ध कच्चा दूध या गंगा जल में डूबाकर ¬ सों सोमाय नमः का एक माला जपकर आकाश के चंद्रमा को दिखाते हुए बच्चे के गले में पहना दें। यदि नजर लगती हो तो काले धागे में भी पहना सकते हैं। वैसे सामान्यतः सफेद धागा में पहनाएं, बच्चे का जिद्दीपन दूर हो जाएगा।

बच्चा जिद्दी हो तो इसे छत के पंखे के पंखों पर लगा दे ताकि पंखा चलने पर मोर के पंखो की भी हवा बच्चे को लगे धीरे-धीरे हठ व जिद्द कम होती जायेगी.
बच्चे को मस्तक पर केसर का टीका या हल्दी का टीका लगाना भी शुभ होता हैं, इससे बच्चे को अनुशासन आयेगा ।
घर मे पढ़ाई के कक्ष मै माँ सरस्वती की एक मूर्ति या फोटो अवश्य लगावे,और बच्चे से वँहा एक दीपक रोज जलवाए ।

सुबह उठते ही बच्चे को अपने धर्म अनुसार गायत्री मन्त्र , नवकार मन्त्र आदि का पूर्व दिशा की और मुख करके हाथो को देखकर बोलने की आदत
नियमित रूप से सूर्य देव को ताम्बे के लौटे से जल अर्पित करने से बच्चे का मनोबल बढ़ेगा ,और आँखों की रौशनी भी बढ़ेगी ।
हर पूर्णिमा को चांदी के बर्तन से चन्द्रमा को कच्चे दूध का अर्घ्य देने से बच्चे का मन शांत रहेगा और क्रोध एवम् जिद मे कमी आयगी ।

जिन लोगो या बच्चों का मंगल राहु केतु या शनि खराब होंगे वह उनको शान्ति से कभी नहीं बैठने देंगे , हमेशा बैचैनी रहेगी , जीवन में अच्छे फल नहीं लेने देंगे , निजी जीवन के साथ साथ रिश्तों में खट्टास आती रहेगी ।बच्चे मै एकाग्रता की कमी आती हैं, पढ़ाई मे मन भटकता हैं । ऐसे में गंगाजल का दान करें , चाहे मंदिर में या चाहे मित्र या परिवार में , अगर बच्चा झूठ बोलता है तो उसके हाथ से दान करवाए । साथ ही पानी का अपव्यय नही होने दे ।

शुगर को जड़ से खत्म करे दो पत्तियों के सेवन से 100% गारंटी के साथ, एक बार इस्तेमाल जरूर करे!!


आज कल मधुमेह यानी शुगर की बीमारी होना एक आम सी बात बन हैं। हर घर में किसी न किसी को शुगर की बीमारी होती है वैसे तो पुरे विश्व में शुगर तेजी से फैलते जा रही है लेकिन भारत में इसके रोगियों की संख्या दूसरे देशों की तुलना में कहीं अधिक है। शुगर के रोग में रोगी के शरीर में इंसुलिन प्राकृतिक रूप से नहीं बनता और शरीर में शुगर की मात्रा अधिक हो जाती हैं। जिसको नियंत्रण में रखने के लिए रोगी को इंसुलिन के टिके लगाने पड़ते है या इसको नियंत्रण में रखने के लिए दवाई का सेवन करना पड़ता है।

लेकिन क्या आप जानते है की आयुर्वेद में बहुत सारे ऐसे घरेलु उपाय है जिनको अपनाकर आप अपनी शुगर को जड़ से खत्म भी कर सकते है। वैसे तो बहुत सारे घरेलु उपाय होते है लेकिन आज हम बात करने जा रहे है की कैसे हम आम के दो पत्तों से अपनी शुगर को जड़ से खत्म कर सकते है। जी हाँ आपने बिल्कुल सही सुना आम के पत्तो के सेवन से हम शुगर को जड़ से खत्म कर सकते है।

औषिधि बनाने की विधि और सेवन करने का तरीका –

विधि – 1
आप आम की ताजी पत्तियों को तोड़ कर धुप में छिपा ले और सूखने पर इनको पीसकर इसका पाउडर बना लें आपका घरेलु उपाय बनकर तैयार हैं। शुगर को जड़ से खत्म करने के लिए सुबह खाली पेट एक चम्मच इस पाउडर का सेवन पानी के साथ करें। ऐसा करने से आपका शुगर बहुत ही जल्दी समाप्त हो जाता है।

विधि – 2
अगर आप किसी कारण पाउडर का सेवन नहीं कर सकते तो आप आम की ताजा पत्तियों को रात में एक गिलास पानी में भिगोकर रखदे। सुबह उठकर इसको अच्छे से उबाल कर इसको छानकर इसका सेवन सुबह खाली पेट करें। ऐसा करने से तेजी से शुगर नियंत्रण में हो जाता है और कुछ ही दिनों में आपका शुगर बिल्कुल खत्म हो जाता हैं।

अगर कोई भी शुगर का रोगी इन दोनों उपाय में से किसी भी एक को अपनाता है तो कंट्रोल हो जाती है।

26 इंच कमर चाहिए, तो हर रोज ये 5 चीजें खाइए

1 कसूरी मेथी - पेट के इंफेक्शन से बचाए
जिस महिला को ताउम्र पेट के इंफेक्शन से बच के रहना है उसे हर रोज कसूरी मेथी का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना कसूरी मेथी का सेवन करने से हार्ट, गैस्ट्रिक और आंतों की समस्‍याएं भी नहीं होती है। कसूरी मेथी खाने से एनीमिया की बीमारी में भी लाभ मिलता है। ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं के लिए कसूरी मेथी वरदान है। ये ब्रेस्ट में दूध को बढ़ाने में मदद करता है।

2 अलसी - हृदय रोगों से रक्षा करे
घर और ऑफिस के काम के बीच तालमेल बैठाने के दौरान महिलाओं में काफी तनाव हो जाता है। जिससे महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दिल की इन बीमारियों से बचने के लिए रोज सुबह महिलाओं को खाली पेट अलसी के कुछ बीजों का सेवन करना चाहिए। इसमें उपस्थित घुलनशील फाइबर्स आपके कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने का काम करता है।

3 शहद - कब्ज दूर रखे
शहद खाने से गैस और पेट फूलने की समस्या नहीं होती है। समय पर खाना ना खाने की वजह से कई महिलाओं को कब्ज की भी समस्या होती है। ऐसे में महिला को रोज सुबह शहद में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर खानी चाहिए। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर बनती है और कब्ज की समस्या नहीं होती।

4 अजवाइन - डायबिटीज का खतरा कम करे
रसोईघर में मौजूद अजवाइन औषधीय गुणों का भंडार है। ये ना केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है अपितु पेट से जुड़ी कई सारी बीमारि‍यों को भी दूर रखने में मदद करता है। दिन में अगर आप एक बार किसी भी समय एक चम्मच अजवाइन खाते हैं तो ताउम्र डायबिटीज से दूर रहेंगे। अजवाइन पीरियड के दौरान होने वाले दर्द से भी राहत दिलाता है।

5 नींबू - मोटापा दूर रखे
अगर आप इन सारी चीजों को खाने की टाइमिंग याद नहीं रख पाती हैं तो दिन में खाने के बाद रोज एक ग्लास पानी में नींबू मिलाकर पिएं। इसे पीने से मसूड़ों से खून आने की समस्या कभी नहीं होगी। दांत मजबूत बनेंगे। स्कर्वी रोग नहीं होगा। मोटापा दूर रहेगा।

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घर पर बनाइए आसानी से शुद्ध देशी घी


अमूमन हम सभी बाजार से ही घी खरीदते हैं लेकिन अक्सर उसके मिलावटी होने का संदेह बना रहता है। ऐसे में अगर हम घर पर ही घी तैयार कर लें तो मिलावट का डर नहीं रह जाएगा। इसके साथ ही घर पर बने घी का स्वाद भी बहुत खास होता है।

विधि :
आप दूध तो रोज खरीदते ही होंगे। नियमित रूप से दूध की मलाई जमा करते रहें।मलाई को किसी ढक्कन वाले बर्तन में ही रखें।दूध उबालने के बाद उसकी सतह पर जमी मलाई को रोज इस बर्तन में जमा करते जाएं।इस बर्तन को बाहर नहीं, फ्रिज में ही रखें।जब एक अच्छी मात्रा में मलाई जमा हो जाए तो बर्तन को बाहर निकाल लें।मलाई को एक बड़े पैन में डालकर पिघलने के लिए छोड़ दें।धीमी आंच पर मलाई को रख दें। घी बनने में कितना वक्त लगेगा यह पूरी तरह मलाई की क्वालिटी पर निर्भर करता है।थोड़ी देर बाद आप देखेंगे कि घी, मलाई से अलग होने लगी है।इसे ठंडा होने दें। जब ये ठंडा हो जाए तो इसे एक जार में छान लें।लीजिए, आपका होम मेड घी तैयार है।

ईयर बड्स से कान साफ करना है खतरनाक, जानिए कैसे


अक्सर लोक ईयर बड्स का इस्तेमाल ईयर वैक्स को निकालने के लिए करते हैं जो कि गलत है क्योंकि ईयर वैक्स आपके कानों की सुरक्षा करता है और जरुरत होने पर वो खुद ही बाहर निकल जाता है।

क्या आप जानते हैं हम हर रोज एक गलती करते हैं और हम ये दूसरों के देखकर करते रहते हैं, जिसमें कॉटन बड्स से कान साफ करना भी है। जी हां, आपको ये सुनकर भले ही अजीब लगे लेकिन ये बात सच है कि ईयर बड्स से कान साफ करना आपके कान के लिए ठीक नहीं है और आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। अक्सर लोक ईयर बड्स का इस्तेमाल ईयर वैक्स को निकालने के लिए करते हैं जो कि गलत है क्योंकि ईयर वैक्स आपके कानों की सुरक्षा करता है और जरुरत होने पर वो खुद ही बाहर निकल जाता है। इसलिए इसके साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए, साथ ही आपको किसी भी अन्य डिवाइस से ईयर वैक्स निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
क्या होता है ईयर वैक्स-
ईयर वैक्स आपका शरीर खुद विकसित करता है और यह कान को साफ रखने और कानों की आंतरिक सुरक्षा करता है। इससे आपके कान धूल और कई हानिकारक चीजों से बच जाते हैं। यह कान के पर्दे से पहले होता है जो कि उनकी भी सुरक्षा करता है।

कई बार ईयर बड्स या किसी और चीज से कान साफ करने के चक्कर में ईयर बड्स ज्यादा अंदर चला जाता है, जो कि आपके कानों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके अंदर जाने से आपको कान में दर्द शुरू हो जाता है और कई बाद ज्यादा अंदर जाने से आपके कानों को सुनने की दिक्कत भी हो सकती है। कई ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामले में ईयर वैक्स ईयर बड्स की वजह से आगे चला जाता है। हाल ही में अमेरिकल एकेडमी ऑफ ऑटोलेरीजॉलॉजी ने एक गाइडलाइंस जारी की थी, जिसके अनुसार आपका कान साफ करने के लिए दूसरे ओब्जेक्ट को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
कैसे करें कान की सफाई
अपने कान की सफाई करने के लिए आपको अलग से किसी डिवाइस की आवश्यकता नहीं है और आप इसे सीधे साबुन, पानी से साफ कर सकते हैं। सफाई के लिए हर रोज अपने कानों को पानी से धो लें और नियमित रुप से इसकी सफाई करते रहें। इसी के साथ ही कान के बाहरी हिस्से को ज्यादा अच्छे से साफ कर लें और ईयर वैक्स को जबरदस्ती निकालने की कोशिश ना करें। अगर आपको ईयर वैक्स से संबंधित कोई दिक्कत हो रही है तो अपने डॉक्टर से सलाह लें और उससे ही वैक्स निकलवाएं।

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घर से चींटियां भगाने के आसान घरेलू उपाय

घर में चीटियों की समस्या बहुत पुरानी है, जहां मीठा होगा वहां चीटियां आना शुरू हो जाती है| चीटियां मीठे के अलावा, नमकीन के डिब्बे में, रोटी के टिफिन तक में घुस जाती है| छोटी होने के बाद भी यह बहुत परेशान कर देती है| एक चींटी से समस्या नहीं होती, कई सारी चीटियों के आने से परेशानी खड़ी हो जाती है| चीटियां एक दूसरे को संकेत और संदेशो का आदान प्रदान अपने सिर पर मौजूद एंटीना की मदद से करती है|

फेरोमोन्स एक प्रकार का केमिकल होता है , जिसकी मदद से चींटी रास्ता बना कर वह दूसरी चीटियों को रास्ता बताती है| इससे निजात पाने के लिए घरेलू उपाय कर सकते है| नींबू की खुशबू चींटियों को नापसंद होती है| नींबू के छिलके जहां होते है वहां से चीटियां चली जाती है| किचन में इस्तेमाल होने वाला तेजपान पत्ता भी चीटियों को भगाने का काम करता है|

दालचीनी और काली मिर्च भी चीटियों को भगाने के काम आती है| जहां चीटियां हो वहां दालचीनी या काली मिर्च के पावडर को छिड़क दे| सिरका और पानी को बराबर मात्रा में लेकर स्प्रे बना ले, जहां-जहां चीटियां हो वहां स्प्रे कर दे या फिर पोंछा लगा दे| इसे चीटियां नहीं आएगी|

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अगर आप प्लास्टिक की बोतल से पानी पीते हैं , तो एक बार अवश्य पढ़ ले


हर बीमारी का एक ही इलाज है पानी. पानी बॉडी के हर टॉक्सिंस को बाहर निकाल देता है. पहले के समय में लोग तांबे के जग या लोटे में पानी पीते थे और इसी वजह से उनके शरीर से हर तरह की बीमारियां कोसों दूर रहती थी. तांबे में मौजूद तत्व मानव शरीर को अंदर से सही रखता है. पर क्या आप जानते हैं कि पानी पीना का सही तरीका भी होता है।

कहा भी जाता है कि पानी हमेशा बैठ कर ही पीना चाहिए. चाहे आप कितने भी व्यस्त क्यों न हों, पानी पीने के लिए 2 मिनट तो बैठ ही जाना चाहिए. खडे़ होकर पानी पीने से इसका सीधा असर घुटनों पर पड़ता है।

बदलते जमाने के अनुसार आजकल तो सभी बोतल से ही पानी पीना पसंद करते हैं, और वो भी प्लास्टिक की बोतल से. पर वो ये नहीं जानते कि ऐसा करने से वो कई बीमारियों को अपने अंदर इकट्ठा कर रहे हैं।

बोतल से पानी पीने के क्या हैं नुकसान
प्लास्टिक के बोतल से पानी पीना कैंसर की वजह हो सकता है।प्लास्टिक की बोतल जब धूप में गर्म होती है तब प्लास्टिक में मौजूद केमिकल का रिसाव शुरू हो जाता है और यह पानी में घुलकर हमारे शरीर को नुकसान पहुंचता है।

बोतल से पानी पीने से इंसान की स्मरण शक्ति पर बुरा असर पड़ता है।
बोतल को बनाने के लिए बाइसफेनोल ए का प्रयोग किया जाता है जिसका पेट पर भी बुरा असर पड़ता है. पाचन क्रिया प्रभावित होती है और इससे कब्‍ज और गैस की समस्‍या भी हो सकती है।

आज छोडे प्लास्टिक बोतल बाल्टी जग बर्तन का रखा पानी पीना स्वास्थ के लिये घातक प्लास्टिक सब शेयर करे यह पोस्ट पता सके ।

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आधे घंटे में ब्रेन मेमोरी इम्प्रूव करिये

मेमोरी ट्रेनिंग से पहले जो बात मुझे जानकारी में आई थी वो स्पीड रीडिंग थी। ये बहुत ही सामान्य सी बात है कि अगर हम अपनी वर्तमान पढ़ने और समझने की स्पीड को दो गुणा कर दे तो हमारा दिमाग 4 गुणा तेजी से काम करने लगेगा । तो पढ़ने की स्पीड को 2 गुणा बढ़ाकर आप ये शक्ति बढा सकते हैं। आज के मेमोरी ट्रेनिंग वर्कशॉप में ये अभ्यास करेंगे। अभी बस में हुन और हो सकता है रात को क्लास के समय भी बस में रहूँ। टैब तक ये पोस्ट पढ़िए और  प्रैक्टिस करिये।

अभी यूरोप और अमेरिकन देशों में इसपर काफी रिसर्च हुआ है कि पढ़ने की स्पीड कैसे तेजी के साथ बढ़ा सकते हैं। कई सॉफ्टवेयर और एप्प भी बनाये गए हैं। कई ट्रेनिंग स्कूल भी खोले गए है। मैने के एप्प और महंगे सॉफ्टवेयर से प्रैक्टिस की और देखा कि क्या परिणाम आते हैं। अंत मे उन सभी को और उनसे उत्पन होने वाली समस्या को दूर करने के लिए कुछ एक्सरसाइज डेवलप किया। ये आसान है सस्ते है। सस्ता मतलब खर्च तो आता ही नही है। वैसे सबसे सस्ते सॉफ्टवेयर का मूल्य भी आपको 120 डॉलर या 7000 रुपये से ज्यादा है। उस से अच्छे परिणाम आपको मेरे 3 अभ्यास से मिल जाएंगे।
पहला है nk writing
दूसरा है eye fixation
तीसरा है mental dictation

आप सभी को nk writing  और mental dictation के बारे में जानकारी मिल चुकी है इस पोस्ट में मेरे सबसे भरोसेमंद और पुराने तकनीक eye fixation के बारे में जानिए । इसको सबसे पहले राज बापना की किताबो में पढ़ा था । मेरे कई विद्यार्थी इस तकनीक का प्रयोग करके अपने पढ़ने और समझने की स्पीड को आधे घंटे में ही कई गुणा बढ़ा चुके है।

Eye फिक्सेशन

इसमे आपको जरूरत होगी पेन या पेंसिल की पढ़ने के लिए एक न्यूज़पेपर की एक टाइमर की।

स्टेप 1
सबसे पहले अपनी मौजूदा पढ़ने की स्पीड नापिये। घड़ी या मोबाइल में 1 मिनट का टाइमर लगाइये।
किसी दोस्त की मदद ले सकते है। टाइमर स्टार्ट होते ही पेपर या जो भी आपके पास पढ़ने के लिए है उसे पढ़िए। और जब एक मिनट हो जाये तो रुक जाइये। इस एक मिनट में आपने जितने शब्द पढ़े हैं उनको गिनिए। ये शब्द की संख्या ही आपकी स्पीड हुई। मान लीजिए कि आपने 320 शब्द पढ़े हैं इस एक मिनट में तो आपकी पढ़ने की स्पीड 320 शब्द प्रति मिनट (wpm) हैं। अलग अलग विषय और भाषा के अनुसार ये स्पीड में अंतर होगा। पर फिलहाल इस प्रैक्टिस में ये आपकी स्पीड है।

स्टेप 2
अब आपको एक पेज पढ़ना है। पर कुछ नियम है।

बोलकर नही पढ़ें। मन मे ही पढ़ें।
जीभ को दाँत के बीच मे दबाकर रखना है पढ़ने के दौरान।
बच्चे जिस तरह पढ़ते हैं अँगुली लाइन पर रखकर उसी तरह आपको पेन या अंगुली पेज पर रखकर पढ़ना है।एक लाइन पढियेगा तब ही अंगुली उठानी है।लाइन के बीच मे अंगुली  उठनी नही चाहिए।

इस तरह पूरा पेज पढ़िए।
स्टेप 3
आब आपको इसी पेज को 4 बार फिर से पढ़ना है पर उल्टा  पेज करके पढ़ना है।
पेज को ऐसे रखिये की नीचे वाला हिस्सा ऊपर और ऊपर वाला हिस्सा नीचे की ओर हो जाये।
अगर w लिखा है तो आपको अब वो m दिखेगा ।
इसके पहले स्टेप में आप जैसे पढ़ रहे थे उसी तरह पढेंगे पर पेज उल्टा रहेगा।
आप उसी पेज को पढेंगे जिसे इसके पहले पढ़ा था पर 4 बार उल्टा कर के पढ़ना है।सभी नियम पहले जैसे ही हैं।
आपको जल्दी जल्दी पढ़ना है जैसे कि आपको हड़बड़ी है और कहीं जाना है। अगर किसी शब्द को आप हड़बड़ी में नही समझ पाए उसपर अटकिये नही आगे बढ़ जाये।

स्टेप 4
अब आपको एक बार फिर से पेज सीधा रखकर पढ़ना है। तेजी के साथ। ये अंतिम बार आप पढ़ रहे हैं। स्टेप 2 के नियम ही रहेंगे हमेसा। स्टेप 4 और स्टेप 2 समान है। कोई भी अंतर नही हैं। पर इस बार एक पेज पढलेने के बाद आपको रुकना नही है। इस तरह ही आपको लगातार 5 मिनट तक पढ़ते जाना है। नए पेज लीजिये। पर 5 मिनट पढ़िए। इन 5 मिनट में जितना ज्याद हो सके उतना पढ़िए।

स्टेप 5
स्टेप 1 की तरह स्पीड चेक करना है। आपको अपना नया स्पीड को wpm में चेक करना है। आपकी स्पीड बढ़ी हुई होगी।

प्रातिदिन एक बार ये अभ्यास करिये। nk writing और मेन्टल डिक्टेशन भी करिये ।ये 3 साथ मे करके आप अपनी ब्रैंन पावर और मेमोरी को कई गुणा शार्प कर सकते हैं।

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हस्तमैथुन का दुष्परिणाम


हस्तमैथुन के दुष्परिणाम बहुत ही ज्यादा है यो आप को बाद में मालूम पड़ते है।यो भी इस बुरी आदत से पीड़त है,पहले तो वोह इस आदत को छोड़ दे और औरो को भी इस आनंददायक बुरी आदत के दुष्परिणामो की जानकारी दे।यो इस बुरी आदत से छुटकारा पाना चाहते है और अपनी खोई हुई शक्ति,ऊर्जा को पाना चाहते है यह योग उन के लिए बहुत ही लाभकारी है।

१. मकरध्वज वटी एक गोली + मन्मथ रस एक गोली + त्रिबंग भस्म १२५ मिग्रा. इन औषधियों की एक खुराक बना लें व दिन में इस तरह की तीन खुराक दूध के साथ लीजिए।

२. पुष्पधन्वा रस एक गोली दिन में दो बार शहद से लीजिये।
ध्यान रखें कि कब्जियत न रहे यदि कब्ज हो तो आवश्यकतानुसार त्रिफला चूर्ण ले लिया करें।

शरीर के संकेतो को अनदेखा ना करें। हो सकता है बीमारी


हमारा शरीर खुद एक डॉक्टर होता हैं। हर आने वाली बीमारी या शरीर में होने वाले परिवर्तन को वो खुद बता देता हैं लेकिन हम शरीर के इन संकेतों को अनदेखा कर देते हैं। अगर हम अपने शरीर के इन संकेतों को वक्त रहते समझ जाएं तो बहुत सी बीमारियों का सही समय पर इलाज करा सकते हैं। जैसे कुछ के बारे में मैं यहाँ जानकारी दे रही हूँ-

• जीभ पर सफेद या भूरे रंग का मैल जमना पेट की खराबी को बताता है।

• निमोनिया, प्लूरिसी आदि रोग में नाक के नथुने तेजी से फड़कते हैं।

• अधिक थकावट या पुराने कब्ज में आखों के नीचे कालापन आ जाता है।

• कमजोरी, खून की कमी, ल्यूकोरिया (श्वेत-प्रदर) आदि में आंखों के चारों तरफ कालापन आ जाता है।
• किडनी के कार्य में रुकावट आने पर आंखों के नीचे सूजन आ जाती है।

• बुखार आने पर होठों के कोने पर सफेद छाले हो जाते हैं।

• पीरियड्स कम आने पर गालों पर झाइयां हो जाती हैं।

• फेफड़ों (lungs) में इन्फेक्शन होने पर गाल लाल हो जाते हैं।

• टायफाइड में शाम को शरीर का तापमान एक डिग्री बढ़ जाता है।

• पेट में कीड़े होने पर बच्चे सोते समय दांत किटकिटाते हैं या सोते समय बिस्तर पर यूरिन कर देते हैं।

• पेट में कीड़े होने पर बच्चों को नाक और मलद्वार में खुजली होती है।

• तिल्ली बढ़ने पर जीभ का रंग सफेद हो जाता है।

• आंतों और पेट के रोग में जीभ पर छाले या घाव हो जाते हैं।

• पेट में कीड़े होने पर चेहरे पर हल्के सफेद रंग के धब्बे हो जाते हैं।

• लो ब्लडप्रेशर और खून की कमी होने पर आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है।

• महिलाओं में यूट्रस (बच्चेदानी) में रोग होने पर हाथ की उंगलियों के पीछे कालापन आ जाता है।

• अधिक वीर्यनाश से गाल पिचक जाते है।

• पेट के रोग या किसी लंबी बीमारी में होंठ फटने लगते हैं।
• हाइपोथायरॉइडिज्म (थाइरॉइड ग्लैंड का हरमोन कम निकलना) में गले में सूजन आ जाती है।

यदि आप बड़ी बीमारी से बचना चाहते हैं तो अपने शरीर के छोटे से छोटे परिवर्तन को भी अनदेखा न करे।

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शिलाजीत के सेवन से आ सकती है आपकी जिंदगी में खुशियाँ


शिलाजीत के सेवन से आ सकती है आपकी जिंदगी में खुशियाँ 
स्वाद में शिलाजीत काफी कड़वा, कसैला, उष्ण और वीर्य पोषण करने वाला होता है। देखने में यह तारकोल की तरह बेहद काला और गाढ़ा होता है जो सूखने के बाद एकदम चमकीला रूप ले लेता है।

इसके सेवन के न केवल सेक्स पॉवर बढ़ती है वरन इसके शरीर पर कई अन्य प्रभाव भी होते हैं जिनकी सहायता से बुढापा भी दूर रहता है।

मधुमेह, स्वप्नदोष, यौन दुर्बलता, शारीरिक दुर्बलता दूर करने के लिए शिलाजीत का प्रयोग उत्तम माना जा सकता है।

शिलाजीत के प्रकार
शिलाजीत के चार प्रकार होते हैं- रजत, स्वर्ण, लौह और ताम्र। हर प्रकार की शिलाजीत के गुण व लाभ अलग-अलग हैं।

रजत शिलाजीत पित्त तथा कफ के विकारों को खत्म करता है।
स्वर्ण शिलाजीत वात और पित्तजनित बीमारियों के लिए असरदार है।
लौह तथा ताम्र शिलाजीत कफ से हुए रोगों के इलाज के लिए कारगर दवा है।
आइये जाने कैसे शिलाजीत दे सकता है आपको खुशियां

उम्र घटाए
उच्च ऊर्जा और जैव उत्पादक गुणों से भरी शीलाजित नई कोशिकाओं को दुबारा बनाती है और पुरानी कोशिकाओं को मेंटेन करती है, जिससे उम्र कम लगती है।

दिल के सेहत का भी रखता ख्याल
शिलाजीत दिल के सेहत के लिए भी अच्छा है। दिल के साथ-साथ यह रक्त चाप को भी नियंत्रित करता है।

पाचनतंत्र के लिए
शिलाजीत शरीर के पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। इसके सेवन से अपच, गैस, कब्ज और पेट के दर्द जैसी बिमारियां खत्म होती हैं।

शरीर की सूजन मिटाए
यह आपके स्‍वास्‍थ्‍य को बना सकती है। अगर आपके शरीर में दर्द, सूजन या गठिया रोग है तो, शिलाजीत को रोजाना प्रयोग करें।


ऊजा बढ़ाए
शिलजीत के सेवन से शरीर में तुरंत ही ऊर्जा आती है। इससे प्रोटीन और विटामिन ज्‍यादा मात्रा में मिलता है।

किडनी और अंत:स्राव ग्रंथि
शिलाजीत के सेवन से किडनी, पैनक्रियाज और थायराइड ग्लैंड भी सही से काम करते हैं। यह ब्लड सर्कुलेशन के लिए भी अच्छा है।

मधुमेह ठीक करे
अच्‍छी डाइट और शिलाजीत का नियमित सेवन ब्‍लड शुगर लेवल को बैलेंस कर के मधुमेह को कंट्रोल करता है।

दिमाग की शक्ति बढाए
ये तनाव , थकान को मिटा कर नर्वस सिस्टम को मज़बूत बनाती है। यह याददाश्त को तेज बनाती है और ध्‍यान को केन्‍द्रित करने में मदद करती है।

तनाव दूर करे
यह तनाव पैदा करने वाले हार्मोन को बैलेंस करती है और शरीर तथा दिमाग को शांत और स्‍वस्‍थ बनाती है।

एंटी एजिंग
शिलाजीत के सेवन से एजिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। अगर आप समय से पहले बूढ़े या थके-थके नजर आ रहे हैं तो शिलाजीत का सेवन करें। इसमें 85 फीसदी से ज्यादा मिनरल्स पाए जाते हैं जो बिमारियों को दूर भगाते हैं और रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करते हैं। यह हड्डियों में कैल्शियम बनाकर हड्डियों को मजबूत बनाती है।

पुरुष यौन शक्ति में वृद्धि
शिलाजीत पुरुष प्रजनन प्रणाली और कामेच्छा को बढ़ाती है। यह नपुंसकता और प्रीमिच्‍योर इजैक्‍यूलेशन की समस्‍या को दूर करती है।
हड्डियों की बीमारी दूर करे: यह हमारी हड्डियों में मजबूती भरती है और गठिया तथा जोड़ों आदि के दर्द से राहत दिलाती है।

रक्‍त शुद्धी
यह नसों में खून के सर्कुलेशन को बढाती है और बीमारी को दूर रखने में मदद करती है।

शिलाजीत के सेवन में बरते सावधानियां
शिलाजीत का सेवन दूध और शहद के साथ सुबह सूयोर्दय से पहले कर लेना चाहिए। इसके ठीक प्रकार पाचन के बाद अर्थात तीन-चार घंटे के बाद ही भोजन करना चाहिए।

गठिया
जो मरीज गंभीर गठिया से ग्रस्त हों उन्हें शिलाजजीत सेवन से बचना चाहिए। ऐसे मरीजों को शिलाजीत के सेवन से खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाने का खतरा रहता है।

गर्भावस्था
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली औरतों को भी इसके सेवन से परहेज करना चाहिए।

एलर्जी
कभी-कभी शिलाजीत के सेवन से एलर्जी, दिल की धड़कन तेज और उल्टी भी होती है।

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कामदेव चूर्ण - नाम ही काफी है काम शक्ति के लिए बेजोड़ चूर्ण।


कामदेव चूर्ण :- नाम ही काफी है काम शक्ति के लिए बेजोड़ चूर्ण।

सामग्री
गोखरू ,पान की जड़ ,शतावर, विदारीकंद 40- 40 ग्राम कौंच के बीज ,उटंगन के बीच ,खरैटी के बीज ,अश्वगंधा 120-120 ग्राम छोटी इलायची ,तेजपत्ता, पिपली, आमला, केसर, लाल चंदन, बालछड़, नागकेसर ,लौंग, गिलोय, तवासीर असली ,चातरजात (दालचीनी तेजपत्र नागकेसर छोटी इलायची) 5 - 5gm

कामदेव चूर्ण बनाने की विधि :--
इन सभी चीजों को लेकर पाउडर कर ले , सिंबल का काढ़ा बनाकर 21 भावना दो। फिर इसी तरह से कुशा के रस की 21 भावना दो ।(भावना का मतलब होता है जिस जड़ी बूटी की भावना देनी होती उसका रस निकाल कर यहां काढ़ा बनाकर दवाई को उस में भिगोकर रख तो जब वह सूख जाए तब एक भावना हो जाएगी) जब यह पाउडर बिल्कुल सूख जाए ,तब इसके वजन जितनी मिश्री डालकर अच्छे से मिक्स कर लो ,फिर किसी कांच के बर्तन में डाल कर रख लो।

कामदेव चूर्ण के फायदे:--
यह चूर्ण शीतल, पौष्टिक और कामोत्तेजित हैं । यह चूर्ण उन लोगों के लिए अमृत सम्मान काम करता है जिन लोगों ने बचपन में अपनी बुरी आदतों के कारण अपने वीर्य कान नाश कर लिया हो । ऐसे लोगों के लिए यह एक वरदान के समान है।कामदेव चूर्ण के सेवन से हमारे शरीर में जो अधिक गर्मी होती है वह सम्मानीय हो जाती है । जिससे हमारी कामवासना शांत हो जाती है और वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

आजकल बाजार में काम उत्तेजित दवाइयों का बहुत प्रचलन शुरू हो चुका है । सोशल मीडिया, फिल्में और सही संगत ना होने की वजह से अक्सर बच्चे छोटी उम्र में ही काम संबंधों की तरफ आकर्षित हो जाते हैं और इन दवाइयों का सेवन करना शुरू कर देते हैं । जिस वजह से उनकी इंद्रियों का पूरा विकास होने से पहले ही उनका ब्रह्मचार्य टूट जाता है । काम संबंधों  की सही समझ ना होने के कारण अब अपनी काम ऊर्जा कोई नष्ट कर बैठते हैं। उसके बाद वह अपने मन में नामर्द होने का भरम पैदा कर लेते हैं। किसी अच्छे वैद्य या डॉक्टर से सलाह मशवरा करने की बजाए । वह  so called सेक्स स्पेशलिस्ट के चक्कर में फस जाते हैं । वह उन्हें गर्म और उत्तेजित  दवाइयां दे कर  उनकी कामवासना और भी तीव्र कर देते हैं । ऐसे रोगियों के लिए कामदेव चूर्ण अमृत समान  है । जो अधिक काम वासना को शांत करता है।यह चूर्ण वीर्य को बहुत ताकतवर और मूत्र रोगों को दूर करता है । इसके सेवन से चेहरे पर निखार आ जाता है । कमजोर पड़े हुए शरीर भी तंदुरुस्त हो जाते हैं और कामदेव जैसा रूप आ जाता है।

कृपया इस्तेमाल करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ले।

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एक गिलास ड्रिंक से अपने लीवर को करिये पहले जैसा ताकतवर

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अच्छी जीवनशैली और स्वस्थ आहार ही दो ऐसी चीज़ें हैं जो जिगर (liver) को स्वस्थ रखने के लिए बेहद ज़रूरी हैं |लेकिन आज कल की भाग दौड़ की जिंदगी में हम बहुत सारी बुरी आदतों जैसे बाहर का खाना ,सही समय पर भोजन ना करना आदि के शिकार हो जाते हैं जिस से हमारे शरीर में बहुत सारे विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं|

ऐसे में हमें ज़रूरत है लिवर की सेहत का ध्यान रखने की और शरीर से विषाक्त पदार्थों को भर निकालने की |हमारे जिगर को लगातार detoxify करने की जरूरत है क्योंकि ये शरीर में detoxification, और प्रोटीन के अवशोषण का काम करता है |

आज हम आपको इसी ड्रिंक बताएँगे जो जिगर को detoxify करेगा जिगर की किसी भी बिमारी को सामने आने में बहुत वक़्त लग जाता है इस लिए ज़रूरी है के लीवर को साफ किया जाये और सवस्थ भोजन खाया जाये |जिगर के सही तरीके से काम न करने की वजह से बहुत सारी सेहत से जुडी समस्याएँ पैदा हो जाती हैं |

जिगर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करना बहुत ही आसान है , और आप इस आसान ड्रिंक के इस्तेमाल से आसानी से जिगर को साफ कर सकते हैं

ड्रिंक बनाने की सामग्री
3 निम्बू का रस
2 संतरों का रस
कुछ पुदीने के पत्ते
1 लीटर साफ पानी

ड्रिंक बनाने की विधि
पानी को किसी बर्तन में निकाल के उबलने के लिए रख दें | पुदीने के पत्ते पानी में डालें और इसे 5 मिनट तक उबालें | उबलने के बाद इसे गैस से हटा लें और ठंडा होने के लिए रख दें | ठंडा होने के बाद निम्बू और संतरे का रस मिला लें निम्बू के छिलके को भी पीस कर इस में डालें | स्वाद के लिए इसमे थोडा शहद मिला लें |

आप इसे ठंडा या गर्म जैसे भी आपको पसंद हो पी सकते हैं | ये आपके जिगर को साफ रखता है और पेट और पाचन तन्त्र के लिए भी बहुत फायदेमंद है |

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