सफेद बाल को काला करने के 5 नुस्खे balo ko kala karne ke 5 nuskhe

balo ko kala karne ke 5 nuskhe
balo ko kala karne ke 5 nuskhe

अगर आप सफेद होते बालों से परेशान हो चुके हैं तो इन. उपायों से आपके बाल काले हो सकते हैं और इनका कोई दुष्परिणाम भी नहीं होगा
उपाय जानने के लिये लेख को ध्यान से पढ़ें
कम उम्र में ही बाल सफेद होना अब आम बात हो गई है. जबकि पहले बाल सफेद होना बूढ़े होने की निशानी मानी जाती थी. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. आज के लोगों की दिनचर्या ऐसी हो गई है कि उनके खान-पान के साथ-साथ पूरा टाइम टेबल ही बदल गया है. फिर भी अगर आप अपने सफेद बाल को काल करना चाहते हो तो कुछ ऐसे उपाय हैं जिसकी मदद से अपने बाल को काला कर सकते हो

सफेद बाल को काला करने के ये 5 उपाय

1- सफेद बाल को काला करना है तो आप कच्चा पपीता ले लें और उसे पीस कर पेस्ट बना ले. अब इसे सप्ताह में दो से तीन बार अपने बालों पर लगाएं. दस से पंद्रह मिनट तक इसे बालों में ही लगे रहने दें उसके बाद केवल पानी ने धो ले. ऐसा करने पर आपके बालों का झड़ना भी बंद होगा और सफेद बाल भी धीरे-धीरे काले हो जाएंगे.

बाल काले करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

2- एलोवेरा का नाम तो सब जानते हैं. लेकिन इसकी उपयोगिता कुछ हो लोगों को पता है. बालों में एलोवेरा लगाने से बालों का झड़ना तो कम होता ही है साथ में बालों की सफेदी को भी कम करता है. बाल काला करने के लिए आप एलोवेरा जेल इस्तेमाल कर सकते हैं. या फिर एलोवेर का पौधा है तो उसके पत्ते के उपरी परत को हटा देने के बाद उसे अंदर के जेल को अपने बालों में लगाए. सफेद बाल जल्द ही काले हो जाएंगे.

बाल काले करने के आयुर्वेदिक उपाय

3- बालों के लिए आंवला का भी उपयोग किया जाता है. आंवला को मेंहदी और रीठा में मिलाकर इसको बालों पर लगाए. लगभग एक घंटे बाद बाल को पानी से धो लें. सप्ताह में दो-तीन दिन ऐसा करने से आपके सफेद बाल काले होने लगेंगे

सफेद बालों को काला करने की दवा

4 - आमतौर पर प्याज का उपयोग तो केवल खाने में ही प्रयोग किया जाता है लेकिन आपको बता दें कि प्याज का रस बालों में लगाने ने सफेद बाल भी काले होते हैं. इसको लगाने से न सिर्फ बालों की सफेदी में कमी आएगी बल्कि बालों को चमद भी देगा.

बाल काले करने का नेचुरल तरीका

5- सफेद बालों से मुक्ति पाने के लिए काली मिर्च भी कारगर उपाय है. काली मिर्च को पानी में डालकर उबाल ले और नहाते समय इसे नहाने वाले पानी में मिलाकर नहाए. कुछ ही दिनों बाद इसका असर दिखने लगेगा. सफेद बाल दिन पर दिन काले होते नजर आएंगे.

खांसी को आसानी से दूर करने का 11 नुस्खे, Ayurvedic nuskhe for cough in hindi

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज


किसी भी खांसी को आसानी से दूर करें ये 11 नुस्खे

मौसम बदलने के साथ हमारे शरीर का टेम्परेचर भी ऊपर-नीचे होता है। ठंडा-गर्म खाना या फिर किसी एलर्जी के कारण हमें खांसी की समस्या हो जाती है। खांसी होने पर शुरुआत में हम इग्नोर करते है, लेकिन जब यह आपके लिए परेशानी बढ़ा देती है, तो आप डॉक्टर के पास या दवा लेते है। ऐसे में क्यों न हमें खांसी के शुरुआत में ही घरेलू नुस्खे अपनाकर इसे जड़ से मिटा दें। तो चलिए आपको खांसी को आसानी से दूर करने के 11 नुस्खे बता रहा है, जिसे अपनाकर आप भी जल्द ठीक हो सकते हैं।

खांसी का बढ़ियां घरेलू उपचार

रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। इससे खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।
सुबह-शाम चने बराबर मात्रा में भूनी हुई फिटकरी का पाउडर लेने से भी खांसी की समस्या दूर हो जाती है।

खांसी की बेस्ट नुस्खे

शहद और कच्चे प्याज का रस समान मात्रा में लेकर मिलाएं। इसे 3 से 4 घंटे के लिए किसी अंधेरे वाले स्थान पर रख दें। बाद में इसका सेवन करें, यह खांसी की दवाई के रूप में सटीक कार्य करता है।

खांसी की बेस्ट इलाज

धनिया, जीरा और बच बराबर मात्रा लेकर मिलाएं और काढ़ा बना लें। सर्दी और खांसी से परेशान बच्चों को खाने के बाद लगभग 10 ML तक यह काढ़ा पीने के लिए दें। खांसी की समस्या दूर हो जाएगी।

लौंग को घी में सेंककर मुंह में रखने से बार-बार खांसी नहीं आती है।

खांसी का आयुर्वेदिक इलाज

लगभग 2 कप पानी मे अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े और कुछ पत्तियां इमली की डालें। इसे तब तक उबालें जब तक कि ये एक कप न रह जाए। इसमें 4 चम्मच शक्कर डालकर धीमी आंच पर कुछ देर और उबालें और फिर ठंडा होने दें। ठंडा होने पर इसमें 10 बूंद नींबू रस की डाल दें, हर तीन घंटे में इस सिरप का एक बार सेवन करने से खांसी छू-मंतर हो जाती है।
खांसी होने पर हल्दी की छोटी गांठ मुंह में रख कर चूसें। इससे जल्द आराम मिलता है।

खांसी का रामबाण इलाज

तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में रामबाण दवा की तरह काम करती है।

खांसी का आयुर्वेदिक नुस्खे

पानी में गुड़, अदरक, नींबू का रस, अजवाइन, हल्दी को बराबर की मात्रा में डालकर उबालें और फिर इसे छानकर पिएं। खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलेगा।

सूखी खांसी का बढ़ियां घरेलू उपचार

अदरक, लौंग, हींग और नमक को मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां तैयार करें। दिन में 3-4 बार एक-एक गोली चूसें। सूखी खांसी में यह असरदार है।
मुलेठी की चाय बनाकर पीने से भी खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।

घुटने के दर्द से छुटकारा पाने का सबसे सस्ता और घरेलू उपचार, ghutane ke dard ka ilaaj

ghutane ke dard ka ilaaj
ghutane ke dard ka ilaaj

मित्रों आज मैं आपको घुटने के दर्द से छुटकारा पाने का सबसे सस्ता और घरेलू उपचार बताने जा रहा हूँ जिसे मैने खुद आजमाया और आशातीत सफलता प्राप्त हुई है मेरे घुटने का दर्द ख़त्म हो गया है
आइये मित्रों जानते हैं इस उपचार के बारे में

घुटने के दर्द के लिए घरेलू उपचार

हमारी रसोई में प्रतिदिन उपयोग में आने वाले सामान से ही घुटने का दर्द ख़त्म होगा आइये जानते हैं ये सामान क्या है?
1- हल्दी, 2- चीनी , 3- चूना(पान में खाने वाला), 4- पानी
मित्रों सबसे पहले एक चम्मच पीसी हल्दी लें उसमें एक चम्मच चीनी डालें फ़िर उसमें मटर के बराबर चूना डालें अब उसमें एक चम्मच पानी डाल कर सबको मिलाएं जब तक चीनी पूरी तरह से घुल ना जाए ये एक लाल रंग का लेप बन जाएगा।

घुटने के दर्द का घरेलू उपचार

अब इस लेप को घुटने पर चारो तरफ़ से लगा कर करीब 15 मिनट सूखने दें सूखने के बाद इसपर एक कपड़े की पट्टी बाँध दें।
यह लेप कम से कम 5से 6घंटे लगा रहना चाहिये।इसलिये इसे रात में सोने से पहले लगाएं जिससे सारी रात लगा रहेगा और आपको जल्दी आराम मिलेगा।
वैसे तो दो तीन दिनों में ही आराम मिल जाएगा किंतु अगर इसे 30 दिनों तक उपयोग में लिया जाय तो आप सभी को आशातीत लाभ होगा।

ये नुस्खा मैने खुद पर आजमाया हुआ है और लाभ भी हुआ है।

इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें धन्यवाद

लिंग की नसों मे कमज़ोरी ढीलापन का आयुर्वेदिक नुस्खे, ling ki naso me kamzori

लिंग की नसों मे कमज़ोरी ढीलापन का आयुर्वेदिक नुस्खे
लिंग की नसों मे कमज़ोरी ढीलापन का आयुर्वेदिक नुस्खे

हमारे पास रोजाना 100-200 लोगों का यह सवाल होता है कि लिंग की नसों में कमज़ोरी क्यों आती है और कमज़ोरी दूर करने का सुरक्षित तरीका क्या है???
हर मर्द चाहता है कि वह अपनी साथी को भरपूर प्यार दें और उसको खुश रखें. और वह अपने साथी को खुश करने के लिए हरसंभव प्रयास करता है जो वह कर सकता है.
आज के समय में युवा लोग तनाव और खानपान की वजह से कई सेक्स बीमारियों से जूझ रहें हैं और उन सब बीमारियों में से एक है लिंग की नसों का कमजोर होना.
आज के समय करीब 50% युवा लिंग की नसों की कमज़ोरी से परेशान है और आज हम इस बीमारी के बारे में गहराई से बात करेंगे.
सबसे पहले हम बात करते हैं की लिंग की नसें कैसी होती है और क्या काम करती है और कैसे काम करती है.
एक स्वस्थ इंसान के लिंग में 50 से 60 हज़ार छोटी- छोटी नसें होती है जो बहुत ही बारिक होती है धागे जैसी.
एक इंसान के द्वारा सेक्स करने के लिए इन नसों का सही से कार्य करना बहुत ज़रूरी होता है इन नसों के सही नही होने की अवस्था में सेक्स की कल्पना करना भी असंभव है.
सेक्स के दौरान लिंग का खड़ा होना और सख़्त होना इन नसों पर ही निर्भर करता है.

लिंग की नसों मे कमज़ोरी के लक्षण

आइए जानते है की ये नसें केसे काम करती है और इनकी क्या भूमिका है
सेक्स करने के लिए जब मर्द औरत के साथ संपर्क में आता है तो उत्तेजना से टेसटेसटेरॉन हारमोन एक्टिव हो जाता है. टेसटेसटेरॉन हारमोन का कार्य है शरीर में ब्लड सर्क्युलेशन को बढ़ाना. यह हारमोन पूरे शरीर में ब्लड सर्क्युलेशन को बढ़ा देता है और जब लिंग की नसों में यह ब्लड का सर्क्युलेशन पहुँचता है तो नसें फूल जाती है और आपका लिंग भी फूल जाता है और आपके लिंग का साइज़ भी नॉर्मल साइज़ का तीन गुना हो जाता है. आपके लिंग का खड़ा होना इस बात पर निर्भर करता है कि आपके लिंग की नसों में कितना ब्लड सर्क्युलेट हो रहा है !!
(कुछ लोगों के दिमाग़ में सवाल हो रहा होगा कि लिंग का फुल साइज़ कैसा होता है ??? तो उसका जवाब यह है कि जब आपका लिंग का फुल साइज़ बनता है तो लिंग के आगे की स्किन (कैप) 1-2 इंच पिछे हट जाती है और आपका लिंग थोड़ा बाहर निकल आता है.)
इन नसों का दूसरा और सबसे ज़रूरी काम है लिंग को सख़्त करना. आप सभी लोग जानते हैं कि लिंग में कोई हड्डी नही होती. सेक्स के दौरान लिंग का सख़्त होना इस बात पर निर्भर करता है कि इन नसों में कितनी तेज़ी से ब्लड सर्क्युलेट कर रहा है. नसों में जितनी तेज़ी से ब्लड सर्क्युलेट करेगा लिंग उतना ही सख़्त बना रहेगा. सेक्स के दौरान लिंग का साइज़ और सख़्त होना आपके लिंग की नसों पर ही निर्भर करता है

आइए जानते है कि लिंग की नसें कमजोर होने का क्या कारण है?

इन नसों का कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण है हस्थ्मथुन. कुछ लोग 13-14 की उम्र से ही हस्थ्मथुन करना सुरू कर देते है. हस्थ्मथुन किस तरह आपके लिंग की नसों को कमजोर करती है??
जब हस्थ्मथुन करते है हैं तो टेसटेसटेरॉन हारमोन एक्टिव नही होता है और लिंग को हाथ से रगड़ रगड़ कर ही लिंग को उत्तेजित किया जाता है.
हाथ से रगड़ने से घर्षण की वजह से लिंग की ये छोटी छोटी नसें गरम होकर लाल हो जाती है और हस्थ्मथुन के अंत में समय वीर्य जल्दी ना निकल जाए इसलिए लिंग को हाथ से दबाते हैं. इसी समय ये गर्म हुई लाल नसें हाथ के दाब से दब जाती है, कुछ पिचक जाती है और कुछ बिल्कुल ही दब जाती है और यहीं से शुरुआत होती है आपकी कमज़ोरियों की.
इन नसों के कमजोर होने का दूसरा कारण है सोते समय लिंग को रगड़ कर तकिये से दबाना. गरम लिंग को तकिये से दबाने से भी लिंग की नसें दब जाती है और कमज़ोरी आना शुरू हो जाती है.
नसों के कमजोर होने का तीसरा कारण है सेक्स के तुरंत बाद लिंग को पानी से धोना. सेक्स के तुरंत बाद लिंग को ठंडे पानी से धोने की वजह से भी लिंग की नसें कमजोर पड़ जाती है. इसलिए कभी भी सेक्स के तुरंत बाद लिंग को ना धोयें. यदि लिंग को साफ करना ज़रूरी भी हो तो कम से कम आधे घंटे बाद करें.
नसों के कमजोर होने का चौथा कारण है ड्याबिटीज. ड्याबिटीज ज़्यादा होने से और मेडिसिन लेने की वजह से भी लिंग की नसें कमजोर हो जाती है.

आइए जानते है की ये नसें कमजोर होने के क्या क्या नुक्सान है?

•लिंग की नसें दबने की वजह से लिंग का विकास रुक जाता है क्योंकि नसें दबने की वजह से ब्लड का सर्क्युलेशन कम हो जाता है जिससे ऑक्सिजन का सर्क्युलेशन भी कम हो जाता है और लिंग का साइज़ बढ़ना रुक जाता है. लिंग बहुत छोटा सा हो जाता है और चिपका सा बेजान रहता है
लिंग की नसें दबने की वजह से सेक्स के समय लिंग का फुल साइज़ नही बनता और सेक्स का आनंद बहुत ही कम हो जाता है और कई बार सेक्स करते हुए फुल साइज़ नही बनता और सेक्स के बीच में ही लिंग बाहर निकल जाता है
लिंग की नसें दबने की वजह से ब्लड का सर्क्युलेशन बहुत ही कम हो जाता है जिससे लिंग सख़्त होना कम हो जाता है और सेक्स का फुल एंजाय नही आता. कई बार ज़्यादा कमज़ोरी आने की वजह से लिंग सख़्त होना बंद हो जाता है और लिंग खड़ा ही नही होता और napushankta आ जाती है. इसी को नामर्दी और napushankta कहा जाता है.

आइए जानते है कि हम कैसे नसों की कमज़ोरी को दूर कर सकते हैं और सेक्स को एंजाय कर सकते हैं

नसों की कमज़ोरी को दूर करने का सबसे आसान तरीका

नसों की कमज़ोरी को दूर करने का सबसे आसान तरीका है दूध और इलियाची. इसके लिए 300 Ml दूध ले और इसमे 8-10 छोटी इलायची अच्छे से कूटकर डालें और 10 मिनिट तक उबालें. उसके बाद दूध को थोड़ा ठंडा कर उसमें एक छोटा चम्मच शहद डालें और पी लें. 15 दिन में ही आपको असर आना सुरू हो जाएगा. आपको अच्छा रिज़ल्ट पाने के लिए 4-6 महीने तक यह तरीका अपनाना पड़ेगा.

लिंग की नसों मे कमज़ोरी दूर करने की आयुर्वेदिक उपाय

नसों की कमज़ोरी को दूर करने का दूसरा तरीका है सफेद मुसली. इसके लिए 300 Ml दूध ले और 05 ग्राम मुसली डाल कर 10 मिनिट तक उबालें उसके बाद दूध को थोड़ा ठंडा कर पी लें. 15 दिन में ही आपको असर आना सुरू हो जाएगा. आपको अच्छा रिज़ल्ट पाने के लिए 4-6 महीने तक यह तरीका अपनाना पड़ेगा.

लीग का ढीलापन कैसे दूर करे

नसों की कमज़ोरी को दूर करने के लिए कुछ कसरत करना भी फ़ायदेमंद रहेगा जिनके बारे में आप हमसे जानकारी ले सकते है कसरत करने से भी ब्लड का सर्क्युलेशन इंप्रूव हो जाता है और कमज़ोरी दूर होने लगती है.

लिंग की नसों मे कमज़ोरी दूर करने की आयुर्वेदिक इलाज

नसों की कमज़ोरी को दूर करने के लिए हम कुछ आयुर्वेदिक दवा भी बनाते हैं जिनके सेवन से यह कमज़ोरी दूर हो जाती है और सेक्स का आनंद ले सकते हैं

सुबह दौड़ने से अच्छा है वजन घटाने के लिये आप इन चीजों का सेवन करें, Quick weight loss in hindi

सुबह दौड़ने से अच्छा है वजन घटाने के लिये आप इन चीजों का सेवन करें, Quick weight loss in hindi
Quick weight loss in hindi


आइये जानते हैं इनके बारे में
दोस्तों आज आपको बताने वाला हूं एक ऐसे तरीके के बारे में जिसे आप बहुत ही आसानी से कुछ ही दिनों के अंदर वजन घटा सकेंगे।

2 सप्ताह 10 किलो में तेजी से वजन कम करने के लिए

मैं आज आपको बताने वाला हूं ऐसे 3 फलों के बारे में जिसको खाने से आपका वजन 1 हफ्ते या 10 दिनों के अंदर काफी आसानी से कम हो जाएगा। और आपको इन 3 फलों का सेवन नियमित रुप से करते रहना है। सबसे पहला फल जो है वह करेला है और आपको इस फल का सेवन नियमित रूप से करना है आप इसकी मात्रा दिन में एक ले सकते हैं।

एक सप्ताह में 20 किलो कम करने के लिए

और जो दूसरा फल है वह है नींबू इसका भी सेवन आप दिन में एक ही बार करें तथा नियमित रुप से करें और जो अंत में तीसरा साल आता है वह है आंवला इसका भी सेवर आप दिन में एक से दो बार ही कर सकते हैं ऐसा आपको दैनिक रूप से करना जरूरी है।और आप इसका परिणाम 1 हफ्ते के बाद देख सकेंगे कि यह कितना लाभकारी है।

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आयुर्वेद के अद्भुत, चमत्कारी दिव्य जड़ी बूटी, ayurved ke adbhut jadi buti



आज कल की भाग दौर की जिंदगी मे अव्यवस्थित खान पान , रहन सहन और दूषित वातावरण के कारण भूख मे कमी , पाचन क्रिया का कमजोर होना , गैस की प्रॉब्लम , नींद सही से नहीं आना , मानसिक टेंशन और शारीरिक थकावट के कारण लाइफ मे जोश की कमी होना I हमारे ऋषि मुनिओं के द्वारा सुझाय गए 11 चमत्कारी जड़ी बूटी आपके शरीर मे स्फूर्ति , जोश और स्टैमिना को नैचुरली बढ़ाता है I

आयुर्वेद के अद्भुत, चमत्कारी दिव्य जड़ी बूटी

शुद्ध शिलाजीत

Shuddha Shilajit

आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत की उत्पत्ति पत्थर से हुई है। गर्मी के मौसम में सूर्य की तेज गर्मी से पर्वत की चट्टानों के धातु अंश पिघल कर रिसने लगता है। इसी पदार्थ को शिलाजीत कहा जाता है। यह देखने में तारकोल की तरह काला तथा गाढ़ा होता है जो सूखने के बाद एकदम चमकीला रूप ले लेता है। आइए जानते है कि शिलाजीत के क्या-क्या फायदे हैं: A)

स्वप्नदोष की समस्या


B) मधुमेह (डायबिटीज) की समस्याC) बहुमूत्र या बार-बार मूत्र जाने की समस्या D) शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता E) दिमागी ताकत बढ़ाने के लिए F) ब्लड़प्रेशर को नॉर्मल करने में G) यह नपुंसकता खत्म करता है, और यह स्वप्न दोष को भी दूर करता है H) यह सेक्स पॉवर बढ़ाता है और यौन इच्छा में भी वृद्धि करता है. I) ऐसा नहीं है कि इसका सेवन केवल कोई बीमार व्यक्ति हीं कर सकता है, इसका सेवन एक सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति भी कर सकता है. इससे उसका शरीर मजबूत होता है और तंदुरुस्ती बढ़ती है
2 ) अश्वगंधा

Aswagandha

यह पुरुषों में वीर्य को ताकतवर बनाता है और वीर्य की संख्या को भी बढ़ाने में भी मदद करती है। यह एक प्रकार से कामोत्तेजक (Stimulator) की भूमिका निभाता है परंतु इसका कोई साइड इफेक्ट शरीर पर नहीं देखा गया है। यह एजिंग को रोकने का भी काम करती है और आयु बढ़ाती है। इसके सेवन से पुरुषों की प्रजनन क्षमता बढ़ती है। अवसाद-तनाव दूर करने और मानसिक शक्ति बढ़ाने में I अश्वगंधा के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर कम होता है और यह मधुमेह की बीमारी को नियंत्रण में रखती है। इसके चूर्ण खाने से कोलेस्ट्रॉल भी कम होती है।
3 ) सफ़ेद मूसली

Safed Musli

सफेद मूसली एक प्रकार की औषधि है। सफेद मूसली को आयुर्वेद की दुनिया में चमत्कार माना जाता है। मुख्य रूप से सफेद मूसली का प्रयोग सेक्स सम्बन्धी रोगों के लिए किया जाता है। मर्दों में शुक्राणुओं की कमी होनें पर इसका प्रयोग किया जाता है। सफेद मूसली एक बेहतरीन औषधि है। इसमें डायबिटीज से लड़ने की क्षमता होती है। यदि एक दुबले-पतले व्यक्ति को डायबिटीज है, तो मूसली उसका इलाज करने में सक्षम होती है, लेकिन मोटे व्यक्ति में यह थोड़ा मुश्किल होता है।
4 ) कौंच

Kaunch

यह आयुर्वेद की बहुत प्रसिद्ध जड़ी बूटी है जिसके कई लाभ है. इस दवा का प्रयोग प्राचीन काल से ही चला आ रहा है. कौंच/Kaunch के बीजो का प्रयोग सेक्सुअल और न्यूरोलॉजिकल विकारो को दूर करने के लिये भी किया जाता है. इसके बीजो, पत्तियों और जड़ो जैसे भागो का प्रयोग दवा के रूप में किया जाता है. इसका प्रयोग थकान दूर करने. यौन इच्छा की कमी. इरेकशन डिसफंक्शन, पीठ दर्द, नसो का दर्द, शरीर दर्द, वजन बढ़ाने, शक्ति बढ़ाने, इम्युनिटी सुधारने और कई तरह की बीमारियों के इलाज मे किया जाता है.
5 )

गोक्षरु (Gokshru)

यह पेशाब संबंधित सारी समस्याओं को जैसे, पेशाब में जलन, रुक रुक कर पेशाब आना, पेट में दर्द, किडनी स्टोन जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. पुरुषों में यौन संबंधी समस्याओं में जैसे , नपुंसकता, शीघ्रपतन, कमजोरी, प्रजनन अंग की शिथिलता, जल्दी डिस्चार्ज होना, कामेच्छा इच्छा की कमी, इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्याओं में इसके सेवन से फायदा मिलता.
6 ) शतावरी Shatavari शतावरी को शुक्रजनन, शीतल, मधुर एवं दिव्य रसायन माना जाता है। महर्षि चरक ने भी शतावरी को चिर यौवन को कायम रखने वाला माना था। आधुनिक शोध भी शतावरी की जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मानते हैं। शतावरी के लगभग 5 ग्राम चूर्ण को सुबह और रात के समय गर्म दूध के साथ लेना लाभदायक होता है। इसे दूध में चाय की तरह पकाकर भी लिया जा सकता है। इसके अलावा शतावरी के ताजे रस को 10 ग्राम की मात्रा में लेने से वीर्य बढ़ता है। शतावरी मूल का चूर्ण 2.5 ग्राम को मिश्री 2.5 ग्राम के साथ मिलाकर पांच ग्राम मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री-मैच्योर इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष) में लाभ मिलता है। यही नहीं शतावरी की जड़ के चूर्ण को दूध में मिलाकर सेवन करने से धातु वृद्धि भी होती है।
7 ) पलाश (Plash) आयुर्वेद के अनुसार पलाश के पेड़ वात और पित्त (Vata and Pitta) को संतुलित करता है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवा में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। इस पेड़ के सभी भागों का उपयोग विभिन्‍न रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबायल, जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, हाइपोग्‍लाइसेमिक (hypoglycemic), एंटी-इन्‍फ्लामेट्री, बांधने वाले गुण, टॉनिक, एफ्रोडायसियाक (Afrodiusiac) और मूत्रवर्धक (Diuretic) गुण होते हैं। इन सभी गुणों के कारण पलाश हमें बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्रदान करते हैं।
8 ) शुण्ठी (Shunthi) शुण्ठी हमारे हृदय के स्वास्थ को बनाए रखने के लिए एक अत्यंत ही आदर्श औषधी है। यह हायपर टेंशन को कम करती है। शुण्ठी के सेवन से हमारे शरीर में रक्त को पतला होने में सहायता प्राप्त होती है। जिससे शरीर में ब्लडक्ल़ॉट्स नहीं होते। इस प्रकार शुण्ठी हमारे शरीर को दिल का दौरा पडने से सुरक्षा प्रदान करती है। शुण्ठी हमारे शरीर में कोलेस्टेरॉल की मात्रा को भी नियंत्रित करने में बहुत ही प्रभावशाली मानी जाती है।
9 ) अकरकरा (Akarkara) नपुंसकता और स्तंभन दोष के इलाज के लिए अकरकरा (Anacyclus Pyrethrum) अच्‍छा उपाय है। अकरकरा सिल्‍डेलाफिल की तरह ही कार्य करता है लेंकिन यह रक्‍तचाप में वृद्धि नहीं करता है। सिलडेनाफिल की तुलना में इसके कम दुष्‍परिणाम है। इसके अच्‍छे परिणाम के लिए अश्वगंधा (ashwagandha) और कोंच बीज पाउडर के साथ अकरकरा का मिश्रित उपयोग करना चाहिए। अकरकरा का प्रयोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन नपुंसकता (स्तंभन दोष) में अत्यंत ही लाभकारी है ।
10) मेथी (Methi) मेथी दाना पुरुषों के लिए अत्यंत लाभकारी है. अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है। स्वस्थ सेक्स लाइफ के लिए गुणकारी है।
11) सालमपंजा (Salampanja) सालमपंजा वीर्य को पुष्ट कर शरीर को शक्तिशाली बनाता है। बहुत से लोग जो शीघ्रपतन से ग्रस्त हैं उनके लिए सालमपंजा वडा़ ही लाभकारी औषधि द्रव्य है। यह स्त्रियों के प्रदर रोग व इनके कारण उत्पन्न दुर्वलता आदि दूर करने के लिए भी यह उत्तम औषधि रत्न है।
कृपया ध्यान दें उपरोक्त जानकारी आयुर्वेदिक चिकित्सक के लिए है।

योनि में जलन और खुजली के आयुर्वेदिक नुस्खे Ayurvedic nuskhe for itching in vagina




वैजाइना शरीर का सबसे नाजुक और अहम अंग होता है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर के साथ-साथ वैजाइना की देखभाल और पूरी तरह से साफ-सफाई का ध्यान भी रखना चाहिए।
वैजाइना की अच्छे से सफाई न करने और कुछ बातों को नजरअंदाज करने से वहां बैक्टीरियां पनपने लगते हैं, जिससे इंफैक्शन और खुजली की समस्या होने लगती है।
अक्सर महिलाओं को लगता है कि यीस्ट इंफैक्शन के कारण वैजाइना में खुजली हो रही है लेकिन इसके अलावा और बहुत से ऐसे कारण हैं, जिसके कारण वैजाइना में खुजली होने लगती है।
आज हम आपको ऐसे ही कुछ कारण बताने जा रहे हैं, जिसके कारण महिलाओं को यह समस्या हो जाती है।

वैजाइना में खुजली के घरेलू उपचार

1लीटर पानी में 3 बड़े चम्मच सेब का सिरका मिलाकर योनि को साफ करें। इससे वैजाइना की खुजली दूर हो जाती है।

वैजाइना में खुजली के आयुर्वेदिक इलाज

नीम के पत्तों को पानी में उबालकर योनि की सफाई करने से भी खुजली की समस्या दूर होती है।

वैजाइना में खुजली के आयुर्वेदिक नुस्खे

एक खाली कैप्सूल में 9 बूंदे ऑरेगैनो ऑयल की मिलाकर रोज दिन में 2 बार खाने के साथ लें।

योनि में खुजली के घरेलू उपाय

टी ट्री ऑयल एक नैचुरल फंगल क्लींजर है। टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें रूई पर लगाकर 4 घंटे के लिए अपनी योनि पर लगाएं रखें। इससे खुजली दूर हो जाएगी।

योनि में खुजली के आयुर्वेदिक इलाज

तुलसी के पत्तों को धोकर पानी में उबाल लें और उससे योनि की सफाई करें। इससे कुछ समय में ही आपकी वैजाइना खुजली की समस्या दूर हो जाएगी।

योनि में खुजली के आयुर्वेदिक नुस्खे

जिन महिलाओ को योनि में खुजली रहती हैं वो नीम और जैतून के तेल लगाएं आराम मिलेगा

yoni ke rog

जिन महिलाओ की योनि ढीली हो गयी हैं वो नीम के तेल से मसाज करें

नीम का तेल एक सुरक्षित और बहुत प्रभावी गर्भनिरोधक प्रतीत होता है

नीम के तेल से स्तनों की मसाज करने से उनमें निखार आता हैं.

धात गिरना के कारण, लक्षण, और आयुर्वेदिक इलाज, dhatu rog ka aayurvedic nuskhe



धात रोग क्या है

अगर धात रोग को सीधे सीधे समझाएं तो व्यक्ति के मूत्र मेंवीर्यका भी अपने आप निकल जाना धात रोग कहलाता है. धातु के गिरने को शुक्रमेह भी कहा जाता है. किन्तु ये होता क्यों है? इस बात को समझना भी आसान है. मतलब जब किसी पुरुष के मन में काम भावना बढती है तो उसका लिंग सख्त और उत्तेजित अवस्था में आ जाता है. इस अवस्था में पुरुष के लिंग से पानी के रंग के जैसी थोड़ी सी पतली लेस निकलने लगती है. ये लेस इतनी अधिक कम होती है कि ये लिंग से बाहर नहीं आ पाती, लेकिन लिंग के अधिक देर तक उत्तेजित रहने से उसके मुहँ के आगे आ जाती है और इसी को मजी भी कहा जाता है. वैसे इस लेस में तो वीर्य का कोई अंश नहीं होता किन्तु इसका काम लिंग की नाली को गिला करने का होता है ताकि व्यक्ति जब सम्भोग बनाएं तो वीर्य की तीव्र गति से लिंग को कोई नुकसान ना पहुंचें.

आजकल ऐसे अनेक युवक और युवती है जो गलत तरीके से अपने वीर्य को बर्बाद करते रहते है, कुछ तो ख्यालों में ही लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना आरम्भ कर देते है. उनकी इसी ख्यालों की दुनिया में खोये रहने के कारण उनका लिंग अधिक देर तक उत्तेजित रहता है और लेस ज्यादा मात्रा में बहनी आरम्भ हो जाती है. एक समय ऐसा भी है जब इन युवकों की स्थिति अधिक खराब हो जाती है और लड़की का ख्याल मन में आते ही उनकी लेस बाहर निकल जाती है और वे शांत हो जाते है. ये एक रोग है जिसे लालामेह ( शुक्रमेह ) कहते है.

धात रोग के कारण

अधिक कामुक विचार रखना, मन की अशांति, शोक, दिमागी कमजोरी, शरीर में पौषक तत्वों विटामिन्स की कमी, शरीर में मांस, अस्थि, मजा सही मात्रा में ना होना, पौरुष द्रव का पतला होना, नसों में कमजोरी, पौरुष द्रव को व्यर्थ में निकालना

धात रोग के लक्षण

लिंग के मुख से लार टपकना, पौरुष द्रव अर्थातवीर्यका पतला होना, शरीर का कमजोर होना, हर बात पर मानसिक तनाव लेना, शरीर के अन्य हिस्सों में कंपन, पेट रोग जैसे स्नायु का दुर्बल होना, श्वास रोग या खांसी होना, पिंडलियों में दर्द का होना, चक्कर आना या शरीर में हर समय थकान महसूस होना, शरीर की चुस्ती फुर्ती खत्म होना, मन में अप्रसन्नता होना और किसी काम में मन ना लगना भी इसके लक्षणों को दर्शाता है.

धात रोग का प्रभावी हर्बल उपचार

सफेद मुसली White Asparagus Abscendens
आप 10 ग्राम सफ़ेद मुसली का चूर्ण लें और उसमें मिश्री मिलाकर खाएं. इसे लेने के बाद ऊपर से 500 ग्राम गाय का दूध पी जाएँ. ये उपाय शरीर में अंदरूनी शक्ति को बढ़ता है और शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है.

उड़द की दाल Udad Pulses  एक अन्य उपाय के अनुसार आप उड़द की दाल का चूर्ण बनाकर उसे खांड में भुनें और खांड मिलाकर खाएं.

धातु रोग का घरेलू उपचार

जामुन की गुठली Kernels of Blackberry धात के कारण शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लियए आपको जामुन की गुठलियों को सुखाकर उसका पाउडर तैयार करना है और उसे रोजाना दूध के साथ खाना है. ये उपाय कुछ हफ़्तों में ही परिणाम दिखाना आरम्भ कर देता है धात गिरना बंद हो जाता है.

धातु रोग का आयुर्वेदिक इलाज

कौंच के बीज Kaunch Seeds 

अगर वीर्य पतला हो गया है तो आपको 100 – 100 ग्राम की मात्रा में ताल्माखाने और कौंच के बीज लेकर उनका चूर्ण तैयार करना है और उसमें 200 ग्राम पीसी हुई मिश्री मिलानी है. प्राप्त मिश्रण को रोजाना ½ चम्मच गुनगुने दूध के साथ लें. ये उपाय जल्द हीवीर्यको दोबारा गाढा करता है.

धातु रोग का आयुर्वेदिक नुस्खे

शतावरी मुलहठी Asparagus Liquorices  आपको एक प्रयोग के अनुसार 50 ग्राम शतावरी, 50 ग्राम मुलहठी,50 ग्राम सालब मिसरी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज,25 ग्राम बंशलोचन, 25 ग्राम शीतलचीनी और 4 ग्राम बंगभस्म लेनी है. आप इस सभी सामग्री को सुखा लें और उन्हें बारीक पिसें. अब इसमें 60 ग्राम की मात्रा में चाँदी का वर्क मिलाएं और रोजाना सुबह शाम गाय के दूध के साथ 60 ग्राम की मात्रा में लें. ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग से मुक्ति दिलाता है.

सुबह उठते ही आती हैं लगातार छींके तो क्या करें? Sinocytosis problem



साइनोसाइटिस की समस्या
बढ़ते प्रदूषण और लगातार जुकाम रहने के कारण होती है। हमारी खोपड़ी में अनेक प्रकार के खोकले छेद होते हैं जो ये छेद सांस लेने में मदद करते हैं। जिसे साइनस कहते हैं। जब हम सांस लेते हैं तो इसके साथ धूल-मिट्टी के कण अंदर चले जाते हैं तो यह छेद हवा को साफ करके फेफड़ो तक पहुंचाते हैं। जब यह काम करना बंद कर देते है तो साइनोसाइटिस की समस्या हो जाती है। इस समस्या के होने पर रोगी को सुबह उठते ही छींके आना, जुकाम-खांसी, बदन दर्द, आंखों से आंसू आना, दांतों में दर्द जैसी समस्या होने लगती है। आज हम आपको साइनोसाइटिस होने के कारण और इस से बचने के उपाय बताएंगे, जिसे इस्तेमाल करके आप इस समस्या से बच सकते हैं।

साइनोसाइटिस होने के कारण

1. टेंशन होने के कारण
अगर आप हर वक्त तनाव में रहते हैं तो आप कई बीमारियों को बुलावा दे रहे हैं। तनाव के कारण साइनोसाइटिस होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके कारण सिर दर्द भी होने लगता हैं।

छिक क्यों आती है

2. ज्यादा देर ठंड में रहना
जिन लोगों को ज्यादा देर ठंड में रहना पड़ता है। उन्हें इस बीमारी के चांस बहुत अधिक होते हैं। तेज हवा और ठंडे मौसम में रहने से कफ दोष बिगड़ जाता है और बलगम बनने लगती है।
3. वायु प्रदूषण
बढ़ते प्रदूषण के कारण इस बीमारी का खतरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए ऐसे प्रदूषण में सांस लेने से कीटाणु अंदर चले जाते हैं जो एलर्जी का कारण बनते हैं। जिसके कारण नाक में सूजन हो जाती है और जलन होने लगती है।

साइनोसाइटिस से ऐसे करें बचाव

छींक का आयुर्वेदिक इलाज

हल्दी और अदरक की चाय

इस समस्या से बचने के लिए हल्दी और अदरक वाली चाय बना कर पीएं। हल्दी में ऐसे औषधीय गुण पाएं जाते है जो जलन को कम करते हैं। जिससे एलर्जी से बचा जा सकता है। अदरक में भी ऐसे औषधीय गुण पाए जाते हैं जो बंद नाक को खोलने में मदद करते हैं।
इस चाय को बनाने के लिए एक कप उबलते पानी में एक इंच हल्दी और एक इंच अदरक को पीसकर डालें और इसे धीमी आंच पर ढक्कर 10 मिनट के लिए उबालें। फिर इसे छान कर चाय का सेवन करें।

छींक का देसी इलाज

2. स्टीम लें
म्यूकस की मात्रा ज्यादा होने पर भाप जरूर लें। भाप लेने से म्यूकस पिघलता है और नाक अच्छी तरह से साफ होता है। भाप के लिए एक लीटर पानी को उबाल लें और फिर इसमें थोड़ा-सा कपूर मिलाएं। अब इसकी भाप को 10 से 15 मिनट तक लें। इस प्रक्रिया के आराम आने तक रोजाना करते रहे।
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3. अधिक पानी पीएं
इस समस्या से बचने के लिए अधिक मात्रा में पानी पीएं। इससे म्यूकस पतला होता है और नाक में ब्लॉकेज खत्म होती है। जिससे साइनोसाइटिस का खतरा कम होता है।
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4. नाक की सफाई रखें
इस बीमारी से बचने के लिए नाक की रोजाना सफाई करें। इसकी सफाई करने के लिए रात को सोने से पहलें या फिर सुबह-सुबह नाक में थोड़ा-थोड़ा पानी डाल कर साफ करें। इसे जोर से मसल कर साफ न करें।
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5. वातावरण साफ रखें

छींक आने का कारण

इस बीमारी का मुख्य कारण वायु में धूल, मिट्टी के महीन कण, पशुओं के बाल आदि का होना है। अगर आपने ने घर पर पालतू जानवर रखा है तो इन्हें घर से बाहर रखें और इनकी सफाई पर भी विशेष ध्यान दें। घर में एयर प्यूरिफायर लगवाएं, जिससे आपके घर के अंदर वातावरण साफ बना रह सके।

संभोग के बाद आई कमजोरी को दूर करने के आयुवेर्दिक नुस्खा, sambhog ke baad kamajoree ko door karane ke aayuverdik nuskha



संभोग के बाद थकान और कमजोरी के कारण

संभोग के बाद कमजोरी महसूस होती है तो करें विशेष नुस्खे का सेवन आप हो जायेंगे पावरफुल

सर्दी का मौसम आते ही शादी ब्याह शुरु हो जाते हैं और जो पुराना शादी शुदा जोड़े है वो भी बिना बीवी का नहीं रह सकते और थोड़ी से बात पर ही गरम हो जाते है और अपनी वीर्य और धातु का नुक्सान करते रहते हैं

संभोग के बाद कमजोरी के कारण

आज के समय में संयम नाम की चीज ही नहीं है और संभोग करने के बाद कुछ लोग ऐसे ही सो जाते है और सुबह जब उठाते है तो कमजोरी महसूस करते हैं यहाँ हम आपको ऐसे ही कुछ विशेष नुस्खे बताने जा रहे है जिनके सेवन से आपको कभी भी कमजोरी महसूस नहीं होगी

संभोग के बाद कमजोरी की आयुर्वेदिक नुस्खे

आप कितनी भी पावर प्राप्त करने के लिए बाजीकारक औषधियों का सेवन कर सकते हैं।तो आज हम विशेष नुस्खे बताने जा रहे है जिन्हें आप प्रयोग करते रहे तो आपके शरीर में वीर्य की बढ़ोत्तरी ही होगी। इन औषधियों को आप संभोग के बाद भी प्रयोग कर सकते हैं।
सफेद मूसली, विदारी कन्द, गिलोय, गोखरु व लौंग को समान मात्रा में लेकर कूटपीस कर छान लें तीन ग्राम इस चूर्ण की मात्रा को प्रतिदिन रात को गुनगुने दूध से ले लें।

औरतों की कमजोरी दूर करने के उपाय

तालमखाना,उगटन के बीज,व बीजबन्द तीनो को 12-12 ग्राम की मात्रा में लेकर सालव मिश्री,शकाकुल मिश्री,सफेद मूसली,काली मूसली सभी द्रव्य 24-24 ग्राम,मखाना फूला हुआ,सिंघाड़े का आटा दोनो 48 -48 ग्राम,कमरकस 72 ग्राम,और कुल बजन के बरावर खांड या फिर मिश्री लेकर सभी औषधियों का कूट पीस कर वारीक चूर्ण कर लें लैकिन ध्यान रखे सबको पहले अलग अलग कूटने के बाद मात्रा तोले बाद में खांड या मिश्री मिलाए।एक एक चम्मच की मात्रा प्रतिदिन सुबह व सांय को दूध के साथ लें।एक मास भी अगर प्रयोग कर लिया जाए तो भरपूर यौवन शक्ति प्राप्त होगी।

वीर्य वृद्धि और शुक्राणुओं को बढ़ाने के 4 विशेष नुस्खे

उड़द की धुली हुयी दाल 30 ग्राम लेकर घी में भूने।फिर 375 ग्राम दूध डालकर पकाऐं जब खीर की भाँति हो जाए तो चीनी मिलाकर आग से उतार लें तथा कुनकुना गर्म गर्म ही खाऐं इस प्रयोग से कामशक्ति औऱ वीर्य की बहुत वृद्धि होती है।

संभोग के बाद कमजोरी की इलाज

100 ग्राम तालमखाने के बीज, 100 ग्राम चोबचीनी, 100 ग्राम ढाक का गोंद, 100 ग्राम मोचरस तथा 250 ग्राम मिश्री को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं।

यह मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग को खत्म कर देता है।

संभोग के बाद कमजोरी की घरेलू नुस्खे

पीपल का फल और पीपल की कोमल जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2 चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर उसे लगभग चौथाई भाग होने तक पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप सुबह और शाम को पी लें। इसके इस्तेमाल करने से वीर्य में तथा सेक्स करने की ताकत में वृद्धि होती है।

संभोग के बाद कमजोरी की आयुर्वेदिक इलाज

बच्चा पैदा करने के लिए सिर्फ एक बलशाली शुक्राणु की जरूरत होती है, जो स्त्री के अंडाणु से संयोग कर गर्भ में परिवर्तित होता है। वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होने या शुक्राणु कमजोर होने पर बच्चे पैदा करने में परेशानी होती है। जामुन की गुठली का चूर्ण रोज गर्म दूध के साथ खाने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द हो जाता है।

संभोग के बाद कमजोरी की देशी दवा

छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और उसी दूध को पीने से नपुंसकता खत्म होती है। रात को पानी में दो छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे को दूध के साथ खायें।

शारीरिक कमजोरी के कारण

रामबाण नुस्खा :- इसके लिए शतावरी, गोखरू, बड़ा बीजबंद, बंशलोचन, कबाब चीनी, कौंच के छिलकारहित बीज, सेमल की छाल, सफेद मुसली, काली मुसली, सालम मिश्री, कमल गट्टा, विदारीकंद, असगन्ध सब 50-50 ग्राम और शक्कर 300 ग्राम, सभी द्रव्यों को अलग-अलग कूट-पीसकर कपड़छान कर लें। शक्कर को भी पीसकर महीन कर लें और सभी को मिला लें व तीन बार छान लें, ताकि एक जान हो जाएं। सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ 60 दिन तक सेवन करें और इसके बाद वीर्य की जाँच करवाकर देख लें कि शुक्राणुओं में क्या वृद्धि हुई है।
पर्याप्त परिणाम न मिलने तक प्रयोग जारी रखें।